पंडित विश्वेश्वर नाथ रेऊ की जीवनी | Bishweshwar Nath Reu In Hindi

पंडित विश्वेश्वर नाथ रेऊ (Bishweshwar Nath Reu) एक भारतीय इतिहासकार थे। उन्होंने गौरीशंकर हीराचंद ओझा के सहायक के रूप में अपना करियर शुरू किया और उनसे प्राचीन डिंगल भाषा सीखी. बाद में, उन्हें इतिहास विभाग के रूप में नियुक्त किया गया. रातत्व विभाग सरदार संग्रहालय, पुष्पक प्रकाश (पांडुलिपि पुस्तकालय) और पूर्व के सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी रियासत के जोधपुर. महामहोपाध्याय उन्होंने एक इतिहासकार, अधिवक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई ,अंकशास्त्री और संस्कृतिकर्मी , वह अपने मारवाड़ के इतिहास के लिए जाने जाते हैं.

पंडित विश्वेश्वर नाथ रेऊ की जीवनी | Bishweshwar Nath Reu In Hindi

पंडित विश्वेश्वर नाथ रेऊ / रेउ का जन्म 2 जुलाई 1980 को हुआ. संस्कृत और अंग्रेजी भाषा का इन्हें अच्छा ज्ञान था. कर्नल जेम्स टॉड उसकी प्रेरणा के स्रोत थे. इतिहासकार गौरिशंकर हीराचंद ओझा का इसको सानिध्य मिला. ओझा से इन्होने डिंगल भाषा का ज्ञान प्राप्त किया.

जोधपुर महाराजा सुमेरसिंह ने उसे 1917 ई में राजकीय सेवा में नियुक्त किया. रेऊ को महाराजा उम्मेदसिंह ने राजकीय संग्रहालय के सहायक अधीक्षक के पद पर पदोन्नत किया. रेउ ने संग्रहालय में 1926 ई में पुरातत्व का एक अलग अनुभाग बनाया.

रेऊ ने जसवंत महाविद्यालय जोधपुर में संस्कृत विभाग के प्राचार्य पद पर भी कार्य किया. 1947 ई में रेऊ की मृत्यु हो गई. पंडित विश्वेश्वर नाथ रेऊ ने भारत के प्राचीन राजवंश, कोइन्स ऑफ मारवाड़, हिस्ट्री ऑफ द राष्ट्रकुटस, मारवाड़ राज्य का इतिहास, ग्लोरिज ऑफ मारवाड़ एंड द ग्लोरियस राठौड़, विश्वेश्वर स्मृति, राव भोज, ऋग्वेद का सामाजिक और ऐतिहासिक सार, राठौड़ दुर्गादास आदि ग्रंथों का लेखन किया.

रेऊ ने अपने इतिहास लेखन में पुरालेख सामग्री का प्रयोग किया. रेऊ ने केवल राजनीतिक इतिहास लिखा. ख्यात बात, लोककथाओं से लेकर पुरातत्व, पुरालेख आदि प्राप्त स्रोतों का अपने ग्रंथों में सन्दर्भ प्रयोग किया. वहीँ फारसी इतिहास से पुष्ट इतिहास ग्रंथों की सामग्री को कसौटी पर कसते हुए राजस्थान के इतिहास को भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बना दिया.

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