Biography of Vijay Singh Pathik In Hindi | विजय सिंह पथिक का जीवन परिचय

Biography of Vijay Singh Pathik In Hindi | विजय सिंह पथिक का जीवन परिचय: उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर जनपद के गाँव गुढावली में 24 मार्च 1882 को विजयसिंह पथिक का जन्म हुआ. इनका प्रारम्भिक नाम भूपसिंह था. 1907 में इनका शचीन्द्र सान्याल से सम्पर्क हुआ. 1915 की सशस्त्र क्रांति की योजना क्रियान्वित करने के लिए इन्हें खरवा ठाकुर गोपालसिंह की सहायतार्थ राजस्थान भेजा गया था.Biography of Vijay Singh Pathik In Hindi

Biography of Vijay Singh Pathik In Hindi

राजस्थान आते ही पथिक जी को गिरफ्तार कर नजरबंद की अवस्था में टाटगढ़ में रखा गया, जहाँ से ये फरार हो गये तथा किसानों के जन जागरण में लग गये. इन्हें राजस्थान के किसान आंदोलन का जनक कहा जाता हैं. साधु सीताराम दास के आग्रह पर वे बिजौलिया आए और वहां किसानों को सामंती शोषण से बचाने के लिए प्रयत्नशील हो गये.

इन्होने बिजौलिया किसान आंदोलन का नेतृत्व किया. पथिक ने बेगूं किसान आंदोलन का निर्देशन भी किया. इन्होने वर्धा से राजस्थान केसरी एवं अजमेर से नवीन राजस्थान और तरुण राजस्थान नामक पत्र निकाले तथा अजमेर में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की और गनेश शंकर विद्यार्थी एवं गांधीजी से मिलकर बिजौलिया किसान आंदोलन को देशव्यापी बना दिया.

विजयसिंह पथिक की जीवनी

भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी विजयसिंह पथिक की पारिवारिक पृष्ठभूमि देशभक्ति से जुड़ी हुई थी. इन्हें बचपन में ही रासबिहारी बोस और शचीन्द्रनाथ सान्याल जैसे क्रांतिकारियों का निर्देशन मिला. इनके बचपन का नाम भूपसिंह गुर्जर था. लाहौर षड्यंत्र केस में इनका नाम आने के बाद इन्होने अपना नाम बदलकर विजयसिंह रख दिया.

महात्मा गाँधी के राष्ट्रीय आंदोलनों से पूर्व ही इन्होने राजस्थान से बिजोलिया किसान आन्दोलन की शुरुआत कर किसानों में जागृति लाने तथा उन्हें अपने हितों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया. इनके पिता का नाम  हमीर सिंह तथा माँ का नाम कमल कुमारी था. पथिक के दादा ने भारत की आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया तथा वे शहीद हो गये थे.

अपनी अधेड़ आयु में पथिक जी ने जानकी देवी नामक शिक्षिका से शादी की. मगर वे पारिवारिक जीवन का आनन्द नही ले पाए, विवाह के कुछ समय बाद ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. पथिक ने राजस्थान सेवा आश्रम की शुरुआत की थी. इस संस्था का परिचालन उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था मगर वो इसे आगे तक जारी नहीं रख पाए इनका भी अफ़सोस उन्हें था.

आशा करता हूँ दोस्तों Biography of Vijay Singh Pathik In Hindi के बारे में दी गई यह संक्षिप्त जानकारी आपकों अच्छी लगी होगी. इस लेख को विस्तार देने की आवश्यकता हैं. अतः आपके पास विजयसिंह पथिक से जुड़ी कोई जानकारी हो तो कमेंट के जरिये हम तक पहुचाएं.

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