कवि श्यामलदास दधि वाडिया का जीवन परिचय | veer vinod mahamahopadhyaya kaviraja shyamaldas

veer vinod mahamahopadhyaya kaviraja shyamaldas: इनका जन्म 1893 के आस-पास माना जाता है. कवि श्यामलदास दधि वाडिया गोत्र के चारण व मेवाड़ राज्य के ढोकलिया ग्राम के निवासी थे. इनके पिता का नाम कमजी तथा दादा का नाम रामदीन था. कविराज श्यामलाल महाराणा सज्जनसिंह के कृपा पात्र थे.veer vinod mahamahopadhyaya kaviraja shyamaldas

कवि श्यामलदास का जीवन परिचय (veer vinod mahamahopadhyaya shyamaldas)

उन्होंने ही इन्हें कविराज की उपाधि दी थी. अंग्रेज सरकार ने भी श्यामलदास की योग्यता का आदर करते हुए इनकों महामहोपाध्याय का खिताब दिया था. मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट कर्नल इम्पी ने इन्हें केसरे हिन्द की उपाधि दी थी.

श्यामलदास कवि और इतिहासकार दोनों थे. वीरविनोद इनके रचित प्रमुख इतिहास ग्रंथ है. इनमें मुख्यत मेवाड़ का इतिहास वर्णित है. वैशाख 1927 विक्रमी संवत् के दिन श्यामलदास जी के पिता स्वर्ग सिधार गये. उस समय इनकी आयु मात्र 34 साल ही थी. तब ये ढोकलिया से उदयपुर आ बसे.

उदयपुर में आने पर महाराणा शम्भुसिंह जी इनसे मिलने पहुचे, महाराणा के आग्रह पर ये इनके दरबार में रहने. दुर्भाग्यवश कुछ साल बाद राणाजी भी स्वर्ग सिधार गये. तथा इनके उत्तरराधिकारी व ज्येष्ठ पुत्र सज्जनसिंह मेवाड़ के शासक बने. अपरिपक्व आयु में होने के कारण महाराणा को परामर्शदाता की सख्त आवश्यकता थी. जिसे कवि श्यामलदास जी ने निभाया.

 

वीर विनोद (veer vinod) इनका विख्यात काव्य ग्रंथ था. जिसमें मेवाड़ के तत्काकालीन इतिहास व राजव्यवस्था का वर्णन मिलता है. श्यामलदास ने इस ग्रंथ में महाराणा सांगा एवं बाबर के मध्य हुई खानवा की लड़ाई का विस्तार पूर्वक वर्णन किया है. इस ग्रंथ को इन्होने सज्जनसिंह के कहने पर लिखना आरम्भ किया था.

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