चील पर निबंध | Essay On Kite Bird In Hindi

Essay On Kite Bird In Hindi नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है आज का निबंध चील पर निबंध दिया गया हैं. भारतीय चील के नाम से जाना जाता हैं. अपनी स्फूर्ति के दम पर शिकार करने वाला चील अपनी चफलता के लिए विशेष रूप से जाना जाता हैं. आज के निबंध, भाषण, अनुच्छेद, लेख में चील पक्षी के बारें में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे.

चील पर निबंध Essay On Kite Bird In Hindi

चील पर निबंध Essay On Kite Bird In Hindi

चील पर निबंध 300 शब्द

चील एक प्रकार का हवा में उड़ने वाला पक्षी है जिसकी विभिन्न प्रजातियां पूरी दुनिया भर में पाई जाती हैं। इसके अलावा अधिकतर देशों में चील पाया जाता है। इनकी गिनती चिड़िया में ही होती है। इनकी लंबाई तकरीबन 2 फुट के आसपास में होती है और इनकी पूंछ काफी लंबी होती है और दो तरफ गई होती है।

चील का आकार एक बड़े मुर्गे जितना होता है। इसके शरीर पर गहरे रंग के सेहरे से पडे हुए होते हैं। इसकी जो चोच होती है वह काली रंग की होती है और इसकी टांगे पीली रंग की होती है।

चील काफी तेज रफ्तार के साथ हवा में उड़ सकता है और जमीन पर भी चल सकता है। इसके पैर बाज पक्षी की तुलना में थोड़े से कमजोर होते हैं। चील उड़ने में बहुत ही अच्छी तरह से माहिर होता है। बाजार में रखी हुई चीजों पर बिना टकराए हुए आसानी से यह झपट्टा मार देता है।

इसकी गिनती मुर्दा खोर और सर्व पक्षी चिड़िया में होती है। इसीलिए यह शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही प्रकार की चीजें खाता है और इसकी वजह से इससे कोई भी चीज बच नहीं पाती है। यह सामान्य तौर पर बड़े-बड़े पेड़ पर अपना घोंसला बनाते हैं।

जो मादा चील होती है वह एक बार में 2 से 3 सफेद रंग के या फिर राखी रंग के अंडे देती है। दुनिया भर में चील की कई प्रजातियां पाई जाती है परंतु इनकी मुख्य प्रजातियों में काली चील,ब्रह्मनी या खैरी चील,ऑल बिल्ड चील,ह्विसलिंग चील जैसी प्रजातियों की गिनती होती है।

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हमारे भारत देश के कुछ राज्यों में चील का शिकार भी किया जाता है और इनके मांस का सेवन किया जाता है। किसी जानवर के मृत हो जाने पर उसके मृत शरीर के ऊपर की तरफ में चील आ करके अपना पहरा लगाएं रखते हैं और मौका मिलने पर उस जानवर के मास का ग्रहण करते हैं। अंग्रेजी भाषा में चील पक्षी को ईगल कहा जाता है जिनके पंख बड़े बड़े होते हैं और अपने पंखों की वजह से यह तेज रफ्तार के साथ उड़ सकते हैं।

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दोस्तों आज हम चील के बारे में समझेंगे तो हम बिना समय गवाए शुरू करते है आपको इस आर्टिकल पर जानकारी देते है चील एक श्येन कुल का पक्षी है जिसको बहुत ही चतुर पक्षी माना जाता है यह अपने शिकार को बहुत तेजी से झपटने के कारण इसे घातक पक्षियों में से एक माना जाता है चील संसार के प्राय सभी गरम देशो में पाई जाती है यह बहुत तेज उड़ती है व आसमान में बहुत ऊंचाई पर चक्कर लगाती रहती है

चील का आकृति चिड़िया के सामान होती है पर इसका आकार बड़ा होता है चील लगभग दो फुट लम्बी होती है इसका शरीर कई रंगों से बना हुआ है इसका बदन कलछौंह भूरा, चोंच काली और टांगे पीली होती है चील की आँखे बहुत तेज होती है जिससे यह बाजार में खाने कि चीजो पर बिना किसी से टकराए झपट्टा मार ले जाती है/

संसारभर में चील की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें ब्रह्मनी या खैरी चील, ऑल बिल्ड चील तथा ह्विसलिंग चील मुख्य हैं. भारत में काली चील को आसानी से देखा जा सकता हैं. चील की लम्बाई लगभग 2 फुट होती हैं इसकी दुम साधारण चिड़ियाँ से बड़ी तथा दो फंकी होती हैं. इसकी शारीरिक पहचान काली चोंच एवं पीली टांगों को देखकर आसानी से की जा सकती हैं.

उड़ान तथा अपने शिकार पर अनूठे अधिकार के लिए चील जानी जाती हैं. यह हवा में उडती हुई अपने शिकार को आसानी से पंजों में दबा लेती हैं साथ ही सैकड़ों मीटर नीचे जमीन पर चल रहे शिकार पर इतनी दक्षता से आक्रमण करती है कि उसे अपनी मौत का जरा सा भी एहसास नहीं हो पाता हैं. चील सड़े गले पदार्थों से लेकर समस्त जीवों से अपना पेट भर लेती हैं यह मानव बस्तियों में निसंकोच भाव से घौसला बनाकर रहने लगती हैं.

Black Kite काली चील

काली चील एक भारतीय मूल का शिकारी पक्षी हैं यह अपने शिकार की कला के लिए विख्यात हैं. यह अपना अधिकतर वक्त हवा में उड़ते हुए ही व्यतीत करती हैं. काली चील जीवित जीवों का शिकार करने की बजाय मृत जीवों के लिए विशेष आकर्षित रहती हैं. छोटे आकार की इस चील का वैज्ञानिक नाम Milvus migrans है तथा यह Accipitridae कुल से संबंधित हैं.

इनकी सर्वाधिक तादाद एशिया खासकर भारत और इसके अतिरिक्त ऑस्टेलिया एवं यूरोप महाद्वीप में भी इन्हें देखा जा सकता हैं. बदलते मौसम और तापमान के साथ यह स्थान परिवर्तित भी करती हैं. वातावरण के साथ अनुकूलन का उत्क्रष्ट गुण इनमें देखा जा सकता हैं.

आज के दौर में जहाँ अधिकतर पक्षियों की प्रजातियाँ अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं वही चील ने बेहतरीन अनुकूलन के चलते अपने अस्तित्व को नगरीय जीवन के अनुकूल भी बनाया हैं. जंगलो में लगने वाली आग के समय जब समस्त जीव जन्तु भागने लगते है वही चील उस समय अपने शिकार के लिए देखती हैं. मृत जानवरों एवं मनुष्य द्वारा त्यागे गये मांस के अवशेष का अपमार्जन करने में काली चील की अहम भूमिका हैं.

कई शारीरिक विशेषताओं से युक्त काली चील आसानी से अपना भोजन ढूढ़ लेती हैं. इनके मजबूत पंजे शिकार को पकड़ने तथा उस पर पकड़ बनाने में, लम्बी पूछ इसके उतरने की गति में तीव्रता लाती हैं साथ ही चील की आँखें इतनी तेज होती है कि सौ मीटर ऊपर आसमान में उडती हुई चूहे , मेढ़क जैसे जीवों को विचरण करते देख सकती हैं. काली चील का मुख्य भोजन जानवरों का मांस, छोटी मछलियां, छोटे पक्षी, चमगादड़ हैं.

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