एकाग्रता क्या है अर्थ परिभाषा | Concentration Meaning In Hindi

एकाग्रता क्या है अर्थ परिभाषा | Concentration Meaning In Hindi: नमस्कार मित्रों आज के लेख का शीर्षक एकाग्रता है एकाग्रता शब्द बड़ा रोचक है. इसके बहुत से पहलुओं से आप रूबरू होंगे हम एकाग्रता शब्द के अर्थ को जानेंगे तथा एकाग्रता शब्द की विस्तृत व्याख्या करने का प्रयास करेंगे. Concentration In Hindi में हम जानेगे कि Concentration का सही अर्थ (Meaning) और परिभाषा (definition) को इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेगे.

एकाग्रता क्या है अर्थ परिभाषा | Concentration Meaning In Hindi

एकाग्रता क्या है अर्थ परिभाषा Concentration Meaning In Hindi

Concentration is very important in life, we must concentrate to get success in life. But before that we need to know what is concentration, what is the meaning of concentration, here we know what is called concentration in Hindi. Today’s Short essays, speeches, paragraphs will go into detail about what concentration means.

संस्कृत के श्लोकों में एकाग्रता को सभी तपो में सर्वोपरि बताया गया है. एकाग्रता को प्रत्यक्ष रूप से एक मूर्तिकार द्वारा मूर्ति बनाने तथा एक चित्रकार द्वारा चित्र बनाते समय उसकी मनो स्थिति के रूप में व्यक्त किया जा सकता है. लियोनार्डो द विंची ने जब मोनालिसा को उकेरा होगा. तब उसकी एकाग्रता का स्तर महसूस करने का प्रयास करिए.

एकाग्रता स्मरण शक्ति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है इसे मन के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए. जहां तक मस्तिष्क की बात है. मस्तिष्क व्यक्ति के जीवन की यादों तथा अनुभवों का गठजोड़ है, और उसके आधार पर कल्पना शक्ति का प्रयोग है. परंतु एकाग्रता मन के ज्यादा नजदीक है. अब हम एकाग्रता शब्द के विभिन्न पहलुओं पर नजर डालते हैं. और समझने का प्रयास करते हैं, कि वास्तविकता में एकाग्रता किस प्रकार मानव के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. तथा एकाग्रता कैसे बना कर रख सकते हैं. और एकाग्रता के महत्व को रेखांकित करने का प्रयास करते हैं. इस लेख  को एकाग्रता के साथ पढ़कर आप इसके बहुत से पहलुओं को आसानी के साथ समझ सकते हैं.

एकाग्रता अर्थ मीनिंग, डेफिनिशन Concentrated Meaning In Hindi

मन का स्वाभाविक आयाम है. कि यह किसी एक बात पर ज्यादा समय तक रुक नहीं सकता कभी इधर तो कभी उधर भटक ही जाता है. भले ही आप किसी बात को ज्यादा समय तक सोचना चाहते हैं. परंतु आपका मन रुकता नहीं है किसी एक बिंदु पर जमता नहीं है. अब जरा सोचिए कि जिस बिंदु पर आप चिंतन करना चाह रहे हैं.

परंतु आपका मन उस  पर रुकना ही नहीं चाहता रुक ही नहीं रहा तो आशा अनुरूप परिणाम पर आप कैसे पहुंच पाएंगे, और जब ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. तब बड़े से बड़ा चतुर तथा ज्ञानी या यूं कहें कि समझदार व्यक्ति भी अपने काम को ढंग से नहीं कर पाएंगे और ऐसा होने पर उसके निर्णय  असंतोषजनक तथा अपूर्ण होने के पूरे चांस रहते हैं.

मन की एकाग्रता का सीधा संबंध इंटरेस्ट या रुचि  से है. अरुचिकर विषयों में मन नहीं लगता एकाग्रता नहीं रहती, इसलिए किसी भी विषय पर एकाग्रता बढ़ाने की पहली शर्त उस विषय में रुचि पैदा करना है. ज्यादातर विद्यार्थियों को आपने देखा होगा. की मैथ जैसे विषय में उनकी रूचि नहीं होती उनसे बचने का प्रयास करते हैं परंतु जो विषय रुचिकर लगते हैं. उन्हें दिलचस्पी के साथ पढ़ा जाता है. अब बात करते हैं वास्तविकता की ,इस संसार में कोई भी चीज नीरस नहीं है.

प्रत्येक का महत्व प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग अलग हो सकता है कोई व्यक्ति किसी कार्य को करके बहुत अच्छा महसूस करता है तो दूसरा उस कार्य को करना पसंद ही ना करें तो ऐसा रुचि के कारण होता है. धरती का प्राणी सामान्य तौर  पर  नहीं चाहता कि वह दुखी हो या उसे कष्ट सहन करने पड़े या उसे किसी चीज का त्याग करना पड़े. कोई व्यक्ति नहीं चाहता कि उसकी मृत्यु हो जाए. क्योंकि यह सभी सामान्यता अरुचिकर विषय हैं. पर कितने ही लोगों को इसमें भी आनंद आता है. उदाहरण के लिए तपस्वी लोग अपने शरीर को असहनीय कष्ट देते हैं. सर्दी गर्मी बरसात कोई सा भी मौसम हो कोई सी भी परिस्थिति हो. इसका कारण उनकी रुचि है, वह इन सब को ईश्वर प्राप्ति के लिए आवश्यक मानते हैं.

एकाग्रता का जीवन में क्या अर्थ है (What does concentration mean in life In Hindi)

देश भक्त लोग हंसते हंसते फांसी के फंदे को चूम गए, सैनिक रणभूमि में मृत्यु के साथ खेलता है. हंसते-हंसते फांसी खाना और मृत्यु के साथ खेलना आम आदमी के लिए कष्ट दाई हो सकता है. परंतु उनके लिए गर्व तथा रुचि का विषय होने के कारण उन्हें ऐसा नहीं लगता.

निष्कर्ष यही है कि कोई भी कार्य ऐसा नहीं है. जो नीरस हो तथा सभी लोगों को रुचि अरुचिकर लगे फर्क बस इतना है. कि जिस व्यक्ति को जिस कार्य में दिलचस्पी होती है. वह व्यक्ति उस कार्य को प्रसन्नता के साथ करता जाता है. और एकाग्रता का लेवल समय के साथ बढ़ता ही जाता है. और दूसरे व्यक्ति को अगर उस विषय में रुचि नहीं है तो उसका मन उस कार्य में नहीं लगता.

अब सवाल यह उठता है कि जिस व्यक्ति की रूचि किसी कार्य में नहीं है. फिर भी क्या उस कार्य में वह व्यक्ति एकाग्र रह सकता है. या उस कार्य में रुचि उत्पन्न कर सकता है. उदाहरण के लिए देखें तो एक कैदी ना चाहते हुए भी कैद खाने में रहना पड़ता है. इस प्रकार के बहुत से उदाहरण अपने आसपास देखे जा सकते हैं.

बात करते हैं कि किसी विषय में रुचि पैदा करने के लिए किस प्रकार की योग्यताएं आवश्यक होती है. तो इस संदर्भ में एक सेनापति की योग्यताओं को देखा जा सकता है. वह अपनी सेना को विभिन्न विषम परिस्थितियों में खतरे से बाहर रखकर भी युद्ध स्थान तक पहुंचाता है. शत्रु पर विभिन्न मोर्चों से हमला नहीं करता बल्कि एक ही मोर्चे पर अपनी ताकत को लगा देता है. और उसका एक ही लक्ष्य होता है.

एकाग्रता वह शक्ति है जिसके द्वारा एक मंदबुद्धि व्यक्ति भी अद्भुत सफलता प्राप्त कर सकता है. एक रस्सी मुलायम होने के बावजूद शीला जैसी कठोर सतह पर निशान बना सकती है. एक बहती हुई नदी की चौड़ाई को कम कर दिया जाए तथा गहराई को बढ़ा दिया जाए तो उसका वेग बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.

Ekagrata (एकाग्रता) अर्थ, शक्ति, मन्त्र, लाभ, अभ्यास और महत्व Meaning Defination Solution In Hindi

पतंजलि ने भी योग साधना का सारा रहस्य एकाग्रता को बताया है योग चितवृत्तियों का निरोध है. वैसे देखा जाए तो सभी प्रकार की उन्नतियों में एकाग्रता की अहम भूमिका को नकारा नहीं जा सकता. परंतु जहां तक मानसिक शक्तियों के विकास तथा बुद्धि को तीक्ष्ण बनाने का सवाल है. उसमें जो भूमिका एकाग्रता की है. वह किसी और की नहीं हो सकती. एकाग्रता ही वह शक्ति है. जो महा मूर्ख व्यक्ति को संस्कृत का महाकवि कालिदास बना सकती है.

मन को एकाग्र करने का सबसे सही तरीका मन को मारकर उस विषय की ओर ले जाना ना होकर उस विषय में रुचि पैदा करना है. और किसी भी कार्य में रुचि तब पैदा होती है. जब वह मनोरंजक हो उसे हासिल करना उस व्यक्ति के लिए आवश्यक हो तथा उस व्यक्ति को उस कार्य में कुछ स्वार्थ दिखता हो. इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि जिस कार्य में वह अपनी रूचि पैदा करना चाहता है. उस कार्य के परिणामों का इमैजिनेशन करें उसे भविष्य में होने वाले फायदों के बारे में सोचें सही गलत का निर्धारण करें. तब जाकर वह व्यक्ति उस विषय में अपनी रुचि पैदा कर सकता है.

कार्य को करने के तरीके को मनोरंजक बनाना व्यवहारिक है. किसी भी कार्य को करते समय आप किसी वस्तु के बारे में सोचते समय उदासीनता या चिंता का भाव एकाग्रता में बाधक बन सकता है. इसलिए मनोरंजन के साथ किया गया प्रत्येक कार्य व्यक्ति की अधिकतम कौशल शक्ति की अभिव्यक्ति होता है.

लंबे समय तक किसी एक कार्य को करने से मन थकने लगता है यहां पर यह समझना आवश्यक है. कि मन थकने से क्या अभिप्राय है. वास्तविकता में शरीर या मन जीवन भर किसी भी कार्य को करने से थकता नहीं है. तो मन के थकने का अर्थ यह है कि किसी भी कार्य को आप लंबे समय से कर रहे हैं. उस कार्य के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं है. आपको चाहिए कि आप लोग किसी अन्य कार्य को थोड़े से समय के लिए करिए या उसी कार्य को थोड़ा सा परिवर्तित रूप में करने का प्रयास करिए.

इस उदाहरण को विद्यार्थी जीवन से जोड़कर देखें तो अच्छे से समझ में आएगा अगर किसी विद्यार्थी को लगता है. कि उसका मन थक रहा है. तो वहां जिस विषय को पढ़ रहा है. पहला तो उसको कुछ समय के लिए रोक दें और दूसरा विषय पढ़ना स्टार्ट करें या फिर उसी विषय को पढ़ना आवश्यक हो. तो पढ़ने के तरीके में थोड़ा सा परिवर्तन भी किया जा सकता है. जिससे मन की थकावट नहीं रहेगी और रुचि बढ़ेगी जो एकाग्रता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी.

अब बात करते हैं कि वह कौन से कारक है जिनकी वजह से एकाग्रता भंग होती है. इसमें पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण कारण अपने आसपास के वातावरण का अशांत होना है. दूसरा कारण एक साथ कई कार्यों को संपन्न करने की हैबिट का होना है.

तीसरा कारण नियमितता का अभाव तथा अवसाद का किसी भी स्तर पर पाया जाना है. एकाग्रता भंग करने में चौथा महत्वपूर्ण कारक सोशल मीडिया का अविवेकशील प्रयोग तथा अपर्याप्त नींद लेना है. इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी एकाग्रता लाने या बढ़ाने में बाधा पहुंचाती है.

एकाग्रता को बढ़ाने में मेडिटेशन की अहम भूमिका होती है. जो सुबह के समय में करना अच्छा रहता है क्रोध द्वेष अहंकार जैसी प्रवृतियां एकाग्रता की परस्पर विरोधी है. मनुष्य के जीवन में एकाग्रता के महत्व को नकारा नहीं जा सकता प्रत्येक सफलता में एकाग्रता की अहम भूमिका होती है. भले ही वह किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो इसे आप विभिन्न उदाहरणों के द्वारा समझ सकते हैं. की एकाग्रता के अभाव में कोई भी कार्य उस प्रकार संपन्न नहीं होता जिस प्रकार एक अच्छा कार्य होता है. सीधी सी बात है संतोषप्रद परिणाम के लिए किसी भी कार्य को करते समय एकाग्रता का होना आवश्यक है.

अब बात कर लेते हैं, कि एक विद्यार्थी जीवन में एकाग्रता को कैसे बनाए रखा जा सकता है. प्रत्येक विद्यार्थी जानता है कि एकाग्रता के क्या मायने हैं. इसके बहुत सारे उपाय हैं परंतु परंतु सामान्य तौर पर एकाग्रता के लिए नियमित दिनचर्या के साथ स्ट्रांग माइंड सेट का होना आवश्यक है. इसके साथ ही एक ही समय में बहुत सारे कार्यों को एक साथ करने से बचना चाहिए तथा मोबाइल व टेलीविजन से उतना ही नाता हो जितना परम आवश्यक हो.

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