मेरी पहली हवाई यात्रा पर निबंध – Essay On My First Aeroplane Journey In Hindi

आज का निबंध, मेरी पहली हवाई यात्रा पर निबंध – Essay On My First Aeroplane Journey In Hindi पर दिया गया हैं. मेरी अपनी पहली हवाई जहाज की यात्रा के बारे में दिया गया हैं. यात्रा के अनुभव और संक्षिप्त घटनाओं पर आधारित यह छोटा निबंध स्टूडेंट्स के लिए दिया गया हैं.

मेरी पहली हवाई यात्रा पर निबंध My First Aeroplane Journey In Hindi

मेरी पहली हवाई यात्रा पर निबंध - Essay On My First Aeroplane Journey In Hindi

पिछली गर्मियों में मैं काठमांडू गया. हमने हवाई जहाज द्वारा जाने का निश्चय किया और रॉयल नेपाल एयरलाइन्स में एक महिना पहले ही मैंने रिर्ज्वेशन करवा लिया था.

मेरे विमान ने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दस बजे उड़ान भरी, उड़ान से पूर्व हर तरह की पूरी जांच पड़ताल हुई एवं सीटों पर बैठने के पश्चात् यात्रियों को बेल्ट पहनने के निर्देश दिए गये.

जब विमान ने रन वे पर दौड़ना प्रारम्भ किया तो बहुत तेज आवाज हुई. पर कुछ समय में ही यह उड़ने लगा. यह मेरी प्रथम हवाई यात्रा थी. जब विमान उड़ रहा था मुझे कुछ चक्कर महसूस हुए, मेरे कान सुन्न हो गये. किन्तु कुछ देर बाद सब कुछ पूरी तरह सामान्य हो गया तथा प्लेन तेज गति से उड़ने लगा.

कुछ ही वक्त में प्लेन तेज गति से हवा से बातें करने लगा, मैंने पास की विंडों से नीचे देखा तो शहरों एक टापू की तरह और बड़ी बड़ी ईमारते खिलौने की तरग दिख रही थी. यह द्रश्य मेरे लिए बहुत खास और अद्भुत भी था.

बड़े बड़े जंगल व नदियों के ऊपर से गुजरने पर वे बेहद छोटे छोटे नजर आ रहे थे. नदी की धारा भी एक छोटे झरने की तरह लग रही थी. मैं यह नजारा देख ही रहा था कि प्लेन परिचारिका ने मुझे चाय व नाश्ता दिया.

मैंने नाश्ता किया, मैं बहुत खुश था साथ ही प्लेन में सवार सभी यात्री प्रसन्न मुद्रा में नजर आ रहे थे. कुछ लोग नींद का लुफ्त उठा रहे थे, उन्हें देखकर मुझे लगा ये हवाई यात्राओं से थक चुके हैं. वही मेरे पास बैठे दो व्यक्ति कुछ भयभीत भी थे सम्भवतः वे भी मेरी तरह पहली हवाई यात्रा पर ही थे.

इस तरह प्लेन में बैठे सभी यात्री किसी न किसी रूप में व्यस्त थे. कोई कुछ पढ़ रहा था तो कोई मोबाइल में गेम खेल रहा था, कुछ बातचीत में मशगुल थे. हमारी यात्रा को डेढ़ घंटा ही हुआ कि प्लेन ने विराम के लिए पटना एयरपोर्ट पर लेंड हुआ.

एक बार फिर हमें हल्का नाश्ता दिया गया. कुछ लोग न्यूज पेपर एवं उपन्यास ले आये । और विमान ने आखिरकार नेपाल की राजधानी काठमंडू के लिये पटना के रनवे से दुबारा उड़ान भरी ।

जब हवाई जहाज उड़ रहा था मैने प्रकृति की रमणीय दृश्यावली का लुफ्त उठाया. कॉकपिट के मध्य से झाँकने एवं नीचे के दृश्य बेहद मनभावन नजारा प्रस्तुत कर रहे थे.

जब हमारा प्लेन पर्वतीय इलाकों पर उड़ान भर रहा था तो दृश्यावली और भी अधिक आकर्षक एवं मन को मोह लेने वाली हो गयी.

ऊचे-ऊचे विशाल हिम पर्वत जल-प्रपात संर्कीण-घाटी मार्ग एवं दर्रे घने जंगल पहाड़ों के ऊपर हरी वनस्पति एवं साइप्रस के पेड़ सुंदर नजारा पेश कर रहे थे. काठमंडू घाटी का नजारा तो इनसे बढ़कर निराला ही था.

पर्वतों से घिरी काठमंडू घाटी को ऊपर से देखना एक विरला अनुभव है. काठमांडू की घाटी में मिनारें कँगूरे दार बुर्जों, पैगोडा एवं स्तूप के कारण महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं.

आखिरकार हमारा प्लेन लगभग डेढ़ बजे के आसपास काठमांडू पहुंचा. उस वक्त तक वहां का द्रश्य हल्की धुप से नहाया हुआ था. एयर पोर्ट के बाहर मैंने खाना खाया और बस पकडकर अपने दोस्त के घर के लिए चल दिया.

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