तेजा दशमी कब है 2018 और क्यों मनाई जाती हैं इतिहास कथा व मेले की जानकारी

Teja Dashmi Kab Hai 2018 Aur Kyo Manayi Jati Hai: तेजा दशमी का पर्व भाद्रपद शुक्ल दशमी तिथि को मनाते हैं. आपकों बता दे 2018 में तेजा दशमी कब है तेज दशमी क्यों मनाई जाती हैं. वीर तेजाजी महाराज का मेला ( Veer Teja Ji Mela 2018 In Rajasthan) कब और कहाँ भरता हैं. आमजन में लोकदेवता कुंवर तेजल के बारे में क्या क्या लोक कथाएँ व इतिहास की गाथाएं प्रसिद्ध हैं. कब से तेजा दशमी का पर्व मनाया मनाया जाता हैं. गौरतलब है कि उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में तेजादशमी का पर्व को मनाया जाता हैं. जाट समुदाय के आराध्य देव तेजाजी महाराज को साँपों के देव के रूप में पूजा जाता हैं. कितना भी जहरीला सांप काट जाए यदि तेजा के नाम की तांती बाँध दी जाए तो वह जहर उतर जाता हैं. तेजा दशमी कब है और इस पर क्या करे इसकी जानकारी यहाँ दी गई हैं.

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Teja Dashmi Kab Hai 2018 Date Time Mela: भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजदशमी पर्व मनाया जाता है, यह गोगानवमी से ठीक बाद होता हैं. नवमी की रात्री को ही तेजल के बड़े मन्दिरों जिन्हें थान कहते है. वहां पर रात्री जागरण एवं भजनों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. अगले दिन इन मुख्य स्थलों पर विशाल मेला भरता हैं. दूर दूर से भक्त अपनी मनौती लेकर आते है. भगवान् को नारियल का भोग लगाकर सत्यवादी वीर तेजाजी का दर्शन करते हैं.

ऐसी मान्यता है कि सर्पदंश से पीड़ित मनुष्य, पशु यह धागा सांप के काटने पर, बाबा के नाम से, पीड़ित स्थान पर बांध लेते हैं, जिन्हें छोड़ने के लिए वों तेजाजी के धाम आते हैं. नागौर जिले में परबतसर का तेजाजी पशु मेला इन्ही महान पुरुष की स्मृति में भरता हैं. इसके अतिरिक्त भी नागौर जिले में तेजाजी के मेले लगते हैं.

तेजा दशमी की तारीख 2018 में

आगामी 19 सितम्बर 2018 को तेजा दशमी हैं. बुधवार के दिन राजस्थान में तेजा दशमी का पर्व मनाया जाना हैं. हर साल यह अगस्त-सितम्बर में गोगानवमी से एक दिन बाद होती हैं. राज्य में इस दिन का राजकीय अवकाश भी घोषित किया जाता हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दे, भाद्रपद शुक्ल पक्ष सबसे अधिक व्रत पर्व एवं त्योहारों का पंखवाड़ा हैं.

भादों शुक्ल दशमी को एक तो तेजा दशमी है, तथा एक अन्य बलिदान दिवस भी हैं. जी हाँ ईमरती बाई विश्नोई के नेतृत्व में वृक्षों को बचाने की खातिर 363 विश्नोई सम्प्रदाय के स्त्री पुरुषों ने जान दे दी थी. इस बलिदान की याद में हर साल भाद्रपद शुक्ल दशमी तिथि को खेजड़ली शहीद मेला अथवा खेजड़ली वृक्ष मेला भी मनाया जाता हैं.

वीर तेजाजी महाराज का जीवन परिचय और इतिहास

Veer Teja Ji Biography : लोक देवता तेजाजी का जन्म नागौर जिले में खड़नाल गांव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ला, चौदस संवत 1130 यथा 29 जनवरी 1074 को जाट परिवार में हुआ था. तेजाजी के माता-पिता को कोई सन्तान नही थी, उन्होंने शिव पार्वती की कठोर तपस्या की, जिसकें परिणामस्वरूप तेजाजी का उनकें घर दिव्य अवतरण हुआ था. माना जाता है जब वे दुनियां में आए तो एक भविष्यवावाणी में कहाँ गया किया- भगवान् ने आपके घर अवतार लिया हैं. ये अधिक वर्ष तक इस रूप में नही रहेगे. बचपन में ही तेजाजी का विवाह पनेर के रायमल जी सोढा के यहाँ कर दिया गया था.

तेजाजी के जन्म के बारे में मत है—-

जाट वीर धौलिया वंश गांव खरनाल के मांय।
आज दिन सुभस भंसे बस्ती फूलां छाय।।
शुभ दिन चौदस वार गुरु, शुक्ल माघ पहचान।
सहस्र एक सौ तीस में प्रकटे अवतारी ज्ञान।।

जानिए कब मनाई जाएगी तेजा दशमी 2018 में

तेजादशमी यानी भाद्रपद शुक्ल दशमी तिथि को ही उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया था. प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल 10 (तेजा दशमी) से पूर्णिमा परबतसर पशु मेले का आयोजन इन्ही की स्मृति में होता हैं. इस साल 19 सितम्बर 2018 को सभी जगहों पर तेजा दशमी मनाई जाएगी,

भक्तगण प्रसादी चढाने और सर्पदंश के धागे इत्यादि को छोड़ने के लिए उनके मुख्य मंदिर खरनाल में आते हैं. तेजाजी मी मृत्यु गौरक्षा की राह जाते जलते सर्प को बाहर निकालने और फिर उनके द्वारा दंश देने के वरदान के फलस्वरूप हुई थी. सत्यवादी कहे जाने वाले वीर तेजाजी ने नाग देवता को यह वचन दिया था.

तेजा दशमी कथा

कि वे गायों को छुड़ाकर आपके पास वापिस आएगे, तब आप डंस लेना. इस तरह अपनी मृत्यु का भय देखे बिना डाकुओं के गायें छुडाने के बाद वीर तेजाजी नाग देवता के पास जाके अपना वचन पूरा किया. अपने सत्यवादी होने के इस गुण से नाग बेहद प्रसन्न हुआ तथा उन्हें साँपों के देवता के रूप में कलयुग में पूजे जाने का वरदान देते हुए कहा कोई भी सांप का खाया यदि आपका नाम लेकर तांती बांधेगा तो वह मरेगा नही उसका जहर समाप्त हो जाएगा.

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