पश्चिमी सभ्यता बनाम भारतीय सभ्यता | Western Civilization vs. Indian Civilization

Western Civilization vs. Indian Civilization: – पश्चिम की प्रोद्योगिकी और पूर्व की धर्मचेतना का सर्वश्रेष्ट लेकर ही नई मानव संस्कृति का निर्माण संभव है. पश्चिम नया धर्म चाहता है पूरब नया ज्ञान. दोनों की अपनी अपनी आवश्यकताएं है. वहां यंत्र है मन्त्र नही , यहाँ मन्त्र है यंत्र नही.

पश्चिमी सभ्यता बनाम भारतीय सभ्यता

वहां भौतिक सम्पन्नता है पश्चिम के आध्यात्मिक दैन्य को दूर करने में पूरब की मैत्री करुणा और अहिंसा के संदेश महत्वपूर्ण होंगे तो पूरब के भौतिक दैन्य पश्चिमी प्रोद्योगिकी दूर करेगी. पूरब पश्चिम के मिलन से ही मनुष्य की देह और आत्मा को एक साथ चरित्रथ्रता मिलेगी. इससे प्रोद्योगिकी की जड़ता के बन्धनों से मुक्त होगी और पूरब को आध्यात्मवाद परलोकवाद तथा निष्क्रियता वाद से छुटकारा मिल सकेगा.

भाग्यवाद को प्रोद्योगिकी से जोड़कर हम मनुष्यता के अकर्मनियता को दूर कर सकते है. तथा धरती के जीवन को सर्वोतम बनाएगे. जीवन से भाग करके नही, उसके भीतर से ही लोकमंगल की कामना करनी होगी. विरक्तिमुलकआध्यातिम्कता का स्थान लोक मांगलिक आध्यात्मिकता लेगी. यह आध्यात्मिकता लोकमंगल और लोक सेवा में ही चरितार्थ हो पाएगी.

मनुष्य मात्र के दुःख उत्पीड़न और अभाव के प्रति संवेदित और क्रियाशील होकर ही हम अपनी आध्यात्मिकता को प्राणवान और जीवन को सार्थक बना सकते है. ज्ञान को शक्ति में नही परमार्थ तथा उत्सर्ग में ही ढालकर हम मानवता को उजगार करेगे. प्रकृति से हमने जो कुछ पाया है उसे हम बलात छिनी हुई वस्तु क्यों माने.

क्यों न हम स्वीकार करे कि प्रकृति ने अपने अक्षय भंडार को मानव मात्र के लिए अनावृत कर रखा है. प्रकृति के प्रति प्रतियोगिता और प्रतिस्पर्धा का भाव क्यों रखा जाए वस्तुत प्रकृति के प्रति सहयोगी क्रतग्य और सहयोगी होकर ही मनुष्य अपनी भीतरी प्रकृति को राग द्वेष से मुक्त करता है और स्पर्धा को प्रेम में बदलता है

आज के आणविक प्रोद्योगिकी को मानव कल्याण का साधन बनाने की अत्यंत आवश्यकता है. यह तभी संभव है जब मनुष्य की बौदिकता के साथ साथ रागात्मकता का विकास हो . रविन्द्र और गांधी का यही संदेश है ” कामायनी” के रचयिता जयशंकर प्रसाद ने श्रद्धा और इड़ा के समन्वय पर बल दिया है. मानवता की रक्षा और उसके विकास के लिए पूरब पश्चिम का स्मिलन आवश्यक है यह कवि पन्त का कथन चरितार्थ हो सकेगा.
”मानव तुम सबसे सुन्दरतम”

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