अतिवृष्टि का वह दिन निबंध Rainy Day Essay In Hindi

अतिवृष्टि का वह दिन निबंध Rainy Day Essay In Hindi यहाँ हिंदी निबंध आपके लिए दिया गया है, कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 ,9, 10 के बच्चों के लिए अतिवृष्टि के दिन पर निबंध दिया गया है. भीषण वर्षा का वह दिन अर्थात जिस दिन भीषण वर्षा हुई के विषय पर यहाँ हम 100, 200, 250, 300, 400 और 500 शब्दों में निबंध दिया गया है.

अतिवृष्टि का वह दिन निबंध Rainy Day Essay In Hindi

अतिवृष्टि का वह दिन निबंध Rainy Day Essay In Hindi

प्रस्तावना- हमारा राजस्थान शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश हैं. यहाँ वर्षा ऋतु का विशेष महत्व हैं. समय पर वर्षा होने से यहाँ की प्रकृति की उल्लसित एवं हरी भरी हो जाती हैं.

परन्तु प्रायः यहाँ पर अवर्षण की स्थिति रहती हैं और अतिवृष्टि तो कभी मुश्किल से होती हैं.

गाँव का परिवेश– हमारा गाँव पूर्वी राजस्थान में बनास नदी के समीप बसा हुआ हैं. वर्षा काल में कभी कभी नदी में बाढ़ आ जाती हैं तो निचले इलाके के लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं.

कुछ नुकसान भी होता हैं परन्तु बाढ़ का पानी उतरते ही गाँव में अमन चैन रहता हैं. लोग उपजाऊ भूमि का पूरा लाभ उठाते हैं. इसलिए नदी का किनारा अच्छा लगता हैं.

मूसलाधार वर्षा- दो साल पहले की बात है, वर्षा ऋतु प्रारम्भ हो गई थी. दिन भर काम धंधे से थके हारे लोग रात्रि में अपने घरों में सुखद नीद ले रहे थे.

उसी समय बादलों की गडगडाहट होने लगी और तेजी से वर्षा होने लगी. सुबह तक यही स्थिति रही. इससे बनास नदी का जल कुछ जल स्तर जरुर बढ़ा, परन्तु तब तक कोई हानि नहीं हुई.

लेकिन दिन का पहला पहर बीतते ही मूसलाधार वर्षा होने लगी. और एक घंटे की अतिवृष्टि से चारों ओर जल प्रवाह बढ़ने लगा. बादल निरंतर बरसते रहे, तो लोगों को कुछ आशंका होने लगी और इन्द्रदेव से प्रार्थना करने लगे.

अतिवृष्टि से विनाशलीला– मूसलाधार वर्षा निरंतर होती रही. इससे गाँव में चारों ओर पानी भरने लगा. बनास नदी का जल प्रवाह उफान लेता हुए गाँव के नीचले भागों में विनाश लीला करने लगा.

कुछ मकान और कच्चे झौपड़े उसमें बह गये. लोग ऊँचे स्थानों पर और मकान की छतों पर आश्रय लेने लगे.

कुछ लोग पंचायत भवन और स्कूल भवन में चले गये. सब अपनी चिंता करने लगे. गाँव में हाहाकार मचने लगा. कुछ मवेशी भी अतिवृष्टि में बह गये. सारे दिन रुक रुक कर तेज वर्षा होने लगी.

शाम को जब वर्षा का वेग रुका और नदी का जल उतरने लगा तो पता चला कि गाँव के तीन वृद्धजन अतिवृष्टि का शिकार हो गये.

कई घरों का अनाज भीग गया और काफी नुक्सान हुआ. इससे गाँव में मातम छा गया और लोग ईश्वर से अमन चैन की प्रार्थना करने लगे.

उपसंहार- गाँव में अतिवृष्टि से हुए नुक्सान को देखकर सभी लोगों को दुःख हो रहा था. पंचायत समिति के सदस्य राहत कार्य में लग गये. भीषण वर्षा थम जाने से लोग अपने नुक्सान को लेकर चिंता करने लगे.

उस दिन अतिवृष्टि का भयानक दृश्य जब याद आता है तो सारा शरीर कांपने लगता हैं. वर्षा तो हो, परन्तु विनाशकारी अतिवृष्टि न हो, यही भगवान् से प्रार्थना करते हैं.

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