मेसोपोटामिया की सभ्यता | Mesopotamian Civilization In Hindi

आज हम मेसोपोटामिया की सभ्यता Mesopotamian Civilization In Hindi को पढ़े. वर्तमान के इराक कुवैत , सीरिया का क्षेत्र बेबीलोन या बेबीलोनियन /सुमेरियन सभ्यता भी कहा जाता हैं. यह सिन्धु घाटी सभ्यता की समकालीन मानव सभ्यता थी, इसका कालक्रम 2300-2150 ई पू माना जाता हैं. आज हम मेसोपोटामिया के इतिहास को जानेगे.

मेसोपोटामिया की सभ्यता Mesopotamian Civilization In Hindi

मेसोपोटामिया की सभ्यता Mesopotamian Civilization In Hindi

मेसोपोटामिया यूनानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है दो नदियों के बिच की भूमि. इस देश का आधुनिक नाम ईराक है. इस प्रदेश को दजला और फरात नदियाँ सींचती है. मेसोपोटामिया को इसकी अर्द्धचन्द्राकार सी आकृति तथा खेती की दृष्टि से अत्यंत उर्वर होने के कारण उपजाऊ अर्धचन्द्र भी कहा जाता है.

प्राचीनकाल में मेसोपोटामिया प्रदेश के दक्षिणी भाग को सुमेर कहा जाता था जो इस सभ्यता का प्रमुख केंद्र था. सुमेर के उतर पूर्व के भाग को बाबुल (बेबीलोन) तथा अक्कद कहते थे. और उत्तर की ऊँची भूमि असीरिया कहलाती थी.

मेसोपोटामिया के राज्यों का उत्थान और पतन (Emergence and collapse of the states of Mesopotamia)

कालांतर में उतर के पर्वतीय प्रदेशों से आए सुमेरियन लोग मेसोपोटामिया में ही बस गये और उन्होंने एक अत्यंत सम्रद्ध सभ्यता का विकास किया.

सुमेरियन लोगों ने नगर राज्य की सरकार की स्थापना की. उर, लगाश, एरेक तथा एरिडू प्रसिद्ध राज्य थे. 2500 ईसा पूर्व लगभग सागाँन प्रथम ने, जो अक्कद से आया था सुमेरियन लोगों को जीत लिया. सुमेर और अक्कद दोनों राज्यों को मिलाकर उसने एक सुद्रढ़ राज्य की स्थापना की.

किन्तु 2100 ईसा पूर्व लगभग ये अक्कादियन लोग भी पराजित हो गये. बाबुल या बेबीलोन में एक नये सामी राजवंश का उदय हुआ. बेबीलोन नगर अब इस नये सम्राज्य का राजधानी केंद्र बन गया.

बेबिलोनिया के सबसे प्रसिद्ध सम्राट हब्बुराबी ने विभिन्न नगर राज्यों में होने वाली लड़ाईयां रोककर एक समस्त देश में एक जैसे कानून लागू कर दृढ राज्य स्थापित किया.

बेबिलोनिया की सभ्यता भी सुमेरियन सभ्यता पर आधारित थी. इसके अन्ततर मेसोपोटामिया में असीरियाई लोगों ने अपना सम्राज्य लगभग (1100 से 612 ईसा पूर्व) तक स्थापित किया.

असीरियाई लोगों ने सीरिया, फिलिस्तीन, फिनिशिया आदि प्रदेशों को जीतकर विशाल सम्राज्य स्थापित किया. इसके बाद काल्डियाई लोगों ने असीरियाई लोगों को पराजित कर एक दूसरे शक्तिशाली बेबीलोनियन सम्राज्य (612 ई.पूर्व से 539 ईसा पूर्व) का निर्माण किया.

किन्तु 539 ई.पू. उन्हें पारसियों के हाथों पराजित होना पड़ा. सुमेरिया, बेबिलोनिया, असीरिया तथा कोल्डिया की सभ्यताओं को समग्र रूप में मेसोपोटामिया की सभ्यता के नाम से जाना जाता है.

मेसोपोटामिया सभ्यता की विशेषताएं (7 characteristics of civilization mesopotamia)

  • हम्मूराबी की विधि संहिता– बेबीलोन के सम्राट ह्म्मूराबी ने अपनी प्रजा के लिए एक विधि संहिता बनाई थी. जो इस समय उपलब्ध सबसे प्राचीन विधि संहिता है. सम्राट ने इसे एक आठ फुट ऊँची पत्थर की शिला पर उत्कीर्ण करवाया था. हम्मूराबी का दंड विषयक सिद्धांत यह था कि जैसे को तैसा और खून का बदला खून.
  • मेसोपोटामिया का सामाजिक जीवन- मेसोपोटामिया सभ्यता में राजा पृथ्वी पर देवताओं का प्रतिनिधि माना जाता है. राजा व राजपरिवार के बाद दूसरा स्थान पुरोहित वर्ग का था. जो संभवत राजतंत्र की प्रतिष्ठा से पूर्व शासक रहे थे. मध्यम वर्ग में व्यापारी जमीदार व दुकानदार थे. समाज में दासों की स्थति सबसे नीचे थी. लगातार युद्ध होते रहने के कारण समाज में सेना का महत्वपूर्ण स्थान था.
  • मेसोपोटामिया सभ्यता का आर्थिक जीवन कृषि व पशुपालन- इस सभ्यता के लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि था. वहां के किसान भूमि की जुताई हलों से करते थे. और बीज कीप द्वारा बोते थे. खेतों की सिंचाई के लिए नदियों के बाढ़ के पानी को नहर तक ले जाकर बड़े बड़े बाँधो में इकट्ठा कर लेते थे. हलों से जुताई हेतु मवेशी काम में लेते थे. और उनकी नस्ल सुधार के लिए पशुओं का प्रजनन भी किया जाने लगा था.
  • व्यापार व उद्योग- मेसोपोटामिया की सभ्यता मूलतः एक व्यावसायिक सभ्यता थी. वहां देवता का मंदिर एक धार्मिक स्थल ही नही एक व्यावसायिक केंद्र भी था. यही सर्वप्रथम बैंक प्रणाली का विकास हुआ. मेसोपोटामिया का भारत की सिन्धु सरस्वती सभ्यता से व्यापारिक सम्बन्ध था. सिन्धु सरस्वती सभ्यता की कई वस्तुएं मेसोपोटामिया के उर नगर की खुदाई में मिली है.
  • लोगों की धार्मिक मान्यताएं– मेसोपोटामिया  लोग अनेक देवी देवताओं में विशवास करते थे. प्रत्येक नगर का अपना एक संरक्षक देवता होता था. उसे जिगुरात कहते थे. जिसका अर्थ है स्वर्ग की पहाड़ी. उर नगर मेसोपोटामिया के सबसे बाहरी नगरो में से एक था. उर नगर में जिगुरात का निर्माण एक कृत्रिम पहाड़ी पर ईंटो से हुआ था. उर के जिगुरात में तीन मंजिले थी और उसकी उंचाई 20 मीटर से अधिक थी. मेसोपोटामिया के लोग परलोक की अपेक्षा इस लोक के जीवन की व्यवहारिक समस्याओं पर केन्द्रित था. उनके पुरोहित भी व्यवसाय में रत थे.
  • मेसोपोटामिया सभ्यता का ज्ञान विज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में मेसोपोटामिया के लोगों की उपलब्धियाँ महत्वपूर्ण थी. खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने काफी उन्नति कर ली थी. उन्होंने सूर्योदय, सूर्यास्त तथा चन्द्रोदय, चन्द्रोस्त का ठीक समय मालूम कर दिया था. उन्होंने दिन और रात का समय ठीक हिसाब लगाकर पूरे दिन को 24 घंटो में बांटा था. साठ सैकंड का मिनट और साठ मिनट के एक घंटे का सबसे पहले विभाजन मेसोपोटामिया में ही किया गया था.रेखागणित के वृत को इन्होने 360 डिग्री में विभाजित करना प्रारम्भ किया था. इस तरह मेसोपोटामिया के निवासी विज्ञान और गणित की उन्नत परम्पराओं से अवगत थे.
  • स्थापत्य कला- मेसोपोटामिया के कलाकारों ने मेहराब का भी आविष्कार किया. मेहराब स्थापत्य कला की  एक महत्वपूर्ण खोज थी. क्योंकि यह बहुत अधिक वजन संभाल सकती थी. और यह देखने में बहुत ही आकर्षक लगती थी.
  • कीलाक्षर लिपि- मेसोपोटामिया की पहली लिपि का विकास सुमेर में हुआ. सुमेरियन व्यापारियों ने अपना हिसाब किताब रखने के लिए किली जैसे चिन्ह बनाकर लेखन कला का विकास किया, इसे कुनिफोर्म या कीलाक्षर कहते है.

मेसोपोटामिया का इतिहास संस्कृति

सुमेर सभ्यता को मेसोपोटामिया की सभ्यता के नाम से भी जाना जाता हैं. इसका शाब्दिक अर्थ होता हैं जो नदियों के बीच की भूमि. उस समय की दो नदियों दजला और फुरात के बीच के क्षेत्र मेसोपोटामिया कहलाता था.

आधुनिक इराक, उत्तर-पूर्वी सीरिया, दक्षिण-पूर्वी तुर्की तथा ईरान के कुजेस्तान के क्षेत्र में इस सभ्यता का विस्तार था. इस काल खंड में सुमेर, अक्कदी, बेबिलोन तथा असीरिया की सभ्यताएं विद्यमान थी.

ऊर, किश, निपुर, एरेक, एरिडि, लारसा, लगाश, निसीन, निनिवेह मेसेपोटामिया संस्कृति के बड़े शहर थे, जिनमें निपुर एक बड़ा व महत्वपूर्ण शहर था. इस शहर का देवता एनलिल सभी क्षेत्रों में पूजा जाता था.

मेसोपोटामिया और सिन्धु घाटी सभ्यता समकालीन थी, दोनों सभ्यताओं के बीच लोगों का आवागमन था इस कारण दोनों में कई समानताएं भी हैं. दोनों सभ्यता के लोग आस्तिक और मूर्तिपूजक थे. उस समय के समाज में मंदिर और देवताओं की मूर्ति और पूजा की परम्परा थी.

हिन्दुओं से काफी मिलता जुलता जीवन और परम्पराएं मेसोपोटामिया में थी. महीनों की संख्या बारह ही थी तथा काल गणना भी चन्द्रमा की गति पर आधारित थी. अधिकमास, अष्टमी और पूर्णिमा भी बड़ी तिथियाँ मानी जाती थी.

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