अशोकाष्टमी व्रत कथा व्रत की डेट पूजा विधि Ashokashtami Vrat Katha In Hindi

Ashokashtami Vrat Katha In Hindi : अशोकाष्टमी व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी के दिन रखा जाता हैं. अशोकाष्टमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र हो तो अधिक मंगलकारी माना जाता हैं. वर्ष 2019 अशोकाष्टमी व्रत की डेट 13 अप्रैल हैं. इस दिन अशोक-कलिका-प्राशन की प्रधानता होने के कारण इस व्रत को अशोकाष्टमी व्रत के रूप में जाना जाता हैं.

Ashokashtami Vrat Katha In Hindi

Ashokashtami Vrat Katha In Hindi

अशोकाष्टमी का त्यौहार चैत्र शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता हैं. इस दिन अशोक वृक्ष के पूजन का विधान बताया गया हैं. इसके सम्बन्ध में एक अति प्राचीन कथा हैं कि रावण की नगरी लंका में अशोक वाटिका के नीचे निवास करने वाली चिरवियोगिता सीता को इसी दिन हनुमान द्वारा अनूठी तथा संदेश प्राप्त हुआ था.

इसलिए इस दिन अशोक वृक्ष के नीचे भगवती जानकी तथा हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजन करना चाहिए. हनुमान द्वारा सीता की खोज कथा रामचरित मानस से सुननी चाहिए. ऐसा करने से स्त्रियों का सौभाग्य अचल होता हैं इस दिन अशोक वृक्ष की कलिकाओं का रस निकालकर पान करना चाहिए, इससे शरीर के रोग विकास का समूल नाश हो जाता हैं.

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अशोकाष्टमी व्रत कथा (Ashokashtami Vrat Katha)

अशोकाष्टमी व्रत रखने की मान्यता व तरीका

अशोकाष्टमी बुधवार हो तो इसे और भी शुभ माना जाता हैं. इस दिन व्रत रखकर अशोक वृक्ष की पूजा करने तथा अशोक के आठ पत्ते डले पात्र का जल पीने से व्यक्ति को समस्त दुखों से छुटकारा मिल जाता हैं. व्रत रखने की इच्छा वाले स्त्री पुरुष को सवेरे निवृत होने के बाद स्नानादि कर अशोक वृक्ष की पूजा करनी चाहिए तथा अशोक की पत्तियों का पान करते हुए इस मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए.

त्वामशोक हराभीष्ट मधुमाससमुद्भव।
पिबामि शोकसन्तप्तो मामशोकं सदा कुरु।।

ऐसी धार्मिक मान्यता हैं कि अशोक वृक्ष के नीचे बैठने से कोई शोक नहीं होता हैं. साथ ही अशोक के तले स्त्रियों के वास से उनके समस्त कष्टों का निवारण हो जाता हैं. अशोक को एक दिव्य औषधि माना गया हैं. संस्कृत में इसे हेम पुष्प व ताम्रपपल्लव भी कहा गया हैं.

अशोकाष्टमी के व्रत की कथा हिंदी में

ब्रह्माजी ने कहा चैत्र माह में पुनर्वसु नक्षत्र से युक्त अशोकाष्टमी का व्रत होता हैं. इस दिन अशोकमंजरी की आठ कलियों का पान जो करते हैं वे कभी शौक को प्राप्त नहीं होते है. अशोकाष्टमी के महत्व से जुडी कथा कहानी रामायण में मिलती हैं जिसके अनुसार रावण की लंका में सीताजी अशोक के वृक्ष के नीचे बैठी थी और वही उन्हें हनुमान जी मिले तथा भगवान राम का संदेश उन्हें यही प्राप्त हुआ था.

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