Swadeshi Movement In Hindi | स्वदेशी आंदोलन

Swadeshi Movement In Hindi इस समय भारत दुनिया कि सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था हैं, लगभग 7.1 वार्षिक की वृद्धि दर से भारत सभी 200 देशों में शिखर पर हैं. किन्तु फिर भी रोजगार के अवसर नही बढ़ रहे हैं. इसका मुख्य कारण हम बना बनाया माल खरीदते हैं. हमारे यहाँ के उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं. चीन सहित दुनियाभर को जो बना बनाया माल भारत में आता उसमे कोई सस्ते होने का, चमक दमक का आकर्षक विज्ञापन दिखाकर हमे अपना शिकार बना लेता हैं. इससे विदेशी कम्पनियां माला-माल हो रही हैं. हम अपने कल-कारखाने इंडस्ट्री को बंद करते जा रहे हैं. परिणामस्वरूप हमारी अर्थव्यवस्था तेज होने के बावजूद गरीबी और बेरोजगारी बढती जा रही हैं..

स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement In Hindi)

आज अमेरिका में buy american & hire american का नारा जोरो पर हैं, इंग्लैंड भी अपने लोगो की नौकरियां बचाने के लिए विदेशियों को बाहर निकाल रहा हैं. ऑस्ट्रेलिया भी कुछ ऐसा ही कर रहा हैं और चीन भी अपनी घरेलू बाजार को मजबूत करने में लगा हैं. हमे चाहिए कि हम स्वदेशी वस्तुओ का उपयोग करे अपना स्वदेशी समान चाहे कम गुणवत्ता का हो थोड़ा महंगा हो, तब भी अपनी सम्रद्धि के लिए अपने युवक-युवतियों का रोजगार बढ़ाने के लिए स्वदेशी खरीदे स्वदेशी अपनाएँ.

चीन का विशेष विरोध क्यों ? (the swadeshi movement )

भारत तथा चीन दोनों के आणविक अस्त्रयुक्त होने से प्रत्यक्ष और खुले युग का खतरा कम हैं, वह व्यापार युद्ध हैं ( war of trade, war of economics) इसमे सैनिक नही सामान्य जन को लड़ना होता हैं. और हथियार होता हैं बहिष्कार जिन्हें सावरकर जी ने शुरू किया था. महात्मा गाँधी ने अपनाया, जिसका आव्हान पंडित दीनदयाल उपाध्याय व् राष्ट्रऋषि दतोपंत ठेंगडी जी ने किया. आज राष्ट्रिय अंतराष्ट्रीय मंचो पर जितना विरोध जितनी परेशानी चीन भारत के लिए पैदा कर रहा हैं. उतना दुनिया का कोई देश नही कर रहा हैं. फिर भी हम चीन से प्रतिवर्ष ४४ प्रतिशत घाटा उठा रहे हैं. ‘ कृपया अपने व्यवहार के बारे में विचार करे.

हमारा कर्तव्य (swadeshi andolan in hindi )

आज हम संकल्प ले कि चाहे हमे किसी वस्तु के उपभोग से वंचित रहना पड़े तो भी कम से कम कोई भी चीनी उत्पाद तो नही ही खरीदने होंगे. समाज में भी अभियान चलाकर सभी देशवासियों से आग्रह करे कि वह भी कोई चीनी सामान नही खरीदे . आजकल चीन की वस्तुओ का उत्पादन भारत में ही हो रहा हैं. इसलिए उन पर मेड इन इंडिया लिख रहा हैं. अत: सावधान रहे . यहाँ आपकों स्वदेशी और विदेशी सामान की सूची बता रहे हैं. अत: जब भी बाजार जाएगे माल स्वदेशी ही लाएगे.

चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के 10 कारण (short note on swadeshi movement )

  1. हमारा 190 देशों से व्यापार हैं, उसने सबसे बड़ा trade PARTNER चीन हो गया हैं. उससे भारत से चीन को अलग ९ मिलियन डॉलर का सामान जाता हैं और चीन से आता हैं 61.7 बिलियन डॉलर, यानि 52.7 बिलियन डॉलर का घाटा प्रतिवर्ष जो रूपये में बनता हैं 3556 अरब रूपये.
  2. हमारे कुल विदेशी घाटे का ४४ प्रतिशत अकेले चीन से हैं. यदि पेंट्रोल को अलग रखे ( जो चीन से नही आता हैं) तो ६० प्रतिशत से अधिक घाटा हैं.
  3. चीन से होने वाले आयात भारत के कुल मेन्युफेक्चरिंग उत्पादन और रोजगार का कम से कम एक चौथाई कम हो रहा हैं.
  4. भारी सब्सिडी देकर, वहां के किसान मजदूरों का शोषण कर, पर्यावरण का विनाश कर, गुणवत्ता की उपेक्षा कर चीन भारत को सस्ता माल भेजता हैं. इससे हमारे उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं.
  5. इससे रोजगार खत्म हो रहे हैं. हमारे लघु और मध्यम उद्योग बंद होने से गत 15 वर्षो में लाखों नौकरियाँ छिनती गईं. हमे अपना रोजगार वापिस लाना हैं.
  6. हमारे व्यापार में बाधा डालने के लिए चीन NSG नुक्लेअर सप्लायर ग्रुप में प्रवेश नही होने दे रहा हैं.
  7. पाकिस्तान को आतंकवाद फ़ैलाने के लिए हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सहयोग कर रहा हैं. हमने इंडस वाटर ट्रीटी की तो चीन ने भारत की जोकोबा (ब्रहापुत्र) नदी का पानी बंद कर दिया.
  8. रूस व पाकिस्तान को साथ लेकर तालिबान आतंकियों को अफगानिस्तान (हमारे मित्र देश) में फिर खड़ा करने में लगा हुआ हैं. जैश-ए-मोहम्मद व् उसके सरगना मसूद अजहर को अंतराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने नही दे रहा.
  9. 1962 से हमारी 43,000 वर्ग किमी. जगह पर कब्जा कर बैठा हैं, उस समय हमारे 3080 जवान शहीद हुए . अभी भी अरुणाचल प्रदेश सहित नब्बे हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर दावा कर रहा हैं. हर आए दिन चीन के सैनिक हमारी सीमा में घुसपैठ कर हमे परेशान करते हैं.
  10. चीन सदैव भारत कों चारों तरफ से घेरने व् हमारे पड़ोसी देशों को हमारे खिलाफ खड़ा करने में लगा हैं. पाकिस्तान में तो 3120 अरब रूपये का बड़ा आर्थिक भूगौलिक गलियारा CPEC (CHINA PAKISTAN ECONOMIC CORIDOR भारत के विरोध के बावजूद बना रहा हैं.

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