मोहनलाल सुखाड़िया का जीवन परिचय Biography of Mohan Lal Sukhadia In Hindi

Biography of Mohan Lal Sukhadia In Hindi मोहनलाल सुखाड़िया का जीवन परिचय: आधुनिक राजस्थान के निर्माता और सर्वाधिक समय तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहने वाले मोहनलाल सुखाड़िया एक अच्छे राजनेता व स्वतंत्रता सेनानी भी थे. इनका जन्म 31 जुलाई 1916 को राजस्थान के झालावाड में हुआ था. ये जैन धर्म के अनुयायी थे. इनके पिता पुरुषोत्तम लाल सुखाड़िया जी एक रणजी खिलाड़ी थे.

मोहनलाल सुखाड़िया का जीवन परिचय Biography of Mohan Lal Sukhadia In Hindi

मोहनलाल सुखाड़िया का इतिहास Biography of Mohan Lal Sukhadia In Hindi

भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुखाड़िया जी की संक्षिप्त जानकारी

जन्म31 जुलाई 1916
जन्म स्थानझालावाड़, राजस्थान
जीवन संगीइन्दुबाला सुखाड़िया
पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
मुख्यमंत्री काल13 नवम्बर 1954 – 9 जुलाई 1971
पिता का नामपुरुषोत्तम लाल सुखाड़िया
शिक्षाइंजीनियरिंग
निधन2 फ़रवरी 1982, बीकानेर

आधुनिक राजस्थान के निर्माता मोहनलाल सुखाड़िया का जन्म 31 जुलाई 1916 को नाथद्वारा में हुआ. 1939 ई से इन्होने राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लिया और मेवाड़ प्रजामंडल में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया. श्रीमती इंदुबाला के साथ अंतरजातीय विवाह कर इन्होने सामाजिक क्षेत्र में भी क्रांति पैदा कर दी.

1947 ई में मेवाड़ के प्रथम लोकप्रिय मंत्रीमंडल में सुखाड़िया को प्रजामंडल की ओर से मंत्री नियुक्त किया गया. 13 नवम्बर 1954 को सुखाड़िया राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, और सत्रह वर्षों तक राजस्थान निर्माण में अपनी भूमिका निभाई.

मुख्यमंत्री रहते हुए भी आर्थिक और सामाजिक जीवन से सामंती अवशेषों को नष्ट करने के लिए इनको संघर्ष करना पड़ा. इन्होंने राजस्थान में पंचायतीराज को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया. सुखाड़िया 1972-77 ई तक विभिन्न राज्यों के राज्यपाल रहे एवं 1980 ई में उदयपुर से इन्हें सांसद चुना गया.

2 फ़रवरी, 1982 को बीकानेर में इनका निधन हो गया था. ये अपने समय के राजस्थान में सबसे प्रसिद्ध नेता थे. अब तक सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले थे. जिन्होंने 17 वर्ष तक शासन किया. मोहनलाल सुखाड़िया कांग्रेस पार्टी के नेता थे जो कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु आदि राज्यों के राज्यपाल भी रह चुके हैं.

जैन धर्म से सम्बन्ध रखने वाले सुखाड़िया ने वी.जे.टी.आई.’ (वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजीकल इंस्टीट्यूट) से इंजीनियरिंग की तथा बाद में मुंबई आ गये, यहाँ से वो कांग्रेस के महासचिव चुने गये.

जब मोहनलाल सुखाड़िया मुंबई से लौटकर नाथ द्वारा आए तो इन्होने अपनी एक इलेक्ट्रिकल की शॉप खोली तथा यही से वो ब्रिटिश शासन के खात्मे तथा भारत में नव स्थापित सरकार के लिए योजनाएं बनाते थे. इनके निधन के बाद इंदुबाला सुखाड़िया उदयपुर से सांसद चुनी गई.

मोहनलाल सुखाडिया आरम्भिक जीवन

आधुनिक राजस्थान के निर्मातक कहे जाने वाले मोहनलाल सुखाड़िया राजस्थान के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञों में से एक हैं। राजस्थान के विकास में मोहनलाल सुखाड़िया जी का काफी बड़ा योगदान रहा है। इन्होंने मुख्यमंत्री के पद पर बैठकर काफी समय तक राज्य की जनता की सेवा की है।

राजस्थान के इस महान राजनीतिक का जन्म 31 जुलाई 1916 को राजस्थान के एक जैन परिवार में हुआ था। उनका जन्म राजस्थान के झालावाड़ नामक स्थान में हुआ था। मोहनलाल सुखाड़िया के पिताजी का नाम पुरुषोत्तम लाल सुखाड़िया है। मोहनलाल सुखाड़िया जी के पिताजी वर्तमान मुंबई के जाने-माने क्रिकेटर थे।

सुखाड़िया जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नाथद्वारा और उदयपुर से कि। आरम्भिक शिक्षा पूरी कर लेने के बाद मोहनलाल सुखाड़िया ने Veermata Jijabai technological institute से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। कॉलेज के दिनों से ही मोहनलाल सुखाड़िया जी की छवि प्रभावशाली थी, जिसके कारण वे छात्रों के मुख्य सचिव भी चुने गए थे। ‌

मोहनलाल सुखाडिया राजनैतिक करियर

सुखाड़िया जी राजस्थान के दिग्गज नेताओं में गिने जाते हैं लेकिन वे आखिर इतने महान कैसे बने यह जानने के लिए हमें उनके राजनैतिक करियर पर नजर डालनी होगी।

मोहनलाल सुखाड़िया मात्र 38 साल की उम्र में राजस्थान के मुख्यमंत्री बन गए थे उसके बाद उन्होंने 17 साल तक इस राज्य का कार्यभार संभाला।

Veermata Jijabai technological institute से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद यह छात्रों के बीच मुख्य सचिव बन गए थे। कॉलेज के मुख्य सचिव बनने के बाद मोहनलाल सुखाड़िया की मुलाकात उस समय अंग्रेजों से लड़ रहे स्वतंत्रता सेनानियों जैसे अशोक मेहता, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल से हुई थी।

स्वतंत्रता सेनानियों के कांग्रेस दल में मोहनलाल सुखाड़िया जी का योगदान हमेशा ही कार्यशील नेता के रूप में ही रहा है।

कम उम्र में राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने के बाद सुखाड़िया जी एक कुशल राजनेता के रूप में उभरकर सामने आए । मोहनलाल सुखाड़िया जी राजस्थान के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने उदयपुर विधानसभा को चार बार जीता था और चार बार विधानसभा जीतने के बाद वे जयपुर विधानसभा के लिए पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहनलाल सुखाड़िया जी दिल से लोगों की भलाई की। समाज कल्याण में योगदान के अलावा मोहनलाल सुखाड़िया किसानों की मदद करने के लिए अक्सर उनसे मिला करते थे और उनसे बात करके उनकी परेशानियों का समाधान करते थे।

मोहनलाल जी के साथ काम करने वाले नेता अक्सर यही कहते थे कि मोहनलाल जी लोगों की सहायता करने के लिए नंगे पैर ही निकल पड़ते थे। मोहनलाल जी के इन सभी कार्यों के कारण आज भी उन्हें इतना प्यार और याद किया जाता है। इतना ही नहीं उनके सम्मान में कई सारे कार्य किए गए हैं।

बता दें उनके सम्मान में उदयपुर में स्थित उदयपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 1984 में मोहनलाल सुखाड़िया जी रख दिया गया

मोहनलाल सुखाड़िया उपलब्धियां एवम रोचक तथ्य

अपने करियर में लोगों से अथाह प्यार एवम सम्मान पाने वाले मोहनलाल सुखाड़िया जी के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं/ तथ्य निम्नलिखित है।

  • मोहनलाल ने मेवाड़ में हो रहे राजनीतिक गतिविधियों में अपना स्थान बनाए रखने के लिए अंतरजातीय विवाह कर लिया था।
  • सुखाड़िया जी लोगों की मदद करने के लिए अक्सर पैदल ही निकल जाया करते थे।
  • मोहनलाल किसानों की मदद करने के लिए उनसे मिलते थे और उनकी मदद करते थे।
  • सुखाड़िया जी एक बहुत ही विद्वान राजनीतिक थे
  • सुखाड़िया जी के पिता पुरुषोत्तम लाल सुखाड़िया एक बहुत ही फेमस क्रिकेटर थे।

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