करवा चौथ कब है 2017 व्रत की पूजन विधि सामग्री और कहानी | When is Karva Chauth Pooja Vidhi Samagri Or Vrat katha

When is Karva Chauth Pooja Vidhi Samagri Or Vrat katha करवा चौथ हिन्दू पर्व है, मुख्यत इसे सुहागन स्त्रियों द्वारा ही मनाया जाता है. अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत पूजा करती है. इस वर्ष 2017 में करवा चौथ का त्यौहार आने वाला है. चौथ स्पेशल के इस लेख में हम करवा चौथ कब है 2017 में इस दिन सुहागन स्त्री के लिए व्रत तथा पूजन विधि सामग्री एवं इसे मनाने के पीछे जुड़ी मान्यता पौराणिक कहानी की जानकारी नीचें दी जा रही है.

करवा चौथ कब है 2017 व्रत की पूजन विधि सामग्री और कहानी (When is Karva Chauth Pooja Vidhi Samagri Or Vrat katha)

When is Karva Chauth (करवा चौथ कब है 2017)

इस साल करवा चौथ का व्रत भारत में 8 अक्टूबर के दिन रखा जाएगा. इस दिन रविवार है. अकसर यह पर्व अक्टूबर और नवम्बर माह में ही पड़ता है. वर्ष 2012 में यह 2 नवम्बर शुक्रवार को, 2013 में मंगलवार 22 अक्टूबर, वर्ष 2014 में इसे 11 अक्टूबर शनिवार, वर्ष 2015 में 30 अक्टूबर शुक्रवार के दिन व् पिछले वर्ष करवा चौथ 19 अक्टूबर बुधवार को था.

हिन्दू पंचाग के अनुसार यह कार्तिक महीने की कृष्ण चतुर्थी के दिन मनाया जाता है. इसका पुण्य प्राप्त करने के लिए सही vidhi का प्रयोग किया जाना चाहिए. तभी पति की लम्बी आयु और घर में सुख सम्रद्धि की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है.

करवा चौथ पूजा विधि (karva chauth vrat Pooja vidhi in hindi)

  • karwa chauth के दिन उदय के साथ ही व्रत करने का संकल्प करे.
  • सासू माँ द्वारा भेजी गई मिठाई, फल, सेंवई, पूड़ी भोज्य सामग्री ही ग्रहण करे.
  • इस दिन प्याज व् लहसुन से बनी भोज्य सामग्री बिलकुल न करे.
  • शिव पार्वती का पूजा पाठ कर कथा वाचन करे.
  • घर की किसी एक दीवार पर धरना बनाए, जो गेरू रंग व् चावल के घोल से बनाई जाती है.
  • शाम के समय खीर पूरी या मीठे पकवान तैयार करे.
  • मिटटी की अथवा शिव पार्वती गणेश की मूर्ति की स्थापना करे.
  • पार्वती की मूर्ति पर लाल रंग की सुनरी व् श्रृंगार सामग्री सहित कलश पास रखे.
  • बगल में शिव की मूर्ति व् गोद में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करे.
  • विधि विधान व् मंत्रोच्चार के साथ शिव पार्वती की पूजा अराधना करे
  • घर के सभी सदस्यों के साथ करवा चौथ की कथा का वाचन करने के तत्पश्चात सभी बुजुर्गो का आशीर्वाद प्राप्त करे.
  • रात्रि के समय चन्द्र दर्शन का इन्तजार करे. चन्द्रमा के दिखने पर छलनी से चाँद को निहारकर अपने पति के पैर छूकर सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त करे.
  • चन्द्र दर्शन के पश्चात अपने पति के पास बैठकर उन्हें भोजन करवाए. तत्पश्चात स्वयं उपवास तोड़े.

करवा चौथ पूजन सामग्री (Karva Chauth Pooja Samagri)

इस दिन की पूजा सामग्री में 35 से अधिक पूजन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है. जिनमे चन्दन, अगरबती, फूल, शहद, शक्कर, मिठाई, अनाज में मुख्यत गेहू या चावल, स्वच्छ जल का कलश, शिव पार्वती की तस्वीर या मूर्ति, देशी घी, सिंदूर, मेहँदी, चुनरी समेत सुहागन स्त्री के 16 श्रृंगार की सामग्री, दीपक, रुई, कपूर, मिटटी का बना दीपक, गौरी के लकड़ी का तख्ता या आसन,भोजन के लिए पूरी इत्यादि.

करवा चौथ की कहानी (Karva Chauth Vrat katha)

बहुत समय पहले की बात है एक ब्राह्मण परिवार में सात भाई और एक बहिन थी, जो सभी एक दुसरे से असीम प्यार किया करते थे. मुख्यत एक बहिन होने के कारण सभी भाई उन्हें बेहद सम्मान दिया करते थे. यहाँ तक की बहन के द्वरा भोजन किये जाने के बाद ही सभी भाई भोजन ग्रहण किया करते थे.

कुछ समय बहिन अपने ससुराल से माता-पिता के घर आई और करवा चौथ के दिन उन्होंने उपवास रखा. सभी भाइयो के आग्रह करने के बावजूद उन्हें निर्जला व्रत करने की बात कही जिन्हें चन्द्र दर्शन के पश्चात ही खोला जाना था.

उसके भाइयो द्वारा बहिन की यह हालत देखि नही गई अतः छोटे भाई को एक तरकीब सूझी उसने घर के पास ही लगे अशोक के वृक्ष में पत्तों पर दीपक को जलाया तथा उनके पास छलनी रख दी. घर लौटकर उन्होंने बहिन् को बताया की चन्द्रमा निकल चूका है. वह अपना व्रत तोड़ ले.

जब उन्होंने छ्लनी के पार जलते दीपक को देखा तो वह चाँद की तरह ही प्रतीत हो रहा था. अततः उन्होंने उस दिए को ही चन्द्रमा मानकर भोजन करना शुरू कर दिया. जब उन्होंने भोजन का पहला निवाला मुह में रखा तो छिक आई, दूसरा निवाला खाते ही उनके मुह में बाल आया, तीसरा निवाला मुह में रखा ही था कि उनके पति की मृत्यु की खबर आ गई.

तभी उनकी भाभी करवा चौथ के गलत तरीके से छोड़ने के कारण उनके देवता नाराज हो गया, इस कारण उनका सुहाग उजड़ गया. उस बहिन ने अपने पति की लाश को जलाने की बजाय अपने सतीत्व के द्वारा पुनर्जीवित करने का निश्चय किया. एक साल तक वह उस शव की रक्षा करती रही.

सभी भाभियों के मना करने के बावजूद वो करवा चौथ के व्रत को जारी रखती है. अंत में सबसे छोटे भाई की पत्नी जिनके पति के झूट बोलने के कारण ऊनके पति का देहांत हुआ था. वह आती है तथा अपनी ननद को इस सुहागिन व्रत को तुड़ाने के सभी प्रयत्न करती है. मगर उनके द्वारा फिर भी व्रत न तोड़ने पर उनका दिल भी टूट जाता है तथा अपने नंदोई के मुह में अपनी छोटी अंगुली को चीरकर अमृत मुह में डालती है. जिससे उसका पति फिर से जय गणेश जय गणेश करते खड़े हो जाते है.

Karva Chauth 2017 : हार्दिक शुभकामनाएँ संदेश

aap donon kee jodee kabhi na tute,
khuda kare aap ek doosare se kabhee na rothen,
yuheen ek hokar,
aap ye jindagi bitaaye,
ki aap donon kee khushiyan,
ek pal ke lie bhee na chhoote!
shubh karava chauth!
Karva Chauth Festival Wishes SMS


karva chauth ka pavan vrat apke liye maine kiya hai..

kyonki apake he prem aur saman ne..
jeevan ko naya rang diya hai. .
happy karva chauth!


मचलता है मन हमारा भी यों
देखके गोरे हुस्न के दीदार…
करता है दिल कोई gf बनाऊ.
मगर याद आ जाता है उनका समर्पण
और हमारे परिवार पर लुटाया हुआ प्यार….
ऐसी प्रिया को,
है सम्मान का, प्यार का अधिकार |।।

करवा चौथ चंद्रोदय का समय (शुभ मुहूर्त)

  1. करवा चौथ पूजा मुहूर्त= 05:55 से 07:09
  2. समयावधि = 1 घंटा 14 मिनट (74 मिनट)
  3. चन्द्रदर्शन का समय = 08:14
  4. करवा चौथ आरम्भ = 04:58 शनिवार
  5. चौथ की समाप्ति = 02:16 9 अक्टूबर (रविवार)

करवा चौथ में स्थान विशेष के कारण मुहूर्त और चाँद के दिखने का समय अलग हो सकता है. यह समय राजधानी दिल्ली में रात 8 बजकर 29 मिनट, जोधपुर राजस्थान में रात 9 बजकर 10 मिनट, मुंबई में 9-22 बजे कलकता में 8 बजकर 13 मिनट और देहरादून में यही समय 8 बजकर 44 मिनट हो सकता है.

करवा चौथ का इतिहास History of Karva Chauth

सुहागन स्त्रियों द्वारा मनाए जाने वाली इस चौथ के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कथाए जुड़ी हुई है. कहते है जब राजाओं के शासन मुख्यत मध्यकाल में अधिकतर लोग मुंगल सेना का सामना करने के लिए हिन्दू शासकों की सेना के साथ रहा करते थे. घर पर उनकी जीवनसखा अपने पिया की लम्बी आयु तथा प्राणों की सलामती की खातिर भगवान् से प्रार्थना किया करती थी. मन की शांति तथा शुभ संकेत के लिए इस करवा चतुर्थी की शुरुआत हुई.

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