ओणम त्योहार पर निबंध | Essay On Onam In Hindi

Essay On Onam In Hindi: आज हम ओणम त्योहार पर निबंध आपकों यहाँ बता रहे हैं केरल के प्रसिद्ध पर्व ओणम के बारे में यहाँ कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के बच्चों के लिए 5, 10 लाइन, 100, 200, 250, 300, 400, 500 शब्दों में छोटा बड़ा एस्से दिया गया हैं. Onam Hindi Essay निबंध की मदद से आप समझ पाएगे ओणम क्या है इसका इतिहास आदि सरल निबंध भाषण लिख पाएगे.

ओणम त्योहार पर निबंध Essay On Onam In Hindi

ओणम त्योहार पर निबंध Essay On Onam In Hindi

भारत की संस्कृति के समतुल्य विश्व की कोई अन्य संस्कृति नहीं हैं. इसकी मुख्य विशेषता विवधता में एकता की सुन्दरता हैं. भारत को पर्वों त्योहारों का देश कहा जाता हैं. वर्ष के 12 महीनों हर्ष उल्लास व सामाजिक धार्मिक महत्व के उत्सव मेले यहाँ आयोजित किये जाते हैं.

होली, दीपावली, रक्षाबन्धन, ईद कुछ ऐसे पर्व है जो सम्पूर्ण देश में एक तरह ही मनाएं जाते हैं. जबकि लोहिड़ी, गणगौर पोंगल व ओणम स्थानीय पर्व हैं जो एक क्षेत्र विशेष में अपनी मान्यताओं के अनुरूप मनाएं जाते हैं.

जिस तरह राजस्थान में गणगौर का उत्सव 18 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता हैं. उसी तरह दक्षिणी भारत विशेषकर केरल में ओणम को सबसे बड़ा पर्व माना गया हैं.

केरल का सबसे लोकप्रिय पर्व ओणम दस दिनों तक मनाया जाता हैं. इसकें आयोजन को देखने के लिए लोग देश विदेश से आते हैं. इन दस दिनों तक केरल सरकार द्वारा राजकीय अवकाश घोषित किया जाता हैं.

इन छुट्टियों का उपयोग लोग पर्व की तैयारी तथा अपने दोस्तों रिश्तेदारों के यहाँ जाने में करते हैं. विदेशों में रहने वाले भारतीय भी ओणम को धूमधाम से मनाते हैं.

केरल के इस प्रसिद्ध पर्व को मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित हैं, जिसके अनुसार कहा जाता हैं महाबलि नाम के एक शासक केरल में राज्य करते थे. प्रजावत्सल महाबलि अपने राज्य की जनता को अपनी सन्तान मानते थे. उनके सुख दुःख में वे हमेशा साथ देते थे.

उनका व्यक्तित्व बहुत विराट था. एक आदर्श राजा की तरह महाबलि की नजर में कोई छोटा बड़ा नहीं था. प्रजा को भी राजा बेहद प्रिय थे. राज्य में सुख सम्पन्नता का वैभव बरसता था. राजा अनाथ व गरीबों को खूब दान दिया करते थे. इस कारण राज्य की प्रजा उन्हें अपना भगवान मानने लगी.

जब नारद ने यह दृश्य देखा तो तुरंत इसकी सूचना उन्होंने देवराज इंद्र को दी. इंद्र को यह मंजूर नहीं था कि कोई शासक देवताओं से अधिक लोकप्रिय हो जाए. अतः उसने एक छल किया और विष्णु भगवान को वामन अवतार लेकर धरती पर ब्राह्मण के भेष में भेजा.

वामन देव पहले राजा बलि के पास आए और बलि से उन्होंने तीन पग की जमीन अपनी तपस्या के लिए मांगी. उदार एवं दानी ह्रदय के महाबलि ने ब्राह्मण को जमीन देने का वायदा कर दिया. अब तक सब कुछ इंद्र की योजना के मुताबिक ही चल रहा था.

जैसे ही राजा ने ब्राह्मण देव को तीन पग जमीन देने की हामी भरी. विष्णु ने अपना विराट रूप दिखाया. विष्णु ने पहला पग धरती पर रखा दूसरा देवलोक पर रखा.

जमीन कम पड़ने पर राजा ने तीसरा कदम रखने के लिए अपना सिर आगे रख दिया. इस तरह इंद्र अपनी चाल में कामयाब हो गया. उन्होंने वह सब कुछ पा लिया जिस उद्देश्य से उसने विष्णु को पृथ्वी पर भेजा था.

पृथ्वी लोक पर इंद्र का कब्जा हो जाने के पश्चात राजा बलि को पाताल जाने का आदेश हुआ, मगर राजा ने विष्णु से निवेदन किया कि उन्हें वर्ष में एक दिन अपने राज्य की प्रजा का हाल चाल जानने के लिए पृथ्वी पर आने की इजाजत दी जाए, इस बात को विष्णु जी ने स्वीकार कर लिया.

इसी मान्यता के चलते केरल समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों में ओणम का त्यौहार मनाया जाता हैं. कहते हैं कि हर साल के श्रवण नक्षत्र के दिन राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने के लिए आते हैं.

प्रजा भी देवस्वरूप अपने राजन का पलक पावड़े बिछा कर इंतजार करती हैं. सुख समृद्धि के प्रतीक ओणम को मलयालम भाषा में श्रवण नक्षत्र को ओणम नक्षत्र भी कहते हैं.

ओणम के अवसर पर पृथ्वी को खूब सजाया जाता हैं. पृथ्वी माता के श्रृंगार के लिए रंगोलियाँ बनाई जाती हैं. इस तरह वातावरण का निर्माण किया जाता हैं जिससे राजा बलि के आने पर उन्हें यह संदेश मिल जाए कि उनकी प्रजा बेहद प्रसन्न व सुख सम्पन्न हैं.

हर उम्रः के लोगों को ओणम के उत्सव का बेसब्री से इन्तजार रहता हैं. इस दिन रंगोली से सजी धजी धरती पर राजा बलि व विष्णु की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं. तथा उनकी विधिवत पूजा की जाती हैं.

दिन भर गीत, संगीत के कार्यक्रमों का आयोजन होता हैं. इस अवसर पर हाथियों का जत्था तथा नाव की रेस का भी आयोजन होता हैं.

कत्थकली केरल का राज्य नृत्य हैं ओणम के अवसर पर सफेद साड़ी में युवतियां कत्थकली नृत्य करती है बालों पर वेनियाँ सजी रहती हैं.

ओणम पर्व के प्रेरक महाबलि एक आदर्श राजा थे वे खूब दान देते तथा हर  दीन  दुखी की मदद किया करते थे. इसलिए सदियों बाद भी लोग उन्हें स्मरण करते हैं. ओणम का पर्व हमें प्रेम भाईचारे एवं सोहार्द भाव से मनाना चाहिए.

ओणम त्यौहार की ख़ास बातें

  • महाबलि राजा के सम्मान में ओणम को मनाते हैं इस दिन लोग अपने घरों को खूब सजाते है.
  • ओणम के दिन लोग मन्दिरों में न जाकर अपने घरों में ही ओणम की पूजा अर्चना के कार्यक्रम सम्पन्न करते हैं.
  • वर्ष 1961 में केरल सरकार द्वारा ओणम को राज्य त्यौहार का दर्जा दिया गया था.
  • मलयाली लोग चाहे देश दुनियां के किसी भी कोने में रहते हो वे श्रावण त्रयोदशी के दिन ओणम अवश्य मनाते हैं.
  • ओणम एक कृषि पर्व भी हैं इस समय तक केरल में चाय, इलायची, अदरक, काली मिर्च, धान की फसल पककर तैयार हो जाती हैं.

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