मनरेगा पर निबंध Essay on MGNREGA in Hindi

मनरेगा पर निबंध Essay on MGNREGA in Hindi महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (National Rural Employment Guarantee Act, 2005 mgnrega) हैं जिसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रो में हर वयस्क को आवेदन करने पर 15 दिनों के अन्दर स्थानीय सार्वजनिक कार्यो में काम दिया जाना हैं.

मनरेगा पर निबंध Essay on MGNREGA in Hindi

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मनरेगा पर निबंध Essay on MGNREGA in Hindi

महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना पर निबंध

रोजगार के बिना किसी भी व्यक्ति के जीवन का निर्वहन असम्भव हैं, लोकतंत्र में अपने सभी नागरिको को रोजगार के अवसर मुहैया करवाना सरकारों का दायित्व हैं. इसी कड़ी में भारत सरकार ने एक जनकल्याण योजना आरम्भ की जिन्हें महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना यानि मनरेगा (MNREGA) कहा जाता हैं.

प्रत्येक आम नागरिक को इस योजना के तहत उनकी क्षमता के अनुसार रोजगार के अवसर संभव हो पाए हैं. भारत में अपराध की जड़ बेरोजगारी को समझा जाता हैं, एक बेरोजगार व्यक्ति से समाज के लिए अच्छे कार्य की उपेक्षा नही की जा सकती हैं, इस दिशा में मनरेगा बेहद कारगार साबित हुई हैं.

तत्कालीन प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले से शुभारम्भ की. महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के कार्य को कई चरणों के तहत आरम्भ किया गया,

जिसका पहला चरण सत्र 2006-07 से शुरू हुआ, जिनमे देश के 27 राज्यों के ऐसे 200 जिलो का चयन किया गया. जहाँ रोजगार की बदहालात थे. अगले ही वर्ष महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का दूसरा चरण सत्र 2007-08 से आरम्भ किया गया. इस बार देशभर के 130 शहरों को इसके लिए चुना गया.

वर्ष 2008 में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना एक योजना की बजाय एक अधिनियम के रूप में पारित करवाया गया, जिनके तहत अब न सिर्फ ये एक कार्यक्रम रहा बल्कि लोगों को गारंटी के साथ रोजगार अवसर उपलब्ध करवाने का कार्य किया गया.

इन नए प्रावधानों को जोड़ने के साथ ही 2 अक्टूबरः 2009 को इस योजना का नाम राष्ट्रिय रोजगार गारंटी अधिनियम National Rural Employment Guarantee Act (नरेगा) से बदलकर महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) कर दिया गया.

मनरेगा योजना क्या है (What Is Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act)

इस योजना के तहत सभी ग्रामीण क्षेत्रोँ में रहने वाले प्रत्येक परिवार के कम से एक सदस्य को सरकार के इस अधिनियम द्वारा 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती हैं. चाहे दो परिवार के दो या तीन सदस्य भी इस 100 दोनों में विभाजित रूप से कार्यदिवस पुरे कर सकते हैं.

इस अधिनियम में रोजगार प्राप्ति के लिए किसी विशेष ट्रेनिग की भी आवश्यकता नही होती हैं. पूर्व निर्धारित मानदेय के अनुसार mnrega के तहत ग्रामीण क्षेत्र में 60 रूपये प्रतिदिन मजदूरी फिर 2009-10 में इसे 100 रूपये प्रतिदिन और अब यह 155 से 170 रूपये प्रतिदिन की जा चुकी हैं.

mnrega योजना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 33 फीसदी लाभ इस वर्ग को दिए जाने का प्रावधान भी हैं. आजादी के बाद से भारत सरकार द्वारा रूरल देवलोपमेंट के लिए कई रोजगार योजनाएं आरम्भ की थी.

उनके क्रियांव्ह्न में सबसे बड़ी समस्या इनके सही लाभार्थियों तक लाभ का नही पहुचना था. सरकार ने पूर्व की गईं गलतियों से कई नये ऐसें प्रयोग किये जिससे mnrega में भ्रष्टाचार को कम करने में मदद मिली हैं.

नरेगा ग्राम पंचायत प्रावधान (NREGA Gram Panchayat Rules)

  • इच्छुक उम्मीदवार के रोजगार कार्ड बनाना अनिवार्य
  • रोजगार के इच्छुक व्यक्ति के ग्राम पंचायत प्रधान के पास आवेदन करना होता हैं.
  • ग्राम पंचायत प्रत्येक परिवार को रोजगार कार्ड उपलब्ध करवाती हैं.
  • पहचान के लिए रोजगार कार्ड पर धारक की फोटो अनिवार्य
  • रोजगार के लिए आवेदन के 15 दिन में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान.
  • पंचायती अधिकारी द्वारा समय-समय पर सभी इच्छुक रोजगार के लोगों को जानकारी
  • प्रत्येक व्यक्ति को उनके निवास से 5 किमी के अंतर्गत दुरी पर रोजगार उपलब्ध करवाना.
  • 5 किमी से बाहर रोजगार देने की स्थति में अतिरिक्त किराए का प्रावधान
  • आधार कार्ड नंबर इसमे जोड़ने से भ्रष्टाचार में कमी देखि गईं हैं.

Mahatma Gandhi Nrega Yojana Benefit,mnrega Yojna In Hindi

भारत सरकार की यह ग्रामीण विकास योजना भारत की रीढ़ कहे जाने वाले गाँवों के मजदूरों और किसानो की खुशहाली का कारण बन रही हैं. इस योजना ने लोगों को शहरों की ओर पलायन को रोकने के साथ ही गाँवों के विकास को नई गति दी हैं.

कई ऐसे जनहितकारी कार्य जिनमे बाढ़ नियन्त्रण, जल प्रबन्धन, भूमि विकास, ग्रामीण सड़क और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के अभियान को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना ने अच्छी दिशा दी हैं.

गाँवों के लोगों का विकास,गरीबी, बेरोजगारी एवं आर्थिक विषमताओ को कुछ हद तक नियंत्रित करने में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना ने अहम भूमिका निभाई हैं. महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वन के 11 वर्ष बाद इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.

25 दिसम्बर 2001 को आरम्भ की गईं रोजगार आश्वासन योजना और जवाहर ग्राम सम्रद्ध योजना को मिलकर सम्पूर्ण रोजगार योजना की शुरुआत की गईं थी. अब महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में अनाज योजना को भी शामिल किया जा चूका हैं, जिनमे काम के बदले कम कीमत पर अनाज देने का प्रावधान हैं.

मनरेगा पर निबंध 2

यदि काम न दिया जाए,तो उन्हें बेरोजगारी भता दिया जाएगा. mnrega योजना के तहत हर परिवार को एक वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गईं हैं. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साधन उपलब्ध करवाना हैं.

तथा इसके अंदर अन्य उद्देश्य पुरे हो सकते हैं. जैसे उत्पादन सम्पदा का निर्माण, पर्यावरण सुरक्षा, महिलाओं का सशक्तिकरण, ग्रामीण शहरी पलायन पर अंकुश एवं सामाजिक समरसता को बढ़ाना.

महात्मा गाँधी राष्ट्रिय रोजगार गारंटी अधिनियम की धारा 17 (1) के अनुसार ग्राम सभा, ग्राम पंचायत के भीतर कार्य के निष्पादन को मोनिटर करेगी.

कोई भी व्यक्ति मनरेगा के तहत कार्य, भुगतान, mgnrega scheme पेमेंट स्टेटस, बेरोजगारी भत्ता, मनरेगा लेटेस्ट न्यूज़, नरेगा जॉब रिक्रूटमेंट, nrega circular के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट nrega nic पर भी विजिट कर सकते हैं.

मनरेगा में ग्राम पंचायत और ग्राम सभा

रोजगार गारंटी से जुड़ी कम से कम आधी योजनाओं का क्रियान्वन ग्राम पंचायतो द्वारा किया जाता हैं. यह लोगों द्वारा तय की गईं प्राथमिकता के आधार पर विकास के काम कराने में बड़ा अवसर हैं.

ग्राम पंचायत इस मामले में भी, अन्य मामलो की तरह, ग्राम सभा के प्रति जवाब देय होगी. रोजगार गारंटी में ग्राम सभा की प्रत्यक्ष भूमिका हैं. जैसे उपयोगी कार्य की पहचान करना, सामाजिक अंकेक्षण सम्पन्न करवाना आदि.

मनरेगा में ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की जिम्मेदारी

ग्राम पंचायत निम्नलिखित कार्यो के लिए जिम्मेदार हैं.

  1. परिवारों का पंजीयन करवाना.
  2. जॉब कार्ड निर्गत करना.
  3. काम का आवेदन स्वीकार करना.
  4. तिथि अंकित कर प्राप्ति रसीद देना.
  5. आवेदन के 15 दिनों के अन्दर काम मुहैया करवाना.
  6. श्रमिको को सही और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना.
  7. कार्यो की योजना बनाना.
  8. योजनाओं का संचालन करना.
  9. दस्तावेज का संधारण करना.
  10. ग्राम पंचायत में रोजगार गारंटी कानून के क्रियान्वन की निगरानी करना.

मनरेगा में ग्राम सभा के अधिकार

  1. कार्यो की योजना बनाना.
  2. रोजगार गारंटी के कार्यो का प्राथमिकतानुसार चयन करना.
  3. मनरेगा के कार्यो की निगरानी करना.

मनरेगा में कार्य पंजीकरण एवं जॉब कार्ड

रोजगार गारंटी कानून के क्रियान्वन की शुरुआत परिवारों के पंजीकरण और जॉब कार्ड के वितरण से होती हैं. ग्राम पंचायत में रहने वाले किसी भी परिवार को जॉब कार्ड के लिए आवेदन करने का अधिकार हैं.

ग्राम पंचायत का यह कर्तव्य हैं कि ऐसे परिवारों को 15 दिनों के अन्दर जॉब कार्ड दिलवाएँ. प्रत्येक परिवार को एक अलग जॉब कार्ड रखने का अधिकार हैं. हर जॉब कार्ड धारी परिवार को मनरेगा के तहत साल में 100 दिन के काम का अधिकार हैं.

यह परिवार के सदस्यों पर निर्भर हैं, कि इन 100 दिनों में आपस में बंटवारा किस तरह करे. उनकी अपनी इच्छा के अनुरुप, वे एक साथ अथवा अलग-अलग या परिवार के किसी सदस्य द्वारा पुरे 100 दिन का काम करने का निर्णय ले सकते हैं.

मनरेगा में जॉब कार्ड के लिए आवेदन कैसे करे

जॉब कार्ड पाने के लिए हर परिवार को मनरेगा यानि महात्मा गांधी राष्ट्रिय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के तहत निम्न प्रकार आवेदन करना जरुरी हैं.

  1. पंजीकरण हेतु आवेदन स्थानीय ग्राम पंचायत कार्यालय को दे सकते हैं.
  2. आवेदन में परिवार के उन सभी वयस्कों के नाम का उल्लेख होगा, जो मनरेगा के तहत काम करना चाहते हैं. नाम के साथ उम्र, लिंग, जाति, समूह आदि का नाम भी लिखना होगा.
  3. आवेदन सादे पेपर या प्रपत्र पर दिया जा सकता हैं.
  4. ग्राम पंचायतो को जॉब कार्ड हेतु मौखिक आवेदन भी स्वीकार करना चाहिए.
  5. पंजीकरण की प्रक्रिया ग्राम पंचायत कार्यालय में वर्ष भर जारी रहेगी.

सत्यापन

पंजीकरण हेतु आवेदन प्राप्ति के पश्चात ग्राम पंचायत को तुरंत हर आवेदन का सत्यापन करना चाहिए, यह देखने के लिए कि क्या निम्नलिखित शर्ते पूरी की गईं हैं.

  • आवेदक ग्राम पंचायत का स्थायी निवासी हो.
  • सभी आवेदक वयस्क हैं, यानि 18 वर्ष से अधिक की आयु के.
  • वह एक ही परिवार के सदस्य हैं.

सत्यापन के बाद सभी परिवारों के नाम ” पंजीकरण रजिस्टर” में दर्ज कर रखना चाहिए. जो ग्राम पंचायत कार्यालय में संधारित किया जाता हैं. हर पंजीकृत परिवार को एक अलग पंजीकरण नंबर दिया जाएगा.

मनरेगा जॉब कार्ड बनाने की विधि

सत्यापन के बाद हर पंजीकृत परिवार को निम्नलिखित प्रक्रिया द्वारा जॉब कार्ड दिया जाना जरुरी हैं.

  • आवेदन के 15 दिनों के अन्दर निर्गत किया जाना जरुरी हैं.
  • जॉब कार्ड में वयस्क सदस्य का फोटो लगाना अनिवार्य हैं.
  • हर जॉब कार्ड में कुछ आवश्य प्रविष्ठिया जैसे जॉब कार्ड नंबर, निर्गत करने की तिथि, निर्गत करने वाले अधिकारी के दस्तखत, परिवार का विस्तृत ब्यौरा आदि जानकारी होनी चाहिए.
  • जॉब कार्ड को सम्भाल के रखे यह 5 साल के लिए हैं.
  • जॉब कार्ड निशुल्क दिया जाना चाहिए.
  • आवेदक को उसके या उसमे लगे फोटो के लिए पैसे नही लिए जा सकते.
  • यदि जॉब कार्ड खो जाए या नष्ट हो जाए तो परिवार दुबारा जॉब कार्ड बनवा सकता हैं.

 मनरेगा में काम का आवेदन

महात्मा गांधी रोजगार गारंटी स्कीम का यह बुनियादी सिद्धांत हैं ” रोजगार की गारंटी” जिसका अर्थ हैं कि यदि कोई काम की मांग करता हैं तो उन्हें 15 दिनों के अन्दर काम दिया जाना चाहिए.

मनरेगा में काम के लिए आवेदन कैसे करे

काम का आवेदन सामान्यत ग्राम पंचायत के मुखिया या सचिव को देना चाहिए, हर आवेदन में यह स्पष्ट तौर से अंकित होना चाहिए.

  • आवेदक का जॉब कार्ड नंबर
  • किस दिन से काम चाहिए
  • कितने दिन का काम चाहिए

आवेदन सादे कागज या उपलब्ध होने पर फर्म पर दिया जा सकता हैं. हर आवेदन कम से कम 14 दिन के काम के लिए होना चाहिए.

व्यक्तिगत आवेदन के अलावा सामूहिक आवेदन भी किया जा सकता हैं. काम के लिए मौखिक आवेदन भी किया जा सकता हैं. यह उन लोगों के लिए उपयोगी हैं. जो पढना लिखना नही जानते हैं.

मनरेगा में कार्यस्थल पर आवेदन

लोग कार्यस्थल पर जाकर भी काम के लिए आवेदन कर सकते हैं. दिशा निर्देश के अनुसार उन लोगों को भी काम पाने में मदद मिलेगी. जो वहां की आवेदन प्रक्रिया को पहले पूरा नही कर पाए हो. औपचारिक रूप से आवेदन नही करना, किसी को काम नही मिलने का कारण नही होना चाहिए.

मनरेगा में बेरोजगारी भत्ता

काम मांगने के 15 के अन्दर काम नही मिलने व्यक्ति बेरोजगारी भत्ते का हकदार हैं,

  1. पहले 30 दिन न्यूनतम मजदूरी का एक चौथाई.
  2. 30 दिन न्यूनतम मजदूरी का आधा.

मनरेगा में मजदूरी का भुगतान

  1. सभी श्रमिक किये गये काम के आधार पर मजदूरी के हकदार हैं.
  2. समान काम के लिए समान भुगतान. महिला और पुरुष को काम के आधार पर एक समान मजदूरी प्राप्त करने का अधिकार हैं.
  3. मजदूरी का भुगतान 15 दिनों में किया जाना चाहिए.
  4. ऐसा ना होने पर राज्य सरकार को मुआवजा देना होगा.
  5. मजदूरी का भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस से ही होगा.
  6. हर मजदुर का अपना खाता हो चाहे वो पुरुष हो या महिला.

कार्यस्थल प्रबन्धन

कार्य स्थल प्रबंधक ” मैट” की रोजगार गारंटी के क्रियान्वन में महत्वपूर्ण भूमिका हैं. हर कार्यस्थल पर एक शिक्षित मैट होना चाहिए. एक मैट को ज्यादा से ज्यादा 50 मजदूरों के देख रेख की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.

ग्राम पंचायत द्वारा मैट का चयन एक खुले पारदर्शी एवं प्रतिभागी तरीके से करवाया जाना चाहिए. महिलाओं को भी मेट कार्य हेतु उपयुक्त संख्या में शामिल करना चाहिए. मैट पढ़ा-लिखा होना चाहिए. इसके अलावा कोई अन्य विशेष शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नही हैं.

कार्यस्थल पर सुविधाएँ

  • कार्यस्थल पर मजदूरो की सुविधा के लिए छाया पानी मेडिकल क्रेच जैसी सेवाओं का होना अनिवार्य हैं.
  • 6 वर्ष से कम उम्र के 5 से अधिक बच्चे हो तो उनकी देखरेख के लिए एक महिला को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.

मनरेगा पर दुर्घटना हो तो…

  • कार्यस्थल पर चोट लगने पर राज्य सरकार मुक्त में इलाज करवाने की सुविधा उपलब्ध करवाएगी.
  • कार्य स्थल पर दुर्घटना के कारण मृत्यु की स्थति में 25 हजार रूपये का भुगतान मृतक के परिवार को दिया जाएगा.

ग्राम सभा की जिम्मेदारी

  • नरेगा के तहत किये जाने वाले कार्य जैसे सड़क, तालाब, चेक डैम आदि ग्राम सभा द्वारा तय होंगे.
  • उन कामों की देखरेख करना ग्राम सभा की जिम्मेदारी हैं.
  • ग्राम सभा अकेक्षण भी करेगी, जिसमे नरेगा के सभी दस्तावेज़ की जांच होगी.

मास्टर रोल और दस्तावेज

  • मजदूरो की हाजरी मास्टर रोल में कार्यस्थल पर ली जाएगी.
  • नरेगा से सम्बन्धित दस्तावेज कोई भी, किसी भी समय निशुल्क देख सकता हैं.

मनरेगा में शिकायत

  • महात्मा गांधी राष्ट्रिय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की जांच की जिम्मेदारी के लिए ग्राम सभा निगरानी समिति बनाएगी.
  • इस ग्राम सभा में कम से कम दो बार इन योजनाओं का अकेक्षण करेगी.
  • आपकों शिकायत करने का और सात दिनों में जवाब पाने का अधिकार हैं.
  • पंचायत सेवक, रोजगार सेवक या कार्यक्रम पदाधिकारी से शिकायत करे.
  • शिकायत निवारण के लिए लोकपाल के पास भी जा सकते हैं.

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