कावेरी पुकारे अभियान पर निबंध essay On cauvery calling in hindi

कावेरी पुकारे अभियान पर निबंध essay On Cauvery calling in Hindi Short Speech Nibandh History Information about Cauvery calling Campaign 2022 Sadhguru: बड़ा अफ़सोस हुआ जब हमने पाया कि 21 वीं सदी के सबसे बड़े पर्यावरण एवं प्रकृति के बचाव के लिए चलाए जाने वाले कावेरी पुकारे अभियान को शासन, मिडिया द्वारा इसकी पूर्ण रूप से अनदेखी की जा रही हैं. सद्गुरु द्वारा कर्नाटक और तमिलनाडु की मुख्य नदी कावेरी को बचाने के लिए किये गये इस जन आंदोलन की चर्चा आज अमेरिकन अखबार और संयुक्त राष्ट्र संघ करता है मगर क्यों आज भारत में इसके प्रति उदासीनता देखी जा रही हैं. आज हम कावेरी पुकारे सद्गुरु अभियान पर निबंध के रूप में इसकी विस्तृत जानकारी आपकों उपलब्ध करवा रहे हैं.

कावेरी पुकारे अभियान पर निबंध essay On cauvery calling in hindi

कावेरी पुकारे अभियान पर निबंध essay On cauvery calling in hindi

आधुनिकता की आंधी के इस दौर में एक तरफ हम विकसित एवं विश्व शक्ति के रूप में आगे बढ़ रहे हैं मगर आज हमारा देश ही नहीं समूची दुनियां जल संकट के प्रति उदासीन नजर आती हैं. संसार की कई बड़ी नदियाँ सूखने की कगार पर हैं जल संकट अपने भयावह रूप की तरफ बढ़ रहा हैं. भारत में भी इसके असर देखने को मिले हैं. दक्षिण भारत की मुख्य नदी कावेरी आज इसी समस्या से गुजर रही हैं.

दक्षिण भारत के तमिलनाडु एवं कर्नाटक राज्यों की मुख्य नदी कावेरी ही हैं जो बारहमासी नदी है जिसका उद्गम  पश्चिमी घाट के पर्वत ब्रह्मगिरी से होता है इसकी लम्बाई 800 किलोमीटर है. विगत सात दशकों में इसकी कुल जल मात्रा का चालीस प्रति शत भाग सूख चूका हैं. आध्यात्मिक संत सद्गुरु ने कावेरी को बचाने के लिए एक मुहीम शुरू की है जिसे कावेरी पुकारे अर्थात Cauvery Calling का नाम दिया गया हैं.

दक्षिण भारत की गंगा कही जाने वाली कावेरी का जल स्तर निरंतर गिर रहा हैं. नदी के आसपास की भूमि नष्ट हो रही हैं. इससे किसानों के लिए बड़ी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. इस प्रकार के गम्भीर हालातों से फसलें नष्ट हो रही हैं तथा किसान कर्ज की समस्या से डूबे हुए हैं. ऐसे में कावेरी बचाने का अभियान जल संकट के प्रति जागरूकता का अच्छा उदाहरण हैं.

31 जुलाई 2019 को सद्गुरु द्वारा कावेरी पुकारे मिशन शुरू किया गया था. वे हजारों पर्यावरण प्रेमियों तथा किसानों के साथ कावेरी के तट की ओर निकले और आस पास के जिलों के किसानों को पेड़ों की खेती के महत्व एवं आर्थिक लाभ के बारे में अवगत कराते हुए आंदोलन में जनभागीदारी की शुरुआत की.

सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन ने अपने पूर्व के कार्यक्रमों में किसानों के लिए इस प्रकार के एक अभियान की बात कही थी. वृक्ष आधारित कृषि से तमिलनाडु और कर्नाटक के ये किसान आने वाले 5-6 सालों में अपनी आय को 4 से 5 गुना तक बढ़ा सकते हैं.

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कावेरी पुकारे सद्गुरु का व्यक्तिगत आंदोलन न होकर यह समस्त देशवासियों के लिए एक कर्तव्य पथ हैं इस अभियान में देश विदेश में बैठे भारतीयों को पेड़ लगाने के लिए सहयोग की अपील की हैं. 42 भारतीय रूपये एक पेड़ के खर्च के अनुसार कोई भी व्यक्ति कावेरी पुकारे अभियान के लिए पेड़ लगाने तथा अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दे सकता हैं.

“कावेरी भारत की प्रसिद्ध नदियों में से एक है और हम अपनी नदियों की साफ-सफाई का बिलकुल ध्यान नहीं रखते है। इसलिए इस नदी कावेरी के प्रति लोगो को जागरूक करने के लिए यह आंदोलन “कावेरी कॉलिंग” शुरू हुआ”

500 शब्द कावेरी पुकारे अभियान निबंध

भूमिका

भारतवर्ष में नदियाँं अपनी विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध होती हैं। हर एक नदी प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखती है और मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण होती है। लेकिन कई नदियाँ क्षति ग्रस्त होती जा रही हैं जिसके बचाव के लिए कदम उठाना ज़रूरी है क्योंकि नदियाँ हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं। इनका रखरखाव एवम् बचाव होना मनुष्य के हित में है और हानि मनुष्य के लिए हानि होगी। इसी श्रेणी में कावेरी नदी आती है जिसके बचाव की ज़रूरत है।

कावेरी नदी जितनी महत्वपूर्ण है उतनी ही उसकी सुरक्षा महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक वातावरण की सुरक्षा हेतु कावेरी नदी के बचाव में “कावेरी पुकारे अभियान” के संदर्भ में इस  निबंध में बतायेगें। “कावेरी पुकारे अभियान” की महत्वपूर्ण जानकारी देगें।

परिचय

“कावेरी नदी” जो दक्षिण भारत के दो राज्यों तमिल नाडु और कर्नाटक की मुख्य नदी है जिसका उद्गम स्थान ब्रह्मगिरी पर्वत से माना जाता है जो पश्चिमी घाट में स्थित है। कावेरी नदी बारहमासी नदी है जिसमें बारह मासों पानी रहता है। 

इस नदी की कुल लंबाई लगभग 800 किलोमीटर के करीब मानी जाती है। लेकिन कावेरी नदी में जल संकट की समस्या पैदा हो गई है जिसके स्वरूप नदी का चालीस प्रतिशत भाग सूख चुका है। कावेरी नदी के बचाव में संत सदगुरु ने एक अभियान चलाया जिसे “कावेरी पुकारे अभियान” के नाम से जाना जाता है।

कावेरी पुकारे अभियान का उद्देशय

कावेरी नदी दक्षिण भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। दिन प्रतिदिन कावेरी नदी का पानी सूखता जा रहा है। आस पास की भूमि क्षतिग्रस्त हो रही है। जल संकट की वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके कृषि कार्य में बाधाएँं आ रही हैं। 

इस समस्या के तहत फसलें खराब हो रही हैं। खेती उचित पूर्वक नहीं हो पा रही है। किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कावेरी नदी के इस संकट से बचाव और पेड़ लगाने के प्रति जागरूकता  “कावेरी पुकारे अभियान” का मुख्य उद्देश्य है।

कावेरी पुकारे अभियान की शुरुआत वर्ष 2019 में 31 जुलाई को हुई थी। इस अभियान में पर्यावरण समर्थक और किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया था। इस अभियान के दौरान किसानों को पेड़ों की खेती की महत्वपूर्णता समझाई गई थी और आर्थिक लाभ बताए गए थे। इस अभियान के समर्थन हेतु सदगुरु द्वारा देश विदेश के समस्त भारतवासियों को प्रेरित किया गया था कि पेड़ की महत्ता समझें और पेड़ लगाएँ।

कावेरी नदी का महत्व

कावेरी नदी की साफ-सफाई और जल संकट की समस्या को सुलझाने के लिए “कावेरी पुकारे अभियान” किया गया जिसमें कावेरी की महत्ता का उद्देश्य निहित था। कावेरी नदी दक्षिण भारत की गंगा कहीं जाने वाली नदी है जो किसानों के लिए वरदान स्वरुप है। पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण और प्रकृति की दृष्टि से काफी उपयोगी एवं जीवनदायिनी मानी जाती है।

निष्कर्ष

“कावेरी पुकारे अभियान” सिर्फ अभियान नहीं है बल्कि प्रेरणा है कि जब अपनी प्राकृतिक धरोहर खतरे में हो तो उसके बचाव के लिए सहयोग देना चाहिए।

अन्तिम शब्द

दोस्तों “कावेरी पुकारे अभियान” के संदर्भ में अगर जानना है तो इस निबंध में इसका प्रारूप मिल जाएगा जो “कावेरी पुकारो अभियान” का मुख्य उद्देश्य और जागरूकता का संदर्भ बताता है।

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आशा करता हूँ दोस्तों essay On cauvery calling in hindi पर दिया गया यह निबंध आपकों पसंद आया होगा. यदि आपकों कावेरी पुकारे एस्से अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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