ब्रह्मोस मिसाइल का इतिहास | Brahmos Missile History In Hindi

ब्रह्मोस मिसाइल का इतिहास खासियत परीक्षण एक्सपोर्ट | Brahmos Missile History In Hindi भारत पिछले तीन दशकों से मिसाइल शक्ति में न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है बल्कि सबसे उन्नत तकनीक के प्रक्षेपास्त्र बनाने में भी कामयाब हुआ हैं इसका एक उदाहरण ब्रह्मोस, पृथ्वी, नाग जैसी मिसाइल भी हैं. रूस की मदद से भारत तेजी से जल, थल और नभ से दागी जाने वाली मिसाइल के कई सफल परीक्षण कर चूका हैं. भारत की तीनों सेनाओं के पास विश्व की सबसे तेज चलने वाले सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है साथ ही फिलिपिन्स जैसे कई देशों को इसका निर्यात भी किया जा रहा हैं. आज के आर्टिकल में हम इस मिसाइल सिस्टम के इतिहास निर्माण सफल परीक्षण निर्यात विशेषताएं क्षमता और भविष्य योजना के बारे में जानेगे.

ब्रह्मोस मिसाइल का इतिहास | Brahmos Missile History In Hindi

ब्रह्मोस मिसाइल का इतिहास | Brahmos Missile History In Hindi

क्या है ब्रह्मोस मिसाइल

यह एक मध्यम दूरी (लगभग 400 किमी) की मारक क्षमता वाली सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है जिसे जमीन, विमान, पानी के जहाज या पनडुब्बी के जरिये भी छोड़ा जा सकता हैं. रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने इसे मिलकर बनाया हैं. इस मिसाइल सिस्टम को रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल तकनीक के आधार पर तैयार किया हैं.

भारत की मिसाइल तकनीक को विश्व में अग्रणी बनाने में इसका बड़ा योगदान रहा हैं. १२-जून-२००१ को इसका पहला सफल परीक्षण हुआ तथा नवम्बर 2006 से इसे भारतीय सुरक्षा खेमे में शामिल कर लिया, आज भारतीय वायु सेना, थल सेना तथा नौ सेना इसे ओपरेट कर रही हैं. 3,000 किलो वजन वाली इस मिसाइल की लम्बाई 8.4 मीटर एवं व्यास 0.6 मीटर हैं. इस पर 200 किलोग्राम के न्यूक्लियर और गैर न्यूक्लियर वारहेड लगा होता हैं. इसके उड़ान की गति ध्वनि की स्पीड से करीब तीन गुना हैं.

इतिहास व नामकरण

कम ऊंचाई पर बेहद तीव्र गति से उड़ने वाली ब्रह्मोस मिसाइल दुश्मन के रडार सिस्टम को मात देने में सफल हैं. इसे वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता हैं. ब्रह्मोस मेनुवरेबल संस्करण का हाल ही में सफल परीक्षण हुआ हैं. पिछले 20 वर्षों के प्रयत्नों के बाद इसे विश्व की सबसे एडवांस मिसाइल बनाने में भी कामयाबी मिली हैं. इससे पूर्व सबसे तेज मानी जाने वाली अमेरिका की टॉम हॉक भी ब्रह्मोस की काबिलियत के आगे खिलौना साबित हुई हैं.

हाल ही में ब्रह्मोस में मेनुवरेबल तकनीक जोड़ी गई है जिसके चलते अब इसे अपने टारगेट पर हिट किये जाने से पहले ही रास्ता बदलने की काबिलियत हासिल हो गई हैं. युद्ध के हालात में जब लक्ष्य अपना स्थान बदलता रहता हो गतिशील हो उस स्थिति में भी ब्रह्मोस अपने टारगेट को फिर से रास्ता बदलकर हिट करने में सक्षम हैं.

ब्रह्मोस का उत्पादन अब भारत में ही हो रहा हैं. ब्रह्मोस कोर्पोरेशन इसके विकास के लिए निरंतर काम कर रही हैं. इसका नाम ब्रह्मोस रखने के पीछे का रहस्य यह है कि ब्रह्मोस का नाम दो हिस्‍सों- Brah और Mos से बना है, इसमें Brah यानी ब्रह्मपुत्र नदी और Mos यानी रूस की मोस्‍कवा नदी का नाम जोड़ा गया हैं.

ब्रह्मोस का नाम रखने के पीछे भगवान ब्रह्मा के सबसे विनाशक हथियार ब्रह्मास्त्र भी वजह हो सकती हैं. कहते है ब्रह्मास्त्र को अगर शत्रु पर छोड़ दिया जाता तो उसका समूल नाश तो तय ही था मगर उस क्षेत्र में अगले 12 वर्षों तक अकाल पड़ता था. साथ ही अगर दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकरा जाते तो प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी. वाकई में ब्रह्मोस की तैनाती के बाद चीन और पाकिस्तान बेहाल हो गये थे, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ को चिट्टी तक लिख डाली थी.

ब्रह्मोस की विशेषताएँ

प्रत्येक देश अपने रक्षा उपकरणों के विषय में बहुत कम डिटेल्स सार्वजनिक करते हैं ऐसी स्थिति में भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल के बारे में जो सार्वजनिक डाटा उपलब्ध है उसका तोड़ किसी भारत के पड़ोसी देश के पास नहीं हैं, ऐसे में इसके सीक्रेट और फाइटर प्लेन के कॉम्बो और रणनीति निश्चय ही दुश्मनों को हर रोज परेशान करने वाली होगी.

अगर हम ब्रह्मोस की खासियतों की बात करें तो हम निम्न तालिका के जरिये इसे आसानी से समझ सकते हैं.

लक्ष्य भेदनपूर्ण सटीकता के साथ हवा में मार्ग बदलकर अचूक वार कर सकती हैं.
प्रक्षेपकइसे पारम्परिक प्रक्षेपक या सीधे अथवा वर्टिकल रूप में भी दाग सकते है.
संचालकइसे भारत की तीनों सेनाएं (एयर फ़ोर्स, आर्मी, नेवी) ओपरेट कर रही हैं.
कारगर डिफेन्सयह महज 10 मीटर की न्यूनतम ऊंचाई पर भी उड़ सकती है तथा रडार की पकड़ में नहीं आती
एयर डिफेन्स फेलइसे रडार या एयर डिफेन्स सिस्टम पकड़ नहीं पाते इसलिए मार गिराना असम्भव
टारगेट हिट1200 यूनिट ऊर्जा प्राप्त कर यह मिसाइल टारगेट को ख़ाक कर सकती हैं.
टॉम हॉक से शक्तिशालीअमेरिकी मिसाइल टॉम हॉक से दो गुना गति से चलकर लक्ष्य पर भयंकर प्रहार करती हैं.
रेमजेट तकनीकयह हवा से ही अपनी एनर्जी जनरेट करती है जो अन्य मिसाइलों से उल्ट हैं.

ब्रह्मोस की भविष्य की योजना

वर्तमान में भारत के पास करीब 1500 से 3000 के बीच ब्रह्मोस मिसाइल है अब इनका निर्यात भी कई देशों को किया जा रहा हैं. भविष्य की योजना के तहत अब अगले दस वर्षों में 2000 नई ब्रह्मोस मिसाइल बनाई जाएगी. जिन्हें सुखाई फाइटर प्लेन में लगाया जाएगा. डीआरडीओ BrahMos-2 पर भी काम कर रहा हैं. ब्रह्मोस-2 की रेंज 290 किलोमीटर और मेक 7 की गति होने की संभावना है यह एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल होगी.

इसकी रेंज 800 किमी तक की थी मगर रूस 300 किमी से अधिक रेंज वाली मिसाइलों के निर्माण पर रोक वाली एक संधि का सदस्य देश है इस कारण इसकी रेंज को अब सिमित कर 290 किमी ही रखा जाएगा, साथ ही इस मिसाइल के नयें ईंधन फ़ॉर्मूले पर भी काम चल रहा हैं. साल 2011 में इसकी डिजायन का काम पूरा हो गया था. मिसाइलमैन अब्दुल कलाम के सम्मान में अब इसका नाम ब्रह्मोस-2 (के) कर दिया हैं.

परीक्षण प्रक्षेपण व क्षमता

18 दिसम्बर २००९ के दिन बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल टेस्ट किया गया था. इसके बाद के वर्षों में इसे एडवांस स्वरूप देते हुए निरंतर परीक्षण किये जाते रहे हैं. बंगाल की खाड़ी में इसे एक युद्ध पोत से टेस्ट किया गया था जिसने सफलतापूर्वक अपने टारगेट को हिट किया था. भारतीय युद्ध पोतों पर अब यूनीवर्सल वर्टिकल लांचर लगाए गये है जिनमें इस तरह की मिसाइले को दागा जाता हैं.

अगर हम ब्रह्मोस की क्षमता के बारे में बात करें तो यह 290 से 400 किमी तक की दूरी तक 300 किलो ग्राम के विस्फोटक को अपने साथ ले जा सकती हैं. यह ध्वनि की गति से तीन गुना तेज चलती है वहीँ इसके अगले वर्जन यानी ब्रह्मोस 2 में ध्वनि से सात गुना की गति होगी. इसे लम्बवत और उर्ध्वाधर दोनों स्थितियों में प्रक्षेपित किया जा सकता हैं.

ब्रह्मोस मिसाइल विवाद पाकिस्तान

हरियाणा के सिरसा से 9 मार्च 2022 को भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल गलती से पाकिस्तान की तरह दाग दी गई. करीब 150 किमी भारतीय क्षेत्र में सफर के बाद यह मिसाइल पाकिस्तानी क्षेत्र के 100 किमी अंदर जाकर मियाँ चन्नू इलाके में जा गिरी थी. भारत सरकार की ओर से इसे एक गलती बताया तथा खेद भी जताया, बताया गया कि नियमित रखरखाव के दौरान यह मिस फायर हो गई थी.

मिसाइल में कोई वार हेड न लगा होने के कारण कोई बड़ा नुक्सान नहीं हुआ मगर पाकिस्तान इसे बड़ी सुरक्षा चूक बताकर यूनाईटेड नेशंस की सिक्योरिटी काउंसलिंग ले गया. इस विवाद में दो तरह की बातें सामने आ रही हैं एक पक्ष का मानना है कि यह किसी ह्यूमन या टेक्निकल एरर की वजह से हुआ हैं जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि पाकिस्तानी एयर डिफेन्स और रडार सिस्टम की काबिलियत चेक करने के लिए इसे जानबुझकर अंजाम दिया गया था.

ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात

भारत वर्ष 2025 तक रक्षा निर्यात में 5 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को लेकर चल रहा हैं इसमें बड़ी कामयाबी ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम में मिल रही हैं. भारत ने फिलीपिंस के साथ एक रक्षा सौदे में 374 मिलियन डॉलर के कांट्रेक्ट पर हस्ताक्षर किये हैं.

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूती तथा चीन की सैन्य तानाशाही को रोकने के लिए यह डील बेहद अहम मानी जा रही हैं. आने वाले समय में भारत वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका व कई अन्य दक्षिणी एवं पूर्वी एशियाई देशों के साथ ब्रह्मोस सौदा कर सकता हैं.

यह भी पढ़े

उम्मीद करते है दोस्तों ब्रह्मोस मिसाइल का इतिहास | Brahmos Missile History In Hindi का यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा, अगर आपको इस लेख में कुछ नया जानने को मिला हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें.

Leave a Comment

Your email address will not be published.