Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2018 In Hindi

Guru Purnima 2018 In Hindi: गुरु को ईश्वर के समकक्ष दर्जा दिया जाता हैं. गुरु शब्द का अर्थ अन्धकार या अज्ञान को मिटाने वाला होता हैं, यह शब्द दो संस्कृत शब्दों की संधि हैं गु+रु, जिसमें गु का अर्थ अन्धकार व रु का मतलब भगाने वाला, यानि जीवन में अज्ञान रूपी अँधेरे को मिटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश फैलाने वाले को गुरु का दर्जा दिया गया हैं. गुरु पूर्णिमा 2018 कब हैं, आपकों पता ही होगा आज यानि 27 जुलाई शुक्रवार के दिन गुरुओं के सम्मान में यह दिन मनाया जा रहा हैं.Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2018 In Hindi

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गुरु पूर्णिमा कब और क्यों मनाई जाती हैं स्टोरी, कथा, कारण डेट इन इंडिया हिंदी

गुरु पूर्णिमा शिक्षकों को समर्पित एक दिन है। गुरु पूर्णिमा भारत, नेपाल और बौद्ध धर्म और जैन धर्म प्रभाव वाले अन्य देशों में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा की तारीख इस साल 27 जुलाई है। उत्सव हिंदू महीने अशधा में जून और जुलाई के बीच पूर्णिमा दिवस (पूर्णिमा ) पर मनाया जाता है । 

इस दिन सौर चक्र की चोटी के बाद चंद्र चक्र के पहले शिखर को चिह्नित करता है। गुरु एक शिक्षक, मास्टर, एक गाइड है, जो छात्र को सही रास्ते पर निर्देशित करता है। शब्द गुरु दो शब्दों, gu और ru से लिया गया है। संस्कृत रूट gu का मतलब अंधेरा या अज्ञानता है, और आरयू उस अंधेरे को हटाने का संकेत देता है। इसलिए, एक गुरु वह है जो हमारी अज्ञानता के अंधेरे को हटा देता है।Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2018 In Hindi

कई हिंदू महान ऋषि व्यास के सम्मान में दिन मनाते हैं, जिन्हें प्राचीन हिंदू परंपराओं में सबसे महान गुरु माना जाता है। वह गुरु-शिष्य परंपरा (शिक्षक-छात्र) का प्रतीक प्रतीक है । योग परंपरा में, ऐसा कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा वह दिन था जब शिव आदी गुरु, या पहले गुरु बन गए थे। यह माना जाता है कि वह करने के लिए योग का प्रसारण शुरू हुआ। बौद्ध भगवान बुद्ध के सम्मान में दिन मनाते हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश में सारनाथ में इस दिन अपना पहला उपदेश दिया था।

लोग अपने गुरु को अपना सम्मान दिखाने के लिए इस दिन उपवास करते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत और भारतीय शास्त्रीय नृत्य के छात्र, जो गुरु शिष्य परम्परा का भी पालन करते हैं , दुनिया भर में गुरु पूर्णिमा त्यौहार मनाते हैं। किसी के गुरु को प्रार्थना करने के लिए सार्वजनिक प्रवचन और पूजा भी आयोजित की जाती है।

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हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चारों वेद एवं प्राचीन ग्रथ महाभारत के रचियता वेद व्यास जी का जन्म आषाढ़ माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था. जिस कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता हैं, वेदव्यास जी को भारत का पहला आदि गुरु होने का सम्मान प्राप्त हैं, इस कारण उनके इस जन्मदिन को गुरुओं के सम्मान का दिन गुरु पूर्णिमा के रूप में रखा गया.

गुरु का जीवन में बड़ा महत्व हैं, गुरु की महिमा एवं उनके आशीर्वाद से कोई भी व्यक्ति बड़े से बड़ा पद व हैसियत प्राप्त कर सकता हैं. गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति असम्भव हैं, तभी तो इस दिन गुरुओं का पूजन किया जाता हैं तथा आज भी गुरु शिष्य परम्परा का निर्वहन करते हुए शिष्य श्रद्धानुसार अपने गुरु को दक्षिणा, वस्त्र, भेट इत्यादि देकर उनका सम्मान करता हैं.

चूंकि आषाढ़ माह की समाप्ति तक वर्षा हो जाती है तथा हरे भरे माहौल से हर किसी को आनन्द मिलता हैं, प्राचीन समय में गुरुकुलों में पढने वाले छात्र भी इस दिन अपने गुरुजनों के सम्मान में गुरु पूर्णिमा मनाते थे. तथा आगामी चौमासा की अवधि तक अध्ययन में रत रहते थे.

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