Vaikuntha Chaturdashi Puja Vidhi Vrat Katha | बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कथा

Vaikuntha Chaturdashi Puja Vidhi Vrat Katha In Hindi २१ नवम्बर 2018 को भारत में बैकुंठ चतुर्दशी 2018 का पर्व मनाया जा रहा है. Vaikuntha Chaturdashi व्रत कथा और पूजा विधि के बारे में आज हम जानेगे. इसकी एक कहानी मराठा शासक शिवाजी और उनकी माता जीजाबाई से जुड़ी हुई है. माना जाता है. कि जब जीजाबाई ने जगदीश्वर मन्दिर में जाकर बैकुंठ चतुर्दशी की पूजा की तमन्ना बताई तो शिवाजी के लिए एक लाख कमल के श्वेत बिन मुरझाएं फूलों का प्रबंध करना था उन्होंने अपने धनुर्धरों की मदद से यह कार्य सम्पन्न कर दिया तब से यह पर्व बड़े ही उत्साह के साथ न सिर्फ महाराष्ट्र में बल्कि भारतभर में मनाया जाने लगा.

Vaikuntha Chaturdashi Vrat Katha | बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कथाVaikuntha Chaturdashi Puja Vidhi Vrat Katha  | बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कथा

poojan and vrat vidhi of vaikuntha chaturdashi वैकुण्ठ चतुर्दशी की कथा एवम पूजा विधि | Vaikuntha Chaturdashi Vrat Puja Vidhi In Hindi: कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को यह व्रत मनाया जाता है. इस तिथि को बैकुठ वासी भगवान् विष्णु की विधिवत पूजा करके तथा स्नान आचमन कराके बाल भोग लगावें. तत्पश्चात प्रसन्न मन से पुष्प, दीप चन्दन आदि सुगन्धित पदार्थों से पूजन करे.

बैकुंठ चतुर्दशी की व्रत कथा

एक बार नारद जी मृत्युलोक में घूमकर बैकुंठ में पहुचे. भगवान् विष्णु ने प्रसन्नता पूर्वक बिठाते हुए उनके आने का कारण पूछा. नारदजी ने कहा- हे भगवान्, आपने अपना नाम तो कृपानिधान रख लिया है. किन्तु इससे तो केवल आपके प्रिय भक्त ही तर पाते है, सामान्य नर नारी नही. इसलिए आप कृपा करके ऐसा सुलभ मार्ग बतावें जिससे लोक के निम्न स्तरीय भक्त भी मुक्ति पा सके.

इस पर भगवान् बोले- हे नारद, सुनों, कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को जो नर नारी व्रत का पालन करते हुए श्रद्धा भक्ति से पूजा करेगे उनके लिए साक्षात स्वर्ग होगा. इसके बाद जय विजय को बुलाकर कार्तिक चतुर्दशी को स्वर्ग द्वार खुला रखने का आदेश दिया. भगवान् ने यह भी बताया कि इस दिन जो मनुष्य किंचित मात्र भी मेरा नाम लेकर पूजन करेगा, उसे बैकुठ धाम मिलेगा.

वैकुण्ठ चतुर्दशी मनाने का तरीका (Vaikuntha Chaturdashi Vrat Celebration)

भारत के दो स्थानों पर इस चतुर्दशी को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है पहला तो महाराष्ट्र तथा दूसरा उज्जैन शहर, यहाँ पर इस दिन भव्य यात्रा निकाली जाती है. लोग गाजे बाजे के साथ भजन कीर्तन करते हुए इस यात्रा में शामिल होकर भोलेनाथ के मन्दिर पहुचकर उनकी पूजा अर्चना करते हैं.

इस दिन विष्णु का पूजन किये जाने का भी महत्व हैं. विष्णु शहस्त्र के साथ विष्णु जी की पूजा आराधना सम्पन्न की जाती हैं. इस दिन पवित्र नदियों में महास्नान का आयोजन भी किया जाता हैं. ऐसा करने से मनुष्य के पाप धुल जाते है. माना जाता है कि यह वह दिन है जब विष्णु जी चिर निद्रा से जागृत होते है. अतः उनके नाम का दीपदान किया जाता हैं. भारत के एक अन्य शहर वाराणसी के विष्णु जी मन्दिर में भी इसका आयोजन बड़ी धूमधाम के साथ किया जाता हैं. स्वर्ग की तरह इस मन्दिर की सजावट की जाती है. लोग उपवास रखकर गंगाजी के तट पर दीपदान करते हैं.


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