ग्रेच्युटी अधिनियम क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है

What Is Gratuity: जब कोई कर्मचारी किसी कम्पनी में काम करता है तो उसके वेतन में से एक भाग ग्रेच्युटी का काटा जाता है. ग्रेच्युटी सरकारी और प्राइवेट दोनों संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलती है. श्रम मंत्रालय ने भी ग्रेच्युटी की राशी को कर मुक्त करके 10 लाख से 20 लाख कर दिया है. ग्रेच्युटी अधिनियम को 1 जनवरी 2016 से लागु किया गया था. आईये इस लेख में जानते है की ग्रेच्युटी क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है?

ग्रेच्युटी क्या है? What Is Gratuity

ग्रेच्युटी वेतन का एक ऐसा हिस्सा है जो कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के बदले दिया जाता है. जो कर्मचारी कम्पनी में 5 वर्ष की अवधि पूरी कर लेता है वह ग्रेच्युटी का हकदार होता है. ग्रेच्युटी हमेशा एक निश्चित अवधि के बाद दी जाती है. ग्रेच्युटी अधिनियम 1972 के तहत कर्मचारी को उसकी सेवा के बदले साल में 15 दिनों का वेतन ग्रेच्युटी के तौर पर दिया जाता है.

ग्रेच्युटी सिर्फ Pay Rolls पर रहने वाले कर्मचारिओं को मिलती है, प्रशिक्षित लोगों को ग्रेच्युटी नहीं मिलती है. ग्रेच्युटी के अनुसार 20 लाख तक की राशी पर Tax नहीं देना पड़ता है. ग्रेच्युटी के लिए किसी भी संस्थान में कर्मचारियों की संख्या 10 होनी चाहिए.

ग्रेच्युटी मिलने की क्या योग्यता है? Ability Of Gratuity

अगर कोई कर्मचारी किसी कम्पनी में अपने 5 साल पुरे कर लेता है तो वह ग्रेच्युटी पाने का हकदार होता है.

ग्रेच्युटी की गणना कैसे की जाती है? Calculate Of Gratuity

ग्रेच्युटी की गणना में मूल वेतन और महंगाई वेतन का योग शामिल होता है. अगर समझ लो की किसी आदमी की सैलरी कम्पनी में 15000 है और उसका DA 5000 है तो और वह किसी कम्पनी में 10 साल के बाद नौकरी छोड़ देता है तो उसकी ग्रेच्युटी होगी:

(15000+5000)*15*10/26

उसकी ग्रेच्युटी 115384 होगी.

(इसमें महीने में 26 दिन ही माने जाते है)

ग्रेच्युटी कब मिलती है?

रिटायर होने पर, दुर्घटना या बीमारी की वजह से मौत या अपंगता के कारण, अपनी इच्छा से रिटायर होने पर, इस्तीफा देना पर, नौकरी से निकाल दिए जाने पर ग्रेच्युटी मिलती है.

ग्रेच्युटी लेने के लिए कौनसा फॉर्म भरना पड़ता है?

ग्रेच्युटी लेने के लिए कर्मचारी कम्पनी ज्वाइन करते टाइम “F” फॉर्म भरता है और इसमें अपने घर के किसी सदस्य को नॉमिनी भी बताना पड़ता है. अगर किसी कारण से कम्पनी घाटे में चल रही है तो भी उसे ग्रेच्युटी का भुगतान करना पड़ेगा.

अगर कम्पनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो?

अगर कोई कम्पनी 5 साल की अवधि पूरी होने के बाद भी 1 महीने के भीतर अगर कर्मचारी को ग्रेच्युटी नहीं देती है तो कर्मचारी अपने वकील के माध्यम से उस पर केस दर्ज करा सकता है.

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