खुदीराम बोस की जीवनी : Biography of Khudiram Bose in Hindi language

खुदीराम बोस की जीवनी Biography of Khudiram Bose in Hindi language: हमारी संस्कृति के प्रदूषण का ही नतीजा हैं कि आज कोई 17-18 साल का नौजवान आतंकवादी बनकर अपने ही देश के लोगों का काल बन जाता हैं, इस देश का इतिहास यह नहीं हैं तथा जिन्होंने खुदीराम बोस जैसे वीरों की जीवनी नहीं पढ़ी उन्हें नही पता कि वीरता क्या होती हैं. देश के पहले सपूत जिन्होंने मात्र अठारह साल की आयु में फांसी ली वो कोई और नहीं बल्कि खुदीराम बोस ही थे. देश में ऐसे प्रेरक भी हुए हैं मगर दूषित मानसिकता के चलते आज के दंगाइयों को ही हीरों माना जाता हैं.

खुदीराम बोस की जीवनी Biography of Khudiram Bose in Hindi

खुदीराम बोस की जीवनी Biography of Khudiram Bose in Hindi
पूरा नामखुदीराम बोस
प्रसिद्धिफांसी पर चढने वाले पहले युवा
जन्म३-१२-१८८९
स्थानयेवला गाँव (नासिक)
माता-पिताबाबू त्रैलोक्यनाथ बोस और लक्ष्मी प्रिया देवी
मृत्यु११ अगस्त १९०८
बहनअपरूप सरोजिनी, नानिबाला

खुदीराम बोस बचपन से ही क्रांतिकारी विचार के थे और उनके अंदर बचपन से ही भारत माता के प्रति आगाह प्रेम और अंग्रेजों के प्रति अथाह नफरत थी।

अंग्रेजों के प्रति अपनी नफरत के कारण ही खुदीराम बोस ने काफी जवान उम्र में ही अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करना चालू कर दिया। खुदीराम बॉस अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण अक्सर अंग्रेजी हुकूमत को काफी नुकसान पहुंचाते थे।

इस प्रकार एक दिन खुदीराम बोस को अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और फिर उन्हें सिर्फ 18 साल की कम उम्र में ही फांसी की सजा सुना दी गई।

खुदीराम बोस का प्रारंभिक जीवन

भारतीय क्रांतिकारी खुदीराम बोस का जन्म साल 1889 में पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में 3 दिसंबर को त्रिलोकनाथ बोस और लक्ष्मी प्रिय देवी के परिवार में हुआ था।

बोस के पैदा होने के कुछ समय के बाद ही इनकी माता पिता की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद इनका पालन-पोषण इनकी बड़ी बहन ने किया था।

खुदीराम के मन में बचपन से ही देश भक्ति के प्रति बहुत ही ज्यादा जोश था और इसीलिए अपने स्कूली शिक्षा की स्टार्टिंग में ही इन्होंने पॉलीटिकल एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करना चालू कर दिया।

खुदीराम बोस की देश प्रेम की भावना का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने देश प्रेम के खातिर अपनी नौवी कक्षा की एजुकेशन को छोड़ दिया था और देश की आजादी के लिए चलाए जा रहे विभिन्न सत्याग्रह में कूद पड़े।

Khudiram Bose In Hindi

खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसम्बर 1889 को मिदनापुर जिले के बहुवेनी गाँव में हुआ था. खुदीराम जब छः वर्ष के थे तब उनके माता पिता की मृत्यु हो गई थी. ऐसे में उनकी बड़ी बहन अनुरुपा देवी तथा बहनोई अमृतलाल ने खुदीराम का लालन पोषण किया.

जब बालक खुदीराम आठ वर्ष के थे तभी उनके मन में विचार आया भारत मेरा देश है, बंकिमचन्द्र के वन्दे मातरम नामक राष्ट्रीय और आनन्दमठ नामक उपन्यास से खुदीराम बहुत प्रभावित हुए. वे वंदेमातरम् के प्रसार कार्य में जुट गये.

अंग्रेजी काल में अपने राष्ट्र का स्वर बुलंद करना राष्ट्रद्रोह था अतः वंदेमातरम् के उद्घोष को राजद्रोह की श्रेणी में रख दिया. सरकार वंदेमातरम् का गान करने वालों का क्रूरता से दमन कर रही थी वही खुदीराम बेपरवाह होकर अपने अभियान में जुटे रहे.

इनके मन में देश भक्ति का जज्बा बड़ा ही अनोखा था नौवी कक्षा का बालक देश सेवा के लिए अपनी स्कूल छोडकर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो जाता हैं.

उनके निशाने पर हर वह अंग्रेजी अधिकारी रहा जिन्होंने भारतीय लोगों पर अत्याचार किये. ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेकने के उनके प्रयास अलौकिक थे. 19 वर्ष की आयु में पवित्र गीता को हाथ में लेकर फांसी के फंदे को चूमकर इतिहास रच दिया.

महान क्रांतिवीर खुदीराम बोस 

बचपन से ही देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत खुदीराम बोस ने अपने स्तर से अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों का काफी पुरजोर विरोध किया था और इसी के कारण सिर्फ 18 साल की छोटी सी उम्र में ही अंग्रेज गवर्नमेंट के द्वारा खुदीराम बोस को फांसी की सजा दे दी गई थी।

भारत माता के लिए कम उम्र में ही फांसी का फंदा झूलने वाले खुदीराम बोस के योगदान को तब तक याद किया जाएगा जब तक इस धरती पर सूरज चांद है।

क्रांतिकारी

जब अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन करने की बात कही तब भारतीय लोगों के द्वारा इसका काफी विरोध किया गया और इसी दौरान साल 1905 में खुदीराम बोस भी बंगाल विभाजन के बाद स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गए।

सिर्फ 16 साल की उम्र में ही खुदीराम बोस ने अंग्रेजी पुलिस स्टेशन के पास बम रखा और गवर्नमेंट ऑफिस को निशाना बनाया। खुदीराम बोस रिवॉल्यूशनरी पार्टी में भी शामिल हो गए और इसके बाद उन्होंने काफी बड़े पैमाने पर वंदे मातरम पर्चा बांटा।

अंग्रेजी पुलिस ने साल 1906 खुदीराम बोस को दो बार अरेस्ट किया। खुदीराम बोस ने बंगाल के गवर्नर की ट्रेन पर नारायणगढ़ रेलवे स्टेशन पर साल 1907 में 6 दिसंबर को हमला किया था परंतु उसमें गवर्नर बच निकले।

इसके बाद खुदीराम बोस ने वाटसन और पैम्फायल्ट फुलर नाम के दो अंग्रेजी ऑफिसर के ऊपर भी साल 1908 में हमला किया परंतु वह भी बच निकले।

पहला मुकदमा

फरवरी १९०६ में मिदनापुर में एक कृषि मेला लगा था जिसमें हजारों की संख्या में लोग आए थे, खुदीराम भी सत्येन्द्रनाथ बोस की कुछ कापियां लेकर गये तथा लोगों में बांटनी शुरू कर दी,

जब वहां के पुलिस कर्मियों को इस बात की सूचना मिली तो उन्होंने बोस को पकड़ने का प्रयास किया, मगर वे पुलिस वाले के मुहं पर मुक्का मारकर अपने साथियों के साथ भाग निकले, पुलिस द्वारा उन पर राजद्रोह का केस किया गया मगर सबूतों के अभाव में वे निर्दोष साबित हुए.

अंग्रेज अत्याचारियों पर पहला बम

३० अप्रैल १९०८ को बोस एक कार्ययोजना लेकर चले तथा उसे अंजाम तक पहुचाने के लिए किग्जफोर्ड के आवास के बाहर खड़े रहकर उसका इंतजार करने लगे.

वे और उनके एक साथी प्रफुल्लकुमार देर रात तक न्यायधीश के बाहर खड़े रहे, वहां के सुरक्षा गार्ड ने उन्हें चले जाने को भी कहा मगर उन्होंने अपनी तार्किकता के चलते उन्हें यकीन दिलाया कि वे किसी कार्य के लिए यहाँ आए हैं.

रात के ठीक आठ बजे का वक्त था. किंग्जफोर्ड कुछ बग्गियों के साथ अपने आवास पर आ रहा था. वे उनकी गाडी के पीछे दौड़ने लगे, रात के घने अन्धकार में वे नहीं पहचान पाए कि किस बग्घी में किंग्जफोर्ड था. उन्होंने एक गाड़ी पर बम फेक दिया, जज तो बस गया मगर इसमें दो गोरी महिलाएं इस हमलें में मारी गई.

खुदीराम बोस को फांसी

किग्स्फोर्ड पर बम फेकने के बाद वैनी रेलवे स्टेशन में पहुचने पर पुलिस द्वारा बोस को घेर लिया गया. चारों और से पुलिस से घिरने के बाद प्रफुल्ल कुमार ने स्वयं को गोली मार ली तथा बोस को जीवित पकड़ लिया गया. 11 अगस्त 1908 में मुजफ्फपुर जेल में बोस को फ़ासी दी गई.

अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा साल 1908 में 11 अगस्त के दिन खुदीराम बोस को सिर्फ 18 साल की जवान उम्र में ही फांसी दे दी गई। इस प्रकार भारत माता ने अपने एक लाल को खो दिया।हालांकि मौत के इतने सालों बाद भी खुदीराम को भारत का बच्चा-बच्चा जानता है।

यह भी पढ़े-

आशा करता हूँ दोस्तों Biography of Khudiram Bose in Hindi language में दी गई खुदीराम बोस की जीवनी खुदीराम बोस का इतिहास (Khudiram Bose History, Biography, Family, Birth, Details In Hindi) essay, speech का लेख पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

Leave a Comment

Your email address will not be published.