भारत में श्वेत क्रांति/ऑपरेशन फ्लड | White Revolution In Hindi

भारत में श्वेत क्रांति/ऑपरेशन फ्लड | White Revolution In Hindi

पशुधन उत्पादन और कृषि परस्पर सम्बन्ध है और ये एक दुसरे पर निर्भर है और दोनों के समग्र रूप से खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है. विश्व में सर्वाधिक पशु भारत में ही पाये जाते है. और विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादन भारत में ही होता है परन्तु भारत में पशु नस्ल दयनीय स्थति में है. इस कारण दूध में उत्पादकता काफी कम है तथा लागत ऊँची आती है. इसमे सुधार के लिए सरकार द्वारा श्वेत क्रांति/ऑपरेशन फ्लड के रूप में एक सघन कार्यक्रम शुरू किया गया.श्वेत क्रांति

श्वेत क्रांति/ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत (What is White Revolution or Operation Flood?)

वर्ष 1964-65 में भारतीय कृषकों के लिए सघन पशु विकास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया. जिसके अंतर्गत देश में दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए पशुपालकों को पशुपालन के उन्नत और विकसित तरीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया.

इसमे पशुपालकों को उन्नत किस्म की गाय तथा भैसें प्रदान की गई तथा कृत्रिम गर्भाधान के तरीके विकसित किये गये. दूध उत्पादन में तीव्र वृद्धि को ही श्वेत क्रांति कहा जाता है. सन 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने गुजरात के आणद गाँव से श्वेत क्रांति की शुरुआत की जिसे ऑपरेशन फ्लड का नाम दिया गया. इसके जन्मदाता तथा सूत्राधार डॉक्टर वर्गीज कुरियन है. ऑपरेशन फ्लड विश्व का सबसे बड़ा समन्वित डेयरी विकास कार्यक्रम है.

श्वेत क्रांति का महत्व एवं लाभ (importance advantages and disadvantages of white revolution in india)

  • दूध उत्पादन में वृद्धि-श्वेत क्रांति के फलस्वरूप दूध उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई. आज भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. तथा भारत में दूध का कुल वार्षिक उत्पादन सन 2013-14 में 137.69 मीट्रिक टन था. प्रतिवर्ष दूध उत्पादन में वृद्धि होती जा रही है. 2013-14 में प्रति व्यक्ति 307 ग्राम दूध प्रतिदिन उपलब्धता प्राप्त हुई.
  • कृषकों को आय- डेयरी व्यवसाय लाखों ग्रामीण परिवारों की आय का एक महत्वपूर्ण द्वितीय स्त्रोत बन गया है और लाखों लोगों को विशेष रूप से महिला तथा सीमांत किसानों के लिए आय के अवसर जुटाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
  • ग्रामीण बेरोजगारों के लिए रोजगार- ग्रामीण तथा भूमिहीन लोगों तथा खेतिहर मजदूरों को पशुपालन के रूप में एक स्थायी तथा स्वनियोजित रोजगार उपलब्ध हुआ. डेयरी विकास इन्हें इस क्षेत्र में रोजगार मिला. देश में अधिकाश दूध उत्पादन सीमांत तथा भूमिहीन मजदूरों द्वारा ही किया जाता है. इस कार्य में देश के 90 लाख किसान परिवार लगे हुए है.
  • संतुलित ग्रामीण विकास को बढ़ावा- डेयरी विकास के परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधारभूत संरचना (सड़क, परिवहन, संचार, बैंकिग) का विकास हुआ क्योकिं श्वेत क्रांति के सफल क्रियान्वन के लिए इनका विकास आवश्यक था.
  • शहरी क्षेत्रों में दूध की उपलब्धता- ऑपरेशन फ्लड के परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों से अतिरिक्त उत्पादित दूध शहरी क्षेत्रों में पहुचाया गया जिससे शहरी क्षेत्रों में लोगों को न केवल दूध बल्कि दही, छाछ, घी, पनीर तथा मक्खन जैसे दूध निर्मित पदार्थ सरलता से उपलब्ध होने लगे.
  • पशु नस्ल में सुधार- ऑपरेशन फ्लड/श्वेत क्रांति के परिणामस्वरूप पशुओं की नस्ल सुधार तथा उनकी बीमारियों की रोकथाम के समुचित प्रबंध से भारत में पशु नस्ल में सुधार तथा उनकी बीमारियों की रोकथाम के समुचित प्रबंध से भारत में पशु नस्ल में सुधार हुआ है.

इस प्रकार श्वेत क्रांति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की काया पलट दी है. हरित क्रांति ने किसानों के कृषि सुधार कर उनके व्यवसाय की सुरक्षा की तो श्वेत क्रांति ने पशुपालन व दूध उत्पादन के सुधारात्मक सहयोग कर उन्हें एक अतिरिक्त रोजगार एवं आय का आधार प्रदान किया.

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