कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Female Foeticide Essay In Hindi

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नमस्कार आज का निबंध कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध Female Foeticide Essay In Hindi विषय पर दिया गया हैं. कन्या भ्रूण हत्या पर आसान भाषा में लिखे इस निबंध, भाषण, अनुच्छेद में हम जानेगे कि यह बुराई क्या है इसके कारण दुष्परिणाम और रोकने के लिए क्या कानून हैं.

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कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Female Foeticide Essay In Hindi

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध Female Foeticide Essay In Hindi

Here Female Foeticide Essay In Hindi In Various Leanth Big And Short Essay In 5, 10 Line, 100,200, 250, 300, 400, 500 Words Female Foeticide Essay For Class 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 Students And Kids.

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Female Foeticide Essay In Hindi In 250 Words

९० के दशक में विज्ञान ने पर्याप्त प्रगति की, मानव जीवन की उन्नति के नये नये साधनों का विकास हुआ. इस दौर में अल्ट्रा साउंड जैसी मशीनों के आविर्भाव के चलते भारत में कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में तेज गति से वृद्धि हुई.

मशीन की मदद से गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे नवजात के लिंग का पता मशीनों से लगाया जाना आरम्भ हो गया. जिसके चलते बेटे को जन्म देने के इच्छुक माता पिता इस तकनीक का गलत फायदा उठाकर लिंग जांच कर पता कर लेते थे कि गर्भ में बेटा है या बेटी. बेटी होने की स्थिति में उसे दुनियां में आने से पूर्व ही मार दिया जाता था.

इस कुरीति ने समाज पर बहुत घातक प्रभाव डाला, देश के कई राज्यों का लिंगानुपात गड़बड़ा गया. सरकार ने भी मशीनों द्वारा गर्भ जांच पर प्रतिबंध लगाया, मगर आज भी मानवता के दुश्मन कुछ डॉक्टर इस शर्मसार कार्य को अंजाम देने से नही हिचकते हैं.

ऐसे ही वे अंधे माँ बाप हैं जो कन्या भ्रूण हत्या के लिए तैयार हो जाते वक्त ये भूल जाते है कि जिसकी कोख से उनहोंने जन्म लिया वह भी तो किसी की बेटी थी. आपकी पत्नी भी तो किसी की बेटी हैं.

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कुल मिलाकर एक सभ्य समाज में लिंग परीक्षण तथा कन्या भ्रूण हत्या का कोई स्थान नहीं हैं. युवा पीढ़ी को द्कियानुची सोच को त्याग कर एक अच्छी सोच के साथ नयें समाज का निर्माण करना होगा. जिनमें बेटे बेटी को समान महत्व मिले.

Female Foeticide Essay In Hindi In 500 Words

परमात्मा की इस सर्ष्टी में मानव का विशेष महत्व है. उसमे नर और नारी का समानुपात नितांत वांछित है. नर और नारी दोनों के संसर्ग से भावी सन्तान का जन्म होता है तथा इस तरह यह स्रष्टि प्रक्रिया आगे बढ़ती है.

परंतु वर्तमान काल में अनेक कारणों से नर-नारी के मध्य लिंग भेद का वीभत्स रूप सामने आ रहा है. जो कि पुरुष सतात्मक समाज में कन्या भ्रूण हत्या का पर्याय बनकर असमानता को बढ़ा रहा है. हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या आज अमानवीय कृत्य बन गया है, जो कि चिंतनीय विषय है.

कन्या भ्रूण हत्या के कारण-Female Foeticide In Hindi

भारतीय मध्यमवर्गीय समाज में कन्या जन्म को अमंगलकारी माना जाता है. क्युकि कन्या को पाल पोषकर उसका विवाह करना पड़ता है. इस निमित काफी धन खर्च हो जाता है.

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विशेषकर विवाह में दहेज आदि के कारण मुसीबतें आ जाती है. कन्या को पराया धन तथा पुत्र को कुल परम्परा को बढ़ाने वाला तथा वृद्धावस्था का सहारा मानते है.

इसी कारण ऐसे लोग कन्या को जन्म लेने नही देना चाहते है इन सब कारणों से पहले कुछ क्षेत्रों एवं जातियों में कन्या जन्म के समय ही उसे मार दिया जाता है. आज के यांत्रिक युग में अब भ्रूण हत्या के द्वारा कन्या के जन्म से पहले ही रोक दिया जाता है.

कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अपराध (kanya bhrun hatya)

वर्तमान में अल्ट्रासाउंड मशीन वस्तुत कन्या संहार का हथियार बन गया है. लोग इस मशीन की सहायता से लिंग भेद ज्ञात कर लेते है. और यदि गर्भ में कन्या हो तो कन्या भ्रूण को गिराकर नष्ट कर देते है. कन्या भ्रूण हत्या के कारण लिंगानुपात का संतुलन बिगड़ गया है.

कई राज्यों में लड़को की अपेक्षा लड़कियों की संख्या बीस से पच्चीस प्रतिशत तक कम है. इस कारण सुयोग्य युवकों की शादियाँ नही हो पा रही है. एक सर्वेक्षण के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन लगभग ढाई हजार कन्या भ्रूणों की हत्या की जाती है. हरियाणा, पंजाब, दिल्ली में इसकी विद्रूपता सर्वाधिक दिखाई देती है.

कन्या भ्रूण हत्या का अशिक्षा और गरीबी से उतना संबंध नही है. जितना कि दकियानूसी एवं स्वार्थी मध्यमवर्गीय समाज की अमानवीय सोच से है. लगता है कि ऐसे लोगों में लिंग चयन का मनोरोग निरंतर विकृत होकर उभर रहा है.

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के उपाय

भारत सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए अल्ट्रासाउंड मशीनों से लिंग ज्ञान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. इसके लिए प्रसवपूर्व निदान तकनिकी अधिनियम पी एन डी टी 1994 के रूप में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है. साथ ही नारी सशक्तिकरण , बालिका निशुल्क शिक्षा, पैतृक उतराधिकार, समानता का अधिकार आदि अनेक उपाय अपनाए गये है.

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यदि भारतीय समाज में पुत्र और पुत्री में अंतर नही माना जावे तो कन्या जन्म को परिवार में मंगलकारी समझा जावें कन्या को घर की लक्ष्मी एवं सरस्वती मानकर उनका लालन पोषण किया जावे, तो कन्या भ्रूण हत्या पर प्रतिबंध स्वत ही लग जाएगा.

उपसंहार

वर्तमान में लिंग चयन एवं लिंगानुपात विषय पर काफी चिन्तन किया जा रहा है. सयुक्त राष्ट्रसंघ ने कन्या संरक्षण की घोषणा की है. भारत सरकार ने भी लिंगानुपात को ध्यान में रखकर कन्या भ्रूण हत्या पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया है. वस्तुतः कन्या भ्रूण हत्या का यह न्रशंस कृत्य पूरी तरह से समाप्त होना चाहिए.

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कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध प्रस्तावना सहित – Essay on Female Foeticide in Hindi Language

प्रस्तावना– हमारी भारतीय संस्कृति में कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता हैं.  नवरात्र  और  देवी जागरण के समय  कन्या पूजन की परम्परा से सभी परिचित हैं. हमारे धर्मग्रन्थ भी नारी की महिमा का गान करते हैं.

आज उसी भारत में कन्या को माँ के गर्भ में ही समाप्त कर देने की लज्जाजनक परम्परा चल रही हैं. इस दुष्कर्म ने सभ्य जगत के सामने हमारे मस्तक को झुका दिया हैं.

बेटों का है मान जगत में, बेटी का कोई मान नहीं
हे प्यारे भगवान बता तो बेटी क्या इंसान नहीं.

कन्या भ्रूण हत्या के कारण– कन्या भ्रूण को समाप्त करा देने के चलन के पीछे अनेक कारण हैं. कुछ राजवंशों और सामंत परिवारों में विवाह के समय वर पक्ष के सामने न झुकने के झूठे अहंकार ने कन्याओं की बलि ली.

पुत्री की अपेक्षा पुत्र को महत्व दिया जाना, धन लोलुपता, दहेज प्रथा तथा कन्या के लालन पालन और सुरक्षा में आ रही समस्याओं ने भी इस निंदनीय कार्य को बढ़ावा दिया हैं.

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दहेज के लोभियों ने इस समस्या को विकट बना दिया हैं. वहीँ झूठी शान के प्रदर्शन के कारण भी कन्या का विवाह सामान्य परिवारों के लिए बोझ बन गया हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के दुष्परिणाम– विज्ञान की कृपा से आज गर्भ में ही सन्तान के लिंग का पता लगाना सम्भव हो गया हैं. अल्ट्रा साउंड मशीन से पता लग जाता हैं. कि गर्भ में कन्या है या पुत्र. यदि गर्भ में कन्या है  कुबुद्धि वाले लोग उसे डॉक्टरों की सहायता से नष्ट करा देते हैं.

इस निंदनीय आचरण के कुपरिणाम सामने आ रहे हैं. देश के अनेक राज्यों में लड़कियों और लड़कों के अनुपात में चिंताजनक गिरावट आ गई हैं. लड़कियों की कमी होते जाने से अनेक युवक कुवारे घूम रहे हैं.

यदि सभी लोग पुत्र ही पुत्र चाहेंगे तो पुत्रियां कहाँ से आएगी. विवाह कहाँ से होगे, वंश कैसे चलेगे. इस महापाप में नारियों की भी सहमति होना बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

कन्या भ्रूण हत्या रोकने के उपाय– इस घ्रणित कार्य को रोकने के लिए जनता और सरकार दोनों का प्रयास आवश्यक है यदपि सरकार ने लिंग परीक्षण को अपराध घोषित करके कठोर दंड का प्रावधान किया हैं. फिर भी चोरी छिपे यह काम चल रहा हैं.

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इसमें डॉक्टरों तथा परिवारजन दोनों का सहयोग रहता हैं. इस समस्या का हल तभी सम्भव हैं. जब लोगों का लडकियों के प्रति हीनता का भाव समाप्त हो. पुत्र और पुत्री में कोई भेद न किया जाये. लड़कियों को स्वावलम्बी बनाया जाये.

उपसंहार– कन्या भ्रूण हत्या भारतीय समाज के मस्तक पर कलंक हैं. इस महापाप में किसी भी प्रकार का सहयोग करने वालों को समाज से बाहर कर दिया जाना चाहिए. और कठोर कानून बनाकर दंडित किया जाना चाहिए. कन्या भ्रूण हत्या मानवता के विरुद्ध अपराध हैं.

कन्या भ्रूण हत्या पर कानून | Female Foeticide In India

हमारे समाज में व्याप्त भयानक अपराध यानि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए क्या कानून हैं.  भारत सरकार द्वारा इसे प्रतिबंधित करने के लिए किन उपायों को अपनाया जा रहा हैं. महत्वपूर्ण उपायों तथा प्रतिबंधों के बारे में इस निबंध में हम आपकों जानकारी प्रदान कर रहे हैं.

प्रसूति पूर्व अथवा पश्चात अनुवांशिक विकारों, भ्रूण के शरीर की विषमताओं का पता लगाने के लिए प्रसूति पूर्व परिक्षण तकनीक के नियमन हेतु तथा इस तकनीक के दुरूपयोग को रोकने, लिंग का पता कर कन्या भ्रूण हत्या को रोकने इत्यादि के प्रयोजन हेतु सरकार ने एक कानून बनाया है. जिसे गर्भधारण पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 कहते है.

इस कानून में गर्भ में लिंग जांच करना दंडनीय है किसी भी व्यक्ति द्वारा शब्दों, इशारों या अन्य तरीके से गर्भ का लिंग बताना दंडनीय है. कोई भी व्यक्ति जो गर्भ की लिंग जांच या चयन के लिए इन तकनीको की सहायता लेता है. इस कानून से दंडित हो सकता है. अगर किसी औरत को जांच के लिए मजबूर किया गया है तो उसे सजा नही दी जाएगी.

लिंग की जांच की सजा है 3 साल तक की जेल और दस हजार रूपये तक का जुर्माना. दोबारा अपराध करने पर सजा पांच साल की जेल तथा 50 हजार रूपये तक जुरमाना हो सकता है.

कोई भी डॉक्टर या तकनिकी सहायक जो ऐसी गैर क़ानूनी जांच करता है उसे 3 साल तक की जेल और 50 हजार रूपये का जुर्माना हो सकता है. लिंग जांच या लिंग चयन के लिए किसी प्रकार का इश्तिहार दंडनीय है ऐसा करने वाले को 3 साल तक की जेल और दस हजार रूपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध | Kanya Bhrun Hatya Essay In Hindi

प्रकृति के निर्माण के समय ईश्वर द्वारा एक स्वभाविक संतुलन की स्थति दी, कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध मगर मानव ने अपने स्वार्थ के कारण इस संतुलन को बिगाड़ने  प्रयत्न किया हैं.

एक तरफ प्रकृति का अतिशय दोहन हुआ हैं, तो वही स्त्री अथवा कन्या भ्रूण हत्या  के कारण स्त्री पुरुष लिंगानुपात को गिराने का कार्य किया हैं.

हाल ही के कई दशकों में स्त्री पुरुष लिंगानुपात में आई बड़ी गिरावट का सबसे अहम कारण कन्या भ्रूण हत्या ही हैं. आधुनिक तकनीक के कारण आज गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग जांच करवाना आसान हो गया हैं. दुनिया में आने से पूर्व शिशु के लिंग परिक्षण के बाद मादा भ्रूण होने की स्थति में उसे माँ के गर्भ में ही खत्म कर देना, कन्या भ्रूण हत्या कहलाता हैं.

कन्या भ्रूण हत्या आज एक ऐसी अमानवीय समस्या का रूप धारण कर चुकी हैं, जो कई और गंभीर समस्याओं की जड़ हैं. इसके कारण महिलाओं की संख्या दिन ब दिन घट रही हैं. 1901 में प्रति एक हजार पुरुषों पर 972 स्त्रियाँ थी, 1991 में महिलाओं की संख्या घटकर 927 को गईं.

सन 1991 से 2001 के मध्य महिलाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गईं, जिसके फलस्वरूप प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या बढ़कर 940 हो गईं. सामाजिक संतुलन के दृष्टिकोण से देखे तो यह वृद्धि पर्याप्त नही हैं. भारत के कुछ राज्यों में यह अनुपात बहुत कम हैं.

दिल्ली हरियाणा, पंजाब जैसे कुछ राज्यों में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या 900 से भी कम हैं. केरल एक ऐसा राज्य हैं, जहाँ प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों की संख्या एक हजार से अधिक, 1058 हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के कारण (kanya bhrun hatya ke karan)

भारत में कन्या भ्रूण हत्या के कई कारण हैं. प्राचीन काल में भारत में महिलाओं को पुरुषों के समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध थे, किन्तु विदेशी आक्रमणों एवं अन्य कारणों से महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित किया जाने लगा एवं समाज में पर्दा प्रथा, सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं प्रारम्भ हो गईं.

महिलाओं को शिक्षा के समान अवसर नही मिलने का कुप्रभाव समाज पर भी पड़ा. लोग महिलाओं को अपने सम्मान का प्रतीक समझने लगे. सामाजिक एवं धार्मिक रूप से पुरुषों को अधिक महत्व दिया जाने लगा तथा महिलाओं को घर तक ही सिमित कर दिया गया. इसके कारण सन्तान के रूप में नर शिशु की कामना की गलत परम्परा शुरू हुई.

सन्तान प्राप्ति की प्रक्रिया में गर्भधारण महिलाओं को ही करना पड़ता हैं. युवावस्था में प्रेम के फलस्वरूप गर्भ धारण को हमारा समाज पाप मानता हैं, जिस परिवार की किशोरी ऐसा करती हैं, समाज में उसकी निंदा की जाती हैं. इसके अतिरिक्त यौन संबंध बनाने की स्थति में महिला की ही निंदा अधिक की जाती हैं, इसे समाज ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया हैं.

इन्ही कारणों से लोग चाहते हैं, कि भविष्य में अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुचने की आशंका से बचने के लिए वे सिर्फ नर शिशु को ही जन्म दे. कोई भी महिला अपनी गर्भस्थ सन्तान को मारना नही चाहती हैं, भले ही वह कन्या शिशु ही क्यों न हो, लेकिन परिजन विभिन्न कारणों से उसे कन्या भ्रूण हत्या करवाने के लिए बाध्य करते हैं.

कन्या भ्रूण हत्या का एक बड़ा कारण दहेज़ प्रथा भी हैं. लोग लड़कियों को पराया धन समझते हैं और उनकी शादी के लिए दहेज़ की व्यवस्था करनी पड़ती हैं. दहेज़ जमा करने के लिए कई परिवारों का कर्ज लेना पड़ता हैं. इसलिए भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए लोग गर्भावस्था में ही लिंग परीक्षण करवा कर कन्या भ्रूण होने की स्थति में उनकी हत्या करवा देते हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के उद्देश्य (female foeticide/ infanticide essay in India)

हमारे समाज में महिलाओं से अधिक पुरुषों को महत्व दिया जाता हैं. पहले महिलाएं पूरी तरह से पुरुषों पर हर कार्य के लिए निभर हुआ करती थी.

परिवार में पुरुष सदस्य ही परिवार के भरन पोषण के लिए अर्थोपार्जन का कार्य करता था. अभी भी कामकाजी महिलाओं की संख्या बहुत कम हैं, उन्हें सिर्फ घर के काम-काज तक सिमित रखा जाता हैं.

संविधान द्वारा महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने के बाद भी उनके प्रति सामाजिक भेदभाव में कमी नही हुई हैं. इसलिए परिवार के लोग भविष्य में परिवार की देखभाल करने वाले के रूप में नर शिशु की कामना करते हैं.

भारतीय समाज में यह अवधारणा रही हैं, कि वंश पुरुष से ही चलता हैं, महिला से नही. इसलिए सभी लोग वंश परम्परा को कायम रखने के लिए नर शिशु की चाह रखते हैं व उन्हें महिला शिशु की तुलना में अधिक लाड़ प्यार देते हैं.

कन्या भ्रूण हत्या की समस्या एवं रोकने के उपाय

किसी भी देश की प्रगति तब तक संभव नही हैं, जब तक वहां कि महिलाओं को प्रगति के पर्याप्त अवसर न मिले. जिस देश में महिलाओं का अभाव हो, उसके विकास की कल्पना कैसे की जा सकती हैं. साक्षर महिला ही अपने अधिकारों की रक्षा कर पाने में सक्षम होती हैं.

कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण कर इसे पूरी तरह समाप्त कर देने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. इसलिए हमे महिला शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा. महिला परिवार की धुरी होती हैं.

समाज के विकास के लिए योग्य माताओं, गृहणियों तथा पत्नियों के रूप में पर्याप्त महिलाओं का होना आवश्यक हैं. यदि महिलाओं की संख्या में कमी होती रही तो सामाजिक संतुलन बिगड़ जाएगा एवं समाज में बलात्कार, व्याभिचार आदि कुरीतियों में वृद्धि होने लगेगी.

कन्या भ्रूण हत्या पर कानून

भारत में कन्या भ्रूण हत्या को कानूनन अपराध घोषित कर दिया गया हैं. इसके बावजूद भी कन्या भ्रूण हत्या पर पूर्ण नियंत्रण नही हो पाया हैं. लोग चोरी छिपे एवं पैसे के बल पर इस कुकृत्य को भी अंजाम दे देते हैं. कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अभिशाप हैं और इसे रोकने के लिए हम लोगो को जागरूक होना होगा, जब तक कि उसे जनता का सहयोग न मिले.

जनता के सहयोग से ही किसी भी अपराध को रोका जा सकता हैं. कन्या भ्रूण हत्या एक ऐसा अपराध हैं, जिसमें परिवार एवं समाज के लोगों की भागीदारी होती हैं. इसलिए जागरूक नागरिक ही इस कुकृत्य को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन समाज के इस कलंक को मिटाने के लिए कार्यरत हैं. इस कार्य में मिडिया भी सशक्त भूमिका निभा रहा हैं. आवश्यकता बस इस बात कि हैं कि जनता अपने कर्तव्यों को समझते हए कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक कलंक को मिटाने में समाज का सहयोग करे.

Kanya Bhrun Hatya Essay In Hindi In 500 Words

विधाता की सृष्टि में मानव का विशेष महत्व हैं. उसमें भी नर के समान नारी दोनों के संसर्ग से सन्तान का जन्म और मानव समाज का विकास होता हैं. तथा सृष्टि प्रक्रिया आगे बढ़ती हैं. परन्तु वर्तमान काल में अनेक कारणों से लिंगभेद का घ्रानित रूप सामने आ रहा हैं.

जो पुरुष सत्तात्मक समाज में कन्या भ्रूण हत्या का पर्याय बनकर नर नारी के समान अनुपात को बिगाड़ रहा हैं. हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या आज मानवता पर एक कलंक एवं अपराधी कृत्य बन गया हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के कारण– भारतीय रुढ़िवादी समाज में कन्या का जन्म अमंगलकारी माना जाता हैं. क्योंकि कन्या को पाल पोषकर, सुशिक्षित सुयोग्य बनाकर उसका विवाह करना पड़ता हैं. इस निमित्त काफी धन खर्च हो जाता हैं. विशेषकर विवाह आदि में दहेज़ आदि कारणों से मुशीबत आ जाती हैं.

समाज में कन्या को पराया धन और भार स्वरूप माना जाता हैं. इसके जरा से गलत आचरण से कलंक लगने या बदनामी का भय रहता हैं. इस कारण भी कुछ लोग कन्या जन्म नहीं चाहते हैं. इन्ही कारणों से पहले कुछ क्षेत्रों अथवा जातियों में कन्या के जन्मते ही उसे मारा जाता था.

आज के मशीनी युग में अब कन्या भ्रूण हत्या द्वारा कन्या जन्म को पहले से ही रोक दिया जाता हैं.

कन्या भ्रूण हत्या की विद्रूपता- वर्तमान में अल्ट्रासाउंड मशीन वस्तुतः कन्या संहार का हथियार बन गई हैं. लोग इस मशीन की सहायता से लिंग भेद का पता कर लेते हैं. यदि गर्भ में कन्या हो तो उसे दुनियां में आने से पहले ही मार दिया जाता हैं. गर्भ गिरा देते हैं.

कन्या भ्रूणहत्या के कारण लिंगानुपात का संतुलन बिगड़ गया हैं. कई राज्यों में लडकों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या पन्द्रह से पच्चीस प्रतिशत तक कम हैं. एक सर्वेक्षण के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन ढ़ाई हजार कन्या भ्रूणों की हत्या की जाती हैं.

हरियाणा पंजाब तथा दिल्ली में इस वीभत्स अपराध की विद्रूपता सर्वाधिक दिखाई देती हैं. कन्या भ्रूण हत्या का सम्बन्ध मध्यमवर्गीय समाज की रुढ़िवादी प्रवृत्ति से हैं. अब यह कुकृत्य मानसिक विकृति के रूप में पनप रहा हैं. जो कि मानवता पर एक कलंक हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के प्रतिबंध के उपाय – सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए अल्ट्रासाउंड मशीनों से लिंग ज्ञान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया हैं. इसके लिए प्रसवपूर्व निदान तकनीकी अधिनियम PNDT 1994 के रूप में कठोर दंड विधान किया गया हैं.

और कन्या भ्रूण हत्या को जघन्य अपराध माना गया हैं. साथ ही नारी सशक्तिकरण, बालिका निशुल्क शिक्षा, पैतृक उत्तराधिकार, समानता का अधिकार आदि अनेक उपाय अपनाएं गये हैं.

यदि भारतीय समाज में पुत्री और पुत्र में अंतर् नहीं किया जावे, कन्या जन्म को परिवार के लिए मंगलकारी समझा जावे, कन्या को घर की लक्ष्मी एवं सरस्वती मानकर उसका लालन पोषण किया जावे, तो कन्या भ्रूण हत्या पर स्वतः ही प्रतिबंध लग जाएगा.

उपसंहार- इस वैज्ञानिक युग में लिंग चयन एवं लिंगानुपात विषय पर काफी चिंतन किया जा रहा हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ में कन्या संरक्षण के लिए घोषणा की गई हैं. भारत सरकार ने भी लिंगानुपात में अतीव असमानता देखकर कन्या भ्रूण हत्या पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया हैं. मानवता को कलंकित करने वाला लिंग भेद का यह अपराध एकदम समाप्त हो जाना चाहिए.

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