आतंकवाद का अर्थ क्या है इतिहास, वैश्विक परिदृश्य, प्रकृति व भारत पर प्रभाव | What Is Terrorism In Hindi

आतंकवाद का अर्थ क्या है इतिहास, वैश्विक परिदृश्य, प्रकृति व भारत पर प्रभाव | What Is Terrorism In Hindi : एक हम एक बेहद खतरनाक समस्या से गुजर रहे हैं वह है आतंकवाद – Terrorism यह किसी एक देश की समस्या न होकर सम्पूर्ण वैश्विक समाज के लिए संकट बनकर उभर रहा हैं. विश्व समुदाय अभी तक आतंकवाद की परिभाषा व उसका अर्थ भी समझ नहीं पाया हैं. आज हम यहाँ आतंकवाद की समस्या, कारण और समाधान ( What is Terrorism Problem, causes, type and solution in Hindi) पर आपके साथ चर्चा कर रहे है कि असल में What Is Terrorism आतंकवाद की समस्या क्या है.

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आतंकवाद मूलतः एक विखंडनकारी प्रवृति है जिसका अन्य विखंडनकारी प्रवृत्तियों के साथ गहरा संबंध हैं. यह कोई राजनीतिक अवधारणा नहीं है, किसी न किसी रूप में यह प्राचीन काल से लेकर अब तक सभी राजनीतिक व्यवस्थाओं में विद्यमान रही हैं. आतंकवाद, साम्प्रदायिकतावाद और पृथकवाद एक दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं.

आतंकवाद ने विश्व शांति को सर्वाधिक नुक्सान पहुचाया हैं. भारत आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं. आतंकवाद को परिभाषित करना अत्यंत दुष्कर कार्य हैं. एक दृष्टिकोण की मान्यता है कि किसी एक के विचार में जो आतंकवादी है वह दूसरे के विचार में स्वतंत्रता सेनानी भी हो सकता हैं. वर्तमान विश्व में आतंकवाद धार्मिक व जातीय आधार पर ही जिन्दा हैं. विश्व में इस्लामिक आतंकवाद आज सबसे गंभीर समस्या हैं.

आतंकवाद का अर्थ क्या है (What Is Terrorism In Hindi)

terror का लेटिन भाषा में अर्थ है to make tremble किसी को भय से कंपकपाने को मजबूर करना. ओ दिमेरस ने लिखा है कि आतंकवाद एक विभ्रम हैं. यह मनोवैज्ञानिक हमला हैं. इसका लक्ष्य मनौवैज्ञानिक परिणाम प्राप्त करना होता हैं. हिंसा की नाटकीय प्रस्तुती और उन्नति व प्रसिद्ध आतंकवाद की मुख्य प्रकृति हैं.

सामान्य अर्थ में किसी भी तरह से भय उत्पन्न करने की विधि को आतंकवाद की संज्ञा दी जा सकती हैं. जब एक व्यक्ति या समूह उचित मांगों की पूर्ति के लिए शान्तिपूर्वक, अहिंसात्मक ढंग से सकारात्मक प्रयास करता है तो उसे आंदोलन कहा जाता हैं.

आंदोलन लोकतंत्रात्मक व्यवस्था की अपरिहार्य प्रक्रिया कही जा सकती हैं. इसके विपरीत व्यक्ति या व्यक्ति समूह जब अपनी अनुचित मांगों की पूर्ति के लिए व्यापक स्तर पर हिंसा व अशांति पर आधारित नकारात्मक प्रयत्न करता है तो उसे आतंकवाद कहा जाता हैं.

आतंकवाद को आमतौर पर धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय, नस्लीय आधार पर समर्थन मिलता हैं. किन्तु यह अलोकतांत्रिक होने के कारण व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में समर्थन प्राप्त करने में असफल रहता हैं. आतंक के प्रयोग से तात्पर्य है- भय पैदा करना.

सभी निरंकुश समाजों की स्थापना भय पर आधारित थी. आधुनिक युग में तथाकथित अधिनायकवादी शासन का मूल आधार भय ही हैं. शांतिकाल में युद्ध जैसी हिंसा के घोषित रूप में आतंक की तलवार सदैव उन पर मंडराती रहती हैं. जो विद्रोह करने की सोचते हैं.

आतंकवादियों का मुख्य लक्ष्य वर्तमान पर विधिसंगत शासन को अपदस्थ कर सत्ता हथियाना होता हैं. आतंकवाद विश्व की सबसे खतरनाक हिंसक मनोवैज्ञानिक युद्ध प्रणाली हैं. आतंकवाद एक तरह से संक्रामक बिमारी हैं. आतंकवाद के वास्तविक भौतिक प्रभाव से कहीं अधिक इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव हैं.

शीतयुद्ध की समाप्ति के पश्चात विश्व के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बन गया हैं. आतंकवाद उन नवीन संस्कारों में शामिल हैं. जिससे आण्विक, जैविक व रासायनिक हथियारों के प्रयोग व सामूहिक विनाश की आशंका बनी हुई हैं. व्यवहार में आतंकवाद कई बार गरीब का शक्तिशाली के विरुद्ध हथियार बन जाता हैं तो कभी धर्म की सत्ता व धर्म की रक्षा का हथियार.

आतंकवाद का इतिहास (History Of Terrorism In Hindi)

सम्पूर्ण इतिहास में शक्ति को प्राप्त करने के लिए आतंक का बार बार प्रयोग हुआ हैं. सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए बल के सामने झुकना और स्थापित व्यवस्था को मजबूरन स्वीकारना हर युग में आम बात थी. आतंक का प्रयोग सबसे पहले संभवतः उस समय हुआ होगा, जब शासन के लिए आदिम अवस्था में सजा देकर किसी को विशेष गतिविधि करने से रोका गया था.

प्रथम मेसोपोटामिया का साम्राज्य अक्कड़ के सारगोन पूर्णतया डरा धमकाकर ही स्थापित किया गया था. प्रथम सैनिक साम्राज्य अनसिरियाई ने अपने विरोधियों की इच्छा शक्ति और साहस को तोड़ने के लिए क्रूर, भयानक तरीको का प्रयोग किया गया था. सम्पूर्ण इतिहास में निरंकुश समाजों में आतंक का प्रयोग लोगों को मजबूरन दासत्व व अधीनता स्वीकार करवाने के लिए हथियार के रूप में होता रहा हैं.

सदियों से आतंक का साया मानवता पर मंडराता रहा हैं. राज्य का आतंक चाहे गुप्त रूप से अथवा खुले रूप से हो हमेशा सामूहिक हत्या के लिए प्रयोग किया गया था. मंगोलों और तैमूर लंग ने केवल आतंक या भय का प्रयोग कर बड़े बड़े शहरों को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था.

यह सदैव अलग अलग स्वरूप में विद्यमान रहा था. समय काल और स्थान के अनुसार इसके तरीकों और प्रकृति में जरुर अंतर रहा होगा, लेकिन आतंक सर्वत्र व्याप्त था. प्रथम शताब्दी के यहूदी उग्रपंथियों से लेकर 11 वीं से 13 वीं शताब्दियों के इस्माइली एसेसिन हत्यारों को इस श्रेणी में गिना जा सकता हैं.

आतंकवाद की धर्म से सम्बद्धता हर कालखंड रही में रही हैं. वर्तमान समय में आतंकवाद का धार्मिक आयाम इसे जरुर विशिष्ट बनाता हैं. वास्तव में धार्मिक आतंकवाद भी नया नहीं हैं. आधुनिक युग में आतंकवाद ने गुरिल्ला युद्ध को भी पीछे छोड़ दिया हैं.

आतंकवाद का वैश्विक परिदृश्य (World Prespective Of Terrorism Hindi)

9/11 की घटना में अचानक आतंकवाद को पुनः महत्वपूर्ण बना दिया. वस्तुतः तालिबानी स्वरूप पिछली शताब्दी के अंतिम दो दशकों में सक्रिय था, किन्तु अमेरिका ने उन्हें महिमामंडित किया और योद्धा और जन मुक्ति दाता कहा, उल्लेखनीय है कि यही रवैया पाकिस्तान का कश्मीर के आतंकवादियों के प्रति रहा हैं.

वे उन्हें स्वतंत्रता सेनानी की संज्ञा देकर अपने राजनीतिक मंसूबों को साधना चाहता हैं. धार्मिक आधार पर सहानुभूति प्रदर्शित कर वह राजनीतिक रोटियाँ सेक रहा है. आतंकवाद प्रतिक्रियावादी व आत्मघाती दोनों प्रभाव रखता हैं. आज पाकिस्तान जो आतंकवाद का मुख्य पोषक देश है स्वयं आतंकवाद से जूझ रहा हैं.

एक देश ने अपने विरोधी देश के खिलाफ रणनीति के बतौर आतंकवाद का खूब सहारा लिया हैं. अमेरिका ने तालिबान रुपी दैत्य को पूर्व सोवियत संघ के विरोध में उत्पन्न किया. किन्तु दो दशक बाद वह दैत्य उसके विरुद्ध हो गया. ईराक को पनपाना तालिबान को पनपाना, अमेरिकी राज्य रणनीति का हिस्सा था.

स्वयं अमेरिका ने 9/11 के बाद युद्ध को नया नाम आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही देकर ईराक और अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला किया. अमेरिका और उसके सहयोगिनी का मानना है कि किसी भी किस्म के विध्वंसक हथियार रखना और उसके जरिये हिंसक कार्यवाही करना आतंकवाद हैं. इसी नजरिये से आतंकी संगठनों और उनके पनाह देने वाले राष्ट्रों को चिन्हित किया जा रहा हैं.

वास्तव में आतंकवाद केवल हिंसा की तकनीक नहीं हैं. यह सिर्फ जान से मार देने की या आतंकित कर देने की कला नहीं हैं. अपितु विचारधारा हैं. इसका शीतयुद्धकालीन अमेरिकी विदेश नीति से गहरा संबंध हैं. शीतयुद्ध वस्तुतः रक्तबीज हैं. इसे जितना मारोगे यह उतना ही विकराल रूप धारण करता जाएगा.

उपरी तौर पर शीतयुद्ध समाप्त हो गया परन्तु विचारधारा के तौर पर यह आज भी जिन्दा हैं. मौजूदा ISIS तालिबान और आतंकवाद का विश्वव्यापी स्वरूप उसका हिस्सा हैं. इस स्वरूप का अपना तंत्र है और अपनी विचारधारा हैं. इसकी प्राणवायु बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हैं. आतंकवाद अब कोई स्थानीय ढांचागत नही रहा हैं.

इसके प्रभाव को सीमा में नहीं बाँधा जा सकता हैं. इसका मौजूदा वैविध्य पूर्ण रूप इसे पूरी तरह विश्वव्यापी ढांचागत संरचना बनाता हैं. आतंकवाद अत्याधुनिक हथियारों और विदेशी धन के सहारे फलफूल रहा हैं. तालिबान, अलकायदा, लिट्टे, खालिस्तान, कमांडो फोर्स आद्रेन, रोबर्ती द आब्यूस्सोन, फलांगा आदि दर्जनों आतंकी संगठनों के बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से संबंध रहे हैं.

यह कम्पनियां दो प्रकार की है नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाली व दूसरी हथियारों का निर्माण करने वाली. आतंकवाद की यह रणनीति रही है कि हिंसा के माध्यम से सुनियोजित ढंग से आम जनता में दहशत पैदा की जाए. सत्ता की प्रतिक्रियाओं में लाभ उठाया जाए और अपनी मांगों को उभारा जाए.

बी क्रोजियर में ए थ्योरी ऑफ़ कान्फ्लिक्ट में रेखांकित किया गया है कि आतंक और हिंसा कमजोरों का अस्त्र है. ये लोग संख्या में कम होते है और सत्ताहीन होते है, ये ऐसे लोग है जो परम्परागत ढंग से सत्ता प्राप्ति करने में असमर्थ होते हैं.

धर्मान्धता और आतंकवाद (Fanaticism & Terrorism Problem)

आतंकवाद को धर्म से सम्बद्ध मानने की प्रवृत्ति काफी दिनों से विवाद का विषय रही हैं. यह एक गंभीर प्रश्न है कि आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से जोड़ा जाए या नहीं. यह मानना है कि धर्म के अनुयायी आतंकवाद को प्रश्रय देते है. यह बिलकुल असत्य और निराधार हैं.

पश्चिमी देशों के आतंकवाद के विश्लेषकों ने माना कि कुछ देशों में धर्म विशेष का हिंसक उत्परिवर्तन काफी गम्भीर विषय हैं. जो विगत 25-30 वर्षों में एक शक्तिशाली प्रवृति व घटना के रूप में उभरा हैं. आतंकवादियों में किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव न होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव रखना एक नकारात्मक प्रवृति हैं.

जो एक स्वस्थ लोकतांत्रिक समाज के लिए हितकारी नहीं होता हैं. आत्म बलिदान और असीमित बर्बरता, ब्लैकमेल, जबरन धन वसूली और निर्मम न्रशंस हत्याएं करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई हैं. जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया पृथकतावादी श्रेणी में आता हैं.

पाकिस्तान में वर्ष 2014 में स्कूल में घुसकर मासूम बच्चों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर 132 बच्चों की हत्या आतंकवाद का वास्तविक भयानक चेहरा प्रस्तुत करता हैं. खून से भीगे बस्ते, पानी की बोतले, जूते, खाने के टिफिन बताते है कि आतंकवाद मूलतः मानवता के विरुद्ध अपराध हैं.

आतंकवाद की प्रकृति (Nature Of Terrorism)

इसमें मुख्य रूप से तीन पात्र होते हैं.

  1. आतंकवादी गुट
  2. विरोधी गुट
  3. सरकार

आम जनता अन्य देशों की सरकार व आतंकवादी गुट इसके दर्शक होते हैं.

भारत में आतंकवाद (Terrorism Problem In India)

आतंकवाद कोई नई प्रवृत्ति नहीं हैं. जिसका रातोरात आधुनिक युग में अवतरण हुआ हो. भारत के सम्पूर्ण इतिहास में शक्ति को प्राप्त करने के लिए आंतक का बार बार प्रयोग हुआ हैं. भारत में पिछली सदी के दो दशकों के पंजाब के आतंकवाद, जम्मू और कश्मीर के आतंकवाद व वर्तमान में विभिन्न भारतीय राज्यों में सक्रिय नक्सलवाद और उत्तर पूर्व के विभिन्न राज्यों के उग्रवाद को आतंकवाद की परिभाषा में सम्मिलित किया जा सकता हैं.

भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में कई स्थानीय आतंकी संगठनों के अतिरिक्त अन्य विदेशी आतंकी संगठन भी सक्रिय हैं. भारत में वर्ष 2016 तक कुल 38 आतंकवादी संगठनों को अनाधिकृत गतिविधि अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया जा चुका हैं.

भारत में आतंकवाद का स्वरूप (Nature Of Terrorism In India)

भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों की प्रकृति एक जैसी नहीं हैं. यदपि सभी आतंकवादी संगठन हिंसा व भय पैदा करने के विभिन्न तरीको को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयोग जरुर करते हैं. भारत में उत्तर पूर्वी राज्यों, विशेषतया सीमावर्ती राज्यों, जम्मू कश्मीर, असम, पंजाब, आंध्रप्रदेश, छतीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, बिहार, बंगाल व महाराष्ट्र आदि में आतंकवादी गुट सक्रिय हैं.

कश्मीर में आतंकवादी गुटों को धार्मिक कारणों से अधिक जनाधार प्राप्त हैं. उन्हें विदेशी पाकिस्तानी समर्थन भी भरपूर मात्रा में प्राप्त हैं. धन, हथियार, प्रशिक्षण, दुष्प्रचार व युवाओं में धार्मिक वैचारिक विकार पैदा करने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई हैं.

मनोवैज्ञानिक रूप से विभिन्न हथकंडों का प्रयोग करते हुए कश्मीर के युवाओं में धर्मान्धता व कट्टरपन की भावना पैदा कर उन्हें मुख्य राष्ट्रीय धारा से विमुख करने में विदेशी समर्थन का बहुत बड़ा योगदान हैं. जिसने भारत के भौगोलिक, राजनीतिक एवं सामरिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला हैं.

यदपि पिछली शताब्दी में सक्रिय पंजाब के आतंकवादियों का केन्द्रीय लक्ष्य पृथक राष्ट्र की मांग एक जैसी ही हैं. पंजाब, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया पृथकतावादी श्रेणी में आता हैं. सभी आंतकी सगठनों की एक जैसी राजनीतिक सोच संभव नहीं हैं. पंजाब व जम्मू कश्मीर दोनों जगह आतंकवाद ने धार्मिक कट्टरवाद का सहारा लिया हैं.

पंजाब में आतंकवादियों ने हत्या के लिए निर्दोष नागरिकों को अपना निशाना बनाया वहीँ कश्मीर में आतंकवादियों ने सेना व अन्य सुरक्षा बलों को नुकसान पहुचाना अपना लक्ष्य बनाया हुआ हैं. पंजाब में आतंकवाद के उस चरण में आतंकवादियों ने राज्य मशीनरी को निशाना बनाने की बजाय निर्दोष लोगों की हत्या की.

राज्य पुलिस बल उनका दूसरा लक्ष्य था. असम, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड में आतंकवादी गुटों का मुख्य निशाना समुदाय विशेष के लोग हैं. कभी कभी राज्य मशीनरी पर भी हमला बोला जाता हैं. किन्तु आम तौर पर किसी समुदाय विशेष के लोगों पर ही हमलें होते रहे हैं. अतः इन राज्यों के आतंकवाद में समूह या जनजातीय ग्रुपों के बीच में हिंसक मुठभेडे या हमलें होते रहते हैं.

राज्य मशीनरी पर हमला करने का राजनीतिक तौर पर प्रत्यक्ष संबंध नहीं है किन्तु प्रछन्न पृथकतावादी गिरोहों से संबंध जरुर दिखाई देता हैं. मसलन पंजाब में खालिस्तानियों और नक्सली गुटों और आंध्रप्रदेश में पीपुल्सवार ग्रुप का लिट्टे से रिश्ता था. इसी तरह प्रत्येक प्रान्त में ऐसे आतंकवादी गिरोह सक्रिय हैं जो प्रत्यक्ष विदेशी इशारों पर आतंकवाद की कार्यवाहियों में सक्रिय रहते हैं.

तात्पर्य यह है कि आतंकवादी गिरोहों का परिपेक्ष्य एक सा नहीं हैं. भारत में प्रमुख आतंकवादी घटना 12 मार्च 1993 को बम्बई में हुई जिसमें बम विस्फोटों में 317 निर्दोष लोगों की म्रत्यु हुई. इस विध्वस्कारी घटना में अपराधी और तस्कर गिरोह कट्टरपंथियों और विदेशी एजेंसियों की भूमिका थी. मूलतः यह एक आतंकवादी कार्यवाही थी.

साम्प्रदायिकता, पृथक्तावाद और आतंकवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. इन तीनों में अन्तःक्रियाएं चलती रहती हैं. तात्पर्य यह है कि साम्प्रदायिकता के पृथकतावादी या आतंकवादी प्रवृति में रूपांतरण की संभावना हैं उसी तरह से पृथकतावाद से साम्प्रदायिकता और आतंकवाद में बदल जाने की संभावना बनी हैं.

इसी प्रकार आतंकवाद के साम्प्रदायिकता एवं पृथकतावादी रूप लेने की भी संभावना हैं. झारखंड, बिहार, उड़ीसा, मध्यप्रदेश व छतीसगढ़ में नक्सली आतंकी गिरोहों की आतंकवादी कार्यवाहियों से भिन्न होता हैं. नक्सलवादी गिरोहों का पृथकतवाद केन्द्रीय लक्ष्य नहीं हैं. 14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुआ आतंकी हमला हाल ही के वर्षों में भारत में होने वाला सबसे बड़ा आतंकी हमला है जिसमें 44 CRPF के जवान शहीद हुए थे.

भारत के आतंकवाद प्रभावित राज्य (Terrorism Affected States Of India)

  • जम्मू कश्मीर
  • पंजाब
  • उत्तर और पश्चिमोत्तर भारत
  • नई दिल्ली
  • उत्तर भारत
  • पूर्वोत्तर भारत- असम, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड
  • दक्षिण भारत- अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक

आतंकवादियों की सामाजिक पृष्टभूमि (Social Background Of Terrorism)

भारत में आतंकवादी कार्यवाहियों में शामिल व्यक्ति की सामाजिक पृष्टभूमि अलग अलग रही हैं.

  1. मध्य वर्ग और उच्च मध्य वर्ग के युवा
  2. पंजाब, कश्मीर बंगाल के नक्सली, उत्तर पूर्वी राज्यों के आतंकी मोटे तौर पर इन्ही वर्गों से आते हैं.
  3. धर्मांध गरीब तबके के विभ्रमित युवा.

आतंकवादी कार्यवाही के लक्ष्य (Objectives Of Terrorist Activities)

  • सुनिश्चित ढंग से कुछ प्रमुख केन्द्रों या संस्थानों पर हमला करना
  • आतंक और हिंसा की कार्यवाहियों की बढ़ चढ़कर जिम्मेवारी लेना
  • सत्ता से लाभ प्राप्त करना

पहला लक्ष्य कार्यनीतिक है दूसरा रणनीतिक है और तीसरा मील अभिसिप्त लक्ष्य हैं. कार्यनीतिक स्तर पर लोगों को डराना, धमकाना, आतंकित करना और हमला करना होता हैं. रणनीतिक चरण के अंतर्गत अतिनाटकीय ढंग से आतंक एवं हिंसा की कार्यवाही को सम्पन्न करना.

परिणामतः ज्यादा से ज्यादा माध्यमों का ध्यान खीचने में सफलता प्राप्त करना उनका लक्ष्य होता हैं. आतंकवादियों की कार्यनीति, रणनीति और लक्ष्य ये तीनों एक दूसरे से अंतरग्रंथित हैं.

आतंकवाद के मनोवैज्ञानिक तत्व (Psychological elements of terrorism)

आतंकवाद अपरिहार्य रूप से एक ऐसी रणनीति है जो मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर आधारित होती हैं. इस रणनीति के तहत आतंकवादी दर्शकों को प्रभावित करते हैं. यहाँ दर्शक वे लोग है जो आतंकवादी कार्यवाही से भयग्रस्त हो जाते हैं.

  1. कर्म द्वारा प्रचार
  2. अभित्रास
  3. उकसाना
  4. अस्त व्यस्तता व अराजकता उथल पुथल
  5. संघर्ष

आतंकवाद और मीडिया कवरेज (Terrorism and Media Coverage)

आतंकवाद और मीडिया कवरेज- तकनीकी के प्रयोग के कारण आतंक और हिंसा की कार्यवाही और भी आकर्षक दिखती हैं. भारत में पंजाब और कश्मीर में आतंकवाद की प्रस्तुतियों में स्टीरियों टाइप छवि का प्रभुत्व रहा हैं. परिणामतः आतंकवादियों के प्रति तकनीकी माध्यमों के द्वारा घ्रणा के बजाय सहिष्णु भाव पैदा हुआ हैं.

इस तरह के मिडिया के कवरेज का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता हैं. पहला आतंक हिंसा की गतिविधियों की रिपोर्टिंग को मिलने वाले महत्व अन्य को वैसी ही कार्यवाही को प्रेरित करती हैं. दूसरा कम या ज्यादा माध्यम कवरेज से यह संभव हैं. कि राज्य उत्पीड़न की कार्यवाहियां बढ़े.

यही स्थिति आतंकवाद पैदा करना चाहती हैं. इससे उन्हें अपने लक्ष्य के विस्तार में मदद मिलती हैं. तीसरा मीडिया कवरेज के द्वारा आम जनता के अंदर भावशून्य स्थिति पैदा हो जाती हैं. चौथा आतंकवादियों द्वारा अपह्रत या बंदी व्यक्ति के लिए मिडिया कवरेज से जान का खतरा पैदा हो सकता हैं.

आतंकवाद कुछ विशेष शैली प्रतीकों और बिम्बों का प्रयोग करते हैं. पंजाब के आतंकवादी दौर में मोटर साइकिल, मारुति वैन और ए के 47 आतंकवादियों का प्रतीक मानी जाती थी. डर का माहौल पैदा करना उनका मकसद होता हैं. इससे प्रशासनिक मशीनरी पंगु बन जाती हैं.

सेना व सुरक्षा बल लगातार काम करते हैं. जिससे उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती हैं. राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक व आर्थिक कारणों से समाज की आतंकवाद के प्रति सहिष्णुता पैदा करना अत्यंत घातक हो जाती हैं. आम जनता में भाव शून्यता से सहन करने की क्षमता बढ़ जाती हैं. वह आतंकी हिंसा को जीवन की सच्चाई के रूप में देखने लगती हैं.

सामान्य तौर पर आतंकवादी गिरोहों की कार्यवाही के दो मकसद होते हैं.

  1. हिंसा के माध्यम से जनमाध्यमों का ध्यान आकर्षित करना.
  2. भय और आतंक का माहौल पैदा करना.

इन दोनों तरीकों के जरिये आतंकवादी गिरोह अपनी मांगों को लोकप्रिय बनाने और राष्ट्रीय एजेंडे पर लाने में सफल हो जाते हैं. अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए दवाब डालते हैं. अत्यधिक मीडिया कवरेज से आतंकवाद फलता फूलता हैं. आतंकवाद और जन माध्यमों का जटिल संबंध हैं.

और सशलिष्ट प्रक्रिया से यह सम्बन्ध विकसित होता हैं. अब यह सामान्य धारणा बन चुकी हैं कि किसी आतंकवादी घटना को मीडिया द्वारा अधिक कवरेज देने से इसका दुष्प्रचार होता हैं. जो राज्य के हितो का विरोधी हैं.

आतंकवादी घटना के अत्यधिक मिडिया कवरेज का दुष्प्रभाव (Repurcussions Of Over Reporting Of Terrorist Activity By Media)

  1. यह विभिन्न आतंकवादी गुटों का निर्माण के लिए उत्प्रेरित करता हैं.
  2. धार्मिक व साम्प्रदायिक कारणों से आतंकवादियों को सस्ती लोकप्रियता हासिल होने की संभावना निहित हैं.
  3. विभिन्न गुटों में प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होने पर बढत व पहलकदमी हासिल करने की होड़ उत्पन्न करना.
  4. आतंकवादी गिरोहों द्वारा मिडिया कवरेज करने वाले चैनल्स पर नियंत्रण स्थापित करने की आशंका बनना.
  5. प्रशासनिक मशीनरी की कार्य कुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना.

यह माना जाता है कि आतंकवाद एक तरह से संक्रामक बिमारी हैं. जाने अनजाने माध्यमों से आतंक एवं हिंसा को प्रोत्साहित किया जाता हैं. घटनाओं की एक जैसी पुनरावृत्ति और बार बार कवरेज पुनः हिंसा और आतंक को जन्म देता हैं. आतंकवादी गिरोहों का सहज रूप से अपनी राजनीतिक मांगों के लिए मंच मिल जाता हैं. परिणामतः इससे आतंकवाद बढ़ता हैं.

आतंकवाद की सफलता- आतंकवादियों का मुख्य लक्ष्य वर्तमान या विधिसंगत शासन को अपदस्थ कर सत्ता हथियाना होता हैं. यह रणनीति मुख्यतः विद्रोही व बलवाई आतंकवादियों द्वारा अपनाई जाती हैं. यदि हमें आतंकवादियों के सफलता के परिणामों को देख पाते है कि केवल उपनिवेशवादी विरोधी गुटों को पूरी तरह सफलता प्राप्त हो सकी उनमें मुख्य हैं.

20 वीं व 21 वीं शताब्दी के अधिकांश आतंकवादी गुट अपने मंसूबों को पूरा करने में पूरी तरह से असफल रहे हैं. भारत में पंजाब के आतंकी पूरी तरह असफल हुए. LTTE जैसा दुर्दांत आतंकवादी संगठन श्रीलंका में अन्तः असफल ही हुआ. आईएसआई एस ISIS वोकोहरम, तालिबान, जैश ए मोहम्मद व अन्य मुस्लिम आतंकवादी संगठन अभी तक राजनीतिक रूप से असफल ही रहे हैं.

निष्कर्ष

पूर्व सोवियत संघ के विद्वान् यूरी त्रिफोनाव ने लिखा है कि आतंकवाद का विश्व स्तर पर पतन हुआ हैं. रंगमंच खून से तर बतर और चरित्र म्रत्यु हैं. डेविड फ्रामकिन ने लिखा है कि हिंसा आतंकवाद का प्रारम्भ है इसका परिणाम है इसका अंत.

ब्रेनाजिन किंस ने लिखा है कि आतंकवादी चाहते है कि बहुत सारे लोग देखे और सारे लोग सुने न कि बहुत सारे लोग मरे. आज भी आतंकवाद विश्व शांति और सुरक्षा के लिए गम्भीर चुनौती बना हुआ हैं. विश्व के समस्त देश जब तक एकजुट होकर इस दैत्य का मुकाबला नहीं करते तब तक यह समस्या समाप्त नहीं होगी.

भारत में भी आतंकवाद आधे से अधिक राज्यों को प्रभावित कर रहा हैं. शासन को आने वाले समय में आतंकवाद से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे.

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