Veto Power Countries In Hindi | वीटो पावर वाले देश Veto Power का अर्थ मीनिंग

Veto Power Countries In Hindi | वीटो पावर वाले देश Veto Power का अर्थ मीनिंग : क्या आप veto power meaning का अर्थ जानते हैं. क्या होता है वीटो पॉवर, वर्तमान में यह कितने देशों के पास हैं. क्या भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ का यह विशेषाधिकार प्राप्त होना चाहिए. कब तक भारत उन देशों की सूची में शामिल हो सकता है जिनके पास वीटो शक्ति हैं. तथा विश्व के किसी भी क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय फैसले पर उनकी राय बेहद महत्वपूर्ण समझी जाती हैं. आज हम इन्ही कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल के जरिये देने का प्रयास करेगे.

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वीटो पावर क्या है इसका अर्थ व परिभाषा (veto power meaning In Hindi)

वीटो एक लैटिन शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है मैं मना करता हूँ अथवा मैं निषेध करता हूँ. संयुक्तराष्ट्र संघ दो सौ से अधिक देशों का महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठन हैं. जिसमें विशिष्ट प्रभाव रखने वाले ऐसे पांच देशों को सुरक्षा परिषद्वी में वीटो पॉवर नामक एक शक्ति दी गयी हैं. जिसके तहत उनहे यह विशेषाधिकार है कि किसी एक तरफा कानून को रोक लेने का सामर्थ्य उनके पास हैं. साथ ही उन्हें इसका कारण बताने का स्पष्टीकरण करने का कोई प्रतिबन्ध नही हैं. उदहारण के लिए हाल ही में महासभा द्वारा हाफिज सईद को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के बिल पर भारत को विश्व के अधिकतर देशों एवं वीटो पॉवर के देशों के समर्थन मिला, मगर चूँकि चीन एक वीटो शक्ति वाला देश है उनके द्वारा इसका विरोध (अपना वीटो) प्रयोग करने के कारण यह बिल पारित नही हो पाया था.

वीटो पावर वाले देशों के नाम (how many countries have veto power)

१९४५ से २०१८ तक Uno के इतने वर्षों के बाद भी सिक्योरिटी कौंसिल में अभी तक मात्र पांच ही स्थायी सदस्य देश है जिन्हें वीटो पावर प्राप्त हैं. भारत समेत दर्जनों ऐसे देश है जिन्हें विश्व शान्ति एवं स्थिरता के लिए अब सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए. चलिए अब हम उन पांच देशो के बारे में जानते है जिनके पास वीटो पावर है जिन्होंने कब कब व कितनी बार इस शक्ति का प्रयोग किया हैं.

  • रूस- सोवियत रूस दूसरे विश्वयुद्ध से पूर्व जब संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ तो अमेरिका से भी शक्तिशाली राष्ट्रसंघ था.  संयुक्त राष्ट्र के इतिहास के पहले 10 वर्षों में सोवियत संघ ने 79 बार वीटो का प्रयोग किया आपकों जानकार आश्चर्य होगा, कि इस अवधि में मात्र चीन, अमेरिका, ब्रिटेन ने एक बार तथा फ़्रांस ने इसे दो बार ही प्रयोग किया था. रूस के लिए 1957 से 1985 तक विदेश मंत्री रहे आंद्रेई ग्रोमिको को श्रीमान नहीं भी कहा जाता था, हालांकि सोवियत संघ के विघटन के बाद अब तक मात्र दो बार ही वीटो का प्रयोग रूस की तरफ से हुआ हैं. साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र अभियान की वित्तीय व्यवस्था के विरोध में तथा बोस्नियाई सर्बों के पक्ष में.
  • संयुक्त राज्य अमरीका– अमेरिका के वीटो पावर इस्त्मोल के इतिहास में अमेरिका ने सर्वाधिक 35 बार इजरायल   के विरुद्ध इस निषेधाधिकार का उपयोग किया हैं. कुल ५३ बार इस पावर का उपयोग अमेरिका ने अब तक किया हैं.
  • ग्रेट ब्रिटेन– सभी स्थायी देशों ने अपने अपने राष्ट्र हितों को ध्यान में रखते हुए इस शक्ति का दुरुपयोग किया हैं. ब्रिटेन के वीटो पावर इतिहास में अब तक ३२ बार इसका उपयोग हुआ हैं. जिनमें सात बार केवल अकेले रूप में २३ बार अमेरिका के समर्थन में तथा १४ बार इन्होने फ़्रांस का साथ दिया है. ब्रिटेन की ओर से वीटो का अंतिम प्रयोग वर्ष १९८९ में पनामा लिक में अमेरिका के विरुद्ध किया गया था.
  • फ़्रांस– फ्रांस ने अब तक १८ बार इस शक्ति का प्रयोग किया हैं जिसमें उन्हें १३ बार ब्रिटेन और अमेरिका दोनों का साथ मिला, जबकि पनामा मामले में उन्होंने अमेरिका के खिलाफ इसका प्रयोग किया था, जिसमें उसे ब्रिटेन का समर्थन हासिल था.
  • चीन- ऊपर के चार देशों के वीटो पावर प्रयोग का भारत पर अधिक प्रभाव नही पड़ा, मगर चीन ने कई बार इस विशेषाधिकार का भारत के विरुद्ध इस्त्मोल किया हैं. पहली बार इसनें मंगोलिया को uno में सदस्यता के विरुद्ध प्रयोग किया, इसके बाद १९७२ में भारत द्वारा बांग्लादेश के निर्माण के आवेदन पर पाकिस्तान का समर्थन लेकर चीन द्वारा इसका प्रयोग किया गया.

वीटो की शुरुआत व इसका इतिहास (veto power history in hindi)

संयुक्त राष्ट्र संघ में वीटो पावर की अवधारणा कोई नई बात नही हैं. यह परम्परा राष्ट्रसंघ यानि लीग ऑफ नेशंस के समय थी. राष्ट्र संघ के गठन के समय भी चार स्थायी एवं चार अस्थायी सदस्यों को इस प्रकार के ही विशेषाधिकार प्राप्त थे. फिर आगे जाकर अस्थायी सदस्यों की संख्या ४ से बढ़कर ११ कर दी गई और यही स्वरूप UNO की स्थापना के बाद भी कायम रहा.

यूनाइटेड किंगडम (U.K.), चीन, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका ये चार देश तो पूर्व से ही इस संघ के स्थायी सदस्य थे. मगर दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी से पराजित होने के बाद फ़्रांस ने अपनी भूमिका इस संगठन के साथ बनाएं रखी इस तरह से जब संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् सत्ता में आई तो इन्ही पांच देशों को स्थायी सदस्यता यानि वीटो पावर दिया गया था. वीटो पॉवर का उद्देश्य यह है कि विश्व में शान्ति एवं सुरक्षा की स्थापना हो, तथा किसी बड़े मानवीय संकट व युद्ध को बातचीत के द्वारा टाला जा सके.

वीटो पावर की आलोचनाएं कमियां व सुधार (veto power wikipedia in hindi)

इस शब्द वीटो पावर की फुल फॉर्म- असल में, वीटो “आई forbid” के लिए एक लैटिन शब्द है। वीटो पावर का उपयोग एकतरफा कार्रवाई को रोकने के लिए किया जाता है, खासतौर पर कानून के अधिनियमन हैं. इसकी कार्यप्रणाली तथा ढाँचे को लेकर कई बार आलोचना भी की जाती है आलोचको के तर्क इस प्रकार है.

  • यह उस समय के शक्तिशाली देशो जिन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध में सफलता पाई थी, उनके लिए बनाई गयी थी आज विश्व की स्थितियां बदल चुकी हैं. अतः वीटो पावर की अवधारणा में भी बदलाव की आवश्यकता हैं.
  • आलोचकों का मानना है कि यदि ब्रिटेन व फ्रांस को यह शक्ति प्रदान है तो इससे सैनिक व आर्थिक आधार पर शक्तिशाली देशों को भी यह शक्ति दी जानी चाहिए.
  • वीटो का अधिकतर उपयोग स्थायी सदस्य विश्व शान्ति व सुरक्षा के लिए न करके आपसी हितों को मध्यनजर रखकर करते हैं. अतः इस प्रणाली को समाप्त कर सुरक्षा परिषद के फैसले बहुमत के आधार पर किये जाने चाहिए.
  • इस तरह की कमियां होने के बावजूद भी वीटो पावर के सम्बन्ध में कोई बदलाव आज की परिस्थियों में नजर नही आता है क्योंकि UNO चार्टर में बदलाव के लिए पाँचों वीटो पावर देशों की सहमती आवश्यक है, हाल फिलहाल ऐसा प्रतीत नही हो रहा हैं.

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