परिसीमन आयोग क्या होता है | Delimitation Commission In Hindi

Delimitation Commission In Hindi परिसीमन आयोग क्या होता है: पूरे देश में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा खीचने के उद्देश्य से राष्ट्रपति एक स्वतंत्र संस्था का गठन करते हैं, जिसे परिसीमन आयोग कहा जाता हैं. यह चुनाव आयोग के साथ मिलकर कार्य करता हैं. परिसीमन आयोग, परिसीमन के वाद, प्रत्येक क्षेत्र की सरंचना को देखकर अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए क्षेत्रों को आरक्षित करता हैं.

Delimitation Commission In Hindi परिसीमन आयोग क्या होता है

परिसीमन आयोग क्या होता है | Delimitation Commission In Hindi

परिसीमन आयोग– पूरे देश में निर्वाचित क्षेत्रों की सीमा खीचने के उद्देश्य से राष्ट्रपति द्वारा एक स्वतंत्र संस्था का गठन किया जाता हैं जिसे परिसीमन आयोग कहते हैं.

परिसीमन आयोग के कार्य– परिसीमन आयोग के दो प्रमुख कार्य हैं.

  • निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करना- परिसीमन आयोग आम निर्वाचन से पहले पूरे देश में निर्वाचन के क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करता हैं. इस कार्य को वह चुनाव आयोग के साथ मिलकर करता हैं.
  • आरक्षित किये जाने वाले निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण- प्रत्येक राज्य में आरक्षण के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का एक कोटा होता हैं जो उस राज्य में अनुसूचित जाति या जनजाति की संख्या के अनुपात में होता हैं. परिसीमन के बाद परिसीमन आयोग प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में जनसंख्या की संरचना को देखता हैं जिन निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या सबसे ज्यादा होती हैं उसे उनके लिए आरक्षित कर दिया जाता हैं.

परिसीमन का उद्देश्य

अनुसूचित जातियों के मामले में परिसीमन आयोग दो बातों पर ध्यान देता हैं. आयोग उन निर्वाचन क्षेत्रों को चुनता है जिनमें अनुसूचित जातियों का अनुपात ज्यादा होती हैं लेकिन वह इन निर्वाचन क्षेत्रों को राज्य के विभिन्न भागों में फैला भी देता हैं ऐसा इसलिए कि अनुसूचित जातियों को पूरे देश में बिखराव समरूप हैं. जब कभी भी परिसीमन का काम होता हैं इन आरक्षित क्षेत्रों में कुछ परिवर्तन कर दिया जाता हैं.

भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा, लोकसभा तथा विधानसभा की सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर किया जाता हैं. हरेक राज्य की जनगणना के आकंड़ो के आधार पर निर्वाचन क्षेत्र विभक्त हो जिससे केंद्र एवं राज्य के बिच निर्वाचन सम्बंधी विवादों को कम से कम किया जा सके साथ ही विभिन्न जातियों व समुदायों को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जा सके, यह कार्य राष्ट्रीय परिसीमन आयोग करता हैं.

पहला परिसीमन आयोग

जब भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ तो उसमें लोकसभा के कुल क्षेत्रों के सम्बन्ध में यह कहा गया कि देश भर में 500 तक ही लोकसभा सदस्य होंगे. वर्ष 1952 में संसदीय / विधानसभा क्षेत्रों के व्यवहार्य क्षेत्रीय विभाजन का स्वतंत्र प्रभार एक नई संस्था परिसीमन आयोग को दिया गया. इसके बाद 1952,1963,1973 और 2002 में फिर से आयोग का गठन किया गया. जिन्होंने नवीनतम जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का विभाजन किया गया था.

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परिसीमन की प्रक्रिया

परिसीमन की प्रक्रिया में किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है बल्कि आबादी के आधार पर उसकी भौगोलिक सीमाओं में बदलाव किये जाते हैं जैसे किसी बड़े दो निर्वाचन क्षेत्रों के थोड़े थोड़े हिस्से को कम करके नया निर्वाचन क्षेत्र बनाना. इसमें अंतिम एवं नवीनतम जनगणना के आंकड़े आधार बनाएं जाते हैं.

किसी भी राज्य, जिले या निर्वाचन क्षेत्र में इस तरह के बदलावों के लिए परिसीमन आयोग द्वारा एक आधार पत्र तैयार किया जाता है तथा इसे सभी सदस्यों के सम्मुख रखा जाता हैं. प्रस्ताव के विषय में अंतिम निर्णय केवल आयोग ही करता हैं. इस आधार पत्र पर आयोग के सदस्यों की सकारात्मक, नकारात्मक प्रतिक्रियाओं और सुझावों को सम्बन्धित राज्य के राजपत्र और दो न्यूज पेपर में प्रकाशित करवाया जाता हैं.

साथ ही राज्य या क्षेत्र के लोगों को इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां भेजने को कहा जाता हैं. इन जन सुझावों पर चर्चा के लिए एक जन सुनवाई का आयोजन किया जाता हैं. आयोग इन सुझावों पर मंथन के बाद अपना अंतिम आदेश जारी करता हैं.

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन Jammu Kashmir Delimitation

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ पूर्वोत्तर के चार राज्यों में परिसीमन की मंजूरी के बाद इन राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनः निर्धारण किये जाने की प्रक्रिया चल रही हैं. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 के तहत केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में परिसीमन किया जाएगा.

जम्मू कश्मीर की 107 विधानसभा सीट बढ़कर अब 114 हो जाएगी. जम्मू-कश्मीर में अंतिम परिसीमन वर्ष 1995 में हुआ था. पाक अधिकृत कश्मीर हो छोडकर अब जम्मू कश्मीर में 90 निर्वाचन क्षेत्र हो जाएगे इससे पूर्व इनकी संख्या 83 थी. लोकसभा सीट की बात करें तो जम्मू कश्मीर से 5 एवं लद्दाख से एक लोकसभा सीट हैं.

कैसे काम करता है परिसीमन आयोग

मुख्य चुनाव आयुक्त परिसीमन आयोग के अध्यक्ष होते हैं इन्ही के द्वारा राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण किया जाता हैं. आयोग जनगणना के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों को आरक्षित करने का काम भी करता हैं. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दस वर्षीय जनगणना के पश्चात परिसीमन किया जाना हैं.

इसी आधार पर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन साल 1971 में तथा विधानसभाओं का 2001 में किया गया. वर्ष 2026 में सभी राज्यों में पुनः परिसीमन की प्रक्रिया को दोहराया जाना हैं. परिसीमन की प्रक्रिया में चुनाव आयोग के कर्मचारियों की भूमिका सबसे बढ़कर होती हैं उनके द्वारा जिले, तहसील और गाँव के जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सीमांकन किया जाता हैं, इसके अभ्यास में करीब पांच वर्षों का समय लग जाता हैं.

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