कैप्टन अमरिंदर सिंह का जीवन परिचय Captain Amarinder Singh Biography In Hindi

कैप्टन अमरिंदर सिंह का जीवन परिचय Captain Amarinder Singh Biography In Hindi अमरिंदर सिंह भारतीय राजनीति में एक परिचित नाम है। फिलहाल अमरिंदर पंजाब विधानसभा के सदस्य हैं। अमरिंदर सिंह पंजाब में पटियाला राजघराने से आते हैं। और यह बतौर आर्मी ऑफिसर इंडियन आर्मी में कमीशण्ड ऑफिसर के पद पर सेवा दे चुके हैं। इसके साथ ही वे एक बार नहीं बल्कि दो बार मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। आज हम आपको इस लेख में कैप्टन अमरिंदर सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ ताजा एवम विशेष बातें बताने जा रहे है।

अमरिंदर सिंह का जीवन परिचय Amarinder Singh Biography Hindi

कैप्टन अमरिंदर सिंह का जीवन परिचय Captain Amarinder Singh Biography In Hindi
नाम-कैप्टन अमरिंदर सिंह
जन्म तिथि-1 जनवरी 1970
जन्म स्थान-पटियाला, पंजाब
माता का नाम-मोहिंदर कौर
पिता का नाम-यादवेंद्र सिंह
शिक्षा-ग्रेजुएट
पेशा-राजनीति
राजनीतिक पार्टी-(वर्तमान में कोई नहीं)
विवाह-प्रणीत कौर
भाई बहनहेमिंदर कौर (बहन)
राष्ट्रीयताभारतीय

कैप्टन अमरिंदर सिंह का जन्म वर्ष 1942 में 11 मार्च को पंजाब के ही पटियाला शहर में हुआ था। इनके पिता का नाम यादवेंद्र सिंह और माता का नाम महारानी श्री मोहिंदर कौर था।

अमरिंदर के पिता यादवेंद्र सिंह पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत थे, कहा जाता है उनके पिता यादवेंद्र सिंह द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इटली तथा वर्मा के दौरे पर भी गए थें। कैप्टन की प्रारंभिक शिक्षा वेल्हम ब्वॉयज स्कूल के साथ साथ लॉरेंस स्कूल से हुई थी। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह का  परिवार

अमरिंदर सिंह के पत्नी का नाम प्रणीत कौर है।  और यह अपने समय में लोकसभा सांसद भी रह चुकी हैं।  उन्होंने वर्ष 2009 से 20014 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय स्तर पर मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की बहन भी है, जिसका नाम हेमिन्दर कौर हैं। हेमिंदर कौर की शादी एक भूतपूर्व फॉरेन मिनिस्टर नटवर सिंह के  साथ हुई हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने कुछ दिनों शिरोमणि अकाली दल को भी ज्वाइन किया था।

अमरिंदर सिंह की पत्नी और अकाली दल के सुप्रीमो भूतपूर्व आईपीएस ऑफिसर सिमरनजीत सिंह मन की पत्नी दोनों आपस में बहनें हैं। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह एक आर्मी ऑफिसर के रूप में

अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद अमरिंदर सिंह ने देहरादून में स्थित दून विद्यालय की तरफ रुख किया। और अपनी आगे की पढ़ाई वही रह कर पूरी की। कुछ समय पश्चात इन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री स्कूल को जॉइन कर लिया।

वर्ष 1963 में अमरिंदर सिंह ने नेशनल डिफेंस एकेडमी और मिलिट्री स्कूल से स्नाकोत्तर की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात इंडियन आर्मी को जॉइन किया। 

वर्ष 1965 में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध में इन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था  और उस युद्ध में अमरिंदर सिंह सिख रेजीमेंट के कैप्टेन थें। 

कैप्टन का राजनीतिक केरियर

कैप्टन अमरिंदर सिंह को राजनीति में लाने वाले उनके स्कूल के मित्र और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी है। राजीव गांधी ने वर्ष 1980 में पहली बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की और अपने मित्र अमरिंदर सिंह को राजनीतिक गलियारों में खींचा।

राजीव गांधी ने ही अमरिंदर सिंह को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल किया। परंतु साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इंडियन आर्मी के खिलाफ ब्लू स्टार का ऑपरेशन किया तो इसके विरोध में अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। 

उसके बाद कैप्टन ने पंजाब के आंचलिक राजनैतिक पार्टी अकाली दल को ज्वाइन कर लिया। और तलवंडी विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपना राजनीतिक कैरियर आगे बढ़ाना प्रारंभ किया। चुनाव जीतने के पश्चात पंजाब में अकाली दल की सरकार में अमरिंदर सिंह को एग्रीकल्चरल फॉरेस्ट मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इसके बाद वर्ष 1992 में उन्होंने अकाली दल को छोड़ दिया और एक पार्टी शिरोमणि अकाली दल का गठन किया। परंतु कैप्टन की ये पार्टी कुछ खास नहीं रही और आगामी विधानसभा चुनाव में उनको बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा।

इस विधानसभा के चुनाव में शिरोमणि अकाली दल की हालत कुछ ऐसी हुई कि स्वयं अमरिंदर सिंह जिस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे, उन्हें सिर्फ 856 वोट मिले।

और अपनी इस हार से आहत होकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी पार्टी शिरोमणि अकाली दल को कांग्रेस में मिला लिया। बावजूद इसके उन्हें एक दफा फिर पटियाला विधानसभा सभा क्षेत्र से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। और इस बार उन्हें प्रोफेसर चंदूमाजरा ने हराया था। 

इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। पहली बार m 1999 से साल 2002 तक अमरिंदर सिंह पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहे।

इसके बाद अगले विधानसभा चुनाव 2002 में जब पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी तो अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद पुनः साल 2010 से 2013 तक वह पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने रहे थे।

सितंबर 2008 में अमरिंदर सिंह को विधानसभा की एक स्पेशल कमेटी ने विधानसभा से ही निष्कासित कर दिया था। वजह के तौर पर अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीनों को लेकर कैप्टन कि अनिमियतताएं देखी गई।

साल 2008 में अमरिंदर सिंह को पंजाब कांग्रेस कैंपेन का चेयरमैन बनाया गया। और साल 2013 तक इनको कांग्रेस वर्किंग कमेटी की तरफ से हमेशा बुलाया जाता रहा।

इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में अमरिंदर सिंह ने भाजपा के उम्मीदवार और तत्कालीन वित्त मंत्री को लगभग एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया। इसके अलावा पंजाब के विधानसभा चुनाव में यह 5 बार जीत हासिल करने में कामयाब रहे।

जिसमें से तीन बार पटियाला के विधानसभा सीट पर एक बार समाना और एक बार तलवंडी विधानसभा क्षेत्र से जीतकर यह विधानसभा में पहुंचे थे।

इसके बाद साल 2015 में 27 मई को अमरिंदर सिंह के हाथों में पंजाब कांग्रेस की बागडोर संभालने को दे दी गई। और इसे 2017 विधानसभा चुनाव की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। 

2017 में 11 मार्च को अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में ही कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव में एक बड़ी जीत दर्ज की। और कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 16 मार्च 2017 को पंजाब के 26वे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। 

कैप्टन ने छोड़ा कांग्रेस

कैप्टन अमरिंदर सिंह भारत की राजनीति में बहुचर्चित नामों में गिना जाता हैं। ये भारत के राजनीति इतिहास की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस से जुड़े हुए थें। लेकिन पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया। फिलहाल यह किसी पार्टी में नहीं है।

 पंजाब में  यह 26वे मुख्यमंत्री तौर पर चुने गए थें। परंतु कांग्रेस पार्टी से अलग होने से पहले कैप्टन ने अपने मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया हैं। और फिलहाल ये पंजाब में पटियाला विधानसभा क्षेत्र से एक विधायक मात्र हैं।

पंजाब की राजनीति में अमरिंदर सिंह ने इतिहास रच दिया था। और 2017 के विधानसभा चुनाव में 117 सीट में से 77 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई थीं। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह की ऑल इंडिया में जाट महासभा

कैप्टन अमरिंदर सिंह पिछले 30 वर्षों से पूरे इंडिया बार में जाट महासभा से जुड़े हुए हैं। और कई वर्षों तक इस महासभा के अध्यक्ष भी बने रहे थे।  इस संस्था से जुड़े रहते समय अमरिंदर सिंह ने कई बार जाटों और ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण की मांग की है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की शादी और बच्चे

कैप्टन अमरिंदर सिंह की शादी वर्ष 1964 में 31 अक्टूबर को प्रणीत कौर के साथ हुई। अमरिंदर सिंह की पत्नि प्रणीत कौर ने भी बतौर लोकसभा सांसद अपनी सेवाएं दी है। वह साल 2009 से 2014 तक विदेश मंत्री में बतौर राज्यमंत्री भी रही।

और इस विवाह से अमरिंदर सिंह को दो बच्चे भी हैं। जिनमें एक लड़का और एक लड़की है। लड़के का नाम रनिंदर सिंह और लड़की का नाम जय इंदर सिंह हैं। आपको बता दें की अमरिंदर सिंह की लड़की की शादी दिल्ली के एक व्यापारी गुरपाल सिंह के साथ हुई हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा लिखी गई किताबे

कैप्टन अमरिंदर सिंह की राजनीति के साथ-साथ लेखन कार्यों में भी काफी रूचि है। एक तरफ ये अपने अनुभवों को लिखने की कोशिश करते हैं तो दूसरी ओर इन्होंने युद्ध और सिखों के इतिहास पर भी बहुत कुछ लिखा हैं। 

इनके द्वारा लिखी गई कुछ पुस्तके है: – ‘ए रिजु टू फॉर’, ‘लेस्ट वी फॉरगेट’, ‘दि लास्ट सनसेट’, ‘राइज एंड फाल ऑफ लाहौर दरबार’, ‘दि सिख्स इन ब्रिटेन’, ‘150 इयर्स ऑफ फोटो ग्राफी’, आदि  उनकी प्रमुख रचनाएं है। “दि मानसून वॉर ऑफ यंग ऑफिसर्स रिमिंस– 1965 भारत पाक युद्ध” भी उनकी बेहतरीन रचनाओं में गिनी जाती है।

इस पुस्तक में उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच 1965 में हुए युद्ध में अपने अनुभव को बताया है। अमरिंदर सिंह की लेखनी में सबसे महत्वपूर्ण और ताजा लेखनी में उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘दि ग्रेट वॉर ऑफ 1914 टू 1918’ हैं। इन सभी पुस्तकों के अलावा कैप्टन के द्वारा लिखी गई कई अन्य पुस्तकें भी हैं जिनके बारे में ज्यादा जिक्र नहीं है।

यह भी पढ़े

उम्मीद करते हैं, कैप्टन अमरिंदर सिंह का जीवन परिचय Captain Amarinder Singh Biography In Hindi से जुड़ी ये सभी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। और हमारे इस आर्टिकल में कहीं से भी कोई त्रुटि नजर आए तो नीचे कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं हम उसे अपनी तरफ से सुधारने की कोशिश करेंगे। ऐसे ही बेहतरीन आर्टिकल पढ़ने के लिए आप हमारे ब्लॉग से जुड़े रहे।

कमेंट