Viratra Mata Mandir Chohtan Rajasthan Photo History In Hindi | वांकल विरात्रा माता की कथा इतिहास व मंदिर की जानकारी

Viratra Mata Mandir Chohtan Rajasthan Photo History In Hindi | वांकल विरात्रा माता की कथा इतिहास व मंदिर की जानकारी : विरातरा धाम का नाम स्मरण करते ही वांकल विरात्रा माता के दर्शन करने की जिज्ञासा मन में जाग उठती हैं. विरात्रा धाम की चमत्कारी देवी वांकल विरातरा माता के दर्शन के बाद मात्र से सुख, शान्ति और आनन्द की अनुभूति होती हैं. यह विख्यात तीर्थ स्थल पश्चिम राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले की चौहटन तहसील के ढ़ोक गाँव की सीमा में रेगिस्तान के प्राकृतिक नयनाभिराम दृश्यों के बिच काले भूरे पहाड़ो एवं बालू रेत के विशाल टीबों के मध्य में स्थित हैं.

Vankal Mata Viratra History in Hindi |Viratra Mata Mandir Chohtan Rajasthan Photo HistoryViratra Mata Mandir Chohtan Rajasthan Photo History In Hindi | वांकल विरात्रा माता की कथा इतिहास व मंदिर की जानकारी

वांकल विरात्रा माता इतिहास कथा मंदिर Mandir, Photo, History Of Viratra Mata In Hindi: विरातरा धाम की यात्रा करने के लिए रेल एवं बस मार्ग से देश के विभिन्न भागों से बाड़मेर पहुचा जा सकता हैं. बाड़मेर से 55 किलोमीटर दूर पक्के सड़क मार्ग से प्राचीन एवं ऐतिहासिक नगरी चौहटन पहुचकर वहां से दस किलोमीटर ढ़ोक गाँव से चार किलोमीटर पश्चिम पहाड़ियों की गोद में वांकल विरातरा धाम आया हुआ हैं.

विरात्रा धाम का इतिहास (History of Viratra Dham In Hindi)

विरातरा धाम की मुख्य चमत्कारी देवी वांकल माता की उत्पत्ति के सम्बन्ध में बताया जाता हैं. कि यह सरष्टि के रचयिता भगवान श्री ब्रह्माजी की गोद पुत्री विरात्री, जिसे वक्रायी माँ, माँ वक्रांगी, माँ वांकल, माँ वांकूल, विरात्रा माँ, वांकल देवी के नाम से न केवल संबोधित किया जाता रहा है, अपितु देश के विभिन्न भागों में माताजी के मंदिर एवं पूजनीय धार्मिक स्थल भी बने हुए हैं.

राजस्थान प्रदेश के बाड़मेर जिले के चौहटन क्षेत्र में उज्जैन के शासक वीर विक्रमादित्य ने वर्ष ३७५ में राज सिहासन पर बैठने पर शकों के अत्याचार, अनाचार, दुराचार को मिटाते हुए उन पर आक्रमण कर विजय पाई और विजय की इस ख़ुशी में अपने नाम पर विक्रम संवत् चलाते हुए हिंगलाज की यात्रा पर गये.

वहां देवी की तन्मय साधना उपासना भक्ति करने पर देवी अत्यंत प्रसन्न हुई, और राजा वीर विक्रमादित्य के सम्मान पूर्वक व्यवहार, विवेक, विनम्रता से प्रभावित होकर आशीर्वाद देते हुए कहा कि तुम्हारा नाम सदियों तक इतिहास में न्यायप्रिय शासक के रूप में विख्यात रहेगा.

राजा विक्रमादित्य ने भी देवी के आशीर्वाद एवं चमत्कार से प्रसन्न होकर माँ से नित्य दर्शन देने की अभिलाषा प्रकट की. माँ हिंगलाज ने कहा कि मैं इस शक्तिपीठ को छोड़कर अन्यत्र नही जा सकती, लेकिन तुम्हारी भक्ति से प्रभावित होकर मैं शक्ति के रूप में तुम्हारे साथ चलूगी, जो भविष्य में वांकल के नाम से अवतरित होउगी.

लेकिन तुम मुझे शक्ति स्वरूप में ले जाते समय पीछे मुड़कर मत देखना, यदि ऐसा किया तो मैं तुम्हारे साथ उज्जैन तक नही जा पाउगी.

चौहटन की माँ वांकल के मंदिर की कथा (The story of Viratra Mata temple of Chauhattan)

वीर विक्रमादित्य हिंगलाज शक्तिपीठ से देवी द्वारा दी गई शक्ति प्रतिमा को अपने साथ हर्षोल्लास से लेकर उज्जैन की तरफ सैनिक सम्मान के साथ रवाना हुए, रास्ते में सभी जगह शक्ति प्रतिमा के दर्शन करने जनसैलाब उमड़ पड़ा. राजा वीर विक्रमादित्य का शाही काफिला चलते हुए वर्तमान बाड़मेर जिले की चौहटन तहसील के निकट बीजराड़ व घोनिया के बीच पहाड़ी नुमा विशाल रेतीले टीबे पर विश्राम के लिए रुका.

यहाँ से प्रस्थान कर शाही काफिला वर्तमान ढ़ोक गाँव से पश्चिम की तरफ विरातरा पहाड़ी अर्थात भूरा भाखर हिरण डूंगर में सामरिक दृष्टि से सुरक्षित स्थान समझकर यहाँ रात्रि विश्राम किया और अपने साथ लाइ गई शक्ति प्रतिमा को यहाँ की एक गुफा में अस्थायी रूप से पूजा आराधना के लिए विराजमान किया, जो आजकल आदुपुरा नाम से विरातरा तीर्थ का महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हैं.

माँ विरात्रा का हिंगलाज से विरातरा चौहटन आने की रोचक कहानी

चौहटन से सुबह वीर विक्रमादित्य अपने सैनिक लवाजमे के साथ शक्ति मूर्ति को लेकर जब राजा आगे प्रस्थान करने लगे तो उन्हें दिशा भ्रम हो गया और भूल से उन्होंने पीछे मुड़कर हिंगलाज की तरफ देख लिया. इस पर आकाशवाणी हुई और हिंगलाज देवी माँ ने कहा कि- हे राजन, आपने हिंगलाज की ओर मुड़कर देखा हैं. जिससे मेरा वचन पूरा हुआ और अब मैं आगे नही जा सकती. मैं यहाँ भूरा भाखर की चोटी पर रहकर यहाँ उत्पात मचाने वाले राक्षसों का विनाश करुगी.

वीर विक्रमादित्य ने जब शक्ति माता श्री हिंगलाज के मुख से ये वचन सुने तो वे आवाक रह गये, हताश हो गये और देवी के वचनानुसार अपने साथ लाई शक्ति प्रतिमा को जमीन तल से लगभग 1100 फीट की उंचाई पर श्रद्धापूर्वक भव्य धार्मिक उत्सव के साथ वही पर स्थापित कर दिया.

तब से यह भूरा भाखर जिसके पाषाणों का रंग हिरण की तरह होने के कारण उसे हिरण भाखर नाम से संबोधित किया जाता हैं. पर वीर विक्रमादित्य द्वारा रात्रि विश्राम के कारण विरातरा के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जो आज विरात्रा धाम के रूप में श्रद्धालु भक्तों का भव्य धार्मिक स्थल बन गया हैं.

वीरातरा वांकल माता मंदिर का निर्माण

वीरात्रा के भूरा भाखर हिरण डूंगर पर वीर विक्रमादित्य द्वारा शक्ति प्रतिमा की स्थापना करने के बाद यह स्थल विरात्रा के नाम से जनप्रिय होने लगा. राजा वीर विक्रमादित्य ने प्रारम्भ में छोटे से चबूतरे पर शक्ति माता/ विरातरा माता की प्रतिमा स्थापित की थी, जो बाद में भक्तों ने उस पर लोहे का छपरा डालकर मंदिर स्वरूप बना दिया.

जब कोई भक्तगण विरातरा धाम की यात्रा पर दर्शनार्थ आता हैं वह भूरा भाखर हिरण डूंगर जिसे वर्तमान में गढ़ मंदिर के नाम से संबोधित किया जाता हैं, के दर्शन के लिए अवश्य जाता हैं. गढ़ माताजी के चमत्कारों से कई लोगों के लाभान्वित होने पर भक्तों की आस्था विशवास और श्रद्धा बढ़ने लगी.

वीरात्रा के गढ़ माता मंदिर के साथ तलहटी माता मंदिर के दर्शनार्थ बढ़ती तादाद में यात्रियों का निरंतर आना जारी रहा. इससे इस तीर्थ धाम की महिमा बढ़ती देख यहाँ के ट्रस्ट मंडल ने हिरण भाखर पर स्थित गढ़ माता के प्राचीन मंदिर के स्थान पर नया मंदिर बनाने का निर्णय लिया.

विक्रम संवत् 2054 आषाढ़ वदी 5 बुधवार 26 जून 1967 में प्राचीन मंदिर का उत्थापन कर विक्रम संवत् 2054 आषाढ़ सुदी 2, रविवार, 6 जुलाई 1997 को पुण्य नक्षत्र में मंदिर का शिलारोपण कर सम्पूर्ण मंदिर का संगमरमर के पाषाणों से निर्माण कार्य आरम्भ किया.

वर्तमान विरातरा माता मंदिर (viratra mataji mandir dhok rajasthan)

वीरातरा के गढ़ माता मंदिर के नवनिर्माण के लिए जमीनतल से करीब 1240 पक्की बनी सीढ़ियों से बड़ी कठिनाइयों से सामग्री चढ़ाना शुरू किया. श्रद्धालु भक्तों की आस्था, दानदाताओं के आर्थिक सहयोग, ट्रस्ट मंडल के उत्साह, श्रमिकों की भक्ति के कारण भूरा भाखर हिरने डूंगर की चोटी पर पूर्वाभिमुख छोटे शिखरधारी संगमरमर का मंदिर तैयार हो गया. जिसकी विक्रम संवत् 2056 माघ सुदी पूर्णिमा, रविवार तदनुसार 31 जनवरी 1999 को भव्य एवं ऐतिहासिक धार्मिक समारोह के बिच प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई.

नवनिर्मित गढ़ मंदिर में श्री विरातरा वांकल माता की सिंह सवारी की 35 इंच की प्रतिमा पूर्वाभिमुख प्रतिष्ठित की गई हैं. इस मूल प्रतिमा के अतिरिक्त मंदिर के मूल ग्म्भारे के उत्तर में उत्तर की प्राचीर गोख में श्री काला एवं दक्षिण गोख में श्री गोरा भैरव की प्रतिमाओं को विराजमान किया गया.

मंदिर के शिखर के मंगल गोखों में उत्तर में श्री कुबेर, दक्षिण में श्री वरुण एवं पश्चिम में श्री यमदेव की प्रतिमाएं विराजमान की गई हैं. नवनिर्मित गढ़ माता मंदिर के पीछे पूर्वाभिमुख छोटा सा मंदिर निर्माण करवाया गया हैं. जिसमें गढ़ मंदिर से सम्बन्धित प्राचीन प्रतिमाओं को यहाँ दर्शनार्थ विराजमान किया गया हैं. इन दोनों मंदिरों के अतिरिक्त यहाँ यात्रियों दर्शनार्थियों, भक्तों, आगंतुकों की सुविधा के लिए पीने के पानी के दो टांकों, तीन कमरेमय बरामदों, तीन स्नानघरों आदि का निर्माण करवाया गया हैं.

प्राचीन विरातरा मंदिर एवं विरात्रा माताजी के दर्शनीय स्थल व मंदिर

विरातरा तीर्थ का सबसे अधिक लोकप्रिय एवं चमत्कारी विरातरा माताजी का तलेटी (तलहटी) मंदिर हैं. यह मंदिर जमीन तल पर पहाड़ियों एवं रेतीले टीबों के बिच में टापू की तरह बना हुआ हैं. इस मंदिर के यहाँ निर्माण के सम्बन्ध में बताया जाता हैं कि विरातरा के गढ़ मंदिर दर्शनार्थ आने वाले यात्रियों को तकरीबन 1100 फीट की पहाड़ी के दुर्गम करीबन एक किलोमीटर की चढ़ाई की यात्रा करने में भीषण कठिनाई का सामना करना पड़ता था. पहाड़ी की कठिन चढ़ाई उबड़ खाबड़ पथरीले रास्ते दुर्गम पहाड़ी तथा जंगली जानवरों के भय से दर्शनार्थ आने वाला यात्री भयभीत रहता था.

वृद्ध एवं असहाय दर्शनार्थी व्यक्ति का गढ़ माताजी के दर्शन करना दुर्लभ होता था. ऐसी स्थिति में एक वृद्ध मगनियार जाति की माताजी की परम श्रद्धालु भक्त महिला ने तलहटी मर खड़े रहकर अपनी असमर्थता बताते हुए माताजी से नीचे पधारने की करुनामय विनती की.

माताजी अपनी श्रद्धालु महिला भक्त की अंतकरण की प्रार्थना से प्रसन्न हुई. इस बिच पहाड़ की ऊँची छोटी से बड़ा पत्थर निचे की ओर लुढ़कता हुआ जमीन पर गिर गया और उसके दो टुकड़े हो गये, जिसमें से माताजी की मूर्ति प्रकट हुई, जो आज विरातरा माताजी के तलहटी मंदिर की मूल प्रतिमा के रूप में पूजनीय बनी हुई हैं.

इस सम्बन्ध में एक अन्य दंतकथा प्रचलित हैं कि एक सुनार महिला के पुत्र नही होने के कारण उसने माताजी की श्रद्धामयी भक्ति करते हुए माँ से पुत्ररत्न की याचना की. माँ की कृपा से उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और वह प्रसाद चढाने के लिए गढ़ माताजी मंदिर जाने लगी. हाथ में प्रसाद का कपड़े से ढका हुआ थाल था. कपड़े के थाल पर से उड़ने से उसमें रखी प्रसादी को एक कौवे ने चख लिया, जिसे सुनार महिला ने देख लिया, फिर वह झूठी प्रसादी चढाने के लिए पहाड़ी की दुर्गम चढ़ाई करने लगी.

उसका पाँव फिसल गया और वह पहाड़ की चट्टानों से टकराती हुई गहरे गड्डे में गिर गई. पहाड़ी चट्टानों से बुरी तरह चोटिल, घायल होने पर वह चिल्लाने लगी. तब एक मागनियार माताजी से नीचे खड़ा अपनी गायकी में प्रार्थना कर रहा था, उसने महिला की दर्दभरी आवाज सुनी और वह उसके पास पहुचा और देखा कि गम्भीर रूप से घायल महिला ने अपना दम तोड़ दिया हैं.

इस दर्शय को देखकर मगनियार ने वीरात्रा माता से करुनामय विनती करते हुए पहाड़ी से नीचे पधारकर दर्शनार्थियों को नीचे आकर दर्शन देने की याचना की. माताजी ने मागनियार की विनती स्वीकार की और उपर से एक बड़ा पत्थर लुढ़कता हुआ जमीन पर आकर गिरा और टूटकर दो फाड़ हो गया, जिसमें से विरातरा माताजी की प्रतिमा प्रकट हुई.

श्री वांकल माता की आरती (vankal mata aarti)

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी
तुमकों निशि दिन ध्यावत हरी ब्रह्मा शिवजी
मांग सिंदूर विराजत टीको मर्गमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना चन्द्रबदन नीको
कनक समान कलेवर रक्ताबर राजैं
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारि
सुर नर मुनि जन सेवत, तिनके दुःख हारि
कानन कुंडल शोभित नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति
शुभं निशुंभ विडारे महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना निशि दिन मदमाती
चंड मुंड संहारे शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला राणी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी
चौसठ योगिन गावत, नृत्य करत भैरू
बाजत ताल मृदंग अरु बाजत डमरू
तुम ही जग की माता तुम ही हो भरता
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति करता
भुजा चार शौभित खड्ग खप्पर धारि
मनवांच्छित फल पावत, सेवत नर नारी
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमाल केतु में राजत कोटि रतन ज्योति
दोहा- श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे

अन्य लेख-

निवेदन: आशा करता हूँ मित्रों  “Viratra Mata Mandir” के बारे में दी गई जानकारी आपकों पसंद आई होगी, यदि आपकों हमारा यह लेख अच्छा लगा हो तो प्लीज सोशल मिडिया पर अपने मित्रों के साथ जरुर शेयर करे.

GST Kya Hai Full Details About GST Tax India In Hindi All about GST Bill In Hindi - What ...
प्लीज अच्छा लगे तो शेयर करे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *