Swatantrata Diwas 15 august shayari Kavita Speech in hindi | स्वतंत्रता दिवस शायरी कविता भाषण निबंध हिंदी में

Swatantrata Diwas shayari Kavita Speech in hindi सभी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. क्यों हमे याद आता देश अथवा हमारे शहीद जब 15 अगस्त अथवा 26 जनवरी हो. क्या जरुरी हैं तभी हमारी देशभक्ति जगे. या फिर यु कहे इसे ही कहा जाता हैं. देशभक्ति कि राष्ट्रिय पर्व पर एक दो शायरी sms इधर-उधर कर दो हो गया इति श्री ? जी नही ऐसा तो नही हैं. जब भक्ति मातृभूमि भूमि से हो और प्यार देश से वही कहलाती हैं देशभक्ति. कौन हैं सच्चा देशभक्त यह हमारा विषय नही हैं. मगर कौन देशद्रोही हैं इसकी पहचान करना बेहद कठिन हैं, इस राष्ट्रभक्ति के मुखोटे में तो सभी समाएँ हैं. बस इनकी पहचान कर सात दिन में 1 घंटा भी अपने देश को देने का सकल्प हर सपूत ले तो क्या भ्रष्टाचार क्या आतंकवाद ?

Swatantrata Diwas 15 august shayari Kavita Speech in hindi

स्वतंत्रता दिवस शायरी कविता भाषण निबंध हिंदी में (Swatantrata Diwas shayari)

न हिन्दू बन के देखू
ना मुस्लिम बन के
सपूतों की इस लड़ाई में
बस मेरी भारत माँ को देखू.


15 august shayari In Hindi

संस्कार और संस्क्रति की सान मिले ऐसे,
हिंदू-मुसलमान और हिंदुस्तान मिले ऐसे
सब मिलजुल के रहे ऐसे की
मंदिर में अल्लहा और मसिज्द में प्रभुराम मीले जेसे.


15 august shayari hindi

गुजराती की तरह कार्य करें;
एक राजस्थानी की तरह खाओ;
बीगी ~ एनगल की तरह गाओ;
पंजाबी की तरह नृत्य;
कश्मीरी की तरह मुस्कान;
गोवा की तरह जीवन जीना;
और हमेशा एक भारतीय होने का मज़ा लेते हैं!
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं


hindi shayari on independence day

कुछ नशा तिरंगे के आन का,
कुछ नशा मातृभूमि की शान का,
हर जगह लहराए ये तिरन्गा,
नसा ये हिन्दुस्थान की शान का हैं ||

Swatantrata Diwas 15 august Kavita in hindi

independence day poem in hindi

अगर आजादी को बचाना चाहते हो, तो देश के लिए लहू बहाना होगा
जो देश की खातिर जीते-मरते हैं, उनके आगे अपना शीश झुकाना होगा
जो चाहते हो, जय हिन्द का नारा बुलंद रहे, तो तुम्हें सुभाष बन जाना होगा
अगर अकबर को उसकी औकात दिखानी है, तो खुद को प्रताप बनाना होगा………………
मुगलों से लोहा लेना है, तो शिवाजी बनकर आना होगा
गौरी को मौत की नींद सुलानी है, तो पृथ्वीराज सा बाण चलाना होगा
अगर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने हो, तो लक्ष्मीबाई बन जाना होगा………
कभी मंगल, कभी भगत, तो कभी आजाद बनकर धरती में आना होगा…………

जाति धर्म देखे बिना, देशद्रोहियों को अपने हाथों से मिटाना होगा
नई पीढ़ी को अभिमन्यु सा, गर्भ में देशभक्ति का पाठ पढ़ाना होगा
तुम्हें व्यक्तिवाद छोड़कर राष्ट्रवाद अपनाना होगा…………
हर व्यक्ति में भारतीय होने का स्वाभिमान जगाना होगा………
लोकतंत्र को स्त्तालोलुपों से मुक्त कराना होगा
देशभक्ति को भारत का सबसे बड़ा धर्म बनाना होगा
वीरता की परम्परा को आगे बढ़ाना होगा……………
हर भारतीय को देश के लिए जीना सिखाना होगा……

poem on independence day

आज फिर 15 अगस्त हैं.
आजादी के 71 साल बाद भी.
स्वराज प्राप्ति के बाद भी
अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी हैं,
देशभर में सभी जगह
तिरंगा फहराया जाएगा.

.भारत माता की जय का नारा
उद्घोष किया जाएगा||
राष्ट्रगान गाया जाएगा,
इस तरह एक और
15 अगस्त मनाया जाएगा,
देश के नेता मदमस्त हैं.
भ्रष्टाचारीयों ने देश को कर,
अस्त-व्यस्त हैं.
देश के युवा आज पथ भ्रष्ट हैं.
भोग रहे बेरोजगारी का
सर्वव्यापी कष्ट हैं.
और अपना जीवन कर रहे हैं नष्ट
देश के युवाओं में आए जाग्रति
इसी में व्याप्त हैं, देश की उन्नति
बेरोजगारी भ्रष्टाचार के संग हो जाए सती
इन नेताओं की भी कभी सुधर जाए मती
अव्यवस्था और अन्याय की हो रही अति
आर्थिक विकास की रुक रही गति
जिसे अब अवश्य मिलनी चाहिए
एक नई गति
एक नई गति
एक नई गति

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15 अगस्त हमारे इतिहास का एक ऐतिहासिक और यादगार दिन हैं. हमने आपके लिए स्वतंत्रता दिवस 2017 के लिए हिंदी शायरी, कविता, निबंध और भाषण उपलब्ध करवा रहे हैं. हर किसी में देश के प्रति अगाध प्रेम होता हैं, 15 अगस्त और ऐसे राष्ट्रिय पर्वो पर यह देशप्रेम कई गुना बढ़कर हिलोरे मारने लगता हैं, इसे बया करना उतना आसान नही होता हैं. आज के इस लेख में हम आपकी पूरी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. स्वतन्त्रता दिवस के इस अवसर पर आप भी अपनी बात कुछ बेहतर तरीके से रख पाए.

स्वतंत्रता दिवस भाषण

मेरे प्यारे गुरुजनों भाई और बहिनों सबसे पहले तो आपकों 71वे स्वतंत्रता की बहुत बहुत बधाई. जैसा कि हम सभी जानते हैं 15 अगस्त और 26 जनवरी हमारे राष्ट्रिय त्यौहार हैं. जिन्हें हम हर वर्ष बड़े हर्षोल्लास के साथ पिछले 70 वर्षो से मनाते आ रहे है.
यदि आज हम स्वतंत्र हैं तो इनका श्रेय हमारे उन लाखों भारत माँ के शहीद सपूतों को जाता हैं.

जिनके मातृभूमि प्रेम और साहस की वजह से हैं. हमारा कर्तव्य बनता हैं,

कि हम अपने वीर शहीदों द्वारा दी गईं स्वतंत्रता का सही उपयोग करते हुए, भारत को नये मुकाम तक ले जाए. जैसा उन सपूतों ने भारत का सपना देखा था. हम उसे पूरा कर दिखाएँ.

हमें यह कहते उतना अहसास नही होता कि भारत 1947 से पहले तक 200 वर्षो तक अंग्रेजो का गुलाम रहा था. गुलामी क्या होती हैं इन्हे हम नही समझ सकते क्युकि हम आजाद भारत में जन्मे. हमने वो कुछ भी नही भुगता जो हमारे पुरखों ने कई पीढियों तक भोगा था.

यदि राह चलते हमे यह कह दे कि कल यहाँ से मत निकालना तो हमे कितना उस इंसान पर गुस्सा आता हैं, उससे घ्रणा होती हैं. तेरे बाप का राज हैं क्या, या तू बताएगा मुझे कहना चलना हैं. ऐसे शब्द स्वत: ही निकल जाते हैं. इसी वजह हमारी आजादी हैं. जो लम्बे सघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को मिली थी.

Swatantrata Divas Hindi bhashan

मगर उस समय हम वो सब कुछ नही कर पाते थे, जो हम करना चाहते थे हमारा जी चाहता था. क्युकि ऐसा करने से रोकने वालों के बाप का राज था. जी हुजुर या चुपके से ही अंग्रेजो की इच्छा के खिलाफ के कार्य को किया जा सकता था.

मगर इस वीर भूमि पर ऐसे भी सपूत जन्मे जिनमे सुभाषचन्द्र बोस, भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद, लाला लाजपत राय, महात्मा गाँधी जैसे नेताओं ने गोरों के जेहन में वो खोफ भर दिया. जिस कारण भारत में लम्बे समय तक शासन चलाना उनके वश की बात नही रही.

ऐसा तभी संभव हो पाया, जब इन बहादुरों ने गोलियों का जवाब गोलियों और गोले का जवाब गोले से दिया. इन राष्ट्रभक्तो ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपनी पूरी जिन्दगी खफा दी, और हसते-हसते मौत का फंदा गले में डाल दिया था. क्युकि उन्हें इस भारत भूमि से प्रेम था, अपनी आने वाली नस्लों को आजादी के सूर्य की खातिर अपने बलिदान देने से नही झिझके थे.

कम से कम आज स्वतंत्रता दिवस पर ही सही हमे विरासत में मिली खून से सनी इस आजादी का उपयोग हमने कितना किया, अपने शहीदों के सपने के भारत बना पाए कि नही. इनके सवाल और जवाब किसी से अपरिचित नही हैं. आज भी हम कई ऐसी कठिनाइयो से गुजर रहे हैं. जो समय भी थी. ठीक हैं हम सभी समस्याओं का निदान नही कर पाए, जिनमे धीरे सुधार कर रहे हैं. मगर उन शहीदों को भ्रष्टाचार,आतंकवाद,और देशद्रोही जैसे सवालों के जवाब क्या देगे. यह समस्याएं से हमने ही पैदा कर हमारे भारत को और मुश्किल में डालने का काम किया हैं.

speech on 15 august in hindi

यदि इन सबके पीछे सौ बात की एक बात जाने तो वह यह हैं कि हम कर्तव्यहिन् हैं, आलसी हैं. बेवकूफ हैं. अंग्रेज हम पर ज्यादा वर्षो तक इसलिए गुलाम रख सके क्युकि उन्होंने हिन्दुओ और मुसलमानों को आपस में लड़ाए रखा. और उनकी दूकान चलती रही. अंग्रेज तो चले गये मगर अपनी कुछ संतानों यहाँ छोड़ गये जो कभी राजनीती तो कभी फिल्म जगत में साफ़ दिखती हैं. उस समय लाखों की तादाद में अंग्रेज थे. आज करोड़ो की संख्या में हो सकते हैं. जो हमे आपस में बाटे रखकर अपने काम में व्यस्त हैं.

हम इंसान को अभी तक उनकी बाहरी छवि को पहचानने लगे हैं जल्दी ही हमे मन के मैले राष्ट्र विरोधियो को उनके सही स्थान पर पहुचाने की आवश्यकता हैं.

आज हम स्वतंत्रता दिवस पर यह प्रण करे गाँधी और बुद्ध की इस पावन धरा पर जहर बेचने वालों को उन्ही के अंदाज में जवाब दे, क्युकि अभी नही तो कभी नही, हो सकता हैं इस बार अंग्रेजो या किसी और को दूर देश से यहाँ आकर राज करने की नौबत ना आए. इनकी तादाद को नियंत्रित कर उन्हें सम्पूर्ण नष्ट किया जाना ही भारत के बेहतर भविष्य का एकमात्र रास्ता हो सकता हैं.

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