मलेरिया पर निबंध | Essay On Malaria In Hindi

Essay On Malaria In Hindi: नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है आज हम मलेरिया पर निबंध पढ़ेगे. मलेरिया रोग द्वारा प्रतिवर्ष 51 करोड़ लोग प्रभावित होते हैं जिनमें से 20 लाख लोगों की मृत्यु तक हो जाती हैं. मच्छर से मलेरिया के प्रोटोजोआ परजीवी संचरित होते हैं. संक्रामक रोग मलेरिया के निबंध, स्पीच, अनुच्छेद, भाषण में हम रोग के लक्षण, सामान्य जानकारी, ईलाज और बचाव के उपायों की चर्चा इस निबंध में करेंगे.

मलेरिया पर निबंध | Essay On Malaria In Hindi

मलेरिया पर निबंध Essay On Malaria In Hindi

300 Words मलेरिया रोग पर निबंध

मलेरिया बीमारी होने पर पीड़ित व्यक्ति को अत्याधिक सर दर्द और सर्दी का सामना करना पड़ता है तथा उसे बार बार बुखार आने की समस्या से भी परेशान होना पड़ता है। मलेरिया बीमारी से परेशान व्यक्ति का बुखार कभी कम हो जाता है तो कभी अधिक हो जाता है।

अगर यह बीमारी गंभीर अवस्था में तब्दील हो जाती है तो व्यक्ति कोमा में भी चला जाता है या फिर कभी कबार उसकी मृत्यु भी हो जाती है। मलेरिया बीमारी प्लाज्मोडियम नाम के एक परजीवी के कारण होती है। यह बीमारी मादा एनाफिलीज नाम के मच्छर के काटने से शुरू होती है जिसके द्वारा इस परजीवी को शरीर पर छोड़ा जाता है।

जिस जगह पर गंदा पानी इकट्ठा होता है वहां पर मलेरिया के मच्छर अधिक पैदा होते हैं और वहां के आसपास के रहने वाले लोगों को अक्सर ही मलेरिया की समस्या हो जाती है। हमारे भारत देश में सामान्य तौर पर मलेरिया का रोग पूरे साल भर रहता है परंतु बरसात के मौसम में हर जगह जलभराव होने से यह समस्या कुछ ज्यादा ही पैदा हो जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा साल 2016 में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार मलेरिया के पूरे दुनिया भर में तकरीबन 21 करोड़ मामले सामने आए थे और 21 करोड़ लोगों में से तकरीबन 42000 लोगों की मलेरिया बीमारी से मौत हो गई थी।

साल 2015 तक दुनिया के तकरीबन 91 देश और इलाकों में मलेरिया ट्रांसमिशन हो रहा था।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलावा मलेरिया के मामले में तकरीबन 77% मामले दक्षिण पूर्व एशिया में भारत देश में पाए गए थे और भारत देश में अधिकतर राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, गोवा, दक्षिण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर के राज्यों में यह समस्या काफी अधिक थी।

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मलेरिया रोग से ग्रसित व्यक्ति को सामान्य तौर पर तेज बुखार आता है, उसे कमजोरी का एहसास होने लगता है, खाना खाने का मन नहीं करता है, खाने में कोई भी स्वाद नहीं आता है अथवा उल्टी भी होने लगती है।

मलेरिया रोग से छुटकारा पाने के लिए उचित समय पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए और एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना चाहिए अथवा मलेरिया रोग नाशक दवा का सेवन करना चाहिए साथ ही अपने घर के आस-पास गंदे पानी को इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए ताकि मलेरिया रोग पैदा करने वाले मच्छर न पनप सकें।

मलेरिया निबंध 500 शब्द

मलेरिया नामक बुखार से हम सभी परिचित हैं जीवन में कभी न कभी इसका शिकार अवश्य बने हैं. भारत में आमतौर पर बरसात के दिनों में मलेरिया का प्रकोप अधिक देखने को मिलता हैं. मलेरिया जानलेवा बीमारी है यह व्यक्ति को शारीरिक व मानसिक रूप से निर्बल बनाने के साथ ही जान भी ले सकती हैं. मलेरिया पीड़ित व्यक्ति का तापमान 103 डिग्री हो जाता हैं.

मलेरिया प्रोटोजोआ जनित रोग है जो मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से होता हैं. मादा एनाफिलिज में पाए जाने वाले प्लाजमोडियम परजीवी के कारण यह रोग होता हैं. जब मादा एनाफिलिज किसी स्वस्थ मनुष्य को काटती है तब लार के साथ यह परजीवी मनुष्य के रक्त में प्रवेश कर जाता हैं.

प्रवेश करने के बाद यह यकृत कोशिकाओं व लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करता हैं मलेरिया परजीवी का अलैंगिक जीवन चक्र मानव शरीर तथा लैंगिक चक्र एनाफिलिज मच्छर में पूर्ण होता हैं. मलेरिया की उदभवन अवधि लगभग बारह दिन हैं.

मलेरिया के लक्षण (symptoms of malaria)

  • ठंड लगकर तेज बुखार आना व बुखार के उपरान्त पसीना आकर ज्वर का सामान्य हो जाना
  • सिरदर्द उबकाई व मांसपेशियों में दर्द
  • रोगी का अत्यधिक कमजोर हो जाता हैं.
  • मलेरिया के कारण रक्ताल्पता, प्लीहा के आकार में वृद्धि तथा शरीर के विभिन्न भागों में मिलैनिन का एकत्रीकरण होता हैं.

मलेरिया की रोकथाम (Malaria prevention)

  • दोहरे जालीदार दरवाजे व खिड़कियाँ हो ताकि मच्छरों के प्रवेश को रोका जा सके.
  • मच्छरदानी व मच्छर प्रतिकर्षकों का प्रयोग करना चाहिए.
  • गड्डों या अन्य खुली जगहों पर पानी एकत्रित न होने दे, एकत्रित पानी पर मिट्टी का तेल छिड़कना चाहिए, गड्डों को मिट्टी से भर देना चाहिए.

मलेरिया का उपचार (treatment of Malaria)

  1. औषधि क्लोरोक्विन, प्राइमाक्वीन, फेनुड्रीन, मेफ्लोक्वीन, हैलोफेंडरीन आदि औषधियों का सेवन करना चाहिए.
  2. अधिक ज्वर होने पर माथे पर बर्फ की पट्टी रखनी चाहिए.
  3. सोते समय यूकेलिप्टस, संदल, पिपरमेंट व सिरका आदि तेलों की मालिश करनी चाहिए.
  4. मलेरिया की पहचान के लिए एम् पी टेस्ट किया जाता हैं.

सामान्यतया मलेरिया के लक्षण पीड़ित व्यक्ति में 48 से 72 घंटों के बाद दिखलाई देते हैं. मानव के कलेजे की कोशिकाओं में प्रवेश के बाद इनके रोगाणुओं में तीव्र वृद्धि होती हैं. जब मलेरिया परजीवी के आक्रमण से एक लाल रक्त कोशिका फटती है तो ये दूसरी पर आक्रमण करती हैं. इस रोग का सर्वाधिक प्रभाव अफ्रीका महाद्वीप के कुछ देशों में देखा गया हैं जहाँ प्रति मिनट एक बच्चें की मृत्यु मलेरिया रोग के कारण हो जाती हैं.

राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम (National Malaria Control Program): यह 1953 में प्रारम्भ हुआ. 1958 में इसे राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में बदल दिया गया. 1994 में यह मलेरिया एक्शन कार्यक्रम के रूप में प्रारम्भ हुआ. इस कार्यक्रम के तहत आरम्भ में घरों में जाकर डीडीटी का छिड़काव किया जाता था, इन प्रयासों से मलेरिया रोकथाम में आश्चर्य जनक सफलता मिलने के बाद इसे महत्वकांक्षी राष्ट्रीय प्रोग्राम के रूप में लागू किया.

रोनाल्ड रोस ने बताया कि मलेरिया रोग मलेरिया परजीवी द्वारा फैलता हैं और उसका रोगवाहक मच्छर होता हैं उन्हें इस खोज के लिए नोबल पुरस्कार दिया गया था.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों Essay On Malaria In Hindi का यह निबंध आपकों पसंद आया होगा. इस शोर्ट निबंध में हमने मलेरिया रोग की जानकारी आपके साथ शेयर की हैं. यदि आपकों ये जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें.

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