हरिद्वार पर निबंध – Essay on Haridwar in Hindi Language

हरिद्वार पर निबंध Essay on Haridwar in Hindi Language: इस्लाम को मानने वालों के लिए जो स्थान मक्का मदीना का ईसाइयों और युहुदियों के लिए जेरूसलम का उसी तरह हिन्दुओं के लिए हरिद्वार का धार्मिक महत्व हैं. उत्तराखंड राज्य में स्थित यह नगरी मुक्ति धाम कही जाती है. जहाँ मृत्यु के पश्चात आस्तियां गंगा में प्रवाहित करने देशभर से लोग आते हैं.

Essay on Haridwar in Hindi Language

भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित हरिद्वार हिन्दुओं का मुख्य तीर्थ स्थल हैं.  भारत के सबसे बड़े  धार्मिक नगरों में  हरिद्वार की गिनती की जाती हैं शहर का नामकरण हरी तथा द्वार दो शब्दों से हैं जिसका आशय ईश्वर का दरवाजा होता हैं. मोक्षदायिनी गंगा हरिद्वार से होकर गुजरती हैं.

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु पर उनकी अस्थियों को हरिद्वार जाकर बहाया जाता हैं. गंगा नदी को हिन्दू संस्कृति में माँ का दर्जा दिया गया हैं जिसका उद्गम गौमुख कहलाता हैं जो हरिद्वार  250 किमी की दूरी पर स्थित हैं. कहते है कि जब राजा भागीरथ गंगा जी को धरती पर लाए तो यह हरिद्वार के इसी रास्ते से गुजरी थी इस कारण हरिद्वार का गंगा का प्राचीन द्वार भी कहते हैं.

हिन्दू पुराणों की मान्यता के अनुसार जब समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत का कलश छिला तो वह चार स्थानों पर गिरा जिनमें से एक स्थान हरिद्वार भी था. हरिद्वार के अतिरिक्त अमृत कलश उज्जैन नासिक और इलाहबाद में भी गिरा, जहाँ वर्तमान में चार कुम्भ के मेले भरते हैं. हर तीन साल में हरिद्वार में कुम्भ मेले का आयोजन होता हैं इसके अतिरिक्त 12 साल में एक बार कुम्भ मेला उत्तरप्रदेश के प्रयाग में भरता हैं. जहाँ लाखों की संख्या में भक्त स्नान करने आते हैं.

ऐसा माना जाता हैं कि हरिद्वार में ब्रह्म कुण्ड अथवा हरि की पौड़ी इन स्थलों पर अमृत कलश गिरा था यहाँ विष्णु जी के कदम पड़े थे. यहाँ गंगा में आकर स्नान करने वाले मानव को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं तथा उसके समस्त पाप कट जाते हैं. वर्ष 2000 से पूर्व हरिद्वार उत्तरप्रदेश के सहारनपुर मंडल में 1998 में जिला बनाया गया था.

Haridwar Essay in Hindi Language

हरिद्वार को चार धाम का बद्रीनाथ केदार नाथ गंगोत्री और यमुनोत्री प्रवेश द्वार भी कहते हैं. इसे हिन्दू पुराणों में गंगद्वर और मायापुरी भी कहा गया हैं. धौम्य मुनि ने युधिष्ठिर को गंगद्वार के महत्व के बारे में बताया, जब कपिल मुनि गंगा के तट पर यहाँ रहने लगे तो हरिद्वार  कपिलस्थान के रूप में जाना गया. मुगल सम्राट अकबर ने हरिद्वार को मायापुरी कहकर संबोधित किया था.

मुगलकाल में हरिद्वार को महत्वपूर्ण स्थान मिला. अकबर ने जब गंगा के जल को पीया तो इसे अमृत तुल्य बताया था. भारत की सभ्यता एवं संस्कृति के प्रतिनिधि शहर हरिद्वार में अकबर ने सिक्के ढलवाने की टकसाल भी लगवाई थी. विदेशी अंग्रेजी यात्री कोर्यात जब भारत आया तो उसने हरिद्वार को शिव की राजधानी कहकर सम्बोधित किया.

आज भी हरिद्वार में भारत की सदियों पुरानी आश्रम व गुरु शिष्य व्यवस्था यहाँ जीवंत हैं. यह शहर ध्यान-योग योगासन यज्ञ एवं अन्य धार्मिक संस्कारों का मूल केंद्र माना गया हैं. 1886 ई0 में ही हरिद्वार रेलवे मार्ग से जुड़ गया था.

भारत के पर्यटन स्थलों में हरिद्वार का महत्वपूर्ण स्थान हैं. यहाँ पावन पवित्र गंगा, लक्ष्मण झूला और ऋषिकेश तथा पर्वतों में मनसा माताजी के मन्दिर विशेष आकर्षण के केंद्र हैं.

हरिद्वार को ” हर की पौड़ी ” क्यों कहा जाता है और इसका महत्व क्या है ?

हमेशा से हरिद्वार ऋषि मुनियों की तपस्या स्थली रहा हैं. हरिद्वार को हर की पौड़ी भी कहा जाता हैं. इसके पीछे मान्यता यह है कि राजा स्वेत ने यहाँ ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की.उनकी निष्ठां से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने दर्शन देकर वर मांगने के लिए कहा. तब से ही इस स्थल को ब्रह्मकुंड और हर की पौड़ी कहा जाने लगा. रहस्यों की नगरी हरिद्वार से हर व्यक्ति का अतीत जुड़ा होता हैं. जिन लोगों के पूर्वजो की कही भी जानकारी नहीं मिलती है उनके इतिहास की जानकारी हरिद्वार अवश्य मिलती हैं.

यहाँ हर की पौड़ी नामक एक घाट है इसलिए इसे हर की पौड़ी कहते हैं. इसी स्थल पर भगवान आए थे और उनके चरण पड़े थे. करोड़ो जीवों को मुक्ति देने वाली पावन धरा हरिद्वार भारत का एक प्रमुख तीर्थ स्थल हैं.

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