Essay on Importance of Games in Hindi Language | खेलकूद का महत्व पर निबंध

Essay on Importance of Games in Hindi Language | खेलकूद का महत्व पर निबंध: इंसान का मस्तिष्क सभी जीवों तथा प्राणियों में श्रेष्ठ माना गया हैं. उसने अपने दिमाग के बल बूते पर ही सम्पूर्ण पृथ्वी को अपने अधिकार में करने में सफलता अर्जित की हैं. अपने इस मुकाम तक पहुचने के उनके प्रयास अभी भी जारी है. स्वस्थ मस्तिष्क ही विकास का परचम लहरा सकता है तथा मस्तिष्क के विकास में खेलों का बड़ा महत्व हैं. यह कहावत सत्य है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग का वास होता हैं. अतः व्यक्ति को शरीरिक तथा मानसिक रूप से पूर्ण चुस्त रहने के लिए नियमित खेल खेलने चाहिए तथा व्यायाम करना चाहिए.

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Essay On Sports And Games In Hindi खेलों का महत्व पर निबंध: खेल और व्यायाम हमारे शरीर के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. खेलकूद तथा स्वस्थ जीवन के सामजस्य तथा आपसी सम्बन्धों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि स्वस्थ जीवन के लिए खेल बेहद जरुरी हैं.

आज के खेलकूद पर निबंध में बच्चों के लिए सरल भाषा में खेलों के महत्व पर छोटे अनुच्छेद पेरोग्राफ में निबंध (एस्से) उपलब्ध करवा रहे हैं. जिन्हें आप 100,200,250,300,400,500 शब्दों में एस्से ओन इम्पोर्टेंस ऑफ़ गेम्स एंड स्पोर्ट्स यहाँ दिया गया हैं.

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खेल खेलने के कई सारे फायदे है. इनसे न सिर्फ शरीर की हड्डियों तथा मांसपेशियों को मजबूती मिलती हैं बल्कि शरीर में रक्त का संचार भी उचित तरीके से होता हैं. शरीर की पाचन क्षमता को बढाने में खेलों का बड़ा योगदान हैं. खेलकूद से शरीर में अतिरिक्त प्राणवायु मिलती हैं. जिसके कारण फेफड़ों को मजबूती मिलती हैं.

खेल में शरीर के विभिन्न अंग सुचारू रूप से चलते है जिसके कारण उनमें सक्रियता बढ जाती हैं. शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलता हैं. इस प्रकार खेल न सिर्फ व्यक्ति की फिजिकल देलोपमेंट के लिए जरुरी है बल्कि मानसिक फिटनेस में भी खेलकूद का बड़ा योगदान हैं.

व्यक्ति को मानसिक उद्देल्नाओं तथा समस्याओं से निपटने की क्षमता खेलों से ही मिलती हैं. पूज्य स्वामी विवेकानन्द जी ने खेलकूद के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा था कि यदि आप गीता के रहस्य को समझना चाहते है तो खेल के मैदान में जाओ और फुटबॉल खेलो.

उनके कहने का अर्थ यह था कि व्यक्ति द्वारा खेलों को खेलने से उनमें मानसिक क्षमता का विकास होता हैं. प्लेटों ने खेलों के महत्व के सम्बन्ध में कहा था कि बच्चें को सजा देकर नियंत्रित करने की बजाय उन्हें खेलों के माध्यम में कंट्रोल में लेना अधिक सरल हैं. जीवन के हर पडाव में खेलों का बड़ा महत्व है चाहे वह बाल्यावस्था हो या किशोरावस्था या युवावस्था. बाल्यवस्था में खेलकूद का अधिक महत्व होता है क्योंकि उम्रः के इस दौर में बच्चें का शारीरिक एवं मानसिक विकास अन्य आयु सीमा की तुलना में बेहद तीव्र गति से होता हैं.

बच्चे की ऊर्जा तथा शक्ति का सही उपयोग खेलों के माध्यम से ही संभव हैं. यदि उसे बाल्यकाल से ही खेलों में रूचि है तो यह सभव है कि वह अपने खाली समय का उपयोग गलत कार्यों में करने की बजाय उसे खेलकूद में ही व्यतीत करेगा. हरेक शिक्ष्ण संस्थान में खेल की पर्याप्त व्यव्स्थाए इसी उद्देश्य से की जाती है ताकि बच्चा खाली समय को खेल में व्यतीत कर बुरे कार्यों की ओर प्रवृत ना हो उसे उसके लिए वक्त ही ना मिले.

खेलकूद से जीवन में कई गुणों का विकास होता हैं. संयम, द्रढ़ता, गंभीरता, एकाग्रता, सहयोग, टीम भावना तथा सबसे महत्वपूर्ण अनुशासन की शिक्षा बच्चों को खेलों में ही मिल सकती हैं. खेल की हार जीत बच्चे को जीवन में उत्साह तथा निराशाओं के मध्य संतुलन बनाने के लिए बहुत अच्छे तरीके से तैयार करती हैं.

एक समय बच्चों को खेलों से दूर रखने के लिए एक कहावत चलन में हुआ करती थी कि पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे कूदोगे तो होंगे खराब. आज यह बिलकुल भी प्रासंगिक नजर नही आता हैं. देशभर में लाखों होनहार खिलाड़ियों के लिए खेल उनके जीवन में रोजगार एवं शोहरत का कारण भी बना हैं.

देश दुनियां में आज खेलों की लाखों प्रतियोगिताएं होती है जिनमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों को पद और पैसे दोनों की प्राप्ति होती हैं. भारत में खेलों को धर्म से बढकर सम्मान मिलता हैं. एक खेल के खिलाड़ी के सुपर स्टार के तौर पर माना जा हैं. देश भर में खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्कूल स्तर से राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक कई संस्थाएं बनी हुई हैं.

खेलों के दो प्रकार होते है इनडोर तथा आउटडोर. लोगों की ऐसी धारणा बनी हुई है कि आउटडोर गेम्स जैसे हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, बैडमिंटन जैसे खेल ही शारीरिक तथा मानसिक विकास के द्योतक है जबकि इनडोर गेम्स जैसे शतरंज, ताश, लूडो जैसे खेल केवल समय की बर्बादी है, ऐसा सोचना गलत है क्योंकि इन खेलों में सर्वाधिक मानसिक परिपवक्ता आती है तथा ये हर समय मस्तिष्क को व्यस्त रखने में कारगर होते हैं.

जिस तरह जीवन में हम शिक्षा को महत्वपूर्ण मानते हैं ठीक उसी तरह खेलकूद का भी जीवन तथा इसके अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक अंग हैं. दिनभर के काम की थकान के बाद खेल ही है जो व्यक्ति के मनोरंजन के साधन बनते हैं. इसलिए हमें अपने डेली रूटीन में खेलों को भी शामिल करना चाहिए तथा अवकाश के समय का सदुपयोग खेल में करने के अतिरिक्त कोई अच्छा विकल्प नहीं हो सकता हैं.

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