संयुक्त परिवार पर निबंध Essay on Joint Family in Hindi

Essay on Joint Family in Hindi – संयुक्त परिवार पर निबंध : नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज हम संयुक्त परिवार पर हिंदी निबंध अथवा जॉइंट फॅमिली एस्से आपके साथ उपलब्ध करवा रहे हैं. आज के आर्टिकल के माध्यम से आप जानेगे कि संयुक्त परिवार क्या है, संयुक्त परिवार के फायदे, संयुक्त परिवार का अर्थ मीनिंग व परिभाषा के बारे में इस निबंध में विस्तार से हम चर्चा करेगे.

संयुक्त परिवार पर निबंध Essay on Joint Family in Hindi

संयुक्त परिवार पर निबंध Essay on Joint Family in Hindi

Hindi Essay on Joint Family: क्या आप संयुक्त परिवार का अर्थ जानते हैं. यदि नही तो चलिए जानते हैं. जॉइंट फॅमिली को अन्य शब्दों में अविभाजित परिवार, संयुक्त परिवार, विस्तारित परिवार व्यवस्था के रूप में भी जाना जाता हैं. यह एक ऐसा परिवार होता हैं जिसमें एक से अधिक पीढियां साथ रहती हैं.

संयुक्त परिवार पर निबंध (100 शब्द)

हमारे भारत देश में प्राचीन काल से ही लोग जॉइंट फैमिली में रहते हुए आए हैं क्योंकि प्राचीन काल से ही लोगों ने सामाजिक ताने-बाने का ऐसा गठन किया है कि लोग संयुक्त परिवार में रहना ही पसंद करते हैं। 

संयुक्त परिवार में एक ही घर में कई लोग रहते हैं जैसे कि अगर हमारे माता-पिता उस घर में हैं तो उनके माता-पिता भी अगर जीवित हैं तो उसी घर में रहते हैं।

इसके अलावा चाचा-चाची, काका-काकी, तथा अन्य लोग भी संयुक्त परिवार में रहते हैं। अधिकतर जॉइंट फैमिली में हमेशा खुशी भरा माहौल होता है क्योंकि हमेशा परिवार में अधिक लोग होने कारण लोगों का मनोरंजन होता रहता है।

संयुक्त परिवार पर निबंध (200 शब्द)

संयुक्त परिवार को अंग्रेजी लैंग्वेज में जॉइंट फैमिली भी कहा जाता है। जॉइंट फैमिली का मतलब होता है एक ऐसा परिवार जिसमें माता-पिता, चाचा-चाची, दादा-दादी, उनके बेटा-बेटी तथा परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं।

जैसे-जैसे जमाना बदलता जा रहा है वैसे-वैसे लोग संयुक्त परिवार में रहना कम पसंद करने लगे हैं क्योंकि आजकल की आधुनिक पीढ़ी अपने लिए एक सेपरेट मकान ढूंढती है जहां पर वह अपने हस्बैंड या फिर अपनी पत्नी के साथ रह सके।

हालांकि जो खुशी हमारी नजरों में जॉइंट फैमिली में रहने में प्राप्त होती है, वह शायद ही लोगों को अकेले रहने में प्राप्त हो पाती हो, क्योंकि संयुक्त परिवार में ज्यादा लोग होने के कारण कभी भी व्यक्ति को उदासी पन का सामना नहीं करना पड़ता है, क्योंकि परिवार में कोई ना कोई व्यक्ति हमेशा एक दूसरे से बातचीत करता ही रहता है।

जॉइंट फैमिली में रहने के कारण हम अपनी जिंदगी को काफी बेहतर ढंग से जी पाते हैं, क्योंकि संयुक्त परिवार में रहने के कारण जब हमारे ऊपर कोई मुसीबत आती है तो हमारा पूरा परिवार हमारे साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा होता है और हमारी सहायता करता है।

संयुक्त परिवार पर निबंध (300 शब्द)

जॉइंट फैमिली में रहने के कारण हमारे बच्चों को घर के बड़े बुजुर्गों के द्वारा अच्छी शिक्षा और अच्छी परवरिश मिलती है, जिसके कारण वह अपनी जिंदगी में एक आदर्श नागरिक बनते हैं। इसके अलावा परिवार में खुशनुमा माहौल होने के कारण सभी लोगों का दिमाग भी चिंता मुक्त होता है। 

परिवार में अत्याधिक लोग होने कारण घर के लोगों को अपना मनोरंजन करने के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि परिवार में हर व्यक्ति का स्वभाव अलग-अलग होता है। इसीलिए लोगों का टाइम पास एक दूसरे से बातचीत करके होता रहता है।

सिंगल फैमिली में रहने वाली महिलाएं अधिक देर तक घर में रहने के कारण बोरियत अनुभव करने लगती हैं, वही संयुक्त परिवार में रहने का एक फायदा यह भी होता है कि व्यक्ति के ऊपर जब कोई परेशानी आती है तो उसके परिवार के लोग उसके समर्थन में आ जाते हैं और सभी मिलकर के उसकी समस्या को दूर करने का प्रयास करते है।

आमतौर पर संयुक्त परिवार में परिवार को चलाने की जिम्मेदारी घर के किसी ऐसे व्यक्ति के ऊपर होती है जो सभी प्रकार की जिम्मेदारियों का निर्वहन अच्छे से कर लेता है और उसी का दिशानिर्देश पूरे घर में माना जाता है। 

हमारे घर में भी हमारे दादा जी जो कहते हैं वही होता है क्योंकि दादा जी अब बुजुर्ग हो चुके हैं और उन्हें जिंदगी का अच्छा अनुभव प्राप्त हो चुका है। इसलिए उनकी बात को हमारे घर का हर सदस्य मानता है।

कई लोगों की अपने परिवार में पटती नहीं है और जिस घर में ऐसा होता है उस घर में बहुत जल्द ही दरार पैदा होना चालू हो जाती है और इस तरह उसका फायदा उस परिवार के विरोधी लोग उठाने लगते हैं। 

इसीलिए हमें कभी भी अपने परिवार से विरोध नहीं करना चाहिए। अगर परिवार के लोगों के बीच कोई समस्या है तो उसे आपसी बातचीत से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि बातचीत से बड़ी बड़ी समस्याएं सुलझ जाती है।

600 words Short Essay on Joint Family in Hindi

माता-पिता, दादा दादी, चाचा-चाची, नाना नानी, बुआ आदि सभी एक ही छत के नीचे, जिनके लिए एक ही घर का चूल्हा हो उस परिवार को हम जॉइंट फैमिली कहते हैं.

परिवार के दो स्वरूप होते हैं. पहला संयुक्त तथा दूसरा एकल. संयुक्त परिवार प्राचीन भारतीय समाज का मूल स्वरूप है जो समय के बदलाव के साथ खंडित होकर वर्तमान के एकल परिवारों के रूप में सामने आया हैं.

संयुक्त परिवार के कई सारे लाभ है जिनमें परिवार के सभी सदस्यों की वित्तीय भागीदारी होती हैं तथा जिसका मुखिया परिवार के सबसे बड़े व्यक्ति को माना जाता हैं.

घरेलू सम्पति पर सभी सदस्यों का समान अधिकार होता हैं. एक ही रसोईघर में सभी का खाना पकता है तथा परिवार का मुखिया ही सभी की जरूरतों को पूरा करता हैं.

आधुनिक परिवारों में जिस तरह बड़ा बेटा शादी के बाद अपने बीबी बच्चों के साथ अलग हो जाता हैं. संयुक्त परिवार में वह विवाह के पश्चात पत्नी के साथ उसी घर में रहता हैं. परिवार में अधिकतर निर्णय बड़े व्यक्ति अर्थात परिवार के मुखिया द्वारा ही लिए जाते हैं.

जॉइंट फैमिली में व्यक्ति को कम परेशानियों का समाना करना पड़ता हैं उनमें एक सामूहिक सुरक्षा का भाव रहता है जो उसके विकास में कारगर होता हैं. परिवार में एक अलिखित संविधान अर्थात कानून कायदे होते हैं जिसका पालन सभी को करना पड़ता हैं.

सभी के साथ सहयोग तथा समायोजन के साथ जीवन जीने का असली स्वरूप संयुक्त परिवार में ही देखने को मिलता हैं. बच्चों के लिए यह भरा पूरा परिवार होता हैं.

जिनमें उनके खेलने के लिए साथी तथा पढने के लिए सहपाठी सहजता से मिल जाते हैं. लड़ाई झगड़ा होने पर बड़े उन्हें समझा बुझाने का कार्य करते हैं.

परिवार में कोई बड़ा कार्य शादी आदि की जिम्मेदारी किसी एक की न होकर सभी सदस्यों की होती हैं. तथा परिवार के इस स्वरूप में सभी की जरूरतों का विशेष ख्याल रखा जाता हैं.

बड़ो का सम्मान तथा छोटे से प्यार के गुण संयुक्त परिवार का मूल आधार होता हैं आपसी विश्वास तथा सहयोग से ही इस प्रकार के परिवार चलते हैं.

आधुनिक समय में घर से दूर नौकरी, शहरों की ओर पलायन, अधिक स्वेच्छा तथा स्वतंत्रता से जीवन जीने की तमन्ना के चलते संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं.

शहरों में तो ये पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं जबकि कुछ गाँवों में आज भी ऐसे परम्परागत परिवार रहते है जिनमें 30-50 सदस्य एक साथ मिलजुलकर रहते हैं.

एक तरफ जॉइंट फैमिली के कई फायदे है तो इसके कुछ नुक्सान भी हैं. अक्सर परिवार के इस तरह के स्वरूप में कुछ लोग परजीवी बनकर रह जाते हैं.

जो दूसरों की कमाई पर ही अपना जीवन जीना पसंद करते हैं. कई बार बड़े परिवार में अच्छा कार्य करने वाले अथवा बड़े लोगों की यातना सभी को सहनी पड़ती हैं.

आपसी द्वंद्व के चलते माँ बाप अपने बच्चे को अच्छे विद्यालय में स्वेच्छा से दाखिला नहीं दिलवा पाते हैं. परिवार में अधिकतर अहम निर्णय बड़े लोगों द्वारा ही लिए जाते है

जिनमें प्रति सदस्य की सहमति एवं सहभागिता नहीं होती हैं. इन तमाम बातों के बावजूद जॉइंट फैमिली कई मायनों में एकल परिवारों से बेहतर हैं.

हमें चाहिए कि हम लुप्त होते परिवार के इस स्वरूप को बचाएं तथा आपसी सहयोग तथा विश्वास के साथ इस प्रकार के परिवार का निर्माण करे जिसमें सभी का सहयोग तथा संतुलन से सफलतापूर्वक जीवन को जिया जा सके.

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