देश के प्रति हमारा दायित्व निबंध | Desh Ke Prati Hamara Dayitva Essay In Hindi

Desh Ke Prati Hamara Dayitva Essay In Hindi के इस निबंध में हम देश के प्रति हमारा दायित्व निबंध अर्थात राष्ट्र के प्रति नागरिकों के कर्तव्य नैतिक जिम्मेदारी क्या है. यहाँ कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चों के लिए अपने वतन के प्रति Desh Ke Prati Hamara Dayitva Essay In Hindi का निबंध आर्टिकल पैरोग्रफ आदि यहाँ उपलब्ध करवा रहे हैं.

Desh Ke Prati Hamara Dayitva Essay In Hindi In 500 Words देश के प्रति हमारा दायित्व निबंध | Desh Ke Prati Hamara Dayitva Essay In Hindi

Desh Ke Prati Hamara Dayitva Essay In Hindi

For Students & Teachers Essay On Desh Ke Prati Hamara Dayitva Essay In Hindi: प्रत्येक राष्ट्र और समाज का भविष्य उनके सुनागरिकों पर निर्भर रहता हैं. राष्ट्रीय उत्थान के लिए केवल भौतिक सम्रद्धि ही पर्याप्त नहीं रहती हैं. इसके लिए तो वैचारिक, शैक्षिक, बौद्धिक एवं नैतिक चिंतन की परिपक्वता भी उतनी ही जरुरी हैं.

वर्तमान काल में लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था के अंतर्गत अधिकारों को प्राप्त करने की बात, राजनीतिक सत्ता को प्राप्त करने की बात हर कोई करता है. परन्तु कर्तव्य बोध और नैतिक दायित्व की भावना लोगों में वैसी दिखाई नहीं देती हैं. हमारे सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में नैतिकता की कमी आ गई हैं. इस कारण हम राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को भूलते जा रहे हैं.

वर्तमान राष्ट्रीय स्वरूप

स्वतंत्रता प्राप्ति के अनन्तर देश के कर्णधारों ने संविधान निर्माण कर धर्मनिरपेक्ष संघीय शासन व्यवस्था का प्रवर्तन किया और सभी नागरिकों को वयस्क मताधिकार देकर इसे लोकतंत्र का स्वरूप दिया.

आज विश्व में भारतीय लोकतंत्र को सबसे बड़ा माना जाता हैं. और इसमें सामाजिक विकास की प्रक्रिया भी निरंतर चल रही हैं. परन्तु आज सारे देश में नवयुवकों में बेरोजगारी, बेकारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के कारण उदंडता, अनुशासनहीनता और तोड़ फोड़ की प्रवृत्ति बढ़ रही हैं.

सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार एवं अनुत्तरदायित्व की भावना तीव्र गति से फ़ैल रही हैं. राजनीति में भाई भतीजावाद, स्वार्थ लोलुपता, चरित्रहीनता और छल कपट अत्यधिक बढ़ रहा हैं. इससे हमारा राष्ट्रीय चरित्र दूषित हो रहा हैं.

राष्ट्र के प्रति हमारा नैतिक दायित्व

अपने राष्ट्र के नागरिक होने से हमे जहाँ संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार प्राप्त है, वहां हमारे कुछ कर्तव्य भी है. इसलिए हमें अपने नैतिक दायित्वों का निर्वहन करने में पूर्ण सावधान रहना चाहिए. हमें ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए, जिनसे संविधान का उल्लंघन हो, राष्ट्रीय विकास और सद्भाव अवरुद्ध हो.

हमें अपने व्यक्तित्व के साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का हित चिंतन करना चाहिए. राष्ट्र की सुरक्षा चहुमुखी प्रगति, जन कल्याण, सामाजिक उन्नति और सुव्यवस्था के प्रति हमें अपने दायित्वों का निर्वाह करना चाहिए, इसलिए हमें नैतिक दायित्वों का निर्वाह करना चाहिए.

अपने राष्ट्र में सच्चरित्र का निर्माण करना हमारा प्रथम दायित्व हैं. क्योंकि सच्चरित्र से ही समाज को मंगलमय बनाया जा सकता हैं. अतः हमारा राष्ट्र के प्रति यह नैतिक दायित्व है कि हम त्याग भावना, सच्चरित्रता, देशभक्ति, समाज सेवा आदि श्रेष्ट गुणों को अपनाकर पूरे समाज को इसी तरह निष्ठावान बनावें.

उपसंहार

राष्ट्र निर्माण का कार्य जन जागृति एवं कर्तव्य बोध से ही सम्पन्न हो सकता हैं. उक्त सभी बातों का चिंतन करते हुए दायित्वों का निर्वाह करते रहे, तभी हम राष्ट्रीय कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं. इसलिए यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम सुनागरिक बने, अपनी चारित्रिक नैतिक उन्नति का प्रयास करे.

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