चीता पर निबंध – Essay on Cheetah In Hindi

चीता पर निबंध – Essay on Cheetah In Hindi : चीता बिल्ली की प्रजाति का धरती पर सबसे तेज गति से दौड़ने वाला जानवर हैं. भारत में इन्हें अंतिम बार वर्ष 1948-50 में देखा गया था तथा 1952 में इन्हें विलुप्त प्राणियों की श्रेणी में शामिल कर दिया गया. सितम्बर 2022 में भारत सरकार द्वारा नामीबिया से चीते लाकर भारत में इन्हें फिर से जीवित करने का एक प्रयास किया गया हैं. करीब 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाले चीते देखने में तेंदुएं जैसे ही दिखते हैं. शेर, बाघ इनका आसानी से शिकार कर लेते हैं. आज के निबंध में हम चीता के बारे में विस्तार से जानेगे.

Essay on Cheetah In Hindi चीता पर निबंध

Essay on Cheetah In Hindi चीता पर निबंध

इस निबंध में हम चीते की शारीरिक विशेषताएं, दौड़ने की गति, भोजन, किन किन देशों में पाया जाता है भारत में चीता, बाघ चीता और शेर के बीच के अंतर को समझने का प्रयास करेंगे.

नमस्कार दोस्तो। आज हम लेकर आए चीते पर निबंध। आपने चीता का नाम तो सुना ही होगा । ये एक जंगली  जानवर होता है, जो मांसाहारी प्रवृति का होता है। आज हम इस खूंखार जंगली जानवर के बारे में बहुत सी रोचक जानकारी प्राप्त करने वाले है। 

चीते की शारिरिक विशेषताएं 

चीता बिल्ली की प्रजाति का सबसे बड़ा जानवर होता है। चीते की लंबाई लगभग 1.3 मीटर होती है ।  चीते की औसत ऊंचाई 32 इंच होती है।चीते के पूंछ की लंबाई 70 से 80 सेमी के बीच होती है।  चीते का रंग हल्का पीला होता है, जो छोटे काले धब्बों से ढका रहता है।

इनकी दोनो आंखो से नीचे की और एक काली पतली  लकीर होती है। नर चीता मादा चीते की तुलना में थोड़ा बड़ा होता है। चीते के पंजे मुड़ते नहीं है, इसलिए ये पेड़ो से आसानी से नहीं चढ़ पाते है। चीता देखने में बहुत ही आकर्षक होता है। चीते के पैरो की मासपेशिया बड़ी और ताकतवर होती है।

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चीते की गति

इस पूरी पृथ्वी पर रहने वाले जानवरों में चीते की स्पीड सबसे ज्यादा होती है। ये अपने फुर्तीले अंदाज के लिए जाना जाता है।  दौड़ते समय चीते अपने पैरो को साथ उठाते है। ये इसी स्पीड का फायदा उठाकर आसानी से अपना शिकार कर लेता है। चीते की औसत रफ्तार 80 किमी प्रति घंटा होती है, जो इस स्पीड को अधिकतम 120 किमी प्रति घंटा तक बढ़ा सकता है।  जब चीता अपनी अधिकतम स्पीड पर होता है तो ये लगभग 23 फीट तक लंबी छलांग लगा सकता है। चीता अपनी अधिकतम स्पीड से 60 सेकंड तक ही दौड़ सकता है। 

चीते के पंजे घुमावदार होते है, जो दौड़ते समय जमीन से मजबूत पकड़ बनाने में इसकी सहायक होते है। चीते की स्पीड की सबसे खास बात ये होते ही की ये बहुत जल्दी अपनी स्पीड को बढ़ा कर अधिकतम स्पीड पकड़ लेता है और  जरूरत होने पर जल्द ही स्पीड को तेजी से कम करके सामान्य कर सकता है।

चीते की आंख की दृष्टि सीधी होती है, जिससे ये दूर तक देख सकता है। साथ ही चीते के कान भी तेझोते है, जो उन्हे शिकार की आहट सुनने में सहायक होते है। चीते की सबसे खाश विशेषता ये होती है की चीता तेज दौड़ते हुए भी अपने शिकार पर केंद्रित होकर फोकस कर सकता है।

चीते का भोजन

चीता एक मांसाहारी  जानवर होता है। ये लगभग 40 किलोग्राम तक के जानवर का शिकार करते है। चीते की विशेषता होती है की ये खुद शिकार करके ही अपनी भूख मिटाते है, साथ ही ये अपने छोटे बच्चो के भोजन के लिए भी शिकार करते है। इसका मुख्य शिकार चिंकारा होते है, ये छोटे और बड़े हरिणो का शिकार करते है। चीतल, गजेल,सांभर, नीलगाय, , चिंकारा, चौसिंघा, इत्यादि जानवरों के चीते शिकार करते है।

चीते अपनी तेज स्पीड से चिंकारा का शिकार करने में सफल होते है, हालांकि चिंकारा भी अपनी स्पीड की विशेष प्रवृति के कारण आसानी से चीते का शिकार नहीं बनते है, क्योंकि चीते की तुलना में चिंकारा लंबे समय तक अपनी तेज गति को बरकरार रख सकता है। चीता केवल एक मिनट ही अपनी अधिकतम गति से दौड़ सकता है।

इसके साथ ही चिंकारा शिकार होने से बचने के लिए सीधा नही दौड़ता है, जिससे चीता उनका आसानी से शिकार नहीं कर पाता है और कई बार चिंकारे शिकार होने से बच जाते है। चीते की लंबी पूछ उसे दौड़ते समय पीछे खड़ी हो जाती है जो उसे दौड़ते समय मुड़ने में अपने शरीर का संतुलन बनाने में सहायक होती है।

चीते का निवास स्थान 

चीते आमतौर पर घने जंगलों में नहीं रहते है। इन्हें खुले विशाल क्षेत्र में रहना पसंद है।चीते अफ्रीका के सवाना के जंगलों में  पाए जाते है। चीतों के रहने के लिए वही स्थान अनुकूल होते है,चीते अपने परिवार के साथ रहते है। मादा चीता अपने छोटे शावको के लिए शिकार करती है, और उनकी रक्षा भी करती है।

चीते के बच्चे आपस में मस्ती से लड़ते भी है, हालांकि ये एक दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाते है। चीते अपना शिकार आमतौर पर सुबह जल्दी जब उनका शिकार दिन के लिए तैयार नहीं होता है तब या शाम को जब शिकार थक जाता है तब शिकार करते है। कभी कभी चीते समूह में भी शिकार करना पसंद करते है। चीते टाइगर को तरह घात लगाकर ज्यादा शिकार नहीं करते है।

दुनिया के किन किन देशों में चीते पाए जाते हैं 

चीतों की संख्या में लगातर कमी आ रही है। वर्तमान में पृथ्वी पर लगभग 7000 चीते मौजूद है, जिनमे से 4500 चीते अकेले दक्षिण अफ्रीका में है। चीते अफ्रीकी देशों में पाए जाते है।

साथ ही कई एशियाई देशों में भी चीते पाए जाते है। चीते भारत, ईरान, ईराक,इजरायल, अफगानिस्तान,जॉर्डन, ओमान, पाकिस्तान, चीन, सऊदी अरब, सीरिया और रूस जैसे देशों में भी चीते पाए जाते है। 

भारत में चीते 

भारत में चीतों का पुराना इतिहास रहा है। भारत में राजपूत काल, मुगल काल, मराठा और अंग्रजी साम्राज्य के दौरान चीते पाए जाते है, जिनके शिकार को सम्मान का प्रतीक माना जाता है। शिकार के कारण ही भारत में चीते धीरे धीरे विलुप्त हो गए थे। भारत की आजादी के बाद हुआ सर्व से पता चला की भारत में चीते विलुप्त हो चुके थे।

भारत सरकार ने 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया। निवास स्थान में मानवीय हस्तक्षेप और व्यापक शिकार इनके विलुप्त होने का कारण रहा। हाल ही में भारत सरकार ने 17 सितंबर 2022 को अफ्रीकी देश नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए है। जिसमे से पांच मादा और तीन नर चीते है। इनकी आयु 4 से 6 वर्ष के बीच है। ये चीते मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़े गए है। आगामी वर्षों में भारत में चीते और लाए जाने का प्रयास रहेगा। 

चीता,  बाघ, तेदुआ और शेर में अंतर

बाघ को टाइगर कहते है, इसके शरीर पर चीते की तरह काले छोटे धब्बे नहीं होकर काली धारिया होती है। चीते और तेंदुआ में ज्यादा समानता देखने को मिलती है। लेकिन इनमें में अंतर देखा जा सकता है। चीते का सिर छोटा और गोल होता है। इसकी छाती ऊंची और पेट पतला होता है। चीते के चेहरे पर आंखो के कोने से मुंह तक एक काली लकीर होती है, वही तेंदुआ का सिर बड़ा होता है।

तेंदुआ के शरीर पर भी काले धब्बे होते है, लेकिन इनका आकार निश्चित नहीं होता है, इनके आंखों के नीचे  चीते की तरह काली लाइन नहीं होती है। चीते की आंखे पीली होती है, वही तेंदुआ की आंखे नीले और हरे रंग की होती है। इस प्रकार हम चीते और तेंदुआ में अंतर पहचान सकते है। शेर इन सभी से काफी अलग होते है, उनके मुंह पर लंबे बाल होते है। शेर दहाड़ता है, जबकि चीते नही दहाड़ते है।

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