हिंदी भाषा के महत्व पर निबंध Essay On Hindi Bhasha Ka Mahatva In Hindi

हिंदी भाषा के महत्व पर निबंध Essay On Hindi Bhasha Ka Mahatva In Hindi:- हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ साथ भारत की राष्ट्रभाषा बनने की प्रबल दावेदार एवं योग्य हैं. 14 सितम्बर 2021 को हिंदी दिवस (Hindi Diwas) के अवसर पर आपके लिए अपनी भाषा हिंदी के महत्व, आधुनिक भारत के विकास में हिंदी का महत्व व योगदान जैसे विषयों पर बात करने जा रहे हैं. हमें भाषा के महत्व की समझ होनी चाहिए. मात्र पढने लिखने एवं बोलने की भाषा होने के अतिरिक्त राष्ट्र की प्रतीक, राष्ट्रीय एकता, अंतर्राष्ट्रीय पहचान के रूप में भी हिंदी भारत का सम्मान बढ़ा सकती हैं.

हिंदी भाषा के महत्व पर निबंध

हिंदी भाषा के महत्व पर निबंध Essay On Hindi Bhasha Ka Mahatva In Hindi

Hindi Bhasha के महत्व को इस छोटी कविता से समझा जा सकता है, यानि जीवन की परिभाषा ही हिंदी है. एक हिंदी भाषी के लिए दुनियां तभी सजीव है जब उसे कोई समझने एवं बात का जवाब देने वाला हो.

हिंदी हमारे देश को एकता के सूत्र में पिरोए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. Hindi Diwas मनाने का इतिहास संविधान के उस प्रावधान से जुड़ा हुआ है,

जब 14 सितम्बर 1949 के दिन भारतीय संविधान द्वारा औपचारिक रूप से हिंदी को भारत की राष्ट्र भाषा का दर्जा प्रदान किया गया था.

पहली बार Hindi Bhasha के सम्मान में राष्ट्रीय हिंदी दिवस 1953 को मनाया गया था. उसके बाद हर साल इसी दिन देशभर में हिंदी डे मनाया जाता हैं.

इस अवसर पर विद्यालयों, कॉलेजों एवं अन्य सरकारी दफ्तरों में हिंदी दिवस पर निबंध, भाषण, नाटक, कविता, शायरी, कवि सम्मेलन प्रतियोगिताओं का आयोजन होता हैं.

हमारी सोशल मिडिया पर भी Hindi Bhasha के महत्व को लोग बखूबी समझते हैं. बहुत से लोग इस दिन अपने स्टेट्स हिंदी में ही पोस्ट करते हैं तथा हिंदी दिवस विशेस शायरी कोट्स से सारा माहोल हिन्दीमय रूप ले लेता हैं.

Essay On Hindi Bhasha Ka Mahatva In Hindi

आज हिंदी का इन्टरनेट पर निरंतर विकास हो रहा हैं. गूगल ने भी हिंदी में टाइपिंग के लिए ऐसे टूल विकसित किए हैं. जिनसे अंग्रेजी में टाइप करने पर स्वतः हिंदी के वर्ण आ जाते हैं.

हिंदी के विकास में इसका अहम योगदान रहा हैं. जिसकी बदौलत आज इन्टरनेट के युग में हम विभिन्न वेबसाइटों पर हिंदी में कंटेट पढने को मिल रहे हैं.

भारत के बहुत से दक्षिणी एवं पूर्वी राज्यों में आज हिंदी को समझा जाने लगा हैं. भले ही कहने को हम गर्व करते है कि हमारी मातृभाषा हिंदी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा हैं.

मगर हम इसका अपमान स्वयं करते हैं. पहली क्लाश में एडमिशन लेने वाले बच्चे को यस सर और मे आई कम इन सर जैसे अंग्रेजी शब्दों के साथ लाते है. जिसका मतलब स्वयं उस बालक को भी पता नही होता हैं.

हम भी अपनी बोलचाल की भाषा में अंग्रेजी के शब्दों को बोलना गर्व की बात समझते है. हमें कब समझ आएगा. एक गुलामी की प्रतीक अंग्रेजी भाषा को टूटी फूटी बोलकर हम कब तक उन्हें अपमानित करते रहेगे.

क्या दोष है हमारी हिंदी में जो हम अंग्रेजी के दीवाने होते जा रहे हैं. सबसे बड़ी प्रशासनिक नौकरियों में आज भी हिंदी माध्यम की सरकारी स्कूलों में पढ़े बच्चें आगे आ रहे हैं.

हमारी न्याय व्यवस्था हो या सरकारी सिस्टम इन्होने भी हिंदी भाषा का बढ़ चढकर अपमान किया हैं. आज भी हमारे लोगों की यह मानसिकता बनी हुई है कि दो चार अंग्रेजी की स्पेलिंग, ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार कविता और अंग्रेजी वर्णमाला क्या सीख लेते पूरे मोहल्ले में ढिढोरा पीटने लग जाते हैं.

16 वीं एवं 17 वीं सदी का युग जब भारत में पुनर्जागरण एवं सुधारवाद का काल ऐसा था. जब भारत के उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम चारों दिशाओं में Hindi Bhasha को बोला जाता था.

बस लार्ड मेकाले की बदनीयती ने भारत पर अंग्रेजी थोपने की तमन्ना ने भारत की सांस्कृतिक एकता को ही ध्वस्त नही किया बल्कि आज की युवा पीढ़ी को अंग्रेजी के गुलाम बनाकर रख दिया.

आज भी हमारे शासन की भाषा का माध्यम अंग्रेजी बनी बैठी हैं. हिंदी कुछ ही मातृभाषा प्रेमियों, कवियों एवं साहित्यकारों तक सिमट कर रह गई हैं. हिंदी की दुर्दशा के लिए जितने जिम्मेदार अन्य कारक है उससे कही अधिक फिल्म जगत ने हिंदी को अपमानित करने में कोई कसर नही छोड़ी हैं.

हिंदी भाषा की फिल्म बनाने वाले अभिनेता सिर्फ और सिर्फ अंग्रेजी में ही इन्टरव्यू देते नजर आएगे. उन्हें यह एहसास नही है हम जिसकी वजह से आज स्टार बने है वह हिंदी ही हैं. मगर खुद को साना दिखाने के लिए वो अंग्रेजी बोलते है.

उनके लाखों अंध भक्त उनकों फॉलो करते हैं. हिंदी दिवस के अवसर पर हमें स्वयं जागना होगा तथा हिंदी का अपमान करने वालों को सबक सिखाना होगा. तभी इस देश की राष्ट्र भाषा के पद पर हिंदी भाषा स्थापित हो सकेगी.

हमारे युवा वर्ग को चाहिए कि वो अपनी मातृभाषा हिंदी के महत्व को समझे, अपने ह्रदय में इसे सजोकर रखे और इसकी दुर्दशा होने से केवल हम और आप ही बचा सकते हैं. आज जरुरी नही उच्च पदों के लिए हमें हिंदी को छोड़ना पड़ेगा.

यदि ऐसा किसी नौकरी के लिए करना भी पड़े तो हमें हिंदी से दूरी बनाने की बजाय इसे अपनी भाषा ही बनाकर रखना चाहिए. जब भारत के प्रधानमन्त्री हिंदी से ही विश्व भर में अपना काम चला सकते हैं. फिर हम क्यों नही.

हिंदी का महत्व पर निबंध। Essay on Hindi ka Mahatva

निजभाषा उन्नति अहै, सब उन्नति कौ मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को सूल।

एक आजाद मुल्क के प्रतीक उनका क्षेत्रफल, राष्ट्र ध्वज, राष्ट्र गान, राष्ट्रीय चिह्न जितने मायने रखते हैं. उतनी ही महत्वपूर्ण उस देश की राष्ट्रभाषा होती हैं. देश की एकता, अखंडता एवं स्थायित्व के लिए एक राष्ट्रभाषा होना परिहार्य हैं.

भारत के स्वतंत्रता सैनानियों का सपना था, कि हम विषम भाषा परिस्थतियों से गुजरे है वो आजाद भारत के नागरिकों को नही झेलनी पड़े. इसके लिए उन्होंने हिंदी को भारत की राष्ट्र भाषा बनाने की बात कही थी.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारी संविधान सभा द्वारा 14 सितम्बर 1949 को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया था.

सर्वव्यापकता, प्रचुर साहित्य रचना, बनावट की दृष्टि से सरलता और वैज्ञानिकता ये वो गुण है जो किसी देश की आधुनिक भाषा में होने चाहिए. जो राष्ट्रभाषा बनने का दावा करती हैं. हिंदी भाषा इन सम्पूर्ण गुणों से परिपूर्ण हैं. अतः अब समय आ चूका है. गुलामी की निशानी अंग्रेजी को उखाड़ फेककर हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा बनानी चाहिए.

आज भारत में ऐसा कोई राज्य नही हैं. जहाँ के लोग बिलकुल भी हिंदी से अपरिचित हैं. अहिन्दी भाषी राज्यों में बड़ी संख्या में लोग मिल जाएगे जो हिंदी को अच्छी तरह समझते हैं. इसके उल्ट भारत के 1 या 2 प्रतिशत ही लोग ऐसे है जो अंग्रेजी को ठीक से समझते हैं अथवा आम बोलचाल में उसका उपयोग करते हैं.

  • हिंदी भाषी राज्य- उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली
  • द्वितीय भाषा हिंदी वाले राज्य- पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और अंडमान निकोबार
  • अहिन्दी भाषी राज्य- तमिल नाडु, पाण्डिचेरी, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, मेघालय (इन राज्यों में 1 से 2 प्रतिशत लोग ही हिंदी जानते हैं)

हिंदी भाषा के महत्व को राष्ट्र विकास एवं एकता के सन्दर्भ में कभी भी नकारा नही जा सकता हैं. तुलसी जैसे कवियों की याद आती है. जब लोग हिंदी के हश्र की बात करते हैं. विदेशी आक्रान्ताओं के आक्रमण से त्रस्त भारतीय जनता को भक्ति मार्ग से बांधने वाली भाषा हिंदी ही थी.

14th September Hindi Day के दिन मातृभाषा हिंदी के इतिहास, महत्व, भविष्य एवं साहित्य का समाज में योगदान को देखा जाता हैं.

हिंदी भाषा का महत्व Hindi Bhasha Ka Mahatva Essay Slogan In Hindi

हिंदी हमारी मातृभाषा हैं. जिसे भारत की राष्ट्रभाषा होने का गर्व प्राप्त होना चाहिए. बिना राष्ट्र भाषा के राष्ट्र गूंगा कहलाता हैं. ठीक वैसी ही स्थति हमारे यहाँ हैं.

100 करोड़ जनता की बोली, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा, विश्व का सबसे समृद्ध साहित्य एवं शब्दकोश वाली हिंदी अपने ही वतन भारत में अपमानित हैं. Hindi Diwas  के लिए यहाँ हिंदी भाषा के महत्व पर निबंध, भाषण कविता आदि प्रस्तुत की गई हैं.

इस लेख में हम बात करने वाले है Hindi Bhasha के महत्व, इसके इतिहास, विकास, राष्ट्र के विकास में योगदान एवं हिंदी शब्द की उत्पत्ति के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा करने वाले हैं.

14 सितम्बर को हर साल राष्ट्रीय हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता हैं. इस दिन को मनाने का उद्देश्य Hindi Bhasha के इतिहास वर्तमान एवं भविष्य के बारे में चर्चा करने के साथ ही किस तरह हिंदी को देश की मुख्य भाषा बनाई जाए.

आदि विषयों पर स्कुल एवं कॉलेजों में हिंदी दिवस का महत्व, कविता, भाषण, निबंध एवं कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जाता हैं.

Hindi Bhasha के Mahatva के इस आर्टिकल में हम आपकों Hindi Language Essay & Slogans के द्वारा मातृभाषा के महत्व के बारे में जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं.

Essay & Slogans On Hindi – हिंदी का महत्व

हिंदी शब्द की उत्पत्ति व विकास (Origin and development of Hindi word)

हिंदी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से मानी जाती हैं. यह सिन्धु शब्द से बना हैं. माना जाता है कि सिंध नदी के आस-पास रहने वाले लोगों को सिन्धु कहा जाने लगा. उसी काल में ईरानियों की भाषा में स वर्ण का उच्चारण ह के समान किया जाता था. उदाहरण के लिए इरानी लोग असुर को अहुर कहा करते थे.

इसी प्रकार अफगान के पार भारतवर्ष के क्षेत्र को ‘हिन्द’, ‘हिन्दुश कहा जाने लगा. यह सिन्धु शब्द पहले ह के गलत उच्चारण के चलते हिन्दू बना फिर हिंदी और कालान्तर में हिन्द हो गया. उस समय के अरबी एवं फ़ारसी साहित्य में भारत के क्षेत्र के लोगों की भाषा के लिए ज़बान-ए-हिंदी शब्द का प्रयोग किया जाता था.

यह क्षेत्र दिल्ली और आगरा के पास का था. जिसे आज की खड़ी बोली हिंदी की जन्मस्थली भी माना जाता हैं. हिंदी भाषा को हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार में माना जाता हैं. इसकी मुख्य लिपि देवनागरी है, जिनमें संस्कृत के शब्दों की बहुतायत है.

अवहट्ठ जो अपभ्रश का रूप था, इसके बाद हिंदी का जन्म हुआ. लगभग एक हजार वर्ष पुराना हिंदी इतिहास हैं. मध्यकाल व इससे पूर्व के हिंदी साहित्य को ब्रज एवं अवधि में लिखा गया था.

कबीरदास, सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई, मलिक मुहम्मद जायसी, बोधा, आलम, ठाकुर जैसे कालजयी हिंदी कवियों की रचनाओं ने हिंदी साहित्य को विस्तृत रूप प्रदान किया हैं.

अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, भोजपुरी, हरियाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, झारखंडी, कुमाउँनी, मगही भिन्न भिन्न राज्यों में बोली जाने वाली हिंदी की उपभाषाएँ अथवा बोलियाँ हैं.

राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का महत्व (Importance of Hindi language)

आज कोई भी देश को ले लीजिए उनकी अपनी एक राष्ट्र भाषा होती हैं. जिस पर सम्पूर्ण देशवासियों को गर्व होता हैं. देश की जनता, राजनेता, अभिनेता हर कोई उसी भाषा में ही बात करता हैं. एक देश की राष्ट्र भाषा उन्हें एकता एवं स्थायित्व प्रदान करती हैं.

यदि हम हिंदी भाषा को देखे तो संविधान द्वारा 14 सितम्बर 1949 को भारत की राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया गया. भारतीय संविधान में 22 भाषाओं को यह दर्जा प्राप्त हैं.

वर्ष 1953 में इसी दिन को ऐतिहासिक बनाने के लिए राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितम्बर के दिन ही मनाने का निश्चय किया गया था.

सर्वव्यापकता, प्रचुर साहित्य रचना, बनावट की दृष्टि से सरलता और वैज्ञानिकता ये वों गुण है जो एक राजभाषा में होने पर ही उन्हें एक आधुनिक भाषा होने का दर्जा दिया जाता हैं.

हिंदी भाषा में ये सभी गुण विद्यमान हैं. चूँकि हिंदी अभी तक भारत की राजभाषा हैं. जिसका अर्थ यह है कि सरकारी कामकाज की भाषा आम लोग सरकार के कार्यों एवं नीतियों को समझ सके इसलिए ही राजभाषा का प्रावधान किया जाता हैं.

इंग्लैंड, अमेरिका, जापान, कोरिया, चीन, पकिस्तान, नेपाल, मॉरिशस, बंगलादेश, सूरीनाम भारत के अतिरिक्त ये वो देश है जहाँ बड़ी संख्या में लोग हिंदी भाषा को बोलते और समझते हैं. भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली आदि की मुख्य भाषा हिंदी हैं.

पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और अंडमान निकोबार ये वों क्षेत्र है जहाँ प्रथम भाषा वहां की स्थानीय भाषा है. सैकड भाषा का दर्जा हिंदी को दिया गया हैं. आज हिंदी का महत्व इस कदर बढ़ गया है कि इसने आधुनिक तकनीकी को भी अपना लिया है.

हिन्दी दिवस पर स्लोगन ! Hindi Slogans On Hindi Divas

Slogan 1: हिंदी में बात है क्योंकि हिन्दी में जज्बात है

Slogan 2: हिन्दी हमारी शान है, देश का अभिमान है

Slogan 3: हिन्दी का सम्मान करे, देश का मान करे

Slogan 4: चलो मिलकर मुहीम चलाये, आज ही से हिन्दी अपनाए

Slogan 5: जन – जन से करो पुकार, हिंदी ने किया हमपे उपकार

Slogan 6: हिन्दी बनती हमें महान, देश की है यह शान

Slogan 7: अंग्रेजी को पछाड़ दो, हिन्दी को आकार दो

हिंदी दिवस का महत्व 

आशा करता हूँ आपको यहाँ Hindi Bhasha का Mahatva पर एस्से स्लोगन्स आपकों पसंद आए होंगे. इस लेख को आप Hindi Diwas 2021 पर बोलने के लिए भाषण में उपयोग कर सकते हैं.

हिंदी के महत्व को नकारा नही जुआ सकता, यह देश के विभिन्न भागो को एकता के धागें में बांधकर रखती हैं. तथा सभी हिंदी भाषियों के दिल में अपनत्व का भाव जगाती हैं. साथ ही हिंदी का साहित्य सागर विस्तृत होने के कारण यह समाज को सही राह बताने में सक्षम हैं.

आज के हिंदी दिवस पर लेख में आप हिंदी भाषा के इतिहास, शब्द की उत्पत्ति विकास एवं वर्तमान भारत में महत्व पर प्रकाश डाल सकते हैं. आपकों बता दे हर साल 14 सितम्बर को हिंदी डे उस ऐतिहासिक निर्णय के उपलक्ष्य में मनाया जाता हैं. जब संविधान में 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया था.

यदि आप हिंदी भाषा अथवा Hindi Diwas के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो यहाँ पर निचे दिए गये आर्टिकल को रीड कर अपने भाषण अथवा निबंध की अच्छी तैयारी कर सकते हैं.

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