Van Mahotsav In Hindi | वन महोत्सव दिवस

Van Mahotsav In Hindi वन महोत्सव दिवस पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से प्रतिवर्ष जुलाई माह के पहले पखवाड़े में मनाया जाने वाला उत्सव हैं. घटती हुई वनों और वन्य जीवों की संख्या ही प्रकृति के असंतुलन का सबसे बड़ा कारण हैं, इन्ही विषयों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा 1960 के दशक से प्रतिवर्ष Van Mahotsav Week का आयोजन राजधानी नई दिल्ली और देश के सभी शहरों में आयोजित किया जाता हैं.

वन महोत्सव दिवस के दिन सभी पर्यावरण प्रेमी अपनी धरती को हरी भरी करने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में वृक्षारोपण कर वनों के सरक्षण और इनके महत्व पर जोर दिया जाता हैं. देश की आजादी से पूर्व ही मोर्य और गुप्त वंश के शासकों ने भी इस दिशा में सराहनीय कार्य किये हैं.

Van Mahotsav In Hindi वन महोत्सव पर लेख

Van Mahotsav की विधिवत शुरुआत 1950 से मानी जाती हैं, नेहरु केबिनेट के तत्कालीन कृषि मंत्री श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी द्वारा पर्यावरण आन्दोलन इसके सरक्षण और आम जन में इसके प्रति जन जागरूकता लाने का श्रेय इन्ही को जाता हैं, 70 साल से जारी इस मुहीम में आज लाखों भारतीय सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, इसी का नतीजा हैं कि प्रतिवर्ष पर्यावरण दिवस और वनमहोत्सव दिवस के अवसर पर करोड़ो पेड़ पौधे लगाकर इनके सरक्षण का जिम्मा आम नागरिक उठाते हैं. सरकार द्वारा भी प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक से अपेक्षा की जाती हैं, कि वे प्रतिदिन कम से कम एक वृक्ष लगाकर वन और वन्य जीव सरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए.

भारतीय सभ्यता में पृथ्वी और वृक्षों को पूजनीय मानकर उसकी पूजा की जाती हैं, वन महोत्सव इसी का उदाहरण हैं. इस पर्यावरण आन्दोलन की शुरूआती देश की आजादी के शुरूआती सालों में ही कर दी थी. कई लोकप्रिय और प्रकृति प्रेमी नेताओं के इसके पीछे हाथ रहा जिनमे डॉ. राजेंद्र प्रसाद एवं मौलाना अब्दुल क़लाम आज़ाद कन्हैयालाल मनिकलाल और जवाहरलाल नेहरु जैसी हस्तियाँ ऐसे कार्यक्रम को आमजन के बिच लेकर गईं.

importance of van mahotsav वन महोत्सव का महत्व

वर्ष 2013 में देवभूमि उत्तराखंड में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा का द्रश्य दशकों तक हमारी आँखों से ओझल नही होगा,

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ और खिलवाड़ का ही नतीजा था.

कि कई हरे भरे शहर जिस पर कुदरत हमेशा से मेहरबान रही ,

फिर अचानक यह कहर ढहाना हमारे कुकर्मो और पर्यावरण के साथ अपनी मनमानी का ही नतीजा था.

यह जरुर हैं, अंग्रेजो के शासनकाल तक भारत में वन और वन्य जीव सरक्षण पर किसी ने ध्यान नही दिया.

मगर आजादी की प्राप्ति के बाद कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जी ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए.

उनका ध्यान बड़ी संख्या में वनों की कटाई को रोकने और पौधरोपण के कार्य का शुभारम्भ किया गया.

विद्यालयों में भी वन महोत्सव को लेकर ओपचारिक रूप से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाने लगा.

लाल बहादुर शास्त्री जी का जय जवान जय किसान ने भी लोगों के ध्यान को प्रक्रति की ओर

आकृष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया

भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं,

केंद्र सरकार ने हाल ही के वर्षो में कृषि समृद्धि योजना की शुरुआत की हैं,

जिसके तहत खेतो के चारों और मेडबंदी करने और पौधे लगाने के बदले उन्हें परिश्रमिक देने का भी प्रावधान हैं.

इस योजना में जन-जन जागृति के लिए वन विभाग के अधिकारियो की भी मदद ली जा रही हैं.

सरकार और विभिन्न स्वयसेवी संस्थाओ द्वारा प्रतिवर्ष पौधे लगाने का एक नया लक्ष्य निर्धारित किया जाता हैं.

हमे भी अपने पर्यावरण की सरक्षा की खातिर सरकार के इन कार्यक्रमों में तन मन से सहयोग देना होगा.

slogan on van mahotsav वन महोत्सव नारे

janm-mrityu, sukh-dukh ka sathi hoon, hoon main manava tera. phir bhee too upakaar chukaata, kaat-kaat tan mera

 

hal, bakkhar, jua, baadee bol kaha se deta? chhappar, ghaas, baans, ballee main hee tujhako deta.

 

janm se lekar ant samay tak, tera saath nibhata. vrddh sahaara banakar laathee, mrtyu chita tak jaata.

 

सर कटे रुख रहे, तो भी ससतो जान।

 

 

अरे! मनुष्य, आपसे अनुरोध, जो आप मुझे काटते हैं, क्या आप पहले दस पेड़ लगाते हैं, उन्हें स्वस्थ बनाते हैं

 

अब ये बंजर धरती करे हैं तुमसे पुकार, एक पौधा लगाकर करो श्रृंगार

 

पेड़ लगाओ, प्राण बचाओ.

 

जहाँ हरियाली है, वही खुशहाली है.

 

kadee dhoop mein jalate hain paanv, hote ped to milatee chhaanv.

 

vrikshon ke sara jeevan keval dosaron kee bhalaee karane ke liye hee hai. ye svayan to hava ke jhonke, varsha, dhoup aur paala sab kuch sahate hai, phir bhe ye ham logon kee unse raksha karte hai.

van mahotsav speech वन महोत्सव भाषण निबंध

इस तथ्य से हर कोई वाफिफ हैं, प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में प्रकृति और वातावरण का अहम योगदान हैं, वृक्षारोपण का सीधा अर्थ – अधिक से अधिक संख्या में पौधारोपण से हैं. आज के पर्यावरण में असंतुलन का सबसे बड़ा कारण वनों का विनाश और अनियत्रित कटाई.

वन विभाग के आकड़ो के मुताबिक देश के कुल क्षेत्रफल पर 33 फीसदी वन होने चाहिए.

एक समय था. जब हमारे कुल क्षेत्रफल पर आधे से अधिक क्षेत्र वन से अच्छादित थे.

मगर जनसंख्या वृद्दि के कारण बढ़ती हुई मानव आवश्यकताओ के कारण हमारे वन निरंतर लुप्त हो रहे हैं.

आज के हालात यह हैं, हमारे कुल क्षेत्रफल पर 30 फीसदी से कम वन रह गये हैं.

इसके दुष्परिणाम देखने का इन्तजार करना ही नही पड़ा.

बीते कुछ वर्षो में आने वाले संभावित खतरे के संकेत मिल चुके हैं.वन महोत्सव की भागीदारी, जन सहयोग और सरकारों की सक्रियता के कारण भारत में वनों की स्थिति में कुछ सुधार आया हैं. भारत के वन विभाग की 14 व़ी सूची जो 2015 में सार्वजनिक की गईं उस पर नजर डाली जाए तो भारत के कुल क्षेत्रफल में से लगभग 5100 वर्ग km की वन क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गईं हैं.

कुल वन क्षेत्र के आकड़े 794,245 वर्ग किमी हैं जो तक़रीबन 25 फीसदी हैं.

वनों में क्षेत्रफल की द्रष्टि से मध्यप्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य हैं.

राज्य में लगभग 77 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में वन हैं,

इसके बाद क्रमश अरुणाचल प्रदेश और छतीसगढ़ आते हैं,

यदि प्रदेश के कुल क्षेत्रफल में वन प्रतिशत की बात की जाए

तो 89 फीसदी कुल वन क्षेत्र के साथ मिजोरम पहले और लक्षद्वीप दुसरे स्थान पर हैं.

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Van Mahotsav Date And Program

वन महोत्सव पर्व हर वर्ष जुलाई महीने के पहले पखवाड़े में मनाया जाता हैं, देश भर में पर्यावरण सरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं. 1947 से शुरू हुई इस परम्परा में केंद्र सरकार स्थानीय सरकारों और स्वयसेवी संस्थाओ द्वारा जनजागरूकता और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए इस पर्व को मनाया जाता हैं.

अपनी माँ पृथ्वी को बचाने उन्हें फिर से हराभरा करने के लिए लोग घरों, कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों में बड़ी संख्या में पोधरोपण कर अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदुषण के दुष्प्रभावो से आम जन को जागरूक बनाने के लिए हर भारतीय का यह कर्तव्य हैं, कि वो वन महोत्सव 2017 में कम से कम एक पौधा अपने घर अथवा ऑफिस में लगाए और उनकी सुरक्षा देखभाल का संकल्प ले.

कभी-कभी पेड़ काटना जरुरी भी हो जाता हैं,

कोई पाप नही हैं यदि हम किसी आवश्यक परिस्थति में एक वृक्ष को काटे,

मगर उनकी जगह फिर पांच नए वृक्ष जरुर लगाए.

van mahotsav day

अक्सर आए दिन पढ़ने या सुनने को मिलता है, कहीं जल संकट तो कही वर्षो से सुखा साथ ही कई बार जंगली जानवरों द्वारा आवासीय बस्तियों में घुसने की खबरे तो आम हो गईं हैं. क्या हम कभी विचार करते हैं, आखिर वो ऐसा क्यों करते हैं. जब किसी का घर उजड़ जाता हैं अथवा उजाड़ दिया जाता हैं, तो मजबूरन उसे कही आश्रय लेना पड़ता हैं. यकीनन हम उनके जंगलो को काटेगे उनके घरो का विध्वंस करेगे, तो एक दिन यह भी हो सकता हैं ये जानवर शहरों की ओर पलायन कर जाएगे. चाहे खनन माफिया हो या लकड़ी की तस्करी करने वाले वनों के विनाश के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं. सरकार को कड़े नियम बनाकर इन पर कठोर कार्यवाही करने की जरुरत हैं.

Van Mahotsav In Hindi दोस्तों ये लेख आपकों कैसा लगा कमेंट कर जरुर बताए.

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