बाल विवाह पर भाषण Child Marriage Speech In Hindi

बाल विवाह पर भाषण Child Marriage Speech In Hindi: भारतीय समाज स्वयं को प्रबुद्ध शिक्षित एवं आधुनिक बना रहा हैं मगर आज भी हमारे समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं कानूनी रूप से प्रतिबंधित किये जाने के बाद भी सिर उठा रही हैं. Child Marriage के कानून एवं हकीकत को जानने के लिए अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर राजस्थान व बिहार के देहाती क्षेत्रों का भ्रमण कर आइए आप हकीकत से रूबरू हो जाएगे. चाइल्ड मैरिज स्पीच इन हिंदी में हम बाल विवाह के बारे में यहाँ जानेगे.

Child Marriage Speech In Hindi

बाल विवाह पर भाषण Child Marriage Speech In Hindi

बाल विवाह पर भाषण- Child Marriage Speech

समस्त मेहमानों एवं मुख्य अतिथि महोदय, सर्वप्रथम बाल विवाह पर आयोजित इस भाषण समारोह में मुझे अपने उद्गार प्रकट करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद.

अक्सर हमारे समाज की कई बार ऐसी तस्वीर देश व दुनियां के मध्य पेश की जाती हैं कि क्षण भर के लिए हम भी चकरा जाते हैं कि ये किस समाज की बात कर रहे हैं.

मैं अपने भाषण के विषय पर आता हूँ, मुख्य अतिथि महोदय मैं प्रदेश के ग्रामीण इलाके से आता हूँ. वैसे तो यहाँ का परिवेश दुनियां की भागदौड की बेहद दूर एवं बेहद शांत हैं.

मगर रूढ़िवादिता के विषय में हम किसी को आगे नही निकलने देते हैं. हम कुछ भी बदलना पसंद नहीं करते यहाँ तक कि पहने हुए वस्त्र बदबू न दे तो उन्हें भी नहीं, ठीक ऐसा ही बाल विवाह के विषय में हैं.

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समाज में बाल विवाह कुप्रथा के प्रचलन का मूल कारण मैं जो समझता हूँ वह जानकारी का अभाव हैं. आज भी समाज के अधि कतर लोगों का मानना हैं कि बाल विवाह हमारे धर्म से जुड़ा विषय हैं अथवा यह हमारे पुरखों द्वारा शुरू की कोई परम्परा व रस्म हैं. मगर सच्चाई इन दोनों दावों को खारिज कर देती हैं.

वैसे तो हम सभी परिचित होंगे कि बाल विवाह क्या हैं मगर किसी को इस विषय में अधिक जानकारी नहीं हैं तो बताना चाहूँगा. जन्म के बाद 2-3, 5-6, 8-10 अर्थात ऐसे समय में नन्हे बालक बालिकाओं का विवाह कर दिया जाता हैं जिन्हें विवाह जैसे संस्कार का क, ख भी नहीं पता हो.

भारत में बाल विवाह मध्यकाल में मुगलों की देन हैं. बाहरी आक्रमणकारियों के भय से माँ बाप अपने  नन्हे बालक बालिकाओं का विवाह करवाकर जिम्मेदारी से मुक्त होने लगे, यह चलता रहा और समाज ने इसे एक प्रथा के रूप में स्वीकार कर लिया.

एक समय यह समाज के लिए जरूरत थी मगर आज वैसी कोई परिस्थिति नहीं हैं अतः हमें समाज में लोगों तक यह बात पह चानी होगी.

आज हर ओर से बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद की जा रही हैं. सरकार ने कठोर कानूनों का प्रावधान भी किया हैं. मगर इन सबके बावजूद भी चोरी छिपे बाल विवाह हो रहे हैं.

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जिस तेजी से दुनियां बदल रही हैं हमे भी अपने विचारों को नये दौर के सांचे में ढालना होगा. विवाह जैसे पवित्र प्रसंग व जीवन भर साथ रहने के रिश्ते को लड़के व लड़की की पसंद के अनुसार ही बनाने चाहिए न कि माँ बाप की मर्जी से.

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