स्वच्छ भारत अभियान पर भाषण व निबंध | swachh bharat abhiyan bhashan in hindi- Clean India Mission Essay

स्वच्छ भारत अभियान पर भाषण व निबंध | swachh bharat abhiyan bhashan in hindi: आज से सौ साल पहले भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एक सपना देखा था, स्वच्छ भारत का. उसे अब साकार करने का कदम भारत सरकार ने उठाया हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मिशन के बागडोर संभाली हैं. गांधी का मानना था, कि स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण स्वच्छता हैं. देश में गंदगी के हालात से वों वाकिफ थे, स्वयं झाड़ू उठाकर सफाई के अभियान गांधीजी ने भी चलाए थे. मगर उनका वों सपना सफल नही हो सका, जिन्हें अब पूरा करने का बीड़ा नरेंद्र मोदी ने उठाया हैं. आज के swachh bharat abhiyan in hindi essay में हम क्लीन इण्डिया मिशन पर संक्षिप्त भाषण व निबंध प्रस्तुत कर रहे हैं.

स्वच्छ भारत अभियान पर भाषण व निबंध | swachh bharat abhiyan essayस्वच्छ भारत अभियान पर भाषण व निबंध | swachh bharat abhiyan bhashan in hindi

Essay on Swachh Bharat Abhiyan: 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जयंती के दिन हमारे प्रधानमंत्री ने भारत छोडो आंदोलन की तर्ज पर स्वच्छ भारत अभियान (क्लीन इण्डिया मूवमेंट) की शुरुआत की. भारत के सवा सौ करोड़ लोगों को आंदोलन का हिस्सा बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने खुद हाथ में झाड़ू थामी.

अभियान को राजनीति से दूर रखने का ऐलान कर हर नागरिक से आशा जताई कि वह अपने आस-पास स्वच्छता रखेगे. सफाई को सरकारी अभियान के बजाय जनता के आंदोलन के रूप में स्थापित करने का उन्होंने प्रयास किया.

स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा हैं. इस कार्यक्रम के साथ देश के सभी विद्यालयों, कॉलेज तथा महाविद्यालयों को जोड़ा गया. विद्यालय के शिक्षकों व स्टूडेंट्स को प्रतिदिन आधा घंटा निकालकर सफाई करने का सुझाव दिया गया. गांधी जयंती के अवसर पर इन विद्यालयों में स्वच्छ भारत स्लोगन, स्वच्छ भारत अभियान निबंध, क्लीन इंडिया मिशन एस्से लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करवाया जाता हैं.

आज के swachh bharat abhiyan bhashan में मै आपकों इस अभियान से जुड़े कुछ तथ्यों से अगवत कराना चाहुगा. भारत सरकार के इस अभियान के चार साल पूरे होने को हैं. अक्टूबर 2019 में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया हैं. सरकार की ओर से इन वर्षों में घर घर शौचालय देकर व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्वच्छता को बढ़ावा देने के प्रयत्न किए हैं.

सरकार ने आम जन पर इस खर्चे के वसूल के लिए ५ प्रतिशत अतिरिक्त कर भी लगाया हैं. पिछले तीन वर्षों के आकंड़ो के अनुसार अब तक 20 हजार करोड़ रूपये राजकोष में इस मिशन के नाम पर जमा हो चुके हैं. मगर स्वच्छ भारत अभियान कहाँ तक सफल हो पाया हैं, इसका अंदाजा आप इस तथ्यों के आधार पर लगा सकते हैं.

  • एक सरकारी वेबसाइट ने स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े कुछ डाटा हाल में ही प्रकाशित किए हैं, जिनके अनुसार अब तक 1,58,957 गाँवों को खुले में शौच मुक्त शौचालय आवंटन हुए हैं, जबकि 2,57,259 गाँवों तक इस स्कीम को जोड़ने का दावा किया गया जो भारत के कुल गाँवों का मात्र चालीस प्रतिशत ही हैं.
  • सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार मात्र 51 फीसदी ही भारतीय शौचालयों का उपयोग करते हैं. शेष ४० फीसदी लोग अभी भी खुले में शौच करना पसंद करते हैं.
  • स्वच्छ भारत अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए बजट का समय पर पहुचना आवश्यक हैं. मगर सरकार द्वारा तय राशि का 5 से 50 प्रतिशत तक ही राज्यों को भुगतान हो पाता हैं, जिससे निर्माणधीन कार्य अधूरे ही रह जाते हैं.
  • अभी तक शहरी जीवन व्यतीत करने वाले सभी लोगों तक कचरा उठाने वाली गाड़ी नही पहुचती अथवा उनके घर के कूड़े करकट के निपटान का कोई ठोस उपाय नही निकल पाया हैं.
  • भारत में उपयोग हो रहे शौचालयों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत पानी किल्लत हैं. पानी की आपूर्ति नही होने के कारण कई बार सफाई कर्मचारियों को हाथ से मैला ढ़ोना पड़ता हैं.
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