Essay on Fm Radio in Hindi | एफएम रेडियो पर निबंध

Essay on Fm Radio in Hindi: आज हम एफएम रेडियो पर निबंध Radio Essay आपकों यहाँ बता रहे हैं. रेडियो का यह नया अवतार क्या हैं, कक्षा 1, 2,3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चों के लिए 5, 10 लाइन, 100, 200, 250, 300, 400, 500 शब्दों में छोटा बड़ा Fm Radio Essay in Hindi को हम यहाँ पढेगे. इस निबंध की मदद से आप समझ पाएगे fm रेडियो क्या है इसका इतिहास आदि पर सरल निबंध भाषण लिख पाएगे.

Essay on Fm Radio in Hindi

Essay on Fm Radio in Hindi एफएम रेडियो पर निबंध

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Essay on Fm Radio in Hindi In 1000 Words For Kids

जरा याद कीजिए उन दिनों को जब क्रिकेट की कमेंट्री एवं विविध भारती के कार्यक्रमों को सुनने के लिए एक रेडियो सैट के सामने लोगों का हुजूम उमड़ आया करता था. शादी में दूल्हे को रेडियो सैट मिलना भी एक बड़ी बात हुआ करती थी. तब रेडियो ही लोगों के मनोरंजन का मुख्य साधन हुआ करता था.

तब रेडियो पर एक अधिकतम दो चैनल ही लोगों को सुनने के लिए मिला करते थे. किन्तु भारत में 1923 में रेडियो के प्रसारण के प्रारम्भिक प्रयास और 1927 में प्रायोगिक तौर पर इसकी शुरुआत के बाद से अब तक इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की जा चुकी हैं. और इसका सर्वोत्तम उदहारण एफएम रेडियो प्रसारण हैं.

एफ एम फ्रीक्वेंसी माड्यूल का संक्षिप्त रूप हैं. यह एक ऐसा रेडियो प्रसारण हैं जिसमें आवृति को प्रसारण ध्वनि के अनुसार माड्यूल किया जाता हैं. भारत में इसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी. इसके बाद से इसके विकास के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सतत प्रयत्नशील रहा हैं.

एफ एम प्रसारण के क्षेत्र में निजी भागीदारी की आवश्यकता को देखते हुए इस क्षेत्र में प्रसारण के उदारीकरण के लिए जुलाई 2003 में रेडियो प्रसारण नीति समिति का गठन किया गया. 1990 के दशक में इस क्षेत्र में किये गये प्रयासों के बाद यह भारत में एफ एम रेडियो प्रसारण के विस्तार का दूसरा चरण था.

इस समिति ने पहले चरण से प्राप्त अनुभव के आधार पर कई सुझाव दिए. इनमें प्राथमिक रूप से प्रसारण क्षेत्र में प्रवेश करने और छोड़ने की विधि, लाइसेंस शुल्क की संरचना, सेवाओं का क्षेत्र बढ़ाने और मौजूदा लाइसेंसधारियों के दूसरे चरण में जाने की विधि सम्बन्धी कई सुझाव थे. इन्ही सुझावों के परिणामस्वरूप मई 2005 में देश के 40 नगरों में एफ एम की 40 फ्रीक्वेंसी के लिए खुली बोली के द्वारा नीलामी कर सरकार ने इसके तीव्र विकास के प्रयास शुरू कर दिए.

इस नीलामी के द्वारा निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के पीछे सरकार के कई और उद्देश्य थे. जैसे एफ एम रेडियो नेटवर्क का विस्तार करना, उच्च गुणवत्ता वाले रेडियो कार्यक्रम उपलब्ध करवाना, स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना तथा रोजगार बढ़ाना इत्यादि. इस क्षेत्र में प्रगति को विस्तार देने के लिए मई 2006 में देश के विभिन्न प्रान्तों में 19 स्थानों पर एक किलोवाट ट्रांसमीटर क्षमता वाले एफ एम स्टेशनों को स्वीकृति प्रदान की गई.

उसके बाद देश के 87 शहरों में 245 एफ एम चैनलों के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध करवाया गया. आकाशवाणी ने प्रसारण के क्षेत्र में परामर्श और तैयार समाधान उपलब्ध कराने के लिए अपनी एक वाणिज्यिक शाखा के रूप में ए आई आर रिसोर्सेस की शुरुआत की, जो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुफ्त विश्वविद्यालय को देश में 40 स्थानों पर ज्ञानवाणी केन्द्रों की स्थापना के लिए एफ एम ट्रांसमीटर स्थापित करने में सहायता कर रहा हैं.

एफ एम की जब बात चलती हैं तो लोग समझते हैं कि इसका उद्देश्य गीत संगीत आधारित मनोरंजन ही होता हैं जबकि ऐसा नहीं हैं. इसमें कोई संदेह नहीं कि एफ एम आज गीत संगीत आधारित मनोरंजन का पर्याय बन चुका हैं. यह भी सही हैं कि सूचना प्रोद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप लोगों को मोबाइल फोन के माध्यम से साफ़ साफ़ सुनते देखा जा सकता हैं.

पर सही मायनों में देखा जाए तो भारत में एफ एम स्टेशन की शुरुआत शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए की गई थी. स्थानीय स्तर पर एफ एम प्रसारण के लाभ को देखते हुए देश के कई विश्वविद्यालयों ने इसके जरिये अपने शैक्षिक प्रसारण के उद्देश्य से अपने अपने एफ एम प्रसारण चैनलों की शुरुआत की हैं.

यही कारण हैं कि इससे न केवल आम जनता को लाभ पहुंचा हैं बल्कि दूरस्थ एवं खुले विश्वविद्यालयों से शिक्षा ग्रहण कर रहे लोगों के लिए भी वरदान साबित हुआ हैं. इस प्रसारण की ही देन हैं कि अब लोग अपनी स्थानीय बोली में स्थानिय सांस्कृतिक परम्पराओं से सम्बन्धित कार्यक्रमों का आनन्द उठा पा रहे हैं.

आज एफ एम प्रसारण दुनिया भर में रेडियो प्रसारण का पसंदीदा माध्यम बन चुका हैं. इसका एक कारण इससे उच्च गुणवत्ता युक्त स्टीरियो फोनिक आवाज की प्राप्ति भी हैं. शुरुआत में इस प्रसारण की देशभर में कवरेज मात्र 30 प्रतिशत ही थी. किन्तु अब इसकी कवरेज बढकर 60 प्रतिशत से अधिक जा पहुंची हैं. लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही सूचना एवं जानकारी के अभाव में जनता न तो अपनी पसंद की सरकार चुन सकती हैं और न ही सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकती हैं.

इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो एफ एम प्रसारण के क्षेत्र में प्रगति से भारतवासियों को निश्चय ही अधिक लाभ पहुंचा हैं. एफ एम प्रसारण के महत्व को देखते हुए देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों ने इसमें रोजगार की सम्भावनाओं के दृष्टिकोण से इससे सम्बन्धित पाठ्यक्रमों की शुरुआत की हैं.

एफ एम गोल्ड, रेडियो मिर्ची, बिग एफ एम इत्यादि जैसे एफ एम रेडियो चैनल आज इतने लोकप्रिय हो चुके हैं कि हर दस में से सात युवा इनसे निश्चित रूप से परिचित हैं. विज्ञापन के क्षेत्र में भी एफ एम प्रसारण ने अभूतपूर्व क्रांति का सूत्रपात किया हैं.

पहले के रेडियो प्रसारण में स्थानीय विज्ञापनों से अधिक लाभ नहीं होने के कारण इनकी कमी अनुभव की जाती थी. किन्तु अब स्थानीय विज्ञापनदाताओं को भी इससे लाभ मिलने लगा हैं. एफ एम रेडियो प्रसारण के व्यापारिक महत्व को देखते हुए बड़े बड़े औद्योगिक घराने ने भी अपने एफ एम रेडियो प्रसारण की शुरुआत की हैं.

रिलायंस का बिग एफ एम इसका एक अच्छा उदहारण हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और बी बी सी जैसे मीडिया के दिग्गजों ने भी एफ एम प्रसारण के क्षेत्र में अपने कदम रखकर इसकी महत्ता को उजागर किया हैं. आने वाले समय में एफ एम प्रसारण के एक महत्वपूर्ण निजी उद्योग के रूप में उभरने की सम्भावना हैं, इसकी शुरुआत रिलायंस जैसे व्यापारिक घरानों से हो चुकी हैं.

एफएम के जरिये समाचार प्रसारण की आजादी नहीं दी गई थी. इसे शैक्षिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बढाया जा रहा था, किन्तु कुछ महानगरों के चुनिन्दा चैनलों को समाचार प्रसारण की स्वतंत्रता दे दी गई है और अब यह उम्मीद की जा रही हैं कि सभी एफ एम चैनलों के जरिये समाचार प्रसारण की इजाजत भारत सरकार शीघ्र ही दे देगी.

इस समय देश के लगभग सौ से अधिक एफ एम चैनल शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु प्रसारण कर रहे हैं. सूचना के महत्व को देखते हुए जिस देश में सूचना का अधिकार विधेयक पारित किया गया हो, वहां तीव्र सूचना की प्राप्ति के लिए एफ एम रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में प्रगति निश्चय ही एक शुभ संकेत हैं. समय के साथ साथ इसके विकास में तेजी आएगी और यह देश के विकास में भी अहम योगदान देगा.

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