भारत में बेरोजगारी एक समस्या और इसका समाधान | Unemployment In India In Hindi

Berojgar / Unemployment In India In Hindi शताब्दियों की गुलामी के बाद जब भारत स्वतंत्र हुआ, तो सभी नागरिकों को अपनी आर्थिक दशा सुधरे जाने की आशा होने लगी. हमारे सविधान में सभी नागरिकों को समान रूप से भविष्य निर्माण करने का संकल्प व्यक्त किया गया. नव स्वतंत्र देशों में औद्योगिक विकास तथा शासन तन्त्र के विस्तार के कारण प्रारम्भ में रोजगार के साधन सुलभ बन गये.

भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध | Unemployment Essay In India In Hindi

यहाँ प्रथम पंचवर्षीय योजना के साथ ही शरणार्थी समस्या, जनसंख्या वृद्धि तथा उचित विकास दर न रहने से रोजगार की समस्या बढ़ने लगी और नागरिकों को योग्यता एवं श्रम शक्ति के अनुसार रोजगार न मिलने से बेरोजगारी का भयंकर संकट सामने आने लगा.

  • बेरोजगारी की समस्या (Problem of unemployment)

    विकासशील देश भारत में जिस तीव्र गति से विकास होना चाहिए था, वह नही हो सका. इसका सबसे अधिक प्रभाव उन शिक्षित नवयुवकों पर पड़ा, जो रोजगार की तलाश में भटकने लगे और भविष्य के प्रति निराश होकर सरकार से असंतुष्ट रहने लगे. वस्तुतः देश की जनसंख्या जिस तीव्रतम गति से बढ़ी है, उसके अनुरूप रोजगार के साधन उपलब्ध नही हुए है. सरकारी तन्त्र में लालफीताशाही, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार बढ़ता गया.

    आम जनता के जीवन स्तर में काफी गिरावट आई तथा आर्थिक विषमता उतरोतर बढ़ती गई. इससे नई पीढ़ी में असंतोष बढ़ा. फलस्वरूप आंदोलनकारी प्रवृतियाँ, अशांति और अराजकता का भयंकर प्रसार होने लगा. इन सब बुराइयों के मूल में बेरोजगारी की समस्या है. आज तो अच्छे पढ़े-लिखे एवं योग्य नवयुवकों को रोजगार मिल पाना अतीव कठिन हो गया है और आज के समय में बेरोजगारी एक ज्वलंत समस्या बनकर उभर रही है.

  • भारत में बेरोजगारी के कारण (problems caused due to unemployment in india)

हमारे देश में रोजगार के अवसर निरंतर घट रहे है. इसके प्रमुख कारण ये है.

  1. जनसंख्या की अप्रत्याशित वृद्धि होने से रोजगार के उतने साधन नही है.
  2. लघु कुटीर उद्योगों का हास और मशीनीकरण का प्रसार बेरोजगारी का एक अहम कारण भी है.
  3. व्यावसायिक शिक्षा एवं स्वरोजगार की ओर पूरा ध्यान नही दिया गया है.
  4. जातिवाद, क्षेत्रवाद तथा अन्य कारणों से नौकरी के लिए आरक्षण का गलत तरीका अपनाया जा रहा है.
  5. सार्वजनिक उद्योगों की घाटे की स्थति और उत्पादकता का न्यून प्रतिशत रहने से रोजगार के नए अवसर नही मिल पा रहे है.
  6. शासन तन्त्र पर स्वार्थी राजनीती एवं भ्रष्टाचार हावी हो रहा है.
  7. पंचवर्षीय योजनाओं में मानव श्रम शक्ति का सही नियोजन नही हो पाया है.

इन सब कारणों से भारत में लगातार रोजगार के साधन घट रहे है और बेरोजगारी बढ़ रही है. इससे युवा वर्ग अत्यंत परेशान है.

  • बेरोजगारी की समस्या का समाधान (Solution to unemployment problem)

    रोजगार के घटते साधन और बेरोजगारी के बढ़ने के कारणों पर नजर डाले तो यह कहा जा सकता है कि इस समस्या का निराकरण किया जा सकता है. इसके लिए सर्वप्रथम देश की बढ़ती हुई जनसंख्या को प्रभावी रूप से नियंत्रित करना होगा. लघु एवं कुटीर उद्योगों एवं कृषि प्रधान हस्तकलाओं को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए. शिक्षा ऐसी हो जो स्वरोजगार एवं व्यावसायिक क्षमता प्रदान करे.

    देश में वर्तमान में नौकरियों के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था चल रही है. उसे समाप्त करके योग्यता को ही प्राथमिकता दी जावे और कृषि कार्यों के उचित प्रसार करने पर बल दिया जावे. शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव परिवर्तन कर नवयुवकों को स्वावलम्बी बनाया जावें. शासन तन्त्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, स्वार्थपरता एवं भ्रष्ट राजनीती पर अंकुश लगाया जावे. पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण तथा क्रियान्वयन में इस बात का पूरा ध्यान दिया जावे तथा ऐसे आर्थिक उपाय किये जावे जिनसे रोजगार के साधनों में वृद्धि की जा सके.

  • बेरोजगारी निबंध का सार (essay on unemployment in hindi)

    इस प्रकार के उपाय करने पर रोजगार के घटते साधनों पर न केवल अंकुश लगाया जा सकेगा, अपितु रोजगार सुलभ होंबे में परेशानी नही रहेगी. बेरोजगारी की समस्या का समाधान सरकारी और गैर सरकारी सभी स्तरों पर प्रयास करने से ही हो सकता है. इसके लिए देश की युवा पीढ़ी का सहयोग नितांत अपेक्षित है.

    क्योकि रोजगार की समस्या से अधिक वे ही प्रभावित हो रहे है. अतः उचित उआय करने पर रोजगार के साधनों की वृद्धि निश्चित ही हो सकती है.

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