त्योहारों का महत्व पर निबंध | Essay on the importance Festivals Of India In Hindi

Essay on the importance Festivals Of India In Hindi मानव आदिकाल से उत्सव प्रिय रहा है. मानव समाज में इस कारण उत्सव एवं त्योहार का बहुत ही महत्व है. असभ्य व आदिवासी जातियों से लेकर सभ्य एवं सुसंस्कृत लोगों तक सभी के जीवन में त्योहारों उत्सवों का आयोजन होता है.

त्योहारों का महत्व पर निबंध | Festivals Of India In Hindi

ये उत्सव त्योहार हमारे दुखों को कम करते है तथा जीवन की कटुता में सरसता एवं माधुर्य लाते है. ये त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जिनसे हम भावनात्मक रूप से जुड़े हुए है. ये समाज में आनंद-मंगल एवं एकात्मकता का वातावरण उत्पन्न करते है.

    • प्रमुख त्योंहार (national festivals of india in hindi language)

      हमारा देश त्योहारों उत्सवों का देश है, यहाँ कोई महिना ऐसा नही है, जिसमे कोई छोटा बड़ा त्योहार नही पड़ता है. हमारा कृषि कर्म मुख्य धंधा है. उसका वर्ष आषाढ़ से प्रारम्भ होता है., क्योकि इसी माह में वर्षा आरम्भ होती है और खेतों में जुताई बुवाई करके कृषि कर्म का वर्ष प्रारम्भ होता है.

      सर्वप्रथम आषाढ़ की पूर्णिमा को आषाढ़ी पर्व मनाया जाता है. वैसे हिन्दू धर्म में प्रमुख त्योहार ये है- दीपावली, होली, रक्षाबंधन, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी, विजयादशमी, मकर सक्रांति, शिवरात्रि, गणेश चतुर्थी, श्रावणी तीज, दुर्गा अष्टमी, बसंत पंचमी.

      दीपावली व होली ऋतू परिवर्तन के समारोह है तथा इनका सम्बन्ध धार्मिक आस्था से भी है. कृष्ण जन्माष्टमी, रामनवमी ये महान पर्व दो महान पुरुषों के जन्मदिन है. इस प्रकार सभी त्योहार हमारी संस्कृति से जुड़े हुए है. भारतीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में धर्म की प्रधानता होने के कारण सभी त्योहारों का कुछ न कुछ धार्मिक महत्व है ही.

    • त्योहारों का महत्व एवं उद्देश्य (Importance and purpose of festivals)

भारतीय जीवन में त्योहारों का सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, मनोवैज्ञानिक महत्व है. संस्कृति अर्थात उतम कृति जिसमे देह, इन्द्रिय, प्राण, मन, बुद्धि आदि की उत्तम चेष्टाएँ या हलचल के द्वारा इनमे लौकिक, पारलौकिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, आर्थिक, राजनैतिक सभी प्रकार के अभ्युदय उन्नति के अनुकूल चेष्टाएँ आ जाती है.

भारतीय संस्कृति में सब कर्मों को वर्णाश्रम धर्म के अनुसार विभाजित कर दिया गया है. वर्ण और आश्रमों के धर्म में विविधता एवं भिन्नता होते हुए भी उसमे एकरूपता है, जिसका प्राण प्रेम है.जहाँ वर्ण व्यवस्था के अनुसार धर्माचरण का विधान किया गया है. वहाँ वर्णानुसार त्योहारों की प्रतिष्ठा हुई है.

उदाहरणार्थ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र इन चार वर्णों के अलग अलग त्योहार है.जो क्रमशः श्रावणी, विजयादशमी, दीपावली एवं होली के रूप में मनाये जाते है. परन्तु हमारी संस्कृति समन्वयपरक है, अतः प्रत्येक त्योहार को चारों वर्ण बड़े उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाते है.

  •  श्रावण की पूर्णिमा (Full moon of shravan)

श्रावणी का पवित्र त्योहार श्रावण की पूर्णिमा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. प्राचीन समय में जब आर्य लोग किसी पवित्र स्थान पर एकत्रित होते थे. वे वहां ऋषियों से धर्मोपदेश सुनते और मिलकर एक बड़ा यज्ञ करते थे.

आज भी हम श्रावणी के पवित्र अवसर पर पूर्वजों के सदनुष्ठान का अनुसरण करते हुए जीवन में उत्कर्ष की प्रेरणा लेते है.

  • विजयादशमी (VijayaDashami)

विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी को मनाई जाती है. इस दिन परम प्रतापी रघुवंशी राजा श्री रामचन्द्र ने लंका नरेश रावण पर विजय प्राप्त की थी. यह दानवता पर मानवता की विजय का पुण्य दिवस है.

  • दीपावली का त्योहार (Diwali festival)

दीपावली का त्योहार कार्तिक अमावस्या के दिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस, चतुर्दशी को रूप चौदस या बड़ी दीवाली, अमावस्या को लक्ष्मीपूजन, दूसरे दिन गोवर्धन पूजा तीसरे दिन भैयादूज या यमद्वितीया मनाई जाती है. इस प्रकार पांच दिनों तक यह त्योहार चलता है.

  • होली का त्योहार (Festival of holi)

होली का त्योहार फाल्गुन की पूर्णमासी को बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है. ऋतू परिवर्तन की दृष्टि से यह त्योहार महत्वपूर्ण है. इस दिन लोग सालभर के भेदभाव एवं द्वेष को भूलकर परस्पर अबीर-गुलाल और रंग से खेलते है तथा बड़ो के चरण छूकर आशीर्वाद प्राप्त करते है.

इसके अतिरिक्त अन्य अनेक छोटे छोटे त्योहार है, जिनमे हमारी संस्कृति प्रतिबिम्बित होकर हमे जीवन को उत्कृष्ट बनाने की प्रेरणा देती है. हमारी संस्कृति की पूंजीभूत उत्कृष्टता त्योहारों के रूप में प्रस्फुटित होकर हमे उदार, महान और कर्तव्यपरायण बनाती है.

इससे हमारा पारिवारिक जीवन सदा शुद्ध, सरस व मधुर रहता है. हमे इनसे पग पग पर उपदेश और प्रेरणा मिलती है. हमारा सामाजिक जीवन पवित्र रहता है जिससे सुख शांति की उपलब्धि होती है. हमारे त्योहारों की महत्ता अवर्णनीय है.

  • त्योहारों से लाभ हानि (Profit loss from festivals)

    समय के प्रवाह में इन त्योहारों में बहुत से दोष भी आ गये है, जिनसे समाज का सबसे बड़ा अकल्याण होता है. विजयादशमी पर देवी के आगे निरीह पशुओं की बलि चढ़ाई जाती है. यह बर्बरता का परिचायक है. दीपावली में लोग जुआ सट्टा खेलते है तथा हजारों रूपये गवाते है.

    होली पर लोग शराब पीते है तथा भद्दी गालियाँ बकते है, कीचड़ उछाला जाता है. रक्षाबंधन के दिन दान दक्षिणा लेकर भाई बहिन व यजमान ब्राह्मण में मनमुटाव होता है. हम लोगों को चाहिए कि त्योहारों में आई इन विसंगतियों और दोषों को दूर करने का प्रयास करे, ताकि त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त हो सके.

    त्यौहार हमारी संस्कृति के संजीव स्वरूप है, ये हमारी अखंडता और विशुद्धता स्थिर रखने में जागरूक रखते है और कर्तव्य कर्म में शिथिलता आने पर हममें स्फूर्तिमय चेतना भर देते है. भारतीय संस्कृति में संसार को एक परिवार के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है एव सबके कल्याण और सम्रद्धि की उच्च भावना अभिव्यक्त की गई है. त्योहार जीवन में विश्रंखलता को दूर कर एकसूत्रता स्थापित करते हुए मंगल भावना का प्रसार करते है.

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