बकरी पालन की जानकारी | Goat Farming Business Plan In Hindi

बकरी पालन की जानकारी Goat Farming Business Plan In Hindi: कई सारे बिजनेस प्लान ऐसे होते हैं जिसमें बेहद अल्प पूंजी के साथ बिजनेस शुरू कर अच्छा लाभ कमाया जा सकता हैं, बकरी पालन Goat Farming भी एक ऐसा ही क्षेत्र हैं. खासकर किसान या मजदूर वर्ग के लिए यह बेहतरीन रोजगार क्रियाकलाप हो सकता हैं. आज के आर्टिकल में हम बकरी पालन के व्यवसाय के बारे में विस्तार से जानेगे.

बकरी पालन की जानकारी | Goat Farming Business Plan In Hindi

बकरी पालन की जानकारी Goat Farming Business Plan In Hindi

बकरी को गरीब की गाय भी कहा जाता है. क्युकि इसे गरीब लोग पालकर अपना जीवन निर्वाह कर सकता है. बकरी के पालने और रखरखाव में बहुत कम खर्चा आता है. भारत में उन्नत किस्म की बकरियां 2-3 लीटर दूध प्रतिदिन देती है. बकरी फूलों फलो और सब्जियों के बगीचे से प्राप्त घास और खरपतवार, जंगली पौधों के पत्ते, सब्जियों के छिलके आदि खाती है.

बकरी पालन के प्रमुख विशेषताएं

भारत में बकरियों की संख्या 1200 लाख है तथा अकेले राजस्थान में लगभग 135 लाख बकरियां पाली जाती है. राजस्थान के कई क्षेत्रों में बकरियां मांस के लिए बड़े शहरों में भेजी जाती है. बकरियों को पालने (goat palan) की दो विधियाँ प्रचलन में है.

  1. बकरी को बाड़े में रखकर खूटे से बांधकर पालना.
  2. खुले क्षेत्र में झुण्ड के रूप में खुला छोड़कर

बकरी पालन कैसे करे (How to follow the goat)

  • जो बकरियां बाहर चरने जाती है वे भली प्रकार से पेड़ो की पतियाँ खाकर जीवन निर्वाह करती है. दिन में बाहर 8-9 घंटे चरने से उनके पालन पोषण पर कम खर्च आता है. तथा स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है.
  • जिन बकरियों को बाहर चरने नही भेजा जाता है, उन्हें घर पर ही दिन में दो तीन बार दाना चारा देते है. इस चारे में 1 से डेढ़ किलो सुखी घास 2-4 किलो सुखा चारा खिलाते है. तथा साथ में दिन में 3-5 लीटर पानी भी पिलाते है.
  • चारे के साथ साथ बकरी को दाने का मिश्रण भी आवश्यक है एक वर्ष से कम उम्र के बकरी के बच्चो को प्रतिदिन 250 ग्राम दाने का मिश्रण देते है. एक वर्ष से अधिक उम्र की बकरियों को 500 ग्राम दाना प्रतिदिन देना चाहिए. गर्भित बकरी को ब्याने के दो माह पूर्व से ही 1 किलो दाना देना चाहिए.

Goat Farming In Hindi (आहार मात्रा)

  • चने का दलिया-50 प्रतिशत
  • गेहू की चापट-50 प्रतिशत
  • जौ का दलिया-17 प्रतिशत
  • मक्का का दलिया-33 प्रतिशत
  • मूंगफली की खली-33 प्रतिशत
  • गेहू की चापट-17 प्रतिशत

बकरियों की आवास व्यवस्था के लिए शुद्ध हवा और शुष्क वातावरण चाहिए, ग्रामीण क्षेत्र की बकरियों की कोई आवास व्यवस्था नही होती है. फार्म और शहरी क्षेत्रों में उन्हें एक विशेष प्रकार के आवास में रखा जाना चाहिए.

प्रत्येक बकरी के लिए 5 फीट लम्बा, 2.5 फीट चौड़ा तथा 6 फिट ऊँचा बाड़ा होना चाहिए.इस बाड़े में सुविधानुसार एक या दो बकरियां बाँधी जा सकती है. इस प्रकार बकरियों की संख्या देखते हुए बाड़े में कई विभाजक बनाएं जा सकते है. बकरी के बच्चो के लिए माँ के पास ही एक छोटा सा बाड़ा बना लिया जाना चाहिए.

बकरी के माँस को चेवणी कहा जाता है. आमतौर पर भारत में अच्छी बकरियों की कीमत 3 से 5 हजार होती है.

बकरी रोग

  • रिंडरपेस्ट या पशुमाता
  • शीप पॉक्स
  • गोट पॉक्स
  • गलघोंटू
  • फैसियोलियोसिस
  • लगड़ा बुखार
  • प्लीहा ज्वर
  • क्षय
  • टिटनेस
  • जोन्स रोग
  • थनैला

प्रमुख नस्ले

  • मारवाड़ी व लोही (मॉस के लिए प्रसिद्ध)
  • बारबरी (दूध के लिए प्रसिद्ध बकरी की नस्ल)
  • जखराना या अलवरी
  • सिरोही (मॉस के लिए प्रसिद्ध)
  • शेखावटी (बिना सींग वाली अधिक मात्रा में दूध)
  • परबतसरी
  • जमनापारी
  • राजस्थान के नागौर जिले के वरुण गाँव की बकरियां प्रसिद्ध है.

बकरी पालन लोन

यह वर्ष 2013 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई है. केन्द्रीय पशुपालन विभाग द्वारा बकरी पालन व्यवसाय कर रहे किसानों तथा पशुपालको को इसमे बैंक द्वारा लोन दिया जाता है. जिसमे पशुपालन विभाग 25 प्रतिशत सब्सिडी देता है. शेष लाभाश को निकालकर राशि बैंक में जमा करवानी पडती है.

बकरी पालन व्यवसाय (Goat farming business plan)

बकरी पालन उन व्यवसायों में गिना जाता हैं जहाँ कम इन्वेस्टमेंट से अधिकतम लाभ कमाया जा सकता हैं. ये जन्तुओं को एक अच्छा वातावरण भी प्रदान करते हैं, मानव सदा से पशु प्रेमी रहा हैं व बहुत से जानवरों को अपने साथ पालता आ रहा हैं. बकरी के पालन के लिए उन्हें रखने, दाना पानी देखभाल आदि में बेहद कम खर्च आता हैं, तथा उनकी ब्रिक्री भी उच्च दामों में की बेच सकते हैं. बकरी व्यवसाय में निम्न तरीके से लाभ कमाया जा सकता हैं.

  1. बकरी या उसके मेमने को बेचकर
  2. बकरी के मीट की बिक्री द्वारा
  3. उसकी खाल अथवा दूध व ऊन से कमाई
  4. बकरी की उर्वरक खाद बेचकर

बकरी पालन व्यवसाय लागत (Goat farming investment)

ग्रामीण परिवेश से सम्बन्ध रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति बकरी तथा उसकी कीमत के बारे में अच्छी तरह जानता हैं. यदि आप इससे अनजान तो बता दे एक अच्छी दुधारी बकरी की औसतन कीमत पांच से छः हजार तक होती हैं, यदि आप बकरी पालन की एक फर्म खोलना चाहते हैं तो दो से तीन लाख या इससे कम धन इन्वेस्ट करके भी इस बिजनेस को स्टार्ट कर सकते हैं. इस व्यवसाय में आपकों अधिकतर खर्च बकरियों की खरीद, उनको रखने की जगह, चारा आदि खरीदने में आएगी. मगर एक बार व्यवस्थित रूप से यह व्यवसाय आरम्भ होने के बाद आप मासिक लाखों रूपये का मुनाफा कमा सकते हैं.

गोट फार्मिंग ट्रेनिंग (Goat farming training)

मानव हमेशा से अपने संग विभिन्न पशुओं का पालन करता आया हैं और आज भी कई सारे लोग बिल्ली, कुत्ते, गाय, बकरी आदि का पालन करते हैं. जिस तरह से अन्य पशुओं के पालन के लिए उचित देखभाल की आवश्यकता पडती हैं, ठीक उसी तरह बकरी पालन के लिए  उनकी देखभाल करना बहुत जरूरी हैं. पहले बकरी पालन आदि का व्यवसाय केवल गाँवों तक ही सिमित था. मगर जिस तरह दूध तथा उसके उत्पादों के दाम आसमान छूने लगे हैं शहरों में भी बकरी पालन का प्रचलन तेजी से बढ़ा हैं तथा इस व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण की मांग भी तेजी से बढ़ी हैं ताकि कम से कम जोखिम और खर्च से बकरी पालन के व्यवसाय में सफलता पाई जा सके.

देश में कई गोट फार्मिंग ट्रेनिंग सेंटर खुले हुए हैं, जहाँ आप रहकर बकरी पालन व्यवसाय की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. सही गाइड जैसे बकरी की अच्छी नस्लें उनका खानपान, देखभाल, प्रजनन आदि के बारे में सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता हैं. बकरी एवं पशु विशेष्यज्ञों द्वारा प्राप्त दिशानिर्देशों का पालन करके आप अपने व्यवसाय को अधिक प्रोफेसनल तरीके से करके कई गुणा लाभ अर्जित कर सकते हैं. इस तरह के ट्रेनिंग सेंटर में आपको 5 से दस हजार रूपये व्यय करने पड़ सकते हैं.

बकरी पालन में कितना फायदा है?

बकरी पालन के व्यवसाय में सबसे बड़ा लाभ यह हैं कि बेहद कम पूंजी के साथ इस व्यवसाय को शुरू किया जा सकता हैं, साथ ही इसके बाजार को लेकर भी कोई समस्या नहीं रहती हैं. बकरी को गरीब की गाय कहा जाता हैं. भारतीय ग्रामीण परिवेश में बड़े स्तर पर बकरी पालन का व्यवसाय किया जाता हैं. सबसे कम रिस्क और अधिक फायदे का व्यवसाय कहलाता हैं, इसमें जन्तु के रखरखाव में भी बेहद कम खर्च आता हैं.

बकरी पालन कैसे करते हैं?

एक प्रोफेशनल गोट फार्मर के लिए बकरी पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए यह आवश्यक हैं कि वह अच्छी नस्ल की बकरी के साथ ही कारोबार की शुरुआत करे. सिरोही, बरबरी आदि अच्छे नस्लें हैं, किसान मित्र को बकरी पालन शुरू करने से पूर्व इसकी बेसिक जानकारी होनी चाहिए ताकि वह नुकसान से बच सके.

बकरी पालन से कितनी कमाई होती है?

यदि बकरी को किसान का एटीएम कहा जाए तो गलत नहीं हैं, क्योंकि वह जब चाहे इसे बेचकर आसानी से पैसे कम सकता हैं. एक अच्छी नस्ल की दुधारू बकरी को बेचकर दस हजार रूपये तक कमाए जा सकते हैं. वैज्ञानिक तरीके से यदि बकरी पालन किया जाए तो यह अधिक फायदेमंद होता हैं.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों आपकों बकरी पालन की जानकारी | Goat Farming Business Plan In Hindi का यह लेख अच्छा लगा होगा, यदि आपकों इस आर्टिकल में दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें.

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