स्कूल के विद्यार्थियों के लिए सुविचार | Suvichar In Hindi Language For School Students

Suvichar In Hindi Language For School Students: सुविचार या अनमोल वचन जीवन अनुभव के कुछ उद्धरण व उक्तियाँ होती हैं. जो जीवन की सच्चाई पर आधारित महान विचारकों द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं. स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस तरह के सुविचार प्रार्थना सभा में प्रस्तुत करवाएं जाते हैं. संक्षिप्त सार रूपी ये लाइने जीवन के मर्मज्ञ पर आधारित होती हैं. यहाँ आपकों हिंदी के सुविचार बता रहे है जिन्हें स्कूल के कार्यक्रमों के दौरान प्रस्तुत किया जा सकता हैं.

बेस्ट स्कूल के विद्यार्थियों के लिए सुविचार | Best Suvichar For School Students In Hindi Languageबेस्ट स्कूल के विद्यार्थियों के लिए सुविचार | Best Suvichar For School Students In Hindi Language

thoughts for school assembly in hindi

भाग्य पर नही, चरित्र पर निर्भर रहों


आशा सर्वोत्तम प्रकाश हैं. और निराश घोर अन्धकार हैं.


आत्मा की पुकार अनसुनी न करें.


छोटी छोटी भूलों पर ध्यान दें और अपना सुधार करें


आलसी लोगों के पास से सफलता दूर दूर ही रहती हैं.


आज का काम कल पर मत टालिए


वही उन्नति कर सकता है जो स्वयं को उपदेश देता हैं.


धैर्य और साहस संसार की हर आपत्ति का अमोघ उपचार हैं.


आत्म विशवास अपने उद्धार का एक महान संबल हैं


धनवान नही चरित्रवान सुख पाते हैं.


अपने जीवन को प्यार करो, तो वह तुम्हे प्यार करेगा.


जो सत्य के प्रति वफादार नही है, वे कायर और कमजोर हैं.


जो जैसा सोचता है और करता है, वह वैसा ही बन जाता हैं.


परोपकार से बढ़कर और निरापद कोई दूसरा धर्म नही


सदाचार की शक्ति अनाचार से हजार गुणा बढ़कर हैं.


विश्वास खो बैठना मनुष्य का अशोभनीय पतन हैं.


भय हमारी स्थिरता और प्रगति से सबसे बड़ा बाधक हैं.


दृढ आत्मविशवास ही सफलता की एकमात्र कुंजी हैं.


बिना श्रम के अपनी आवश्यकता पूरी करना चोरी हैं.


इस संसार में कमजोर रहना सबसे बड़ा अपराध हैं.


मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप हैं.


अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा हैं.


चरित्रवान का वैभव कभी क्षीण नहीं होता.


आलसी और प्रमादी धरती के भार हैं.


शीलवान होना किसी भी वस्त्रालंकार से बढ़कर हैं.


असत्य सदा हारता हैं.


जमाना तब बदलेगा, जब हम स्वयं बद्लेगे.


ह्रदयहीन होना मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप हैं.


भाग्यवाद हमें नुपसंक और निर्जीव बनाता हैं.


क्रोध स्वास्थ्य और शांति का शत्रु हैं.


आत्म निर्माण का ही दूसरा नाम भाग्य निर्माण हैं.


जीवन का सच्चा मूल्य कर्तव्य पालन हैं.


श्रेष्ट आदतों में सर्वप्रमुख है- नियमितता की आदत.


महानता के विकास में सबसे बड़ी बाधा असंयम हैं.


सफलता की अपेक्षा नीति श्रेष्ट हैं.


आत्म निर्माण सबसे बड़ा पुण्य पुरुषार्थ हैं.


भूल सुधार मनुष्य का सबसे बड़ा विवेक हैं.


उत्कृष्ट चरित्र ही मानव जीवन की सच्ची कसौटी हैं.


चरित्र साधना का मूलाधार मानसिक पवित्रता हैं.


फल की आतुरता प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा हैं.


मनुष्य स्वयं ही अपना शत्रु और स्वयं ही अपना मित्र हैं. इसलिए अपने को उठाओ गिराओ मत.

 

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