ओजोन परत की सुरक्षा पर निबंध | Essay on Ozone Layer Safety in Hindi

ओजोन परत की सुरक्षा पर निबंध Essay on Ozone Layer Safety in Hindi पृथ्वी के चारों ओर समतापमंडल में १५ से ३५ किलोमीटर के बीच एक परत विद्यमान हैं, जो ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाले अणुओं जिसे ओजोन कहा जाता हैं से निर्मित हैं. ओजोन से बनी इस परत को ओजोन परत कहा जाता हैं. यह परत पृथ्वी की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

ओजोन परत की सुरक्षा पर निबंध Essay on Ozone Layer Safety in Hindi

Essay on Ozone Layer Safety in Hindi

Ozone Parat Ki Suraksha Par Nibandh-200 Word

सामान्य लोग भले ही ओजोन परत के बारे में ना जानते हो परंतु यह एक ऐसी चीज है जिसे इंसान चाह कर भी नजरअंदाज नहीं कर सकता क्योंकि ओजोन परत एनवायरमेंट और हमारी पृथ्वी के लिए एक सिक्योरिटी कवच के तहत काम करती है.

तथा यह हमारी पृथ्वी को सूरज में से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणें (अल्ट्रावायलेट किरणों) से बचाने का काम करती है।

परंतु इंसानों की कुछ गलती के कारण लगातार ओजोन परत को नुकसान हो रहा है। अगर इंसान जल्दी से ओजोन परत के बारे में जागरूक नहीं हुआ तो आने वाले 20 से 30 साल के अंदर ओजोन परत को भारी नुकसान हो सकता है जिसका असर धरती पर रहने वाले सभी जीव जंतुओं और इंसानों पर पड़ेगा।

धरती के लिए और हम इंसानों के लिए ओजोन परत बहुत ही इंपॉर्टेंट मानी जाती है जो कि हमारी रक्षा सूरज की नुकसानदायक पराबैगनी किरणों से करती है।

अगर ओजोन परत को नुकसान होगा तो इसके कारण इंसानों को स्किन कैंसर हो सकता है,समुद्र में रहने वाले जंतुओं को नुकसान हो सकता है और फसलों को भी नुकसान हो सकता है।इसीलिए ओजोन परत की सुरक्षा सुनिश्चित करना इंसानों का परम कर्तव्य है।

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ओजोन परत की सुरक्षा करने के लिए इंसानों को क्लोरो फ्लोरो कार्बन से युक्त चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। गाड़ियों से निकलने वाले पोलूशन को कम करने के लिए नियमित तौर पर गाड़ियों की देखभाल करनी चाहिए।

रब्बर और प्लास्टिक की चीजों को नहीं जलाना चाहिए ताकि वातावरण में धुआ ना फैले।पेड़ ऑक्सीजन प्रदान करते हैं इसलिए पेड़ों को नहीं काटना चाहिए।

Ozone Parat Ki Suraksha Par Nibandh-250 Word

ओजोन परत के लगातार कमजोर होने के कारण इंसानों पर 10-20 सालों के बाद काफी बड़ा संकट आ सकता है। इसलिए दुनिया के सभी देश लगातार ओजोन परत की सुरक्षा से संबंधित कई उपाय कर रहे हैं।

ओजोन परत की सिक्योरिटी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है और हर साल ओजोन दिवस पर नई थीम भी बनाई जाती है।

इस दिन दुनिया भर में अनेक कार्यक्रम आयोजित होते हैं और उसमें ओजोन परत को किस प्रकार से सुरक्षित रखना है इसके बारे में चर्चा होती है।

ओजोन परत से पृथ्वी की रक्षा सूरज से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से होती है। अगर ओजोन परत कमजोर होगी तो पराबैगनी किरणों का प्रभाव धरती पर पड़ेगा जिसके कारण इंसानों को स्किन से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं,

समुद्र में रहने वाले प्राणियों को भी तकलीफ हो सकती है और फसलों की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। इसीलिए ओजोन परत की सुरक्षा करना इंसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन नाम के तत्व का ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने से और वातावरण में इसका प्रसार होने से ओजोन परत को नुकसान होता है। इसीलिए इंसानों को ऐसी चीजों का इस्तेमाल कम करना चाहिए जिसमें यह हानिकारक केमिकल मौजूद होता है।

ओजोन परत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इंसानों को इको फ्रेंडली चीजों के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर देना चाहिए।धुएं के कारण भी ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है इसलिए रबड़ से बनी हुई चीजें और प्लास्टिक से बनी हुई चीजों को नहीं जलाना चाहिए।

पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने का काम करते हैं और बदले में ऑक्सीजन देते हैं। इसलिए लोगों को अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाना चाहिए ताकि ऑक्सीजन का लेवल वातावरण में लगातार बना रहे। जब ऑक्सीजन का लेवल वातावरण में ज्यादा होगा, तो इससे ओजॉन सेल्स का निर्माण होगा।

ओजोन सुरक्षा पर निबंध 500 शब्द

यह पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों का अवशोषण करती हैं. सूर्य की ये पैराबैग्नी किरणें प्राणियों की त्वचा के लिए अत्यंत घातक हैं.

इस तरह हम कह सकते हैं कि ओजोन परत पृथ्वी के सुरक्षा कवच का कार्य करती हैं. पिछले कुछ वर्षों के दौरान ओजोन परत में क्षरण की स्थिति पाई गई हैं.

ओजोन क्षय के कारण causes of ozone layer depletion

ओजोन परत के क्षय के कई कारण हैं. औद्योगिकीकरण के बाद से वातावरण के दूषित होने के कारण पृथ्वी के इस सुरक्षा कवच के क्षरण हुआ हैं. ओजोन परत के क्षरण के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार क्लोरो फ्लोरो कार्बन एवं हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन जैसे रासायनिक पदार्थ रहे हैं.

इन दो पदार्थों के अतिरिक्त कार्बन ट्रेटाक्लोराइड, मिथाइल क्लोरोफार्म, मिथाइल ब्रोमाइड जैसे रासायनिक पदार्थ भी ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार रहे है.

ग्रीन हाउस इफेक्ट के कारण भी ओजोन परत को क्षति पहुची हैं. पृथ्वी पर सीधे आने वाली सौर ऊर्जा की बड़ी मात्रा अवरक्त किरणों के रूप में पृथ्वी के वातावरण से बाहर चली जाती हैं.

इस ऊर्जा की कुछ मात्रा ग्रीन हाउस गैसों द्वारा अवशोषित होकर पुनः पृथ्वी पर पहुच जाती हैं, जिसके तापक्रम अनुकूल बना रहता है. ग्रीन हाउस गैसों में मीथेन, कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड इत्यादि हैं.

वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों का होना अच्छा हैं. किन्तु जब इनकी मात्रा बढ़ जाती हैं तो तापमान में वृद्धि होने लगती हैं.

इसके कारण पृथ्वी के धुर्वों के ऊपर ओजोन परत को भारी क्षति पहुंची हैं. पिछले पचास वर्षों में इसकी क्षति में वृद्धि की दर अधिक रही हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका की विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन परत में दो बड़े बड़े छिद्र हो गये हैं. एक अंटार्कटिका महासागर के ऊपर एवं दूसरा आर्कटिक महासागर के ऊपर.

ओजोन क्षय के दुष्प्रभाव effects of ozone layer depletion

ओजोन परत के क्षरण के कई घातक परिणाम अब सामने आए हैं. यदि इसका क्षय रोका नहीं गया तो इसके और भी घातक परिणाम सामने आने की आशंका हैं.

इसके कारण पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की पराबैंगनी किरणों की मात्रा बढ़ जाएगी, जिसके कारण जीव जन्तुओं को त्वचा सम्बन्धी अनेक प्रकार के गम्भीर रोगों का सामना करना पड़ेगा.

पेड़ पौधों का विकास बाधित होने से अनेक प्रकार की कठिनाईयाँ उत्पन्न होगी. पृथ्वी के तापमान में अत्यधिक वृद्धि होगी, जिससे पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ेगा.

जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण एवं ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए बीसवीं शताब्दी में संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य वैश्विक संगठनों ने पर्यावरण की सुरक्षा की बात करना शुरू किया.

ओजोन परत के क्षय के विषय में पहली बार सन १९७६ में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की प्रशासनिक परिषद् में विचार विमर्श किया गया.

इसके बाद सन १९७७ में ओजोन परत के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की बैठक आयोजित की गई और यू एन ई पी एवं विश्व मौसम संगठन ने समय समय पर ओजोन परत में होने वाले क्षय को जानने के लिए ओजोन परत समन्वय समिति का गठन किया.

ओजोन सुरक्षा ozone layer information

ओजोन परत के संरक्षण के लिए सन १९८५ में वियना सम्मेलन हुआ एवं इसकी नीतियों को विश्व के अधिकतर देशों ने सन १९८८ में लागू किया हुआ.

ओजोन परत के क्षरण के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार क्लोरो फ्लोरो कार्बन एवं हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन जैसे रासायनिक पदार्थों के उत्पादन तथा खपत कम करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की गई.

इसके बाद इस विषय से सम्बन्धित कई समझौते एवं सम्मेलन विश्व के कई शहरों में किये गये.

ओजोन परत का क्षय रोकने के लिए हमें कई आवश्यक उपाय करने होंगे. ओजोन परत पृथ्वी की सुरक्षा परत हैं. इसलिए इसका संरक्षण आवश्यक हैं.

इसके लिए सबसे पहले तो हमें जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने की आवश्यकता हैं. स्वाभाविक हैं कि जनसंख्या बढ़ेगी, तो उसके लिए उत्पाद एवं रोजगार के लिए उद्योग धंधों को स्थापित करना होगा.

उद्योग धंधे प्रदूषण को बढ़ावा देंगे जो ओजोन के क्षरण के कारण बनेगा. अतः यदि हम चाहते हैं कि प्रदूषण कम हो एवं पर्या वरण की सुरक्षा के साथ साथ संतुलित विकास भी हो तो इसके लिए हमें नवीन प्रोद्योगिकी का प्रयोग करना होगा. लोगों को ओजोन परत के क्षरण के भावी खतरे से जागरूक करना होगा.

essay on ozone layer in hindi language ओजोन परत पर निबंध 700 शब्द

ओजोन अपक्षय का अर्थ है समताप मंडल में ओजोन की मात्रा में कमी होना हैं. ऑक्सीजन के तीन अणुओं से बनी गैस को ओजोन कहते हैं.

यह हल्के नीले रंग की हैं और इसकी गंध तीखी होती हैं. ओजोन का सर्वाधिक सांद्रण उच्च अक्षांशों के ऊपर तथा न्यूनतम सांद्रण भूमध्य रेखा के ऊपर पाया जाता हैं.

ओजोन परत सागर से 12 से 35 किमी की ऊँचाई तक को ओजोन मंडल या ओजोन परत या समताप मंडलीय ओजोन परत कहते हैं. इस परत में ओजोन गैस का अधिकतम सांद्रण पाया जाता हैं.

ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी के वायुमंडल में आने से रोकती हैं. अतः इसे पृथ्वी का रक्षा कवच या पृथ्वी का छाता कहते हैं.

समताप मंडल में स्थित ओजोन परत का जीव मंडल में सभी प्रकार के जीवों के लिए अत्यधिक महत्व हैं. इस गैस की परत के अभाव में जीवमंडल में किसी प्रकार का जीवन सम्भव  नहीं हो सकता.

क्योंकि इस ओजोन परत के अभाव में सौर विकिरण की सभी पराबैगनी किरणें भूतल पर आ जाएगी. जिससे भूतल का तापमान अत्यधिक होने के कारण समस्त जीव नष्ट हो जाएगे.

ओजोनछिद्र (Ozone Hole)

ओजोन परत में ओजोन गैस के अपक्षय के कारण बने ओजोन रहित छोटे छोटे क्षेत्र (Ozoneless Paches) को ओजोन छिद्र कहा जाता हैं. दक्षिणी धुर्व में अंटार्कटिका क्षेत्र के ऊपर सबसे बड़ा ओजोन छिद्र देखा गया हैं.

ओजोन के विनाश का कारण

  • ओजोन की अल्पता तथा विनाश के मुख्य दोषी कारक हैलोजनिक गैसें हैं. इन हैलोजनिक गैसों के अंतर्गत क्लूरोफ्लूरो कार्बन, हैलन्स तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड प्रमुख हैं. इनके अतिरिक्त मिथाइल क्लोरोफार्म व कार्बन ट्रेटा क्लोराइड आदि भी ओजोन विनाश के कारण हैं. क्लोरोफ्लोरो कार्बन को सामान्य रूप में क्लोरिन, फ़्लोरिन, कार्बन के नाम से जाना जाता हैं.
  • फ़्रिआन 11 व फ़्रिआन 12 cfc गैसें हैं. इन गैसों की खोज सर्वप्रथम अमेरिकी वैज्ञानिक थोमस मिद्गले जूनियर ने 1930 में की. CFC गैसें प्रकाश रासायनिक प्रक्रिया द्वारा
  • ओजोन परत का विनाश करती हैं. CFC गैसें रेफ्रीजरेटर, अग्निशमन स्प्रे, शेविंग क्रीम व सौन्दर्य प्रसाधन में काम आती हैं.

ओजोन अल्पता तथा क्षय का प्रभाव

जलवायु पर प्रभाव

ओजोन अल्पता के कारण वायुमंडल में सौर्यिक पराबैगनी विकीरण का न्यूनतम अव्शोषण होगा, परिणामस्वरूप अधिक से अधिक मात्रा में पराबैंगनी विकिरण धरातल पर पहुँच जाएगा जिस कारण भूतल का तापमान / ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगा.

समताप मंडल में ओजोन की अल्पता के कारण क्षोभ मंडल में हाइड्रोजन पैराक्साइड में वृद्धि होगी जिस कारण अम्ल वर्षा का अविर्भाव होगा. ओजोन अल्पता तथा पराबैगनी विकिरण में वृद्धि होने से प्रकाश रासायनिक प्रक्रियाओं में वृद्धि होगी जिस कारण जहरीले धूम कोहरे का निर्माण होगा.

मानव समुदाय पर प्रभाव
  • लोगों में त्वचा कैंसर रोग बढ़ जाएगा
  • मानव शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में कमी आएगी. परिणामस्वरूप लोगों में संक्रामक तथा छूत के रोगों का प्रकोप बढ़ जाएगा.
  • भूमध्य रेखीय प्रदेशों में ओजोन क्षय के कारण तापमान में अधिक वृद्धि के कारण लोगों का शारीरिक और मानसिक विकास और अधिक अवरुद्ध होगा.
  • जहरीले धूम कोहरे के कारण मानव शरीर के श्वसन तंत्र पर कुप्रभाव पड़ेगा.
  • फसलें नष्ट होने व् सागरों में अधिकांश मछलियों के मर जाने से मानव समुदाय के लिए खाद्य संकट उत्पन्न होगा.
जैव समुदाय पर प्रभाव
  • तापमान में वृद्धि के कारण प्रकाश संश्लेषण, जल उपयोग क्षमता, पौधों की उत्पादकता एवं उत्पादन में भारी कमी होगी.
  • जलीय सतह तथा मिटटी की नमी का अधिक वाष्पीकरण होने से फसलें सूखने लगेगी व फसलों के उत्पादन में भारी कमी हो जाएगी.
पारिस्थतिकी प्रभाव
  • पारिस्थितिकी असंतुलन पैदा होगा.
  • ऊर्जा तथा विकिरण संतुलन में अव्यवस्था होने से जीवधारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.

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