बर्ड फ्लू पर निबंध Essay on Bird Flu in Hindi

बर्ड फ्लू पर निबंध Essay on Bird Flu in Hindi: नमस्ते दोस्तों, 2021 की शुरुआत से ही जब संसार कोरोना के संकट से जूझ रहा हैं, ऐसे में बर्ड फ्लू वायरस जनित बिमारी ने दस्तक दे दी हैं. वैसे यह कोई नया वायरस तो नहीं हैं, मगर कोरोना के वायरस के साथ मिलता जुलता और पक्षियों में इसके घातक दुष्प्रभाव देखने को मिले हैं. इसे पक्षियों का फ्लू अथवा एवियन इन्फ्लूएंजा नाम से भी जाना जाता हैं. आज के निबंध में हम इस फ्लू के बारे में विस्तार से जानेगे.

बर्ड फ्लू पर निबंध Essay on Bird Flu in Hindi

बर्ड फ्लू पर निबंध Essay on Bird Flu in Hindi

बर्ड फ्लू क्या है What is Bird Flu?  Scientific Name

बर्ड फ्लू का वैज्ञानिक नाम एवियन इनफ्लुएंजा (Avian Influenza) है। इस वायरस का प्रभाव aves (पक्षी वर्ग) वर्ग के प्राणियों में ज्यादा होता है जिससे इसका नाम Avian (Bird) Influenza (Flu) पड़ा। बर्ड फ्लू का वाहक जलीय पक्षी को माना जाता है जो प्रवासी भी होते हैैैै

बर्ड फ्लू वायरस के प्रकार Types of Avian Influenza Virus or Pathogens

इस वायरस के मुख्यतः चार प्रकार होते हैं A B C D.

  • Influenza A इस प्रकार का वायरस इंसानों और दूसरे जानवरों में में भी संक्रमण फैला सकता है और इसकी संक्रमण की क्षमता भी इतनी अधिक होती है कि इसकी वजह से महामारी का संकट भी आ सकता हैै।
  • Influenza B  इस वायरस का संक्रमण भी इंसानों में हो सकता है और यह एक मौसमी महामारी का रूप धारण कर सकता है।
  • Influenza C एवियन इनफ्लुएंजा का यह प्रकार इंसानों और दूसरे जानवरों जैसे सूअर में संक्रमण फैला सकता है लेकिन अब तक सामने आए आंकड़े है बताते हैं कि वायरस का यह प्रकार दुर्लभ है।
  • Influenza D इन्फ्लूएंजा डी हालांकि इसका संक्रमण कुछ पशुओं में तो देखा गया है लेकिन इंसानों में इस प्रकार के वायरस के संक्रमण का अभी कोई प्रमाण सामने नहीं आया ।

सरंचना एवम् सबटाइप्स Structure & Subtypes

चूंकि वायरस प्रोटीन का ही बना होता है और वायरस किस सतह कई सारी प्रोटीन लेयर्स (स्तर) की ही बनी होती है। वायरस कि सतह पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रोटीन आवरण hematoagglutine (H) और neuraminidase (N) के आधार पर हम इसको कई सबटाइप्स में विभाजित कर सकते हैं

वायरस की सतह पर पाए जाने वाले प्रोटीन hematoagglutine के अट्ठारह और neuraminidase के 11 सबटाइप्स होते हैं जो परस्पर विभिन्न प्रकार के होते हैं और इनका संक्रमण होने पर लक्षण भी अलग-अलग तरह के हो सकते हैं एक वायरस अपने इन्हीं सब टाइप्स के कारण अत्यधिक हानिकारक होता है या वह एक साधारण प्रकार का वायरस होता है।

वहीं बात की जाए एवियन इनफ्लुएंजा (avian influenza) virus के strain  (प्रभेद)  की तो इसके दो प्रमुख स्ट्रेन होते हैं 1 हाईली पथोजेनिक एवियन इनफ्लुएंजा (highly pathogenic influenza virus) HPAI &  लो pathogenic एवियन इनफ्लुएंजा (low pathogenic influenza virus) अर्थात अधिक हानिकारक और कम हानिकारक या रोगजनक इनफ्लुएंजा वायरस। सबसे प्रमुख HPAI वायरस h5 n1 है जो 1996 में चाइना के goose से रिपोर्ट किया गया था।

बर्ड फ्लू का इतिहास History of Bird Flu

बर्ड फ्लू का केस दुनिया में सबसे पहले 1878 में सामने आया था और इसको Fowl Plague का नाम दिया गया। अब तक 11 बार दुनिया में यह महामारी फैल चुकी है जिसमें से चार बार इस महामारी के चलते लाखों पक्षियों की जान गई थी। वही इंसानों में बर्ड फ्लू के संक्रमण का पहला केस 1997 में मिला जो h5n1 जनित संक्रमण था।

पशु पक्षियों से लेकर इंसानों तक संक्रमण फैलाने वाली यह बीमारी एशिया के 15 देशों से शुरू होकर आज दुनिया के तकरीबन 60 देशों को अपनी चपेट में ले चुकी है जिसका प्रभाव हर साल कहीं ना कहीं देखने को मिलता है। जहां हजारों लाखों पक्षियों की इस संक्रमण से मौत हो जाती है वही अब तक हजारों इंसाान भी इसकी चपेट में आ चुके है।

शुरुआत से लेकर अब तक  अलग-अलग समय में बर्ड फ्लू को अलग-अलग नामों से जाना जाता रहा है।  समय-समय पर  बर्ड फ्लू के  कई तरह के संक्रमण सामने आए हैं  जिनमें लक्षणों में बदलाव  और प्रभेद (स्ट्रेन) में परिवर्तन मिला है। जिन देशों की अर्थव्यवस्था में पोल्ट्री का बड़ा योगदान रहा है  वहां बर्ड फ़्लू के कारण अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है जिससे जनजीवन पर काफी विपरीत प्रभाव पड़े हैं ।

वायरस की आनुवांशिकता Genetics of Avian Influenza

वायरस के प्रोटीन स्तर की विभिन्नता के आधार पर बर्ड फ्लू के वायरस को कई तरह के सबटाइप्स में रखा गया है जिनका प्रभाव अलग-अलग प्राणियों पर भी हुआ है। इनमें से कुछ सब टाइप्स ऐसे हैं जिनमें fetality rate (मृत्यु दर) काफी अधिक रही है।

लक्षण Symptoms

Symptoms of Influenza Virus in Birds

बर्ड फ्लू सिर्फ पक्षियों में ही नहीं बल्कि इंसानों और अन्य जानवरों में भी संक्रमण फैला सकता है। इसलिए इसके लक्षणों के बारे में सही जानकारी का होना जरूरी है अग्र लिखित लक्षण अगर पक्षियों में दिखाई दे तो इन को गंभीरता से लेते हुए बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय करने चाहिए।

  1. बिना किसी संकेत के अचानक मृत्यु

2.तालमेल की कमी

3.जाँघिया, कंघी और पैरों पर बैंगन निशान

4.सॉफ्ट-शेल्ड अंडे

5.ऊर्जा की कमी और भूख

6.सिर की सूजन

7.अंडा उत्पादन में कमी

Symptoms of of Influenza Virus in Humans

  1. हालांकि इंसानों में इसके h5n1 स्ट्रेन का ही मुख्यतः संक्रमण देखा गया है लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसमें भी मृत्यु दर 60% तक जा सकती है इंसानों में इसके संक्रमण की बात की जाए तो इनमें
  2. खांसी आना कफ
  3.  का जम जाना
  4. बुखार का आना
  5. सर दर्द रहना
  6. पेट संबंधी समस्याएं
  7. दस्त लगना
  8. उल्टी का अंदेशा होना इत्यादि प्रमुख है।

बचाव Preventions

बर्ड फ्लू का प्रभाव कई तरह के प्राणियों पर हो सकता है ऐसे में बर्ड फ्लू के संक्रमण से अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए हमें कई बातों का ख्याल रखना  पड़ता है। जैसे समय-समय पर हाथों को अच्छे से साफ करना, बिना पके हुए मीट को नहीं खाना चाहिए, छोटे बाजार से मीट नहीं खरीदना चाहिए, पोल्ट्री का प्रबन्धन विशेषज्ञों की सलाह लेकर करना चाहिए, जहां तक संभव हो पोल्ट्री से दूरी बनाए रखनी चाहिए, महामारी के समय पक्षों के संपर्क में नहीं रहना चाहिए।

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दोस्तों उम्मीद करता हूँ बर्ड फ्लू पर निबंध Essay on Bird Flu in Hindi का यह निबंध आपकों पसंद आया होगा, यदि आपकों इसमें दी गई जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें.

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