खुशी पर निबंध Essay on Happiness in Hindi

Essay on Happiness in Hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम खुशी पर निबंध लेकर आए हैं. जीवन में हर कोई खुश और मस्त रहना चाहता है, मगर खुशी लाए कैसे यह सभी के लिए बड़ा प्रश्न रहता हैं. इस खुशी निबंध, भाषण, अनुच्छेद में हम शोर्ट में समझना का प्रयास करेगे कि खुशी क्या चीज है और जीवन में खुश कैसे रहे और इसका महत्व क्या हैं.

खुशी पर निबंध Essay on Happiness in Hindi

खुशी पर निबंध Essay on Happiness in Hindi

हर एक जीवन का उद्देश्य खुशी के साथ जीवन जीना होता हैं, मगर यही तो सभी का सवाल हैं सभी की उलझन हैं. अतीत और भविष्य की अनचाही चिंताएं हमारे वर्तमान के छोटे सुकून को भी छीन लेती हैं.

छोटे छोटे ख़ुशी के पलों का आनन्द उठाकर अपने जीवन की दिशा खुशहाली और आनन्ददायी जीवन की तरफ मोड़ सकते हैं. आज हम हैप्पीनेस अर्थात प्रसन्नता पर अलग अलग शब्द सीमा में आपके लिए कुछ निबंध लेकर आए हैं. उम्मीद है आपको ये पसंद आएगे.

निबंध 100 शब्द

प्रसन्नता या खुशी एक तरह का मनोभाव है जो सुख व सुकून देने वाला होता हैं. ऐसा नहीं है यह केवल मनुष्यों में ही पाया जाता हैं बल्कि पशु पक्षियों, पेड़ पौधों सभी सजीवों में दुःख एवं पीड़ा के भाव होते हैं.

बस इसे जाहिर करने के विविध तरीके हो सकते है कुछ मूक बनकर अपनी खुशी जाहिर करते है जैसे पशु आदि, जबकि मनुष्य मुस्कान या हंसी के द्वारा मन की प्रसन्नता को दूसरों के समक्ष प्रस्तुत करता हैं.

खुशी मन का भाव है इसलिए इसे उसी रूप में शब्दों में बया करना कठिन हैं केवल इसे महसूस ही किया जा सकता हैं. एक स्वस्थ जीवन में प्रसन्नता का होना बेहद जरुरी माना गया हैं.

आजकल के हमारे जीवन में जिस चीज की सबसे अधिक कमी है अथवा हम जिसे पाने के लिए दिन रात प्रयत्न करते हैं वह खुशी ही हैं.

दोनों व्यक्तियों की खुशी का कारण एक हो भी सकता है और नहीं भी. कुछ लोग धन दौलत से प्रसन्न होते है तो कुछ पारिवारिक जीवन के सुख से तो कुछ प्रकृति दर्शन से ही खुश हो जाते हैं.

खुशी पर निबंध, 200 शब्द:

आमतौर पर प्रत्येक मनुष्य के चेहरे पर दो तरह के भाव परिलक्षित होते है पहले खुशी के तथा दूसरे गम के, अक्सर हम अपने पसंद की वस्तुएं पाने पर या अपना काम बन जाने से खुश होते है

जबकि इसके विपरीत इन्ही स्थितियों में जब हमारा काम अटक जाता है तो हमारे चेहरे पर उदासी के भाव छा जाते हैं. आज के भौतिकतावादी युग में चीजे बनावटी है इसमें खुशी भी वैसी ही है जैसी की अन्य चीजे दाल आटा आदि.

बहुत से लोगों से हम मिले होंगे जिन्हें बस अवसर पर खुशी जाहिर करनी होती हैं. यह उनके दिल का भाव न होकर एक तरह की अनिवार्यता होती हैं.

मगर बालक के चेहरे की मुस्कान के पीछे सच्ची खुशी छुपी होती हैं जो बड़े होने पर धीरे धीरे मजबूरी और दिखावे के बीच गायब हो जाती हैं.

जो लोग बाहरी भौतिक वस्तुओं में खुशी खोजते है उन्हें यह प्राप्त होना बेहद कठिन इसलिए है क्योंकि जीवन में हम वो सब कुछ नहीं पा सकते है जो हमारे मन की इच्छा होती हैं.

गाड़ी, बंगले, बिजनेस, अपार पैसे की प्राप्ति के बाद खुश रहने की शर्त लोगों में इसलिए बसी होती है क्योंकि बचपन से उन्हें यही सिखाया जाता है कि जीवन में अच्छा पढ़ोगे, अच्छी सैलरी की नौकरी करोगे, अच्छी पत्नी मिलेगी तभी खुश रह पाओगे. इन पूर्व निर्धारित शर्तों के आधार पर जीवन में छोटी सी कमी हमारी खुशी के आगमन की शर्त में बाधक बन जाती हैं.

यदि आप बाहरी साधनों के साथ जीवन में खुशी लाने के प्रयत्न में लगे है तो आपकों आज ही समझ लेना चाहिए कि वह खुशी भी तब तक ही रहेगी, जब तक कि वे साधन आपके पास हैं. इसलिए अपने भीतर से प्रसन्नता के भाव को जगाइए.

आप नित्य छोटे छोटे खुशी के पलों को बटोरकर जीवन को खुशनुमा बना सकते हैं. हाँ आपके इन अवसरों को लाने या इनमें जीने में आपके दोस्त रिश्तेदार या परिवार के सदस्य भागीदार हो सकते हैं.

सकारात्मकता को अपने जीवन में स्थान देकर आप अपने आंतरिक अवसादों को पराजित कर जीवन में कभी न लौटने वाली खुशी से जी सकते हैं.

Essay on Happiness in Hindi 250 वर्ड्स, हिंदी में खुशी पर निबंध

जीवन में खुश रहना हर व्यक्ति की ख्वाइश होती हैं. हंसते मुस्कराते चेहरे सभी को प्रिय होते हैं. इसके लिए हमें जीवन के सभी हालातों में खुश रहने का प्रयत्न करना चाहिए.

लोगों में एक गलत धारणा हमेशा से रहती है कि अधिक धन में ही अधिक खुशी है जबकि ऐसा नहीं हैं. जिन लोगों के पास अपार धन दौलत होती है वे ही सबसे अधिक व्याकुल एवं बैचेन रहते हैं.

धन और खुशी का उतना बड़ा सम्बन्ध नहीं है जितना कि हम सोचते हैं. एक निर्धन व्यक्ति, साधु सन्यासी, आम गृहस्थी जिनके पास जीवन में धन उतना ही होता है, जिससे वे दो वक्त का अपना गुजारा कर सकते हैं वे एक अमीर व्यक्ति की तुलना में अधिक खुश एवं सुखी रहते हैं.

यह लोगों की अपनी व्यक्तिगत सोच और नजरिया ही है, कि वे किसमें खुशी के पल खोजते हैं. कुछ अधिक धन कमाकर स्वयं को खुश बनाते है तो कुछ लोग हर स्थिति में स्वयं को खुश या संतुष्ट रखना सीखते हैं.

अच्छी हेल्थ, सकारात्मक विचार इंसान को हमेशा संतुष्ट रखते है संतुष्टि एवं खुशी एक दूसरे के पर्याय है. जहाँ के जीवन के संतुष्टि के भाव होंगे वहा खुशी स्वतः ही आएगी.

प्रसन्नता के लिए अच्छा स्वास्थ्य भी जरुरी है. एक स्वस्थ व्यक्ति न केवल स्वयं खुश रह सकता है बल्कि अपने आस पास के लोगों को भी खुशी दे सकता हैं.

वही रुग्ण, बिमारी से पीड़ित इन्सान के पास सुख सुविधा के अन्य साधन होने के बाद भी यदि स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो खुश रहना सम्भव नहीं होता हैं.

इस तरह खुशी का राज अच्छे स्वास्थ्य में भी छिपा है हम अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखने का प्रयत्न करे तथा इसी में अपनी खुशी को खोजे तो यकीनन अपने जीवन को सुखी बना सकते हैं.

वही कुछ लोग अपने पसंद के काम को करके जीवन में खुशी अर्जित करते हैं. उन्हें उस कार्य को करने में मन लगता है अच्छा लगता है. इसके विपरीत जो काम हमें पसंद नहीं होते है तथा मजबूरीवंश करने होते है ये जीवन में उलझन, नकारात्मकता तथा उदासीनता के भावों के जनक होते हैं.

इसलिए हमेशा अच्छे रहिये तथा वही करिए जो आपका दिल कहता हैं, मन चाहता है निश्चय ही ऐसा करके आपकों अपार सुख मिल सकता हैं.

हमेशा हल्के फुल्के रहने का प्रयास कीजिए, व्यर्थ की चिंताओं से स्वयं को दूर रखने का यत्न करिए. अपने आस पास के लोगों का मूड अच्छा बनाने में मदद करिये. कभी स्वयं पर हंसने की आदत की रख लीजिए. हर वक्त काम ही काम की प्रवृत्ति से थोड़ा बाहर निकलिए.

अंग्रेजी की एक कहावत है कि हर समय काम और बस काम इंसान को मुर्ख बना देता हैं. इसलिए अपने काम को निर्धारित समय सीमा में बांधिए तथा अतिरिक्त समय को अपने परिवार, दोस्तों के साथ बिताइए.

यकीनन आप धीरे धीरे स्वयं को पहले से खुश पाएगे. खुशी एक आग की तीली की तरह होती है इसे बढ़ाने वाले जितने अधिक साधन या लोग हो उनके साथ शेयर करते जाइए, वर्ना साझा न की जाने वाली खुशी पूर्णतया निरर्थक ही मानी जाती हैं.

खुशी क्या है इसे शब्दों में वर्णित नहीं की जा सकती हैं. इसे केवल अनुभव या महसूस ही किया जा सकता हैं. जीवन में खुशी पाने में एक बड़ी बाधा नकारात्मक विचार होते है जो केवल क्षोभ, चिंता, भय, दुःख एवं उदासी का कारण बनते हैं.

इसलिए इस तरह के भावों को अपने मन में जगह मत दीजिए. आज के जीवन में जहाँ हर कोई चिंता, तनाव और व्यस्तता के बीच जीवन के दिनों को तैसे वैसे काट रहा हैं.

इस प्रवृत्ति से बचकर अपने अच्छे अतीत के खुशी के पलो को सजोकर रखे उन्हें अपनो के साथ साझा करते रहे. जीवन अनिश्चित है कोई भी समय टिकाऊ नहीं रहता है चाहे वह हर्ष का हो या पीड़ा का अतः सभी के प्रति ज्यादा लगाव न रखकर संतुष्ट भाव से जीवन जिए तथा स्वयं खुश रहे अपने आस पास के लोगों को भी खुश करने का सतत प्रयास करते रहे.

खुशी पर निबंध, 300 शब्द:

आनन्द की स्थिति का अन्य नाम खुशी हैं. यदि हम अपने दिमाग को इस तरह ही निर्देशित करे तो वह हमेशा खुश रहने के लिए प्रशिक्षित हो सकता हैं.

मन और मस्तिष्क के अपने समन्वय के अनुसार ही भाव प्रदर्शित होते हैं इसलिए जो मन कहता हैं उस पर दिमाग का क्रियान्वित होना उतना आसान नहीं हैं, बस थोड़े समय के प्रशिक्षण के बाद हम अपने मस्तिष्क को इसके लीये तैयार कर सकते हैं.

जीवन में खुशी पाने के लिए कई अध्ययन एवं शोध प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें कुछ आम बातें जो सभी शोधों में स्पष्ट हो चुकी हैं वे इस प्रकार हैं. जीवन की इन बातों को खुशी के मंत्र कह सकते हैं, जिनमें पहला मंत्र है संतुष्टि.

हमें छोटी मोटी बातों से अधिक उत्साहित होने या अधिक उदास होने की बजाय हर स्थिति में संतोषी बनने की जरुरत हैं. दूसरा मंत्र है वर्तमान में जीने का. हमारे अधिकतर दुखों का कारण अधिक आकांक्षाएं एवं भूत भविष्य की बातें ही होती हैं.

विगत समय में हमसे हुई भूलों को नित्य याद करने की बजाय उन्हें विस्मृत कर दे, मनुष्य को गलतियों का पुतला इसलिए ही कहा जाता है क्योंकि प्रत्येक कार्य में उनसे गलती होने की प्रबल सम्भावना रहती हैं.

हम भविष्य के लेकर भी अधिक चिंतित नहीं रहे क्योंकि ये अतिरिक्त विचार व खयाल मस्तिष्क में असुरक्षा एवं भय का कारण बनते है जिससे हम खुश नहीं रह पाते हैं.

हमारा जीवन जैसा भी है उससे संतुष्ट हो तथा जो कुछ हमारे पास है उन्हें विशिष्ट समझे तथा ईश्वर को उन्हें प्रदान करने के लिए धन्यवाद अर्पित करे.

प्रत्येक खुशी के अवसर को उत्सव की तरह सेलिब्रेट करे इन्ही छोटे छोटे पलों को संजोकर हम अपने जीवन में बड़ी खुशियों के द्वार को खोल सकते हैं. जीवन में सकारात्मक विचारों को महत्व दे, अपनी सोच का निर्माण इस तरह करे जिसमें नकारात्मक विचार कम से कम हो.

संसार में वस्तुएं सभी के लिए समान होती है, बस उसके प्रति हमारा नकारात्मक या सकारात्मक नजरिया ही हमें खुशी या गम देता हैं.

जीवन के हर पल में खुशी पाने का एक ही तरीका है हमारे पास जो कुछ है उसे श्रेष्ठ माने तथा अच्छा महसूस करने का प्रयत्न करे, अपने आस पास ऐसे लोगों लगे रहे उनकी संगति करे जो सकारात्मक विचार रखते है. ऐसा करने से हम अपने विचारों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.

खुशी पर निबंध, Essay on happiness in hindi (400 शब्द)

प्रस्तावना– प्रत्येक इन्सान को जीवन में प्रसन्न रहने का प्रयत्न करना चाहिए. जीवन में खुशी कौन व किन तरीको से प्राप्त करता है, इसे हम अपने दैनिक जीवन के कई उदाहरणों से समझ सकते हैं.

जो व्यक्ति नियमित रूप से असंतुष्ट एवं बैचेन रहते है वे कभी आंतरिक रूप से खुश नहीं रहते हैं. बहुत से इस भ्रम में जीते है कि प्रसन्नता धन से प्राप्त होती हैं,

मगर धन दौलत कभी भी प्रसन्नता नहीं दे सकती हैं, क्योंकि बिना धन के जीवन निर्वाह करने वाले गरीब भी प्रसन्नतापूर्वक जीवन व्यतीत कर सकते हैं, असीमित धन पाकर भी अमीर नाखुश हो सकते है.

खुशी का खजाना है अच्छा स्वास्थ्य – जीवन में प्रसन्नता की कई अहम शर्ते हो सकती हैं. मगर इनमें प्रमुख है स्वच्छता. यदि व्यक्ति शारीरिक या मानसिक रूप से किसी बिमारी से ग्रसित है तो वह कभी प्रसन्न नहीं रह सकता है.

यह कोई पूर्ण शर्त नहीं है क्योंकि कुछ भयानक बीमारियों से पीड़ित लोग भी अपने चेहरे पर मनभावन मुस्कान रखते है, वे बेहद संतुष्ट एवं सकारात्मक लोग होते है जो किसी बहाने खुशी के अवसर खोज ही लेते हैं.

प्रत्येक इंसान को स्वास्थ्य के राज जानकर स्वस्थ बने रहने का प्रयास कर सके जिससे वे भी खुश रहे तथा अपने आस पास के लोगों को भी खुशी दे सके.

धन नहीं है प्रसन्नता का स्रोत– व्यक्ति के पूर्ण रूप से संतुष्ट होने की अवस्था को खुशी कहा जाता हैं, इस सम्बन्ध में विद्वानों ने अलग अलग परिभाषाएँ दी हैं,

जिनमें यह आम तथ्य है कि खुशी आंतरिक वस्तु है जो दीर्घकालीन समय तक बनी रहती है बाहरी साधनों से प्राप्त हुई प्रसन्नता क्षणिक होती है तथा तब तक ही रहती है जबकि तक कि वे साधन हमारे पास हो. यदि अधिक पैसे जोड़कर खुशी पाई जाती है तो आज उद्योगपति, अभिनेता एवं राजनेताओं के जीवन में उदासी या गम का कोई कारण नहीं हैं.

मगर हकीकत यह है कि जिसकें पास अधिक धन है वे अधिक दुखी, भयभीत एवं असुरक्षित महसूस करते है वे हमेशा स्वयं, बच्चों की या परिवार या फिर आर्थिक नुकसान के भय से हमेशा त्रस्त रहते हैं. इससे स्पष्ट है कि खुशी का एक जरिया धन हो सकता हैं जबकि यह आधार या आवश्यक शर्त कभी नहीं हो सकती हैं.

कार्य से प्रसन्नता मिलती है : जीवन में प्रसन्नता के लिए कार्य करना भी जरुरी हैं. बेकार रहने अथवा मन इच्छित कार्य न मिल पाने के कारण भी बहुत से लोग मायूस रहते हैं.

इसलिए हमें प्रयत्न करना चाहिए हम जो भी कार्य करे उसे अपनी पसंद का चुने अथवा जो कार्य हम कर रहे है वह अपनी पसंद पर आधारित न होकर किसी मजबुरी के कारण करना पड़ता है तब भी उससे मन को संतुष्ट करने का प्रयास करे तथा उसे अपनी पसंद बनाकर हम कार्य से भी जीवन में खुशी अर्जित कर सकते हैं.

मनोरंजन एक कारगर साधन – अक्सर मन जब व्यथित हो तो मन बहलाने के लिए हम विभिन्न मनोरंजन के साधनों का सहारा लेते हैं. यथा गाने सुनना, खेल खेलना अथवा फिल्म देखने दोस्तों के साथ घूमने के लिए जाने पर भी हम क्षणिक तनाव या कष्ट को भुलाकर जीवन में खुशी पा सकते हैं.

इसके अतिरिक्त पुस्तके तथा सच्चे मित्र भी कारगर साधन हो सकते हैं. यदि आपके पास एक सच्चा मित्र है तब आप स्वयं को भाग्यशाली मानिए क्योंकि वह भी आपकी खुशी का एक जरिया हैं.

खुशी का खजाना – जीवन में प्रसन्नता हमारे हालात पर कम हम पर अधिक निर्भर करती हैं. यदि हम चाहे तो हमारे अनुकूल वातावरण का निर्माण कर सकते हैं. अभावों, कठिनाइयों एवं निर्धनता के बीच भी खुश रहना सीख सकते हैं.

झोपडी में बसने वाला एक किसान भी हंसमुख रह लेता है जबकि एक एकड़ में बने महलों में रहने वाला राजकुमार भी अप्रसन्न रहता है इसलिए खुशी किसी भी परिस्थिति जन्य न होकर यह हम पर निर्भर करती हैं.

खुशी पर निबंध 500 शब्दों में, Essay on Happiness in Hindi for Children’s and Students

ख़ुशी और उदासी Happiness and Sadness

जीवन में कुछ भी स्थिर और सदा के लिए नहीं होता हैं. संसार में आज लोगों के जीवन में खुशी की बजाय उदासी अधिक नजर आती हैं.

जिस तरह सुख दुःख, धूप, छाँव कुछ भी सदा के लिए नहीं होता इसी तरह हमें खुशी एवं उदासी दोनों का जीवन में कई बार सामना करना पड़ता हैं.

यह मानवीय भावना है जो मस्तिष्क एवं वातावरण द्वारा चालित है, अभ्यास एव प्रशिक्षण से इस पर नियन्त्रण पाया जा सकता हैं.

खुशी के सम्बन्ध में जितना भी वर्णन किया जाए वह असत्य अथवा आंशिक सत्य ही होगा, क्योंकि भावनाओं को केवल जीकर ही अनुभव किया जा सकता है, उन्हें समझा जा सकता हैं.

जहाँ तक व्यक्ति में खुशी के भाव के दर्शन की बात है तो इन्हें उनकी आँखों में देख सकते हैं उनकी आत्मा व चेहरे की चमक से अंदाजा लगा सकते हैं, इसमें भी बड़ी सावधानी की आवश्यकता हैं, क्योंकि आज के दौर में बनावटी खुशी भी उतनी ही लसक से चेहरे को मोह लेती हैं.

आमतौर पर जीवन में हम खुशी को विशिष्ठ नियमों में बाँध लेते है तथा निर्णय देने के लिए तत्पर रहते है कि अमुक इन्सान के साथ यह हुआ है तो वह खुश है या नाखुश है अथवा उन्हें खुश होना चाहिए.

यदि लम्बे अरसे के बाद हमारी मेहनत एक दिन सफल होती है तो अधिकतर लोग खुशी के मारे पागल हो जाते है और उनकी आँखों के आंसू इसकी बयाँ करते हैं, जबकि ठीक इन्ही हालातों में बड़े अथक परिश्रम के बाद परिणाम विपरीत मिले तो चेहरे पर मायूसी के दर्शन होना स्वाभाविक हैं.

परिवार से ख़ुशी का रिश्ता Happy relationship with family

जब हम जीवन में खुशी के कारणों एवं उत्तरदायी कारकों की खोज में निकलते हैं तो इनमें परिवार एक अहम करक हैं हमारी खुशियों एवं गमों को नियंत्रित करने उनमें साथ निभाने में अग्रणी परिवार ही होता हैं. सभी सदस्यों के साथ बैठकर खाना खाने, घूमने जाते एवं प्यार व आनन्द की अनुभूति खुशी को जन्म देती हैं.

जब हम अपने मित्रों के साथ बाते करते हुए वक्त निकालते है तो निश्चय ही वास्तविक दुनियां के तनाव से दूर एक अन्य वातावरण में अपने मस्तिष्क को ले जाते हैं.

कभी प्यार तो कभी पैसों के बहाने खुशी के छोटे बड़े अवसर जीवन को आनन्द से भरते हैं. मूलतः प्रसन्नता व्यक्ति के अंदर निहित भाव है जिसे बाहर के साधनों में पाने अथवा खोजने के यत्न फिजूल ही हैं,

ख़ुशी हर पल में है Happiness is Everywhere and Every time

बेशक यदि आप अपने परिवार और कार्य से संतुष्ट है तो उम्मीद की जाती हैं आपको जिन्दगी में खुशियों का संसार बस्ता है बस हर कोई थोड़े से प्रयत्न एवं पक्के निश्चय से अपने जीवन में खुशी ला सकता हैं.

आज के हमारे कुछ प्रयास भविष्य के जीवन में दीर्घ कालीन बसनें वाली खुशियों का कारण बन सकता हैं.

अक्सर लोग इसी पीड़ा में अपने वर्तमान के सुख का त्याग कर देते है कि उनके पास वह नहीं हैं उसकी कमी है जबकि जो कुछ है वे कठिनाईयाँ हैं. वहीँ व्यक्ति जीवन के अतीत में व्यतीत सुख के दिनों को जल्दी भूल जाता हैं तथा दुःख की यादों को अन्तः काल तक अपने साथ रखता हैं.

मेरा ऐसा यकीन है हम अतीत की बुरी व अप्रिय यादो को भूलाते हुए सुकून के पलों को अपने साथ रखते हुए वर्तमान में जीने का प्रयास करे तथा हर एक सैंकड की खुशी को एन्जॉय करे तो हम खुश रह सकते है तथा औरों के जीवन में भी खुशियाँ भर सकते हैं.

सकारात्मकता और खुशी Positivity and Happiness

आपने कभी छोटे बच्चें को गौर से देखा है तो एक बात उनकी अवश्य जानी होगी. बच्चें अपने अधिकतर समय में खुश रहते है कुछ पलों को छोड़कर जब उनकी पसंद की वस्तु न लाई गई हो, दोस्त के साथ झगड़ा हुआ हो तो वह कुछ वक्त के लिए नाखुश भले ही हो मगर तुरंत उन्हें भूलने के बाद प्रसन्न हो जाते हैं.

फिर बड़े होकर हमें क्या हो जाता है कि खुशी के अवसर पर भी हम इस चिंता में रहते है कि हमारे पास वह नहीं है वोह नहीं हैं. सबसे बड़ी संपदा तो प्रसन्नता ही है जिसके सुनहरे पलों को हम कमियां गिनाने में फिजूल कर जाते हैं.

जानते है चाकलेट न मिलने पर मायूस बच्चे और हमारे जीवन में कितना फर्क है बस नकारात्मकता और बीते वक्त की बुरी यादों के संग का, जो उस बच्चें में नहीं है जो चाकलेट न मिलने पर नाखुश है और कुछ पल बाद उसका मन बहल जाएगा

मगर एक हम है जो जीवन में नकारात्मक विचारों एवं अतीत के दुखदायी क्षणों से मन बहलाने का प्रयास करते है फिर हम किस तरह उस बालक जैसी मुस्कान एवं प्रसन्नता की आशा कर सकते हैं. इसलिए तो कहते है अपने भीतर के बच्चें को जिन्दा रखिये यही जीवन में खुशियाँ भरने के लिए पर्याप्त हैं.

प्राकृतिक सुन्दरता में भी ख़ुशी है Happiness in Nature

निश्चय ही हमारी प्रकृति सबसे बढ़कर सुंदर है उसके पास अपना संगीत, सौन्दर्य, परिवर्तनशीलता सब कुछ हैं, मन मोह लेने वाले नजारे हैं पक्षियों, पेड़ों, नदी, झरनों का गान है.

यकीन मानिये भले ही आप प्रकृति प्रेमी या पर्यावरण प्रेमी नहीं है तो भी एक बार प्रकृति माँ की गोदी में जाइए, आपके चेहरे की मुस्कान, दिल की उत्तेजनाएं एवं मन के भाव ही आपकी खुशी को प्रकट कर जाएगे.

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