कृत्रिम उपग्रह व अंतरिक्ष यात्रियों की जानकारी- information about artificial satellites & Astronaut in hindi

कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष यात्रियों की जानकारी information artificial satellites Astronaut in Hindi वैज्ञानिकों ने विभिन्न उपयोगों के लिए कुछ ऐसे कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे है जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे है. इन पिंडों को कृत्रिम उपग्रह कहा जाता है. कृत्रिम उपग्रह सामान्यत धरातल से उपर की ओर फेकी गई वस्तुएं पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पुनः धरातल पर आ गिरती है. लेकिन अगर राकेट द्वारा कृत्रिम उपग्रह को इतना वेग प्रदान किया जाए कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल की सीमा को पार कर जाए तो उपग्रह पुनः लौटकर पृथ्वी पर नही आएगा.

Artificial Satellites & Astronaut In Hindi कृत्रिम उपग्रह की जानकारी

Artificial Satellites & Astronaut In Hindi कृत्रिम उपग्रह की जानकारी

कृत्रिम उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से बाहर निकलने के लिए 11.2 किलोमीटर प्रति सैकंड की गति की आवश्यकता होती है, जिसे उपग्रह की पलायन वेग या एस्केप स्पीड कहा जाता है.

कोई भी व्यक्ति इतनी तेज गति से वस्तु नही फेक सकता. परन्तु अब हमने ऐसे शक्तिशाली राकेट बना लिये है, जो ऐसा कर सकते है.

इन रोकेटों से अंतरिक्ष यान (Spaceship) भेजे जाते है. जो नीचे नही आते है. कृत्रिम उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए दिए गये वेग को उपग्रह का प्रक्षेपण वेग (satellite motion physics) कहा जाता है. विभिन्न उपग्रहों की उंचाई लगभग 6400 किलोमीटर से 36000 किलोमीटर तक होती है.

कृत्रिम उपग्रह किसे कहते है (What Is Artificial satellite)

यदि किसी पिंड को हम पलायन वेग से कुछ कम वेग (जैसे लगभग 8 किलोमीटर/प्रति सैकंड) से प्रक्षेपित करे तो यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर नही जाएगा, अपितु पृथ्वी के चारों ओर निश्चित कक्षा में चक्कर लगाने लगेगा.

कृत्रिम उपग्रह मानव द्वारा बनाया गया एक मशीनी पिंड है जिसे राकेट की सहायता से पृथ्वी की कक्षा में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव की सीमा के अंदर स्थापित किया जाता है. चूँकि मानव निर्मित उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करता है इसलिए यह कृत्रिम उपग्रह कहलाता है.

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कृत्रिम उपग्रह के चार उपयोग- uses of artificial satellites in hindi

  • उपग्रहों द्वारा टेलीफोन, टेलीविजन, रेडियों आदि की तरंगों का प्रसारण किया जाता है.
  • ये उपग्रह जासूसी, मौसम एवं पृथ्वी सम्बन्धी अन्य जानकारियाँ भी प्रदान करते है. कृत्रिम उपग्रह हमारे लिए बहुत उपयोगी है.
  • उपग्रहों की सहायता से तूफ़ान या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व जानकारी मिल जाती है, जिससे जान-माल को सुरक्षित स्थानों पर पहुचाकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.
  • कृषि, वन और जल संसाधनों की व्यवस्था में भी कृत्रिम उपग्रह द्वारा प्राप्त जानकारियों काफी उपयोगी साबित हो रही है.

विश्व का पहला कृत्रिम उपग्रह व पहला अंतरिक्ष यात्री

विश्व का पहला उपग्रह 1957 में स्पुतनिक-1 (Sputnik) तत्कालीन सोवियत संघ द्वारा अन्तरिक्ष में राकेट द्वारा पहुचाया गया. सोवियत संघ और अमेरिका के बिच तब अन्तरिक्ष अन्सुन्धान को लेकर एक होड़ सी लगी हुई थी.

सोवियत अन्तरिक्ष कार्यक्रम के अंतर्गत पहले जीवित प्राणी को स्पुतनिक-2 में भेजा गया था. यह जीवित प्राणी ‘लाईका’ नामक कुतिया (Bitch) थी. हालांकि यह परिक्षण पूरी तरह सफल नही रहा.

चार साल बाद 1961 में सोवियत संघ ने पहला मानव सफलतापूर्वक अन्तरिक्ष में भेजा. यूरी गागरिन (Yuri Gagarin) अन्तरिक्ष याँ वोस्तोक 1 में अन्तरिक्ष की यात्रा करने वाले विश्व के पहले व्यक्ति बने.

1969 में अमेरिका ने दुनिया को तब चौका दिया जब अपोलो 11 अन्तरिक्ष याँ से तीन यात्रियों को सफलता के साथ न सिर्फ अन्तरिक्ष की सैर करवाई, बल्कि बल्कि दो अन्तरिक्ष यात्रियों को चन्द्रमा की सतह पर भी उतारा. नील आर्मस्ट्रांग पहले व्यक्ति बने जिसने चन्द्रमा की सतह पर पहला कदम रखा.

अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धि [कृत्रिम उपग्रह व अंतरिक्ष यात्री]

  • राकेश शर्मा (First Indian astronaut Rakesh Sharma)- भारत में सर्वप्रथम वर्ष 1984 में अंतरिक्ष की यात्रा करने का गौरव भारतीय वायु सेना के राकेश शर्मा को मिला. राकेश शर्मा ने सोयुज टी 11 (Soyuz T XI) में दो अन्य सोवियत अन्तरिक्ष यात्रियों के साथ न सिर्फ अन्तरिक्ष की सैर की बल्कि सोयुज 7 स्पेस स्टेशन में लगभग आठ दिन रहकर कई वैज्ञानिक परीक्षण भी किये. इनका जन्म 1949 में पंजाब राज्य के पटियाला में हुआ था.
  • कल्पना चावला (First Indian woman astronaut Kalpana Chawla)– कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में वर्ष 1961 में हुआ. कल्पना चावला एक शोध वैज्ञानिक एवं प्रसिद्ध अन्तरिक्ष यात्री थी. वे अन्तरिक्ष में जाने वाली भारत में जन्मी पहली महिला एवं राकेश शर्मा के बाद दूसरी भारतीय थी. कोलम्बिया अन्तरिक्ष याँ के वापिस लौटते समय 2003 को हुई दुर्घटना में अपने छ अन्य सहयोगी सदस्यों के साथ कल्पना की भी मृत्यु हो गई. इसके अतिरिक्त भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक सुनीता विलियम्स अन्तरिक्ष में सर्वाधिक समय बिताने वाली महिला है.

प्राकृतिक उपग्रह क्या है?

प्राकृतिक उपग्रह में प्राकृतिक नाम जुड़ा हुआ है, इस प्रकार कोई भी इंसान यह समझ सकता है कि जो उपग्रह प्रकृति के द्वारा बनाए गए हैं उसे प्राकृतिक उपग्रह कहा जाता है। इस प्रकार के उपग्रह पर किसी भी प्रकार से इंसानों का नियंत्रण नहीं होता है ना हीं इंसानों के द्वारा बनाए गए किसी मशीन का नियंत्रण प्राकृतिक उपग्रह पर होता है। 

प्राकृतिक उपग्रह परमानेंट होते हैं और इनके काम करने के तरीके में कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता है। अंतरिक्ष में दिखाई देने वाले धूमकेतु, ग्रह को प्राकृतिक उपग्रह कहा जा सकता है क्योंकि यह दोनों ही अंतरिक्ष में मौजूद तारों के चारों तरफ गोल गोल घूमते हैं।

प्राकृतिक उपग्रहों के प्रकार क्या है?

बता दे कि, सौरमंडल में मुख्य तौर पर दो प्रकार के उपग्रह देखे गए हैं जिन्हें उनकी कक्षा के अनुसार नियमित उपग्रह और अनियमित उपग्रह में बांटा गया है। इन दोनों की जानकारी नीचे आपको दी जा रही है।

नियमित उपग्रह

नियमित उपग्रह उन्हें कहां जाता है जो सूर्य के संबंध में एक ही अर्थ में होते हैं और किसी विशेष वस्तु के चारों तरफ गोल गोल घूमते हैं। एग्जांपल के तौर पर देखा जाए तो जो चंद्रमा है यह पूरब दिशा से होकर के पश्चिम दिशा की ओर घूमता है। इसके अलावा यही सेम चीज हमारी पृथ्वी भी करती है।

अनियमित उपग्रह

जो भी अनियमित उपग्रह होते हैं उनकी कक्षा झुकी हुई होती है और यह अपने ग्रह से काफी लंबी दूरी पर विराजमान होते हैं। झुकी हुई होने के साथ ही साथ इनकी कक्षाएं अंडाकार होती हैं।

कृत्रिम उपग्रह कैसे काम करता हैं?

सामान्य व्यक्ति हमेशा यही सोचता है कि आखिर जो कृतिम उपग्रह धरती से आकाश में छोड़े जाते हैं वह आकाश में जाने के बाद कैसे वहां पर टिके हुए रहते हैं। इसके पीछे क्या लॉजिक है। अगर इस प्रश्न का आंसर देखा जाए तो आंसर बहुत ही आसान है।

जब किसी सैटेलाइट को या फिर ऑब्जेक्ट को धरती से बाहर अंतरिक्ष की कक्षा में छोड़ा जाता है तो वह ऑब्जेक्ट अपनी एक निश्चित गति में किसी बहुत बड़े ऑब्जेक्ट का लगातार चक्कर लगाते रहता है

और यही वह वजह है जिसके कारण उस ऑब्जेक्ट पर धरती के गुरुत्वाकर्षण के बल का नियम काम नहीं करता है और इसी कारण जो ऑब्जेक्ट पृथ्वी से वायुमंडल में छोड़ा जाता है वह पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाने के बाद हवा में टिका हुआ रहता है।

भारतीय अन्तरिक्ष विभाग की स्थापना

आज के समय में हमारे भारत देश की इसरो संस्था किसी भी प्रकार के परिचय की मोहताज नहीं है परंतु जब इसकी स्थापना हुई थी तब शायद ही किसी ने यह सोचा था कि एक दिन यह संस्था भारत के लिए इतनी लाभदायक साबित होगी। 

विक्रम साराभाई वह इंसान है जिन्हें इसरो को स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है क्योंकि इन्ही के प्रयासों के कारण साल 1969 में 15 अगस्त के दिन भारत में इसरो स्पेस एजेंसी की स्थापना की गई थी और इसलिए आज भी भारतीय किताबों में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक विक्रम भाई सारा भाई को पढ़ाया जाता है।

जब से इसरो संस्था स्थापित हुई है तब से ही इसने लगातार कई क्षेत्र में प्रगति हासिल की है और वर्तमान के समय में इसरो में इतने बड़े साइंटिस्ट काम कर रहे हैं.

कि यह इंडिया की सेटेलाइट को लांच कर ही रहे हैं साथ ही विदेशों की भी सेटेलाइट अपनी स्पेस एजेंसी से लांच कर रहे हैं जिसके कारण इसरो की ख्याति पूरी दुनिया भर में फैल रही है, साथ ही भारत को और इसरो संस्था को बड़ी मात्रा में इनकम भी प्राप्त हो रही है।

अभी तक इसरो ने श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यानमार, वियतनाम, फिलीपींस, थाईलैंड जैसे कई देशों की सेटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने का काम सफलतापूर्वक किया है जिसके बदले में इसरो को अरबों डॉलर की कमाई हुई है।

बता दें कि इसरो इंस्टिट्यूट का हेड क्वार्टर हमारे भारत देश के कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु शहर में स्थित है और यह एक इंडियन स्पेस एजेंसी है जिसका मुख्य काम है टेक्नोलॉजी को उपलब्ध करवाना।

इसरो को तब सबसे ज्यादा प्रसिद्धि हासिल हुई थी जब साल 2014 में 24 सितंबर के दिन इसरो ने मंगलयान को अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा में एंट्री करवा दी थी।

इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के कारण भारत को और इसरो संस्था को पूरे दुनिया के कई देशों से बधाई मिली थी और तब से ही कई देश इसरो के साथ मिलकर के स्पेस की फील्ड में काम कर रहे हैं।

अंतरिक्ष में जाने वाली पहली वस्तुएं

  1. यूरी गागरिन को अंतरिक्ष में जाने वाले पहले इंसान का खिताब प्राप्त है।
  2. रसिया ही वह देश है जिसने सबसे पहली बार अंतरिक्ष में सेटेलाइट को लांच किया था।
  3. लाइका उस डॉग का नाम है जिसे अंतरिक्ष में जाने वाला पहला स्पेस डॉग कहा जाता है।
  4. वेलेंटीना टैरेशकोवा अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला थी।
  5. राकेश शर्मा पहले ऐसे इंडियन थे जो अंतरिक्ष में गए थे।
  6. नील आर्म स्ट्रांग उस व्यक्ति का नाम है जिसने पहली बार चांद पर अपनी पहुंच बनाई थी।
  7. यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका ही वह देश है जिसने पहली बार चंद्रमा पर आदमी भेजा था।
  8. बिना ड्राइवर के मंगल की ग्रह पर स्पेस सैटेलाइट भेजने वाला पहला देश अमेरिका है।
  9. हमारे भारत देश का पहला बिना ड्राइवर वाला विमान लक्ष्य था।
  10. लूना- 10 ही उस स्पेसक्राफ्ट का नाम है जिसने पहली बार चंद्रमा की पूरी परिक्रमा कंप्लीट की थी।
  11. वाइकिंग-1 ही उस स्पेसक्राफ्ट का नाम है जो सबसे पहली बार मंगल पर उतरने में कामयाब हुआ था।
  12. ईगल उस स्पेसक्राफ्ट का नाम है जो ड्राइवर सहित पहली बार चंद्रमा पर उतरा था।
  13. अपोलो- 11 उस स्पेसक्राफ्ट का नाम है जिसने सबसे पहली बार इंसानों को चंद्रमा पर पहुंचाने का काम किया था।
  14. कोलंबिया ही वह स्पेस शटल है जो पहली बार अंतरिक्ष में गया था।
  15. कार्ल जी हैनिजे एक ऐसे अंतरिक्ष यात्री थे जिनकी उम्र सबसे ज्यादा थी।
  16. गैरेमान ही उस अंतरिक्ष यात्री का नाम है जिसकी उमर सबसे कम है।

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