नेतृत्व पर निबंध Essay on Leadership in Hindi

नेतृत्व पर निबंध Essay on Leadership in Hindi : जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नेतृत्व अर्थात लीडरशिप की आवश्यकता होती है। यह गुण सीमित लोगो मे ही होता है, नेतृत्व का संकुचित अर्थ राजनीति के परिपेक्ष्य में देखा जाता है। जबकि लीडरशिप का सरल मतलब यह है किसी भी क्षेत्र खेल, कला, साहित्य, शिक्षा, व्यापार आदि में अपने कार्यों से अन्यो को प्रभावित करना जिससे वे स्वतः अनुकरण कर सके। आज के नेतृत्व निबंध में हम लीडरशिप का अर्थ प्रकृति विशेषता गुण आदि पर स्पीच भाषण अनुच्छेद पैराग्राफ सरल भाषा में दिया गया है।

नेतृत्व पर निबंध Essay on Leadership in Hindi

नेतृत्व पर निबंध Essay on Leadership in Hindi

नेतृत्व निबंध (500 शब्द)

अंग्रेजी भाषा में नेतृत्व को लीडरशिप कहा जाता है जिसका मतलब होता है एक ऐसा व्यक्ति जो कई लोगों के समूह को दिशानिर्देश देता है और उनसे अपनी इच्छा के अनुसार काम करवाता है। नेतृत्व एक ऐसा गुण है जो किसी किसी व्यक्ति में ही होता है।

लीडरशिप करना हर किसी व्यक्ति के बस की बात नहीं होती है क्योंकि जो भी व्यक्ति नेतृत्व करता है उसके ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं और अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से पालन करने वाला व्यक्ति ही असली लीडर कहलाता है।

कुछ व्यक्तियों में बचपन से ही नेतृत्व करने की क्षमता दिखाई देने लगती है और कई व्यक्ति आगे चलकर के लीडरशिप स्किल्स इंप्रूवमेंट कोर्स करके नेतृत्व करने की क्षमता को डिवेलप करते हैं।

नेतृत्व का अर्थ निकाला जाए तो इसका मतलब यह होता है कि बिना किसी व्यक्ति के ऊपर दबाव दिए हुए उससे अपनी इच्छा के अनुसार काम करवाना। एक अच्छा लीडर बनने के लिए यह आवश्यक है कि उसके अंदर लीडरशिप के गुण हो।

अच्छा नेतृत्व करने के लिए हमारी बोली भाषा अच्छी होनी चाहिए, साथ ही हमें लोगों की बातों को सुनना और समझना भी आना चाहिए। इसके अलावा हमारे अंदर धैर्य भी होना चाहिए।

जिस व्यक्ति के अंदर अच्छा नेतृत्व करने का गुण होता है वह अपनी क्षमता से किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। लीडर शिप करने की क्षमता रखने वाला व्यक्ति अलग ही पर्सनैलिटी रखता है। यह लोग टाइम के बहुत ही पाबंद होते हैं, साथ ही यह अपने काम के प्रति पूरी तरह से समर्पित होते हैं।

एक बढ़िया लीडर में हमेशा कुछ ना कुछ सीखने की इच्छा होती है। वह हर दिन अपने आपको इंप्रूव करने का प्रयास करते हैं और और भी बेहतर ढंग से अपने आप को लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं।

लीडरशिप का गुण सीखने वाले व्यक्ति के अंदर सहनशीलता ज्यादा होती है। यह सभी लोगों के साथ एक समान व्यवहार करते हैं और सभी लोगों के साथ शालीनता के साथ व्यवहार करते हैं क्योंकि नेतृत्व के अंतर्गत उन्हें लोगों से अपने कामों को करवाना होता है और इसीलिए उन्हें यह पता होता है कि उन्हीं लोगों से किस प्रकार से बात करना है।

अच्छा नेतृत्व करने के लिए अथवा अच्छा लीडर बनने के लिए व्यक्ति के अंदर पॉजिटिव एटीट्यूड होना आवश्यक है, क्योंकि लोग उसे ही फॉलो करते हैं जो उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश देता है।

ऐसे में अगर आपके अंदर पॉजिटिव एटीट्यूड नहीं रहेगा तो आप तो हताश होंगे ही, साथ ही आपके साथ जुड़े हुए व्यक्ति भी निराश हो जाएंगे जो कि एक अच्छे लीडर के गुण नहीं होते हैं ना ही एक अच्छा नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के गुण होते हैं।

लीडर शिप करने के लिए आपको अपने अंदर क्रिएटिविटी भी डिवेलप करनी होगी क्योंकि कुछ काम ऐसे होते हैं जो हर कोई कर सकता है परंतु आप उसी काम को किस प्रकार से अलग तरीके से कर सकते हैं इसके बारे में आपको सोचना चाहिए क्योंकि एक लीडर का यह गुण होता है कि वह एक ही काम को कई प्रकार से कर सकता है।

600 शब्द Leadership Essay in Hindi | लीडरशिप पर निबंध

लीडरशिप या नेतृत्व यह एक गुण है जो बहुत कम लोगों में ही पाया जाता हैं. बहिर्मुखी स्वभाव के लोग जो सार्वजनिक जीवन बिताते तथा अपने साथ अपने समाज देश को आगे ले जाने की सोच रखते है वे लीडर कहलाते हैं.

एक अच्छा लीडर एक अच्छा मार्गदर्शक भी होता है उसे अच्छे बुरे सही गलत की परख होती है. लोकप्रियता वह पहली कसौटी है जिसके बिना लीडरशिप का कोई महत्व नहीं रह जाता हैं. नेतृत्व क्षमता कुछ लोगों में जन्मजात होती है कुछ जीवन के अनुभव से स्वयं को इस और ढाल लेते हैं.

लीडरशिप से आप क्या समझते है. हम उन लीडर की बात नहीं कर रहे हैं. जो राजनीति में होते है. हम लीडरशिप की बात कर रहे हैं, लीडरशिप का अर्थ है नेतृत्व. जो व्यक्ति हर परिस्थति का सामना करने को तैयार होता हैं, समस्याओं से जूझता हैं. ईमानदारी और परिश्रम से हर चुनौती का सामना करना जानता हैं, उसमें नेतृत्व की क्षमता कूट कूट कर भरी होती हैं.

नेतृत्व की कला का मालिक हर क्षेत्र में जीत हासिल करता है. नेतृत्व को अपने जीवन का अंग बनाने के लिए बचपन से ही प्रयास करने चाहिए. इसके लिए बचपन से ही आशा और आत्मविश्वास से आगे बढ़ना चाहिए. आशा निर्जीव को भी सजीव कर सकती हैं. और आत्म विश्वास से व्यक्ति विश्व की फतह कर सकता हैं.

यकीन नही आता तो अपने आस-पास के व्यक्तियों, मसलन सबसे कम उम्रः की एवरेस्ट विजेता मालावत पूर्णा, दिव्यांग एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा को देखिये. इन्होने अपने संकल्प हौसले, आशा और आत्मविश्वास से नेतृत्व कर असीम सफलता प्राप्त की हैं.

इसी तरह डिजिटल क्रांति के जनक स्टीव जॉब्स ने अपने जीवन में अनेक परेशानिया उठाकर नेतृत्व की भावना को इतना बलवती कर दिया कि आज अनेक आईपोड, उच्च कोटि के फोन उन्ही की देन हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन अनेक बार असफल हुए, लेकिन आशा और आत्मविश्वास ने उन्हें पूरी दुनिया में प्रसिद्ध कर दिया. उनके सफल नेतृत्व की मिसाल आज तक दी जाती हैं. आशा एक ऐसी संजीवनी है, जो मरते हुए व्यक्ति को जीवन देती हैं.

आशान्वित व्यक्तियों में ही लीडरशिप की भावना कूट कूटकर भरी होती हैं. जिस तरह आशा सकारात्मक सोच से व्यक्ति के मन और दिमाग में अपनी जगह बनाती है, उसी तरह आत्मविश्वास व्यक्ति को निर्भीक और साहसी बनाता हैं. डेल कार्नेगी कहते है” आत्मविश्वास बढ़ाने का तरीका यह है कि तुम वह काम करो जिससे तुम डरते हो.

इस प्रकार ज्यो ज्यो तुम्हे सफलता मिलती जाएगी, तुम्हारा आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा. जीवन में सफलता पाने के लिए लीडरशिप के शिप पर सवार होना बहुत जरुरी हैं. नेतृत्व की भावना से व्यक्ति हार को भी सहजता से ग्रहण करता हैं. और फिर उसे पायदान बनाकर सफलता की मंजिल पर पहुचता हैं.

नेतृत्व से भरपूर व्यक्ति स्वयं तो आगे बढ़ते ही है, इसके साथ ही वे अपने साथ ऐसे व्यक्तियों को भी ले चलते है जिनमे लीडरशिप, आशा और आत्मविश्वास की कमी होती हैं. ऐसा करने से एक दिन उन लोगों में भी लीडरशिप आ जाती है, जो अपने लीडर के साथ होते हैं.

आप भी लीडर बने और अपने साथ ऐसे बच्चों को शामिल करे, जिनमें आशा और आत्मविश्वास की कमी हो. ऐसा करके आप सबके चहेते बन जाएगे और कह्लाएगे एक सफल लीडर.

(700 शब्द) नेतृत्व पर निबंध Essay on Leadership in Hindi

नेतृत्व का अर्थ प्रभावित से सम्बंधित है। अर्थात किसी समूह में जो व्यक्ति अपने विचारों, कार्यों आदि से समूह के अन्य सदस्यों को प्रभावित करता है, उसे नेता कहते है।

सामान्यतः यह कहा जा सकता है कि नेता में कुछ विशिष्ट गुण होते हैं जिनके द्वारा वो अन्य सदस्यों के व्यवहारों को भी प्रभावित करता है। कुछ जगह शक्ति प्रदान व्यक्ति को नेतृत्व का कार्य दिया जाता हैं। जैसे पशुओं में सिंह इत्यादि।

किसी भी प्रकार के समूहों में से मानवीय समुदाय में प्रायः नेता सामाजिक दृष्टि से अधिक व्यवस्थित होता है। मानव में लीडरशिप की भावना प्रारम्भ से ही होती है। बाल्यावस्था में बालक अपनी प्रभावशाली प्रवृति द्वारा दूसरे बालकों पर अधिकार जमाना चाहता हैं।

इसके बाद बाल्यावस्था के उत्तरकाल में वह बालक जो निर्देश देता हो, दूसरों को आज्ञा मानने के लिए बाध्य करता हो नेता नहीं हो सकता बल्कि वह बालक जो शांतिपूर्वक अपने निर्देशों को उनके समक्ष प्रकट करता है और उन्हें भावी कल्याण तथा सफलता का मार्ग सहानुभूति से सिखाता है वह नेता बनता हैं।

वास्तव में वह व्यक्ति ही नेता बन सकता है, जो अपने अनुयायियों के विचारों, व्यवहारों व कार्यों आदि को प्रभावित कर उन्हें निश्चित व नई दिशा तथा उद्देश्य प्रदान करता हैं तथा उनका मार्गदर्शन करता हैं।

कोई भी व्यक्ति लीडरशिपनेतृत्व के बिना नहीं रह सकता उसमें किसी भी अन्य व्यक्ति का आंशिक या पूर्ण प्रभाव अवश्य होता है तथा वही प्रभाव नेतृत्व होता हैं। यह कहा जा सकता है कि लीडरशिप एक सार्वभौमिक घटना है अतः जहां समाज है वहां लीडरशिप अवश्य होगा।

वास्तव में समूह को उचित मार्गदर्शन, उद्देश्यों के निर्धारण , समूह के उचित संगठन , समूह की उन्नति के लिए परिवर्तन (समूह की उन्नति व नवीनता हेतु) कार्यों के क्रियान्वयन, प्रेरणा तथा समूह पर नियंत्रण आदि के लिए नेतृत्व आवश्यक होता हैं।

एक नेता को संज्ञानात्मक, भावनात्मक व मनोक्रियात्मक तीनों पक्षों में दक्ष होना चाहिए अर्थात उनका व्यक्तित्व बहिर्मुखी होना चाहिए। उसे व्यक्तित्व के शारीरिक, संवेगात्मक, सामाजिक, मानसिक पक्षों में दक्ष होना चाहिए।

अर्थात नेता को शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा सामाजिक चारों ही पक्षों में दक्षता प्राप्त होना चाहिए इसके अतिरिक्त कुछ सामान्य गुण जो एक नेता में होने चाहिए वो इस प्रकार हैं।

  • दूरदर्शिता
  • आत्म विश्वास
  • दृढ़ संकल्पी
  • आवश्यकतानुसार लोचशील
  • अपने कार्य क्षेत्र में विशेष्यज्ञ
  • साहसी और परिश्रमी
  • सतत प्रयत्नशील
  • समूह गत्यात्मकता
  • नैतिक व दयावान
  • उद्दीपक
  • सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करने वाला
  • प्रवाह पूर्ण तार्किक अभिव्यक्ति
  • सूचना संग्रहण व सम्प्रेषण कला में दक्ष
  • आदर्श चरित्र व समायोजन करने वाला
  • जनहित के कार्य करने वाला तथा अच्छी स्मृति, भाषा वादिता तथा व्यावहारिकता आदि गुण होने चाहिए।

नेतृत्व के प्रकार (types of leadership In Hindi)

नेतृत्व को विभिन्न आधारों में वर्गीकृत किया गया हैं इनमें मुख्य हैं।

प्रजातांत्रिक नेतृत्व (democratic leadership)

इस प्रकार के लीडरशिप में नेता अपने अधिकारों को विकेन्द्रित कर देता हैं। लेकिन मुख्य केंद्र वह स्वयं रहता हैं तथा समूह को अभिप्रेरित करता रहता हैं। इसमे समूह के सदस्यों को अपने विचार अभिव्यक्त करने के समान अवसर प्राप्त होते हैं। प्रजातांत्रिक नेतृत्व सर्वोत्तम प्रकार का नेतृत्व होता हैं।

निरंकुश नेतृत्व (Authoritarian leadership)

इस प्रकार के लीडरशिप में नेता दमनकारी नीति अपनाता हैं, वह समूह के सदस्यों को अपने नियंत्रण में रखता हैं। उसका निर्णय ही सर्वोपरि होता हैं। वह समूह हित की अपेक्षा अपने विषय मे तथा अपने आदेशों की पालना करने पर अधिक जोर देता हैं तथा ऐसे नेता व्यक्ति पूजा पर भी बल देते हैं।

इसके अतिरिक्त एक अन्य प्रकार का लीडरशिप भी इस श्रेणी में आता है। जिसे उन्मुक्त लीडरशिप कहते हैं लीडरशिप का वर्गीकरण एक अन्य प्रकार से किया गया है जिसके तहत एक नेतृत्व जिसमें नेता समूह के हृदय में राज करते हैं तथा सर्वप्रिय होते हैं उसे हृदय ग्राही नेतृत्व कहते हैं।

कई संस्थाओं द्वारा उसकी समिति के सदस्य किसी व्यक्ति को संस्था प्रधान बनाते हैं या संस्थाओं में उनके मुखिया द्वारा किया जाने वाला नेतृत्व संस्थागत लीडर शिप कहलाता है किसी भी भाग में उसके वरिष्ठतम  सदस्य या विशेषज्ञ द्वारा किए गए नेतृत्व को विशेषज्ञों का नेतृत्व कहा जाता है।

इस प्रकार नेतृत्व में पाए जाने वाले गुणों के आधार पर नेतृत्व को कलात्मक व प्रबन्धकीय नेतृत्व में विभाजित किया गया है।

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